कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम क्या है? | Workmen’s compensation act 1923

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यदि आप एक बिज़नेसमैन है अथवा आप किसी कंपनी में काम करते हैं workmen’s compensation act / Employees compensation act 1923 के बारे में अवश्य ही पता होना चाहिए|

जैसे:- मजदूरी भुगतान अधिनियम, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, maternity benefit act, industrial disputes act का बहुत महत्व है ठीक उसी प्रकार “कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम 1923” का भी बहुत महत्व है|

तो चलिए दोस्तों!! शुरू करते हैं!

Workmen’s compensation act introduction 

  • सबसे पहले आपको Employees compensation act 1923 का पुराना नाम जानना जरूरी है| इससे पहले workmen’s compensation act के नाम से जाना जाता था|
  • यह पूरे भारत में एक समान रूप से लागू है|
  • workmen’s compensation act 1st July 1924 प्रभावी (Effective) हुआ था|

What is Employees compensation act 1923

Employees compensation act 1923 को समझने से पहले हमे ” नुकसान भरपाई (compensation) आखिर क्या चीज होती है?” इसके बारे में जानना जरुरी है| 

मान लीजिए कोई  कर्मचारी किसी औद्योगिक संस्थान पर काम करता  है| किसी दिन किसी  अपने औद्योगिक केंद्र पर काम करते हुए किसी मशीन द्वारा उसके हाथ-पैर कट जाते हैं और वह अपंग हो जाता है| 

अब ऐसी स्थिति में वह अपना या अपने ऊपर dependent लोगों का भरण-पोषण कैसे करेगा यह बहुत चिंता का विषय हो जाता है|

Employees compensation act 1923 के द्वारा हमें यह पता चलता है कि मालिक द्वारा अपने कर्मचारियों को नुकसान भरपाई की जाएगी|

यह नुकसान की भरपाई वेतन (Wages) की कैलकुलेशन करके दी जाएगी|

इस कंपन सेशन के द्वारा कर्मचारी अपना जीवन यापन आसानी से कर सकता है|  

माफ कीजिएगा!! यहां पर मुझे आसानी शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था क्योंकि ऐसी परिस्थिति में आसान तो कुछ भी नहीं रहता!! 

Employees compensation act 1923 का मकसद क्या था?

यह भी जानना जरूरी है की आखिर Employees compensation act 1923 को बनाने का मकसद क्या था?

  • कर्मचारी तथा उस पर आश्रित (Dependents) लोगों को गुजारा भत्ता दिलवाना|

लक्ष्य (Objects) of workmen’s compensation act

यह एक्ट कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है|

जैसे कि:- 1- किसी कर्मचारी को मर जाने पर, पूरी तरह या थोड़ा अपंग हो जाने पर 

  • दुर्घटना द्वारा मृत्यु होने पर
  • मुआवजा पाने का हक
  • उसके निर्भर सदस्यों को मुआवजा पाने का हक| 

साथ ही यह अवश्य पढ़ें: फायर इंश्योरेंस के बारे में जानकारी

अधिनियम की संरचना (structure of the act)

workmen’s compensation act में 36 सेक्शन हैं जिनको को चार भागों में बांटा गया है| 

इसमें 4 अनुसूची (schedule) हैं|

  1. अनु सूची (schedule) 1 में list of injuries  के बारे में बताया गया है|

इसमें भी 2 पार्ट बनाए गए हैं: 1-  पूर्ण अपंगता (Total disablement) के बारे में बताया गया है 2- आंशिक (Partial) बारे में बताया गया है| 

  1. अनु सूची (schedule) 2 में कर्मचारियों की परिभाषा दी गई है| किन्हे कर्मचारी माना जाएगा?
  2. अनु सूची (schedule) 3 उद्योग से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया गया है|  यानी कि इस अनुसूची में उन बीमारियों का जिक्र है जो कर्मचारी को उस व्यवसाय के कारण हुई हैं|
  3. अनु सूची (schedule) 4 मैं कर्मचारी के पूर्ण अपंग होने या मरने की स्थिति में कितना मुआवजा दिया जाएगा और वह किस प्रकार कैलकुलेट किया जाएगा इसके बारे में बताया गया है|

अधिनियम की प्रयोज्यता (Applicability of the act)

इसके अंदर वह फैक्ट्रियां, खदानें तथा कंस्ट्रक्शन इत्यादि के काम आएँगे जिनको ESI ACT 1948  के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया है|

 इसका मकसद इस बात को ध्यान में रखते हुए किया गया है जिससे कि किसी भी कर्मचारी को एक ही प्रकार के विषय में दो बार मुआवजा ना मिल सके| 

विकलांगता (disablement) 

-अधिनियम के अनुसार विकलांगता का अर्थ है काम करने या चलने में असमर्थ होना||

– इसके परिणाम स्वरूप व्यक्ति की आय में कमी हो सकती है|

– यह अपंगता स्थाई या अस्थाई दोनों रूप से हो सकती है|

– इस अपंगता का रूप पूर्ण अपंगता या आंशिक अपंगता भी हो सकता है|

अर्थात  इसका अर्थ यह है कि अपंग व्यक्ति उतना नहीं कमा सकता जितना वह अपंग होने से पहले कमा सकता था| 

Amendment in Employee compensation act

चलिए दोस्तों!

अब बात करते हैं!! Employee compensation (Amendment), 2017 के बारे में|

इस अधिनियम में संशोधन करने की मुख्य वजह निम्नलिखित थी| 

1- Employee compensation (Amendment), 2017  का मुख्य मकसद Employer द्वारा दी जाने वाली पेनल्टी को और ज्यादा सख्त बनाना था| 

2- दोबारा से गणना करके मौजूदा समय की महँगाई के हिसाब से कंपन सेशन की कैलकुलेशन की जाए| 

3- कर्मचारियों के हितों को और ज्यादा सुरक्षित बनाना| इसके अंदर इस बात को अनिवार्य बताया गया कि मालिक द्वारा अपने कर्मचारी को उसके क्या-क्या हक हैं? उसके बारे में अवगत कराया जाए| 

साथ ही यह अवश्य पढ़ें:

industrial disputes act क्या है?

maternity benefit act क्या है?

कंपनी क्या होती है? कंपनी तथा साझेदारी में क्या अंतर होता है?

डायरेक्टर का कंपनी में क्या रोल होता है?

आपने सीखा 

इस पोस्ट के द्वारा आपने यह सीखा कि आप के कर्मचारियों के भी कुछ अधिकार होते हैं| यदि आपके पास काम करने वाले किसी कर्मचारी को कोई क्षति पहुंचती है तो वह मुआवजे का हकदार होता है| यह मुआवजा किन-किन दशाओं में लागू होगा? यह आप इस पोस्ट को पढ़कर जान चुके हैं|

 उम्मीद करता हूं यह पोस्ट आपको अच्छी लगी होगी!

 मैं नवीन कुमार अब आपसे इजाजत चाहता हूं|  बिजनेस के अन्य विषयों के बारे में अगली पोस्ट में फिर मिलेंगे|

 धन्यवाद 

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