Taliban News: तालिबान ने दिखाया असली चेहरा भारत से आयात-निर्यात पर लगाई रोक

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सबसे पहले आपको “तालिबान” शब्द का मतलब (Taliban Meaning) क्या है? यह जानना चाहिए| यदि आप निर्यात (Export business) करते हैं तो इससे आपके business के ऊपर प्रभाव पड़ना तय है!

दिनभर तालिबान और अफगानिस्तान की खबरें पढ़ते, देखते और सुनते रहने के बाद आपके मन ये सवाल जरूर आया होगा कि आखिर! ये तालिबान क्या है

यदि आप भी जानना चाहते हैं कि आखिर तालिबान क्या है? और इसका मकसद क्या है? तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ें|

साथ ही साथ हर पैराग्राफ का सार अवश्य पढ़ें!  यह सार आपके मूड को रिफ्रेश कर देगा, इससे आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी| 

तालिबान शब्द का अर्थ (मतलब)

सबसे पहले आपको बताते हूँ कि आखिर “तालिबान” शब्द का मतलब (Taliban Meaning) क्या है?

तालिबान एक पश्तों भाषा का शब्द है| पश्तो जबान में छात्रों (Students) को तालिबान कहा जाता है|

यानि की ‘तालिबान’ शब्द का पश्तून में अर्थ होता है ‘छात्र’|

इससे संगठन के उन सदस्यों की ओर इशारा किया जा रहा था जिन्हें मुल्ला मोहम्मद उमर का ‘छात्र’ माना गया।

वर्ष 1994 में उमर ने “कंधार” में तालिबान को बनाया था। उस समय उसके पास केवल 50 समर्थक थे जो सोवियत काल के बाद गृहयुद्ध के दौरान अपराध, अस्थिरता और भ्रष्टाचार में बर्बाद होते अफगानिस्तान को संवारना चाहते थे। 

विदेश मामलों के जानकार कमर आगा बताते हैं कि तालिबान एक बहुत बड़ा गुट है| इसका काउंसिल क्वेटा शूरा का हेडक्वॉर्टर पाकिस्तान के क्वेटा में है|

यह बलूचिस्तान की राजधानी है। संगठन के सारे लीडर वहीं रहते हैं और वहीं पर मिलते हैं।

नई दिल्ली: तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है और राष्ट्रपति अशरफ गनी (Ashraf Ghani) ने भी देश छोड़ दिया है|

देश छोड़ने के बाद उन्होंने कहा कि “यदि मैं देश नहीं छोड़ता तो और ज्यादा खून खराबा होता तथा राजधानी काबुल पूरी तरह बर्बाद हो जाती|”

देशी भाषा में सार

what is taliban
Ashraf Ghani

अरे चाचा! ऐसी कैसी देश की चिंता!! कि पूरे विमान के साथ तीन गाड़ियां भर के नोट ले गए| नोट भी इतने सारे थे कि आप सारे नहीं ले जा पाए|

खैर छोड़ो! यह सब बात तो बाद में होगी, पहले यह बताओ हमने जो इतने सारी इन्वेस्टमेंट आपके यहां कर दी, इसके पैसे कौन देगा!!??

Ashraf ghani current statement (News)

इनका कहना यह है की “यह कोई पैसे लेकर नहीं भागे हैं, यह सब इन पर झूठे इल्जाम लगाए जा रहे हैं|”

तालिबान का कैसे उदय हुआ?

वर्ष 1980 की दहाई में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान में फौज उतारी थी, तब अमेरिका ने ही स्थानीय मुजाहिदीनों को हथियार और ट्रेनिंग देकर जंग करने के लिए उकसाया था|

इसका नतीजा यह निकल की, सोवियत संघ तो हार मानकर चला गया, लेकिन अफगानिस्तान में एक “कट्टरपंथी आतंकी संगठन” तालिबान का जन्म हो गया|

कहा जाता है तालाबानियों ने पाकिस्तान के मदरसों में शिक्षा ली है| हालांकि, पाकिस्तान हमेशा कहता है कि तालिबान के उदय में उसका कोई किरदार नहीं है|

देशी भाषा में सार

पाकिस्तान कितना सच बोलता है और कितना झूठ बोलता है, इस बात को सारी दुनिया जानती है!! यदि पाकिस्तान का तालिबान से कोई रिश्ता नहीं है तो फिर उसे पैसे क्यों देता था?

इस पर भारतीय मुसलमानों की क्या प्रतिक्रिया आई है? 

यू सुसरा निरा झूठा है| इसके खुद के घर में खाने को रोटी नहीं है| हमारे सुनने में तो यूं भी आ रहा कि देश की अर्थव्यवस्था चलाने के लिए प्रधानमंत्री आवास को ही किराए पर देने की चर्चा हो रही है| 

अबे! ओ!! “लपड़ झंडिस” पहले अपने देश को ठीक कर ले और कहीं के बारे में बाद में सोच लियो| 

एक बात और याद आ गई! तू जो हमको कोरोना की दूसरी लहर के समय अपनी टूटी-फूटी एंबुलेंस देकर मदद करने की घोषणा कर रहा था ना|

हमें सब पता है!  तू अपनी 12 एंबुलेंस देकर हमारी 500 ले जाता!! 

और बेटे हमारे लफड़े में पड़ेगा तो तेरी मौज कर देंगे!!

अफगानिस्तान में तालिबान कैसे फैला?

वर्ष 1995 के सितंबर महीने में तालिबान ने ईरान से लगे ‘हेरात’ पर कब्जा किया और फिर अगले साल 1996 के दौरान ‘कंधार’ को अपने नियंत्रण में लिया| और राजधानी काबुल पर कब्जा कर लिया था। 

इसके साथ ही राष्ट्रपति ‘बुरहानुद्दीन रब्बानी’ को कुर्सी से हटा दिया गया था। रब्बानी अफगानिस्तान मुजाहिदीन के संस्थापकों में से एक थे जिन्होंने सोवियत ताकत का घोर विरोध किया था। वर्ष 1998 तक तालिबान करीब 90 प्रतिशत अफगानिस्तान पर तालिबान काबिज था।

अफगानिस्तान के लोग तालिबान के विरोध में क्यों हैं?

शुरुआत में अफगान के लोगों ने तालिबान का स्वागत और समर्थन भी किया था। इसे मौजूदा अव्यवस्था के समाधान की शक्ल में देखा गया था। 

फिर धीरे-धीरे कड़े इस्लामिक नियम कानून लागू किए जाने लगे। इसमें चोरी से लेकर हत्या तक के दोषियों को सरेआम मौत की सजा दी जाने लगी थी। 

समय के साथ-साथ रुढ़िवादी कट्टरपंथी नियम थोपे जाने लगे थे। टीवी, म्यूजिक, मौज मस्ती को बैन कर दिया गया, लड़कियों को स्कूल आने-जाने से मना कर दिया गया, महिलाओं पर बुर्का पहनने का दबाव दिया जाने लगा।

अमेरिकी के निशाने पर क्यों?

अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर 11 September 2001 को हुए आतंकी हमले के बाद अलकायदा सरगना ‘ओसामा बिन लादेन’ को तालिबान ने पनाह दे रखी थी। 

अमेरिका ने तालिबान को चेताया की ‘ओसामा बिन लादेन’ उसे सौंप दिया जाए लेकिन तालिबान ने इससे इनकार कर दिया। 

इसके जवाब में अमेरिका ने अफगानिस्तान में घुसकर मुल्ला ओमार की सरकार को गिरा दिया। ओमार तथा बाकी तालिबानी नेता पाकिस्तान में भाग गए। अमेरिका के अलावा यहां NATO (North Atlantic Treaty Organization) के सुरक्षाबल भी तैनात हो गए।

तालिबान का मकसद क्या है?

अफगानिस्तान में तालिबान की जड़ें इतनी मजबूत हो चुकी हैं कि अमेरिका अगुवाई में कई देशों की फौज के उतरने के बाद भी इसका खात्मा नहीं किया जा सका| 

यदि तालिबान के मकसद की बात करें तो उसका एक ही मकसद है “अफगानिस्तान में इस्लामिक अमीरात की स्थापना करना”

कितने तालिबानी लड़ाके अफगानिस्तान में हैं?

अमेरिकी सेना के देश छोड़ते ही तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। यहां तक कि राष्ट्रपति अशरफ गनी को देश छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। 

BBC की रिपोर्ट में NATO के आकलन के हवाले से दावा किया गया है कि तालिबान आज पहले से भी ज्यादा मजबूत होकर उभरा है। इस समय इसमें 85 हजार लड़ाके शामिल हैं।

तालिबान के पास कितना पैसा है और यह कहाँ से आता है?

तालिबान के पास पैसों की कोई कमी नहीं है! तालिबान को हर साल एक बिलियन डॉलर से ज्‍यादा की कमाई होती है। 

एक अनुमान के मुताबिक, इन्होंने वर्ष 2019-20 में 1.6 बिलियन डॉलर कमाए। 

तालिबान की आए के मुख्‍य स्त्रोत  इस प्रकार हैं:

स्रोत कमाई 
ड्रग्‍सहर वर्ष 416 मिलियन डॉलर
चंदा2020 में 240 मिलियन डॉलर
निर्यातहर वर्ष 240 मिलियन डॉलर
रियल एस्‍टेटहर वर्ष 80 मिलियन डॉलर
रंगदारी160 मिलियन डॉलर
खननपिछले वर्ष 464 मिलियन डॉलर
दोस्‍तों की मदद से रूस, ईरान, पाकिस्‍तान और सऊदी अरब जैसे देशों से 100 मिलियन डॉलर से 500 मिलियन डॉलर के बीच सहायता
Taliban income sources

इससे भारत के Export पर क्या असर पड़ेगा?

पहले हमारे अफगानिस्तान के साथ बहुत ही अच्छे संबंध थे|  भारत में अफगानिस्तान में बहुत सारे प्रोजेक्ट भी लगाए हैं|

अफगानिस्तान में भारत के लगभग 3 बिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट चल रहे हैं| 1700 से भी ज्यादा भारतीय प्रोफेशनल अफगानिस्तान में काम कर रहे हैं|

अफगानिस्तान पर तालिबानी कब्जे के बाद इन प्रोजेक्ट्स का क्या होगा? , कैसे लौटेंगे अफगानिस्तान में फंसे भारतीय लोग?, यह कुछ बड़े सवाल हैं|

यह सवाल हर किसी के मन में आ हैं| काबुल की सड़कों पर हर तरफ अफरातफरी का माहौल है| बाजार में, मंडियों में, यहां तक कि एयरपोर्ट पर तो मारामारी के हालात हैं|

अफगानिस्तान में एक बार फिर तालिबान के कब्जे से कोहराम मचा गया है| अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में हिंदुस्तान के 400 से भी ज्यादा के प्रोजेक्ट चल रहे हैं|

अफगानिस्तान में भारत की तमाम परियोजनाएं फंसी हुई हैं, यहां तक की अफगानिस्तान में सैकड़ों भारतीय भी फंसे हुए हैं|

ऐसे में भारत के निर्यात (Export) पर सीधा-सीधा असर पड़ने वाला है| हर किसी के मन में एक यही सवाल है की “अब आगे क्या होगा?”

जो लोग भारत से अफगानिस्तान एक्सपोर्ट करते थे उनके व्यापार पर असर पड़ना तय है!

ऐसे में! जल्दी से हालात सामान्य लगने के कोई भी लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं|

Afghanistan Trade News 18 August 2021

तालिबान ने दिखाया अपना असली चेहरा, भारत से निर्यात-आयात पर लगाई रोक!!

नई दिल्ली
अफगानिस्तान (Afghanistan) की सत्ता हथियाने के बाद तालिबान (Taliban) ने भारत से सभी तरह के निर्यात-आयात पर रोक लगा दी है। Federation of Indian Export Organisations (FIEO) के डायरेक्टर जनरल डॉ. अजय सहाय के मुताबिक तालिबान ने फिलहाल पाकिस्तान के transit routes से होने वाली सभी cargo मूवमेंट पर रोक लगा दी है। इससे अफगानिस्तान से आयात-निर्यात अब पूरी तरह से बंद हो चुका है।

डॉ. अजय ने एएनआई से कहा कि FIEO अफगानिस्तान की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, भारत के अफगानिस्तान के साथ सदियों पुराने संबंध है। भारत ने वहां भारी निवेश किया हुआ है। भारत अफगानिस्तान के सबसे बड़े business partners में से एक है। 2021 में भारत ने अफगानिस्तान को 83.5 करोड़ डॉलर निर्यात (Export) किया| इस दौरान भारत ने अफगानिस्तान से 51 करोड़ डॉलर का सामान आयात (import) भी किया।

देशी भाषा में सार

यह बात मैंने पहले बता दी थी कि एक्सपोर्ट करने से पहले ECGC INSURANCE POLICY ले लेना, पर मेरी कहाँ बात सुन रहे हैं|

मैंने पहले ही कहा था, भैया पैसे पहले ले लो!! पर मेरी बात कौन मानता है!!

अब कई exporter के “L” लगने तय है|

चलो! आगे से ध्यान रखना और यह पोस्ट अच्छी तरह पढ़ लो: Export business में ECGC Policy का क्या महत्व है? 

भारत को तालिबान से क्या दिक्कत है हो सकती हैं?

भारत द्वारा अफगानिस्तान में करीब 22,251 करोड रुपए का निवेश किया गया है| पिछले साल ही करीब 500 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में पैसे खर्च किए गए हैं|

 ऐसे में तालिबान के आने के बाद भारत के यह प्रोजेक्ट्स रुक सकते हैं| 

हालांकि तालिबान का बयान आया है कि वह विदेशी नागरिकों को कुछ नहीं कहेंगे तथा भारत अपने रुके प्रोजेक्ट पूरे कर सकता है क्योंकि इससे वहां की जनता को फायदा होगा| 

अन्य मुसीबतें क्या असर पड़ेगा?
चाबहार प्रोजेक्ट ईरान में  बनाया चाबहार बंदरगाह  भारत को  अफगानिस्तान और ईरान के साथ मध्य एशियाई देशों से जोड़ता है|  भारत इसके जरिए अफगानिस्तान के साथ trade  का सीधा रास्ता बनाना चाहता था| 
कश्मीर सभी को पता है कश्मीर में एक्टिव आतंकी संगठनों को तालिबान समर्थित ग्रुप से मदद मिल सकती है|  जैश-जयेश लश्कर अगर अफगानिस्तान में आकर ट्रेनिंग करना चाहेंगे तो उसके लिए मुश्किल नहीं होगी| हालांकि तालिबान ने कहां है कि कश्मीर भारत तथा पाकिस्तान का आंतरिक मामला है वह उनके एजेंडे में नहीं है|  साथ ही साथ इस बात का खंडन किया है कि वह अपनी जमीन को आतंकवाद के लिए इस्तेमाल नहीं होने देंगे|
हिंदुओं और सिखों की सुरक्षा भारत अपने विदेश मंत्रालय के द्वारा हिंदू और सिख संप्रदायों के प्रतिनिधियों के संपर्क बनाए हुए हैं| 
चीन-पाक तालिबान का गठजोड़ चीन तथा पाकिस्तान तालिबान को मदद दे रहे हैं|  इन तीनों का गठजोड़ भारत के सामने मुश्किलें पैदा कर सकता है| भारत तथा अफगानिस्तान के भूतकाल में संबंध बेहद अच्छे रहे हैं परंतु,  अब एक सहयोगी के खोने का डर है|

देशी भाषा में सार

चीन तो कतई ना चाहता कि भारत तरक्की कर ले| और पाकिस्तान को अंडर गारमेंट से बने मास्क भेज कर यह साबित कर चुका है कि वह दोस्ती निभाने में कितनी जान लड़ा सकता है!! 

तालिबान ने भारत को प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए इसलिए कहा है क्योंकि उसके पास माल आ रहा है, उसे पैसे थोड़ी ना देने हैं|

यह तो वही बात हो गई एक आदमी ने अपने नौकर से कहा श्यामलाल आज मुझसे मिलने कोई भी आए तो उसे मना कर देना|

 उसने कहा साहेब! कोई मनीष साहब है ₹1 लाख लेकर आए हैं, मना कर दूं? 

मालिक ने उससे कहा श्यामलाल जो मुझे पैसे देने आ रहा है उसे कोई भी की गिनती से निकाल दे| 

यही बात तालिबान भी कह रहा है भारत के लिए उससे कोई खतरा नहीं है| 

यह तो वही बात हो गई कि भारत, पाकिस्तान की आर्मी को ट्रेनिंग देने लगे! 

FAQs: What is Taliban

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

तालिबान शब्द का अर्थ क्या है?

तालिबान एक पश्तो भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘छात्र’

तालिबान ने अमेरिका पर हमला कब किया था?

11 September 2001, 6:16 pm IST

तालिबान का सरगना कौन है?

हिबतुल्लाह अखुंदजादा

अफगानिस्तान की राजधानी का नाम क्या है?

काबुल

भारत और अफगानिस्तान के बीच कितने किलोमीटर की सीमा लगती है?

उत्तर पश्चिमी कश्मीर में भारत अफगानिस्तान के साथ 106 कि.मी. की सीमा साझा करता है।

भारत और अफगानिस्तान को अलग करने वाली रेखा का नाम क्या है?

डूरण्ड रेखा

अफगानिस्तान की सीमा कितने देशों से मिलती है?

अफगानिस्तान के उत्तर पूर्व में भारत तथा चीन, पूर्व में पाकिस्तान, उत्तर में ताजिकिस्तान, कज़ाकस्तान तथा तुर्कमेनिस्तान तथा पश्चिम में ईरान है।

भारत, अफगानिस्तान से क्या-क्या आयात करता है|

अखरोट, बादाम, किशमिश, अंजीर, सूखी खूबानी, पाइन नट, पिस्ता

भारत, अफगानिस्तान से क्या-क्या निर्यात करता है|

ताजे फल जैसे खरबूजा, तरबूजा, अनार, सेब, चेरी, और मसाले जैसे जीरा, हींग, और केसर का आयात करता है|

अफगानिस्तान का ऐसा कौन सा इलाका है जहां पर तालिबान कब्जा नहीं कर पाया है?

पंजशीर | अफगानिस्तान के पंजशीर प्रांत पर तालिबान अभी तक कब्जा नहीं कर पाया है| 1980 के दशक में जब सोवियत रूस ने हमला किया था, तब सोवियत रूस भी पंजशीर पर कब्जा नहीं कर पाया था|

अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति का नाम बताइए जिसने अपने आप को अफगानिस्तान के राष्ट्रपति घोषित कर दिया है|

इनका नाम अमरुल्लाह सालेह है| अमरुल्लाह सालेह गनी सरकार में उपराष्ट्रपति थे| सालेह ने खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया है और तालिबान के खिलाफ आखिरी दम तक लड़ने की हुंकार भर दी है|

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

दुबई में बिजनेस सेटअप कैसे करें? (business setup in Dubai)

affiliate marketing क्या होती है?

खुद का बिजनेस कैसे शुरु करें? (How to start a business)

Payment gateway procedure क्या है?

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