शेयर क्या होता है? | Equity तथा Preference शेयर के बीच क्या अंतर होता है

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दोस्तों, इस पोस्ट के माध्यम से आपको शेयर क्या होता है? (What is a share?) इक्विटी शेयर तथा प्रेफरेंस शेयर के बीच का अंतर होता है? (Difference between Equity shares and Preference Shares) के विषय में बहुत ही आसान भाषा में जानकारी मिलेगी| 

शेयर क्या होता है?

अक्सर आप शेयर को समझने के लिए हिन्दी में आर्टिकल खोजते हैं| इसके लिए आप इंटरनेट पर “Share in Hindi” टाइप करते हैं| इस पोस्ट को पूरा पढ़ने के बाद आपको शेयर के बारे में अच्छी तरह से समझ में आ जाएगा|

शेयर को समझने से पहले आपको एक बार कंपनी क्या होती है? इसके बारे में जानना बहुत जरूरी है| Share के बाद आपको डिबेंचर (ऋणपत्र) के बारे में भी अवश्य पढ़ना चाहिए|

आइए! शुरुआत करते हैं की “Share का हिंदी अर्थ क्या होता है?” 

Share meaning in Hindi: “हिस्सा, अंश, भाग, योगदान, हिस्सा देना, बँटना, में सहभागी होना”

यह जितने भी हिंदी अर्थ है, इनमें एक चीज समझ में आती है की “शेयर किसी भी कंपनी शेयर कैपिटल में हिस्सेदारी को दर्शाता है|”

यानी साधारण शब्दों में यदि मैं आपको समझाऊं तो शेयर का अर्थ उस कंपनी में आपकी कितने प्रतिशत हिस्सेदारी है, उसको बताता है|

शेयर की परिभाषा (Share definition): ” कंपनी अधिनियम 2013 के सेक्शन 2(84) के अनुसार: यह कंपनी की शेयर पूंजी में एक हिस्सा है और इसमें स्टॉक शामिल है|”  

चलिए! मैं इसको थोड़ा सा और सरल भाषा में समझा देता हूं|

शेयर की परिभाषा मेरे अनुसार:  “शेयर द्वारा लोग किसी कंपनी में पैसे लगाकर हिस्सेदार बन जाते हैं, इस प्रकार लोगों का पैसा कंपनी के पास चला जाता है, अब!  कंपनी चाहे उस पैसे का जो मर्जी करे!” 

उदाहरण द्वारा मैं आपको शेयर क्या होता है? इसके बारे में अच्छी तरह समझा दूंगा

मान लीजिए आपकी कोई वन पर्सन कंपनी है या कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या कोई पब्लिक लिमिटेड कंपनी है|

अब जैसा कि आपने OPC के बारे में पढ़ा कि उसमें एक शेयर होल्डर होता है|

यानी कि यदि मैं परसेंटेज की बात करूं तो 100% Share एक ही व्यक्ति के पास  होते हैं|

इसका अर्थ यह है कि वह अकेला व्यक्ति उस कंपनी का मालिक कहलाएगा|

 यही बात अन्य कंपनियों पर भी लागू होती है|

 अर्थात यदि किसी व्यक्ति के पास 50 परसेंट से अधिक शेयर होते हैं या फिर सबसे ज्यादा Share होते हैं वह उस कंपनी का मालिक कहा जाएगा| 

अब दिमाग में दूसरा प्रश्न उठता है – की “शेयर जारी क्यों किए जाते हैं?” तो आइए देखते हैं!  

शेयर क्यों जारी किए जाते हैं?

किसी भी कंपनी में शेयर जारी करने का मुख्य मकसद पैसा इकट्ठा करना होता है| 

मान लीजिए,  किसी कंपनी में कारोबार को बढ़ाने के लिए एक करोड़ रुपए चाहिए| अब वह कंपनी एक करोड़ रुपए के शेयर्स  के माध्यम से पैसा इकट्ठा कर सकती है| 

नोट:- वन पर्सन कंपनी तथा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सामान्य जनता के बीच जाकर अपने शेयर को प्रचार-प्रसार करके बेचने का हक नहीं होता| यह कार्य केवल लिस्टेड कंपनी द्वारा ही हो सकता है| कंपनी शेयर ज़ब्ती (Forfeiture) भी कर सकती है|

शेयर्स को और अच्छी तरह समझने के लिए आपको इक्विटी शेयर तथा प्रेफरेंस शेयर्स के बीच क्या अंतर होता है? (Difference between Equity shares and Preference Shares) भी समझना चाहिए| 

Difference between equity and preference shares को समझाने का मुख्य मकसद यह है कि इसके द्वारा आप Share के बारे में और अधिक जान सकते हैं| इक्विटी शेयर तथा प्रेफरेंस शेयर को आप एक तरीके से शेयर का प्रकार कह सकते हैं| 

जैसे-जैसे आप यह Difference between preference shares and equity shares पढ़ते जाएंगे आपको धीरे-धीरे सारा कांसेप्ट क्लियर होता चला जाएगा| 

Difference between Equity Shares and Preference Shares

मुख्य बिंदु अर्थ Equity shares/ इक्विटी शेयरPreference Shares / तरजीह शेयर 
Voting rights / वोट का  अधिकार वोट देने का अधिकार इक्विटी शेयर होल्डर के विषय में यह प्लस्पॉइंट माना जाता है कि उनको वोट देने  के सारे अधिकार दिए जाते हैं| प्रेफरेंस शेयर होल्डर को सामान्य तौर पर वोटिंग राइट मिलते ही नहीं है| नोट:-  2 साल तक प्रॉफिट ना देने पर कंपनी नुकसान भरपाई करने के लिए बोल सकती है कि आपको वोटिंग राइट दिया जाता है| 
Dividend / लाभांशमिलने वाला लाभांश डिविडेंड कहलाता है| हर शेयर होल्डर को पेमेंट देने के बाद (प्रेफरेंस शेयर होल्डर, डिबेंचर होल्डर,इत्यादि) इक्विटी शेयर होल्डर को पेमेंट दी जाती है| इनका कोई फिक्स अमाउंट भी नहीं होता कि कितना पेमेंट मिलेगा| जैसा किसके नाम से ही स्पष्ट हो जाता है – Preference (तरजीह )यानी इनको जो लाभांश मिलेगा वह इक्विटी शेयर होल्डर से पहले मिलेगा तथा इनको एक निर्धारित दर प्राप्त होती है| 
face value / अंकित मूल्यकिसी भी शेयर पर अंकित मूल्य को उस शेयर का फेस वैल्यू कहते हैं| इक्विटी शेयर का फेस वैल्यू प्रेफरेंस शेयर के मुकाबले सामान्य तौर पर कम होता है| प्रेफरेंस शेयर का फेस वैल्यू सामान्य तौर पर इक्विटी शेयर के मुकाबले अधिक होता है| 
Attraction / आकर्षणकिस प्रकार का व्यक्ति किस प्रकार का शेयर लेने के लिए आकर्षित होता है? इक्विटी शेयर अधिकतर साहसिक निर्णय लेने वाले लोगों द्वारा लिए जाते हैं|जो लोग रिस्क नहीं लेना चाहते उन लोगों द्वारा प्रेफरेंस शेयर को प्राथमिकता दी जाती है| 
Risk / खतरा किस शेयर में खतरा ज़्यादा होता है? इक्विटी शेयर होल्डर खतरा लेने वालों की लाइन में सबसे आगे खड़े होते हैं|क्योंकि इसमें ना तो निर्धारित दर पर पैसा मिलता है|इसमें  कंपनी के समापन  होने पर भी पैसा मिलने की कोई गारंटी नहीं होती|इसमें पैसे को डूबने की आशंका बनी रहती है| खतरा तो प्रेफरेंस शेयर में भी होता है परंतु इक्विटी शेयर  के मुकाबले कम होता है| 
Refund of capital / पूंजी की वापसीपूंजी वापस लेने पर क्या होगा? जब कोई कंपनी बंद हो रही होती है तो  इक्विटी शेयर होल्डर को पैसा प्रेफरेंस शेयर होल्डर के बाद मिलता है| नोट:- यदि सब को पेमेंट करने के बाद कंपनी के पास पैसा नहीं बचता तो इक्विटी शेयर होल्डर को कुछ नहीं दिया जाता| कंपनी बंद होने के समय प्रेफरेंस शेयर होल्डर को इक्विटी शेयर होल्डर से पहले पैसा दिया जाता है| 
Redemption / प्रतिदाननिर्धारित समय बाद क्या होगा? इक्विटी शेयर में पैसा लगाने के बाद जब तक कंपनी चलती रहेगी तब तक आप उससे पैसा वापस नहीं ले सकते| प्रेफरेंस शेयर में शेयर की मैच्योरिटी का टाइम लिखा होता है| 
Difference between Equity shares and Preference Shares in Hindi

FAQ: Share

Share कंपनी द्वारा क्यों जारी किए जाते हैं?

कंपनी द्वारा धन इकट्ठा करने के मकसद से शेयर जारी किए जाते हैं|

क्या सभी प्रकार की कंपनियां आम जनता के बीच Share को बेच सकती हैं?

जी नहीं,  वह कंपनी जो शेयर बाजार में लिस्टेड होती है वही शेयर को आम जनता के बीच भेज सकती है|

(Share): आई पी ओ का अर्थ क्या होता है?

IPO का अर्थ होता है “सार्वजनिक प्रस्ताव”

Share: आईपीओ की परिभाषा क्या होती है?

जब कोई भी कंपनी अपने शुरुआत के शेयरों को बेचने के लिए आम जनता को लुभाने के मकसद से अपना प्रस्पेक्टस जारी करती है| इस प्रस्पेक्टस में कंपनी के सार्वजनिक प्रस्तावों का वर्णन किया जाता है| इन सार्वजनिक प्रस्तावों के वर्णन को ही आई पी ओ की संज्ञा दी गई है|

इक्विटी Share तथा प्रेफरेंस Share किस में ज्यादा रिस्क होता है?

इक्विटी शेयर में ज्यादा रिस्क होता है|

यदि  कोई कंपनी भारी मात्रा में मुनाफे को अर्जित करती रहती है तो इक्विटी Share या प्रेफरेंस Share में से किस शेयर होल्डर को ज्यादा फायदा होगा? 

इक्विटी शेयर को ज्यादा फायदा होगा|  इक्विटी शेयर में रिस्क ज्यादा होता है तो कंपनी के अत्यधिक प्रॉफिट पाने पर मुनाफा भी ज्यादा होता है| 

इक्विटी Share से पैसा किस प्रकार वापस लिया जा सकता है?

इक्विटी शेयर में पैसा कंपनी के बंद होने पर ही वापस मिलता है| 

इक्विटी Share में लोग पैसा क्यों लगाते हैं?

1- यदि कंपनी भारी मुनाफे में रहती है तो इक्विटी शेयर होल्डर को उस लाभांश का हिस्सा दिया जाता है|
2- कंपनी के मैनेजमेंट में भी इक्विटी शेयर होल्डर की हिस्सेदारी हो जाती है|

साथ ही यह अवश्य पढ़ें:

आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन क्या होता है?

Memorandum Of Association क्या होता है? इसमें क्या लिखा जाता है?

ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन कैसे होता है तथा कितनी फीस लगती है?

Perpetual succession क्या होता है तथा कंपनी में इसका क्या महत्व है?

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