Section 8 Company क्या होती है? | सेक्शन 8 कंपनी के क्या फ़ायदे होते हैं?

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इस पोस्ट के माध्यम से आप Section 8 company क्या होती है? सेक्शन 8 कंपनी के क्या फायदे होते हैं? तथा यह सेक्शन 8 कंपनी अन्य कंपनियों से किस प्रकार अलग होती है?  इसके बारे में जानेंगे|

तो चलिए दोस्तों!  शुरू करते हैं!

What is section 8 company

दोस्तों, सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि सेक्शन 8 कंपनी क्या होती है

Section 8 company को Non profit organization भी कहते हैं|

जैसा कि इसके नाम से जाहिर हो रहा है –  non-profit ऑर्गेनाइजेशन यानी कि वह संस्थान जिसका मकसद पैसा कमाना ना हो, वह Section 8 company कहलाएगी|

उम्मीद करता हूं  कि आपको What is a section 8 Company in India का थोड़ा सा कंसेप्ट क्लियर हो गया होगा!

पोस्ट पूरा पढ़ते-पढ़ते आपको इसके सारे कंसेप्ट पूरे हो जाएंगे|

Section 8 company Definition

दोस्तों समझते हैं,  कंपनी अधिनियम 2013 के अनुसार सेक्शन 8 कंपनी की परिभाषा क्या है?

 ऐसी कंपनी जिसका उद्देश्य पैसा कमाना ना होकर कला (Arts), दान (Charity), धर्म (Religion), खेल (Sports), पर्यावरण (Environment), अनुसंधान (Research) जैसे क्षेत्रों को तरक्की दिलाना है| जिससे कि देश की आर्थिक तरक्की के साथ-साथ इन क्षेत्रों में भी तरक्की हो सके| 

आइए जानते हैं सेक्शन 8 कंपनी के कुछ मुख्य बिंदु 

  • इसे लिमिटेड कंपनी की कैटेगरी में तो रखते हैं परंतु सेक्शन 8 कंपनी के नाम के आगे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या पब्लिक कंपनी नहीं लगा होता|
  • इसे लाइसेंस कंपनी भी कहा जाता है| सेक्शन 8 कंपनी को बनाने के लिए  केंद्र सरकार से पूर्व अनुमोदन (Prior Approval) लिया जाता है| सरकार द्वारा इसे बनाने के लिए एक लाइसेंस  दिया जाता है|  इस लाइसेंस को ROC में रजिस्ट्रेशन के लिए जमा किया जाता है| इसके उपरांत ही सेक्शन 8 कंपनी का उदय होता है|
  • जैसा कि आप जानते हैं Partnership firm कि कोई Separate legal entity नहीं होती इसलिए वह किसी दूसरी कंपनी के शेयर भी नहीं ख़रीद सकती परंतु वह सेक्शन 8 कंपनी की सदस्य बन सकती है|
  • सेक्शन 8 कंपनी को वन पर्सन कंपनी में कन्वर्ट नहीं किया  जाता| 
  • Section 8 Company के Articles Of Association में संशोधन (amend) करने के लिए भी केंद्र सरकार (Central Govt.)  का पूर्व अनुमोदन (Prior Approval) जरुरी है| 

Section 8 company क्यों बनाई जाती है?

जैसा कि आप जान चुके हैं सेक्शन 8 कंपनी को non-profit ऑर्गेनाइजेशन भी कहते हैं|

अतः इसका मकसद समाज के लिए कुछ  क्षेत्रों में उन्नति तथा उत्थान करने के लिए होता है| 

जैसे कि:- कला (Arts), दान (Charity), धर्म (Religion), खेल (Sports), पर्यावरण (Environment), अनुसंधान (Research)

सेक्शन 8 कंपनी को Exemptions (छूट) प्राप्त होती हैं? 

  1. किसी भी पब्लिक लिमिटेड कंपनी या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को अपनी जनरल मीटिंग के लिए 21 दिन का नोटिस देना जरूरी होता है| सेक्शन 8 कंपनी में किसी भी जनरल मीटिंग के लिए 14 दिन का नोटिस देना जरूरी होता है| 
  2. सेक्शन 8 कंपनी में है 15 डायरेक्टर से ज्यादा के नियुक्ति के लिए किसी भी विशेष संकल्प (special resolution) को पास कराने की जरूरत नहीं होती| 
  3. सेक्शन 149 तथा सेक्शन 150 में स्वतंत्र डायरेक्टर तथा उउसकी नियुक्ति के प्रावधान (provision) दिए गए हैं| सेक्शन 149 तथा सेक्शन 150 सेक्शन 8 कंपनी के ऊपर लागू नहीं होते|
  4. कंपनी अधिनियम 2013 के  सेक्शन 165 अनुसार एक अकेला व्यक्ति अधिकतम 20 कंपनियों में डायरेक्टर बन सकता है जिसमें 10 पब्लिक लिमिटेड कंपनी हो सकती है| SEBI के अनुसार एक व्यक्ति केवल 7 सूचीबद्ध (Listed) कंपनी में डायरेक्टर बन सकता है| परंतु यदि कोई व्यक्ति 20 कंपनी में डायरेक्टर है इसके बाद भी वह सेक्शन 8 कंपनी में डायरेक्टर बन सकता है| इसे कंपनी अधिनियम 2013 के सेक्शन 165 का उल्लंघन (violation) नहीं माना जाएगा|
  5. सेक्शन 8 कंपनी में एक कैलेंडर ईयर में 2 बोर्ड मीटिंग से भी काम चल जाता है| 
  6. Section 8 Company में बोर्ड मीटिंग में Coram (मौजूद सदस्यों की संख्या) कितना होना चाहिए?- (8 Directors या टोटल संख्या का एक चौथाई) दोनों में से जो भी कम हो| नोट:- परंतु न्यूनतम (minimum) 2 डायरेक्टर मौजूद होने चाहिए| 

सेक्शन 8 कंपनी को बनाने के क्या फायदे होते हैं?

  • यह आसानी से बन जाती है| (Ease of formation) 
  • इसकी अपनी अलग कानूनी पहचान होती है| (Separate legal entity)
  • सीमित दायित्व (Limited liability) होता है| 
  • लगातार चलती रहती है इसके लिए शाश्वत उत्तराधिकार (Perpetual succession) का सिद्धांत लागू होता है|
  • न्यूनतम शेयर होल्डर की संख्या दो निर्धारित की गई है| 
  • बेहतर लचीलापन (Greater flexibility) होता है| 
  • कर लाभ (Tax Benefits) होते हैं| 
  • प्रॉपर्टी भी खरीद सकते हैं|
  • सेक्शन 8 कंपनी पर कोई केस कर भी सकता है तथा सेक्शन 8 कंपनी भी किसी पर केस कर सकती है| 

सेक्शन 8 कंपनी के क्या नुकसान होते हैं?

सेक्शन 8 कंपनी के नुकसान के मेरी नजर में कोई नुकसान नहीं होता परंतु मुझे इसके कुछ ना कुछ नुकसान तो आपको बताने ही पड़ेंगे| 

  • कंपनी के सदस्य किसी भी प्रकार का लाभांश (Dividend) नहीं ले सकते| (जब किसी कंपनी का आधार ही प्रॉफिट ना कमाना हो तो इसे नुकसान की श्रेणी में डालना मजबूरी है|)
  • कंपनी के अधिकारी तथा डायरेक्टर भत्ते (allowance) का लाभ नहीं ले सकते|
  • मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन तथा आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में केंद्र सरकार की अनुमति के बाद ही संशोधन (amendment) जा सकती है| 
  • सेक्टर 8 कंपनी का लाइसेंस कई आधार पर खंडन करने योग्य होता है| 

सेक्शन 8 कंपनी को NGO की तरह चलाने पर क्या फायदे होते हैं?

  • किसी भी प्रकार की मिनिमम पैड अप कैपिटल की रिक्वायरमेंट नहीं होती|
  • रजिस्ट्रेशन के लिए स्टांप ड्यूटी पर छूट होती है| 
  • रजिस्टर्ड पार्टनर-शिप फर्म भी इसकी सदस्य बन सकती है| 
  • 80G के तहत इनकम टैक्स पर छूट ले सकते हैं| 

सेक्शन 8 कंपनी के नाम आप किस प्रकार रख सकते हैं?

  • Forum
  • Association
  • Federation
  • Chambers
  • Confederation
  • Council
  • Electoral Trust and the like Etc.
  • इसके नाम के पीछे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या लिमिटेड कंपनी लगाना जरूरी नहीं है| 

सेक्शन 8 कंपनी की विशेषताएँ 

  • कला (Arts), दान (Charity), खेल (Sports), धर्म (Religion), पर्यावरण (Environment), अनुसंधान (Research) के क्षेत्रों की उन्नति के लिए ही आप सेक्शन 8 कंपनी बना सकते हैं|
  • प्रवर्तकों को लाभ के वितरण के लिए लाभांश की घोषणा की अनुमति नहीं है|
  • किसी सदस्य को पारिश्रमिक अधिकारी के रूप में नियुक्त नहीं किया जाएगा|
  • कोई पारिश्रमिक / लाभ किसी सदस्य को भुगतान नहीं किया जाएगा कंपनी का एक सेवक / अधिकारी होने के अलावा (जेब खर्च से बाहर प्रतिपूर्ति, पैसे उधार पर उचित ब्याज या परिसर में उचित किराया)
  • MOA (मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन) तथा AoA ( आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन) में बदलाव के लिए केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक है| 
  • इसमें कोई ट्रस्टी नहीं होते|
  • इसका मैनेजमेंट एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से स्थानांतरित किया जा सकता है|
  • सेक्शन 8 कंपनी शेयर होल्डर के द्वारा भी नियंत्रित की जा सकती है|
  • इसमें विदेशी फंड का भी इस्तेमाल किया जा सकता है| 
  • नोट:- परंतु अभी हाल ही के वर्षों में इसका दुरुपयोग होने के कारण केंद्र सरकार इस पर कुछ कानून बनाने के बारे में विचार कर रही है| 

FAQs: Section 8 company

सेक्शन 8 कंपनी को बनाने का मकसद क्या होता है?

सेक्शन 8 कंपनी को बनाने का मुख्य मकसद पिछड़े हुए क्षेत्रों में तरक्की करने का होता है|

क्या सभी क्षेत्रों में सेक्शन 8 कंपनी बनाई जा सकती है?

 जी नहीं,  सेक्शन 8 कंपनी केवल कला (Arts), दान (Charity), धर्म (Religion), खेल (Sports), पर्यावरण (Environment), अनुसंधान (Research)  के क्षेत्र में ही बनाई जा सकती है|

क्या सेक्शन 8 कंपनी के माध्यम से  इनकम टैक्स में छूट पाई जा सकती है?

जी हां,  सेक्शन 8 कंपनी इनकम टैक्स के 80G  में छूट मुहैया करवाती है|

क्या वन पर्सन कंपनी,  प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह सेक्शन 8 कंपनी में नाम के पीछे सेक्शन 8 कंपनी लिखना अनिवार्य है?

जी नहीं,  सेक्शन 8 कंपनी के पीछे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी  या OPC  तरह नाम के पीछे सेक्शन 8 कंपनी लिखना अनिवार्य नहीं है|

सेक्शन 8 कंपनी तथा ट्रस्ट में से कौन सी कंपनी बेहतर है?

मेरे सुझाव से, सेक्शन 8 कंपनी को ट्रस्ट के मुकाबले ज्यादा लाभ प्राप्त हैं इसलिए सेक्शन 8 कंपनी ज्यादा बेहतर है|

साथ ही यह अवश्य पढ़ें:

ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन कैसे होता है तथा कितनी फीस लगती है?

वन पर्सन कंपनी क्या होती है तथा इसका लाभ कैसे लें?

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी क्या होती है तथा इसके क्या फ़ायदे हैं?

कंपनी क्या होती है?, भारत में कैसे खोले? तथा कंपनी तथा साझेदारी में क्या अंतर होता है?

दोस्तों, यदि आप ज़रूरतमंदों की सहायता के लिए किसी ऑर्गेनाइजेशन को बनाने के बारे में सोच रहे हैं|

तो, आप इसके लिए सेक्शन 8 कंपनी को बनाने के बारे में सोच सकते हैं|

उम्मीद करता हूं आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा| 

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