SEBI क्या है, इसके क्या कार्य हैं तथा सेबी को क्या शक्तियां दी गई हैं? | SEBI full form

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दोस्तों, बिजनेस लोक में एक बार फिर से आपका स्वागत है, इस पोस्ट में हम पढ़ेंगे की SEBI full form क्या होती है?, सेबी द्वारा किए जाने वाले कार्यों की लिस्ट, सेबी का निर्माण कब हुआ था?| जब आप कंपनी क्या होती है? वाली पोस्ट पढ़ रहे थे, तब आपने SEBI शब्द बार-बार पढ़ा था|

इसके अलावा भी बहुत सारी पोस्ट में आपने SEBI के बारे में पढ़ा था| 

अपनी पिछली उन पोस्ट में मैंने कहीं पर भी सेबी के बारे में अच्छी तरह नहीं लिखा है|

इस पोस्ट में हम अच्छी तरह पढ़ेंगे कि आखिर!

सेबी क्या होता है?, SEBI क्या-क्या काम करता है?, सेबी की फुल फॉर्म क्या होती है?

तो चलिए दोस्तों! 

शुरू करते हैं, सबसे पहले शुरुआत करते हैं सेबी की फुल फॉर्म से की आखिर “SEBI की full form क्या होती है?” 

सेबी की फुल फॉर्म क्या है? (What is SEBI full form?)

SEBI full form: “Securities and Exchange Board of India”

SEBI full form in Hindi: “भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड”

सेबी की फुल फॉर्म जानने के बाद, आपको थोड़ा सा आईडिया तो हो गया होगा कि कहीं ना कहीं यह सिक्योरिटी से संबंधित होता है| 

सेबी क्या है?

SEBI भारत सरकार के स्वामित्व वाले प्रतिभूति बाजार (Securities market) में प्रतिभूतियों और विनिमय बोर्ड नियामक है| 

हा-हा-हा-हा!! थोड़ा सा समझना मुश्किल हो गया ना!!

चलिए! मैं आपके लिए इसे आसान बना देता हूं| 

सबसे पहले हम यह समझते हैं कि आखिर “प्रतिभूति बाजार (Securities market) क्या होता है?

प्रतिभूति बाजार (Securities market) क्या होता है?

प्रतिभूति बाजार (Securities market): हमारी जो नॉर्मल मार्केट होती है उसमें एक सामान खरीदने वाला होता है तथा एक सामान बेचने वाला होता है| 

सामान खरीदने वाले को  कहते हैं तथा सामान बेचने वाले को विक्रेता(Seller) कहते हैं| इन ग्राहक(Buyer) तथा विक्रेता(Seller) को मिलाकर हमारा मार्केट बनता है| सिक्योरिटी मार्केट भी कुछ नहीं है| यह इस तरह का मार्केट है जहां पर ग्राहक भी सिक्योरिटी पर हैं तथा विक्रेता भी सिक्योरिटी पर हैं|

जहां पर सिक्योरिटी का लेन-देन होता है, यानी सिक्योरिटी को खरीदा तथा बेचा जाता है उस मार्केट को हम प्रतिभूति बाजार (Securities market) कहते हैं| 

अब आपके दिमाग में यहां पर एक प्रश्न यह आ रहा होगा कि “Securities मैं कौन-कौन सी चीजें आएंगी?”

यहां पर सिक्योरिटी से हमारा अभिप्राय: शेयर(Share)डिबेंचर(Debenture), बॉन्ड(Bond), इक्विटी शेयर्स, प्रेफरेंस शेयर्स, गोल्ड बॉन्ड्स इत्यादि से है|

यह सारी चीजें हमारी सिक्योरिटी में आती हैं| यानी कि जहां पर इन चीजों को खरीदा तथा बेचा जाता है उसे Securities market (प्रतिभूति बाजार) कहते हैं| 

अब! SEBI  का काम यहां पर इस प्रकार के सिक्योरिटी मार्केट को नियंत्रित (Regulate) करना है|

इसके लिए सेबी द्वारा कुछ नियम तय किए जाते हैं|  

SEBI का निर्माण कब हुआ था? 

SEBI की स्थापना वर्ष 1988 में हुई थी|  सभी को वैधानिक शक्तियां (statutory powers) 30 जनवरी 1992 को मिली थी|

यानी कि इसकी स्थापना तो पहले ही हो गई थी परंतु इस को वैधानिक शक्तियां बाद में मिली| ऐसा क्यों हुआ? 

चलिए!  इसे भी थोड़ी सी अच्छी तरह समझ लेते हैं|

वैधानिक शक्तियां (statutory powers) किसे कहते हैं?: “वह कानून जो पार्लियामेंट द्वारा पास किया जाता है| इस पार्लियामेंट द्वारा पास किए कानून को हम अधिनियम (Act) कहते हैं| इस अधिनियम को ही हम दूसरी भाषा में Statute कहते हैं| यानी कि हम Statute को कह सकते हैं कि ऐसा एक्ट जो पार्लियामेंट द्वारा पास किया गया हो| 

वैधानिक संगठन (statutory organizations) किसे कहते हैं?: किसी भी Statute की वजह से अगर कोई  भी संगठन अस्तित्व (existence) में आता है तो उसे वैधानिक संगठन (statutory organizations)  कहा जाता है|

इसी अधिनियम(Act) में  वैधानिक संगठन(statutory organizations) की शक्तियां(Powers) भी लिखी गई होंगी| इन्हीं शक्तियों (Powers) को वैधानिक शक्तियां (statutory powers) कहा जाता है| 

SEBI एक संगठन के रूप में वर्ष 1988 में ही आ गई थी परंतु अभी तक इस से संबंधित कोई भी एक्ट पार्लियामेंट में नहीं आया था| आप इसे इस प्रकार मान सकते हैं कि यह एक कार्यकारी (executive) संगठन तो बन गया था परंतु पार्लियामेंट में इसके लिए कोई एक्ट नहीं आया था| 

अब! सरकार को लगा कि यदि SEBI को वास्तव में ताकतवर बनाना है तो इसको कुछ शक्तियां अवश्य देनी पड़ेगी! वर्ना बिना शक्तियों के तो यह बिना धार वाली तलवार के समान है| 

इसी बात को ध्यान में रखते हुए SEBI Act, 1992 लाया गया|

इस एक्ट की वजह से हमने SEBI को क़ानूनी निकाय (statutory body) बोलना शुरु कर दिया तथा इसकी शक्तियों को वैधानिक शक्तियाँ (statutory powers) कहने लगे|

सेबी को क्या-क्या शक्तियां दी गई? (SEBI powers in Hindi)

सेबी को ताकतवर बनाने के मकसद से इसको शक्तियां दी गई थी|  

1970 के बाद कैपिटल मार्केट एक सनसनी के रूप में उभर कर आया| हालांकि शेयर की पॉपुलैरिटी के साथ-साथ बहुत सारी भ्रष्ट (Corrupt) गतिविधियों ने भी जन्म लिया| 

जैसे कि:  प्राइस फिक्सिंग,  इंसाइडर ट्रेडिंग, अनऑफिशियल प्राइवेट प्लेसमेंट, वायलेशन आफ स्टैक एक्सचेंज रूल्स एंड रेगुलेशंस, डिले इन मेकिंग डिलीवरी ऑफ शेयर्स, इत्यादि 

ऐसी स्थिति में सरकार ने यह महसूस किया कि इन भ्रष्ट गतिविधियों को रोकने के लिए तथा भारतीय स्टॉक एक्सचेंज को नियंत्रित करना पड़ेगा|  

सरकार को यह पता था कि यह सब करने के बाद भारतीय लोगों का स्टॉक मार्केट में भरोसा भी बढ़ेगा| 

इसी के मद्देनजर वर्ष 1988 में सेबी की स्थापना की गई| 

वर्तमान स्थिति में भारत में 17 स्टॉक एक्सचेंज कार्यरत है|  इसमें BSE  तथा NSE  को शामिल किया गया है|  यह सारे स्टॉक एक्सचेंज सेबी की गाइडलाइन द्वारा नियंत्रित होते हैं| 

तो देखते हैं! सेबी के पास क्या पावर होती है इन्हे नियंत्रित करने के लिए? 

सेबी की शक्तियां (Powers of SEBI)

  1. सेबी के पास स्टॉक एक्सचेंज के by-laws  बनाने तथा उन को रेगुलेट करने की पावर होती है| 
  2. SEBI के पास वित्तीय मध्यवर्ती  संस्थाओं (Financial intermediaries) जैसे कि: स्टॉक एक्सचेंज,  कमर्शियल बैंक, स्टॉक ब्रोकर, इन्वेस्टमेंट बैंक इत्यादि के एकाउंटिंग बुक्स या रिकॉर्ड्स की जांच कर सकता है|
  3. सेबी के पास है पावर होती है कि वह किसी भी कंपनी को किसी भी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होने से रोक सकता है| 
  4. यह स्टॉक ब्रोकर्स के रिकॉर्ड को भी हैंडल कर सकता है| 

सेबी के कार्य क्या है? (What are the Functions of SEBI) 

आइए! एक बार सेबी के फंक्शन के बारे में भी जान लेते हैं| 

इसके लिए मैं sebi  के फंक्शन को तीन भागों में बांट देता हूं|

1- सुरक्षात्मक कार्य (Protective function)

2- नियामक कार्य (Regulatory function)

3- विकास कार्य (Development function)

विकास कार्य (Development function)

चलिए दोस्तों! जानते हैं कि सेबी के विकास कार्य क्या है? (What is the development function of sebi?

जैसा कि आप जानते हैं|  सेबी सिक्योरिटी मार्केट को रेगुलेट करने के लिए अस्तित्व में आया था| अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तरह, हमारे यहां के सिक्योरिटी मार्केट में ऐसे क्या काम किए जाए? इसका ध्यान सेबी द्वारा दिया जाता है| 

Development function में सेबी का यही सुनिश्चित करता है कि सिक्योरिटी मार्केट की किस प्रकार तरक्की हो? 

सुरक्षात्मक कार्य (Protective functions)

सेबी के सुरक्षात्मक कार्य क्या है? (What are the Protective functions of sebi)  इनके बारे में भी जान लेते हैं| 

सेबी एक रक्षक होने के नाते क्या क्या काम करता है? 

सेब एक निवेशक को, निवेश करने वाले को तथा वित्तीय भागीदारों को सुरक्षा प्रदान करता है| 

इसमें निम्नलिखित कार्य सम्मिलित हैं| 

1- मूल्य हेराफेरी की जाँच (checking price rigging): इसके तहत सेबी द्वारा यह जांच की जाती है कि seller  द्वारा प्राइस फिक्सिंग तो नहीं की जा रही?

जैसे कि:  मान लो कुछ seller  मिलकर किसी  चीज का अधिकतम मूल्य तय कर लें|  यह सभी सेलर इस बढ़े हुए मूल्य पर ही ट्रेडिंग करें|  इससे होगा यह की निवेशक को वह चीज महंगी मिलेगी तथा साथ ही उसके पास अन्य विकल्प खत्म हो जाएंगे|  ऐसी किसी भी स्थिति से बचने के लिए सेबी  समय-समय पर इस तरह की जांच करता रहता है| 

2- अंदरुनी ट्रेडिंग को रोकता है (Prevent insider trading): किसी भी प्राइस से संबंधित रिपोर्ट के लीक करने पर रोक लगाना|

 जैसे कि:  किसी कंपनी के क्वार्टर रिपोर्ट आने वाली है|  उस क्वार्टर रिपोर्ट में कंपनी को भारी मुनाफा हो रहा है|  ऐसी स्थिति में यदि बैंक का डायरेक्टर जिसको वह रिपोर्ट पता है| यदि वह अपने करीबियों को पहले ही कंपनी का वित्तीय स्टेटस बता देगा तो, वह सब रिपोर्ट आने से पहले ही कंपनी के शेयर निचले दामों पर खरीद लेंगे| 

अब जैसा कि आपने डिविडेंड वाले पोस्ट में पढ़ा था कि लोग उस कंपनी में पैसा लगाना चाहते हैं जो ज्यादा मुनाफा कमा रही हो| इस तरह की अंदरुनी ट्रेडिंग को रोकना भी सेबी का ही कार्य है| 

3- निष्पक्ष प्रथाओं को बढ़ावा देना (promote fair practices): सेबी द्वारा इस बात का ख्याल रखा जाता है कि निष्पक्ष प्रथाओं को बढ़ावा मिले|  किसी भी प्रकार की हेरा फेरी से सिक्योरिटी मार्केट को नुकसान हो सकता है|

4- निवेशकों के बीच जागरूकता पैदा करना (Create awareness among investors): यह समय-समय पर निवेशकों को जागरूक करता रहता है|  निवेशकों को नई-नई तकनीक से वाकिफ कराता रहता है| 

5- कपटपूर्ण और अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकना (Prohibit fraudulent and unfair trade practices): निवेशकों को छल कपट से बचाना भी सेबी का काम है| 

नियामक कार्य (Regulatory function)

सेबी द्वारा किए जाने वाले नियामक कार्यों (Regulatory functions) की लिस्ट (Regulatory functions of SEBI) क्या है?

सेबी द्वारा किए जाने वाले नियामक कार्यों (Regulatory functions) की लिस्ट नीचे दी गई है 

1-  फाइनेंशियल मार्केट, स्टॉक मार्केट तथा स्टॉक एक्सचेंज में सारा काम ठीक-ठाक चल रहा है या नहीं यह देखना सेबी का काम है| सेबी द्वारा यह तय किया जाता है कि उसके अंतर्गत आने वाली मार्केट कैसे चलेगी?

2- वित्तीय मध्यस्थों (intermediaries) और कॉर्पोरेट के उचित कार्यों के लिए दिशानिर्देश और आचार संहिता तैयार करना। इनके लिए कुछ नियम बनाना| अलग-अलग तरह के अनुपालन (Compliances) बनाना|

3- कंपनियों के अधिग्रहण का नियम बनाना| 

4- एक्सचेंजों की पूछताछ और ऑडिट करना| इन बाजारों की देखरेख (Supervision) करना|

5- दलालों, उप-दलालों, मर्चेंट बैंकरों आदि का पंजीकरण।

6-  फीस में छूट देना|

7- शक्तियों का प्रदर्शन और प्रयोग करना।

8- क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को पंजीकृत और नियमित करना|

9- कंपनियों द्वारा इन कंप्लायंसेज का उल्लंघन तो नहीं किया जा रहा इस बात का ध्यान रखना| मार्केट द्वारा  कहीं नियम तोड़े तो नहीं जा रहे इस बात का ध्यान भी सेबी द्वारा रखा जाता है|

सेबी के उद्देश्य क्या हैं? (Objectives of SEBI)

अब हम जानेंगे कि सेबी के क्या उद्देश्य है| 

1- निवेशकों का संरक्षण (Protection of the investors)

“सेबी का प्राथमिक उद्देश्य शेयर बाजार में लोगों के हितों की रक्षा करना और उनके लिए एक स्वस्थ वातावरण प्रदान करना है।”

कोई भी नया व्यक्ति जो स्टॉक मार्केट में निवेश करना चाहता है| जब कोई निवेशक नया होता है तो उसे स्टॉक मार्केट के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं होता|  ऐसी स्थिति में उसके साथ धोखाधड़ी हो सकती है| 

इसी धोखाधड़ी से निवेशकों संरक्षण करने का सेबी का मुख्य उद्देश्य रहता है| वह हमेशा निवेशकों के हितों की रक्षा करता है| इसी मुख्य वजह से से भी अस्तित्व में आया था| 

जब निवेशकों के मन से धोखाधड़ी का डर निकल जाएगा तभी वह खुलकर स्टॉक मार्केट में निवेश कर सकते हैं| 

2- कदाचार की रोकथाम (Prevention of malpractices)

हम प्रतिदिन समाचारों, या अखबारों के माध्यम से यह खबरें पढ़ते रहते हैं कि “फलां आदमी ने डिबेंचर इश्यू किए  और घोटाला कर दिया|” “कंपनी के डायरेक्टरों ने निवेशकों के साथ धोखाधड़ी कर दी|” “कंपनी का प्रमोटर लोगों को लाखों रुपए का चूना लगा गया|” 

इस तरह की सारी घटनाएं कदाचार में आती हैं|  इन सब घटनाओं को रोकना सेबी का उद्देश्य रहता है| वह निरंतर स्टॉक मार्केट पर अपनी नजर गड़ाए रहता है| 

यह भी एक मुख्य कारण था सेबी के अस्तित्व में आने का| इसी तरह के कदाचार को रोकने के लिए ही सेबी की स्थापना की गई थी| 

निष्पक्ष और उचित कामकाज (Fair and proper functioning)

सेबी के आने से पहले भी स्टॉक मार्केट काम कर रहा था|  परंतु उस समय स्टॉक मार्केट में फ्रॉड हो जाना आम बात थी| निवेशक शेयर मार्केट में पैसा लगाने से डरते थे|  कंपनियों को शेयर मार्केट में लिस्ट होने के लिए कोई रूल एंड रेगुलेशन नहीं थे|

 कुछ लोग फर्जी कंपनियां बनाकर शेयरों के दामों में हेरफेर (manipulation ) भी करते थे| उस समय पर स्टॉक मार्केट में चीजें बहुत उलझी हुई थी|  लोगों को जल्दी से  स्टॉक मार्केट के बारे में समझ नहीं आता था| इन सभी चीजों को एक सही ढंग से व्यवस्थित करने का काम सेबी ने किया है| 

जब सारी चीजें व्यवस्थित हो जाती है तो सारी प्रक्रिया पारदर्शी हो जाती है| इससे घपले घोटालों पर लगाम लग जाती है| 

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आपने क्या सीखा

इस पोस्ट के माध्यम से आपने “SEBI full form” “सेबी क्या है? (What is SEBI in Hindi)” “प्रतिभूति बाजार (Securities market) क्या होता है?”

“SEBI का निर्माण कब हुआ था?” “सेबी को क्या-क्या शक्तियां दी गई? (SEBI powers in Hindi)” “सेबी के कार्य क्या है? (What are the Functions of SEBI)” “सेबी के उद्देश्य क्या हैं? (Objectives of SEBI)” के बारे में जाना|

उम्मीद करता हूं आपको यह पोस्ट अवश्य पसंद आई होगी| 

धन्यवाद| 

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