ई व्यवसाय का कार्यक्षेत्र (दायरा) कितना है? – Scope of e business in Hindi

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Scope of e business: इस पोस्ट में हम ई बिजनेस के स्कोप के बारे में पढ़ेंगे| Scope of e business में हम अलग-अलग प्रकारों के बारे में जानेंगे|

तो चलिए दोस्तों! शुरू करते हैं आज का टॉपिक: “Scope of e business”

Scope का क्या अर्थ होता है?

सबसे पहले हमें स्कोप का मतलब समझना चाहिए! 

Scope meaning in Hindi: “क्षेत्र, विस्तार, सीमा, फैलाव, व्यापकता, पैमाना, ढांचा, गुंज़ाइश,कार्य-क्षेत्र, विषय क्षेत्र, परिधि, प्रसार”

यानी कि स्कोप का अर्थ होता है की कितने विषय इसकी सीमा में कवर होंगे? जब हम यह बोलते हैं कि “ किसी विषय का स्कोप कितना है?” इसका अर्थ होता है कि इसकी परिधि में कितने विषय कवर हो रहे हैं| 

जब हम ई बिजनेस के स्कोप के बारे में बात करते हैं, अब इसका अर्थ होता है कि यह बिजनेस कहां कहां तक फैला हुआ है?, क्या-क्या विषय इसके अंदर गिने जाएंगे? 

चलिए, आगे बढ़ते हैं!

इसमें मैं 4 विषय कवर करूंगा, इसमें types of e-commerce business models के बारे में पढ़ेंगे|

Types of e-commerce business models

1- B2B Commerce  

2- B2C Commerce 

3- C2C Commerce 

4- Intra B-commerce 

यह चारों ही विषय पढ़ने के लिए बहुत बड़े हैं| यदि आप इन्हें अच्छी तरह समझ लेंगे तो ई बिजनेस का स्कोप भी आपको अच्छी तरह समझ में आ जाएगा| 

B2B Commerce क्या होता है?

यहां पर B2B का अर्थ होता है: Business to Business

दो बिजनेसमैन के मध्य होने वाले व्यापार को b2b कॉमर्स कहा जाता है| 

चलिए!  b2b बिजनेस को एक उदाहरण के माध्यम से अच्छी तरह समझते हैं| 

एक व्यक्ति की गद्दे की दुकान है तथा एक व्यक्ति की गद्दे की फैक्ट्री है|  

इस दुकानदार ने फैक्ट्री मालिक से संपर्क किया| दोनों की आपस में डील हुई| फैक्ट्री वाला दुकानदार को गद्दे बेचने लगा|

अब! यहां पर देखने वाली बात यह है कि दोनों ही प्रोडक्ट को आगे बेचेंगे| इसे ही B2B Commerce कहते हैं|

यानी कि जहां पर दो बिजनेस मैन की डील होती है, उसे B2B “बिज़नेस टू बिजनेस” कहते हैं|

इसमें बिजनेस से बिजनेस तक की कार्यप्रणाली होती है|

इसको आप एक वेबसाइट के एग्जांपल की माध्यम से बहुत अच्छी तरह समझ सकते हैं|

जैसे कि: अलीबाबा, इंडिया मार्ट जैसे पोर्टल b2b का काम करते हैं| यहां पर एक बिजनेसमैन दूसरे बिजनेसमैन के साथ अपने व्यापार की डील करता है| 

B2C Commerce क्या होता है?

यहां पर B2C का अर्थ होता है: Business to Customer/Consumer

एक बिजनेसमैन तथा एक ग्राहक के मध्य होने वाले व्यापार/लेनदेन b2c कॉमर्स कहलाता है|

उदाहरण

 ऊपर वाले उदाहरण में आपने पढ़ा था कि एक दुकानदार ने  बेचने के लिए गद्दे खरीदें|  जब यह दुकानदार अपने गद्दे आगे किसी ग्राहक को बेचेगा तब वह b2c कॉमर्स कहलाएगा|

नोट: जिस ग्राहक ने यह गद्दे खरीदे हैं वह इन्हें आगे बेचने के मकसद से ना खरीद रहा हो|

एक B2C Business में बिजनेसमैन का कार्य केवल माल बेचना नहीं होता| निम्न प्रकार के कार्य भी B2c business में आएंगे|

शोध (Researching): किस प्रकार का प्रोडक्ट ज्यादा चलेगा?,  किस प्रोडक्ट की गुणवत्ता अच्छी  होगी? इत्यादि

बाजार करना (Marketing): उसको मार्केट के बारे में रिसर्च भी करनी पड़ती है|  किस मार्केट में क्या प्रोडक्ट चलेगा?,  कहां किस चीज की कितनी डिमांड है? इत्यादि

Customize (रुचि के अनुसार बनाना): ग्राहक  की रूचि के अनुसार वस्तुओं का साइज, रंग, डिजाइन, इस्तेमाल की विधि,  इत्यादि के हिसाब से बदलकर  बेचना भी b2c बिजनेस में आएगा| 

उदाहरण:  जैसे लोग अपने घर के अनुसार सोफे का डिजाइन बनवाते हैं| 

B2C Commerce कॉमर्स पोर्टल के उदाहरण:  अमेजॉन, फ्लिपकार्ट,  स्नैपडील जैसे ऑनलाइन पोर्टल इसके उदाहरण हैं| 

C2C Commerce क्या होता है?

यहां पर C2C का अर्थ होता है: Customer to Customer/Consumer

दो ग्राहक के मध्य होने वाले व्यापार को C2C कॉमर्स कहा जाता है|

इसे c2c कॉमर्स जब कहा जाएगा जब दोनों ही ग्राहक हों|

जैसे कि:  एक व्यक्ति ने एक गद्दा खरीदा|  कुछ समय बाद उसने यह गद्दा आगे किसी व्यक्ति को बेच दिया|  इस प्रकार का होने वाला ट्रांजैक्शन c2c बिजनेस कहलाएगा| 

नोट:  इन ग्राहकों को बिजनेसमैन इसलिए नहीं कहा जाएगा क्योंकि यह लगातार इस काम को नहीं कर रहे हैं| बिजनेसमैन की कैटेगरी में आने के लिए रेगुलर बेसिस पर क्रय-विक्रय करना पड़ेगा| 

इसमें बार्टर सिस्टम भी अप्लाई किया जा सकता है|

बार्टर सिस्टम क्या होता है?: “मुद्रा के स्थान पर वस्तुओं के द्वारा क्रय-विक्रय बार्टर सिस्टम कहलाता है| यह पुराने समय में इस्तेमाल किया जाता था|  जब तक करेंसी नोट  चलन में नहीं आया था| लोग वस्तुओं के बदले चावल, गेहूं या धान इत्यादि का लेनदेन करते थे|”

C2C Commerce कॉमर्स पोर्टल के उदाहरण: ebay, olx जैसे वेबसाइट पोर्टल c2c के उदाहरण हैं| 

Intra B-Commerce क्या होता है?

समझने के लिए सबसे पहले आपको इंट्रा शब्द का अर्थ समझना पड़ेगा| 

Intra meaning in Hindi: “भीतरी”

अपने स्थान से बिना कहीं जाए, किसी ऑर्डर को, अपने बिजनेस के किसी और यूनिट द्वारा पूरा करवाना| 

उदाहरण: किसी भी बिजनेस में अलग-अलग डिपार्टमेंट होते हैं| प्रत्येक डिपार्टमेंट का अपना एक फिक्स काम होता है| मैनेजमेंट डिपार्टमेंट का अलग काम होता है|  प्रोडक्शन यूनिट का अलग काम होता है| मार्केटिंग डिपार्टमेंट का अलग काम होता है| 

यह सभी डिपार्टमेंट एक दूसरे के काम में बाधा नहीं पहुंचाते| जैसे कि: मार्केटिंग डिपार्टमेंट, मैनेजिंग डिपार्टमेंट के काम में दखल नहीं देगा| 

परंतु सभी डिपार्टमेंट एक दूसरे से जुड़े हुए होते हैं| इन सबके बीच आपस में संपर्क (communication) अवश्य ही रहता है| 

किसी भी डिपार्टमेंट के भीतर होने वाले आपसी संपर्क को ही Intra B-Commerce कहते हैं| 

नोट: इसके लिए उन्होंने आपस में संपर्क टेक्नोलॉजी के माध्यम से किया हो जब भी है यह बिजनेस की श्रेणी में आएगा|  बिना टेक्नोलॉजी के यह ई बिजनेस नहीं माना जाएगा| 

उदाहरण: आपने इंटरकॉम का नाम तो अवश्य ही सुना होगा| जब आप किसी होटल में जाते हैं तो अक्सर होटल के अलग-अलग डिपार्टमेंट इंटरकॉम के माध्यम से जुड़े होते हैं| 

साथ ही यह भी पढ़ें:

E-Business क्या होता है?

E-business के क्या फायदे होते हैं?

ई बिजनेस की सीमाएं तथा नुकसान

Capital market क्या होती है?

मनी मार्केट क्या होती है?

दोस्तों, उम्मीद करता हूं| आपको यह पोस्ट “Scope of e business” पसंद आई होगी|

अगली पोस्ट में फिर मिलेंगे तब तक के लिए, नमस्कार

धन्यवाद|

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