Role of ECGC in Export | एक्सपोर्ट में ईसीजीसी की क्या भूमिका है?

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दोस्तों, इस पोस्ट के माध्यम से हम एक्सपोर्ट बिजनेस में ईसीजीसी की क्या भूमिका है? (What is role of ecgc) इसके बारे में समझेंगे| 

यदि आप निर्यात व्यवसाय करते हैं तो आपको ईसीजीसी के बारे में अवश्य ही जानना चाहिए|

एक्सपोर्ट बिज़नेस में यदि आप सिस्टम के हिसाब से नहीं चलोगे तो आपको नुकसान लगने का जोखिम बहुत अधिक राहत है|

इससे आपका बहुत बड़ा नुकसान होने से बच सकता है!

चलिए दोस्तों Role of ECGC को अपने शब्दों में समझते हैं|

ईसीजीसी की फुल फॉर्म क्या है? 

ECGC full form: “Export Credit Guarantee Corporation of India”

इसे हिन्दी में “निर्यात ऋण गारंटी निगम” कहते हैं|

ECGC क्या है?

ECGC एक नेशनल क्रेडिट रिस्क इंश्योरर है| यह भारत सरकार द्वारा चलाए जाने वाला एक उपक्रम है| इसका मकसद भारत के निर्यात को बढ़ावा देना है| 

ईसीजीसी की स्थापना 1983 में की गई थी| ईसीजीसी का मुख्य मकसद क्रेडिट विदेशी खरीदार (Overseas Buyer) के विरध जोखिमों को कम करना है|  ईसीजीसी बीमा काफी अच्छा होता है! तथा आसानी से इसका फायदा लिया जा सकता है| 

ईसीजीसी का सरल भाषा में अर्थ: जो भी मेरे भाई! लोग एक्सपोर्ट करना चाहते हैं या करते हैं उनके लिए ईसीजीसी के बारे में जानना बहुत जरूरी है| ECGC धोखाधड़ी से सुरक्षा प्रदान करता है| यह पूरी तरह भारतीय कंपनी है| ईसीजीसी के अंदर काफी प्रशासनिक होते हैं|

इसका हेड क्वार्टर मुंबई में स्थित है तथा यह मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स के द्वारा नियंत्रित की जाती है|

यदि आप एक्सपोर्ट बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो यह पोस्ट पढ़ें: एक्सपोर्ट इंपोर्ट बिज़नेस कैसे शुरू करें?

उद्देश्य  

1- ईसीजीसी का उद्देश्य भारतीय एक्सपोर्टर को सपोर्ट करना तथा एक्सपोर्ट के विरुद्ध होने वाले नुकसाननों के लिए सुरक्षा प्रदान करना है| 

उदाहरण: मान लीजिए आप एक एक्सपोर्टर हैं| आप भारत से बाहर किसी वस्तु का एक्सपोर्ट करते हैं| अब!  आपका विदेशी ग्राहक आपको पेमेंट नहीं करता| इसकी कई वजह हो सकती हैं| ऐसी किसी स्थिति से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की स्थापना की गई है| 

2- किसी भी देश की तरक्की के लिए विदेशी पूंजी के भंडार का बढ़ना बहुत आवश्यक है|  निर्यातक के मन से एक्सपोर्ट के जोखिमों  का डर निकालने के लिए ही ईसीजीसी की स्थापना की गई है|

इसकी वजह से  निर्यातकों का एक्सपोर्ट में वित्तीय नुकसान डर निकल जाता है,  इससे हमारे देश का एक्सपोर्ट बढ़ता है तथा देश में विदेशी पूंजी का भंडार बढ़ता है| 

Role of ECG (ईसीजीसी कैसे कार्य करता है?) 

ECGC का निर्यात के क्षेत्र में बहुत महत्व है

ECGC किसी भी फॉरेन buyer की उधार योग्यता (credit worthiness) के बारे में बताता है|

जैसे कि: जब आप किसी भी बैंक से लोन लेने के लिए जाते हो तो आपका “सिबिल स्कोर” चेक किया जाता है| 

ठीक उसी प्रकार ECGC का काम किसी ग्राहक की क्रेडिट रेटिंग जारी करना है| 

इसके लिए ईसीजीसी अपने सभी सोर्स का इस्तेमाल करता है|

जैसे कि: वह उस देश में, उस ग्राहक के बैंक से संपर्क करेगा और देखेगा कि इस ग्राहक की क्रेडिट रेटिंग कितनी है| 

ग्राहक के ठीक पाए जाने पर यह एक्सपोर्टर को सूचना देगा और एक एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी पॉलिसी जारी करेगा| 

इसके अलावा ईसीजीसी आपको किस देश में एक्सपोर्ट करना चाहिए तथा किस देश में एक्सपोर्ट करने से बचना चाहिए उसके आधार पर भी क्रेडिट रेटिंग जारी करता है| 

ECGC ने विश्व के सभी देशों का 7 समूहों में वर्गीकरण किया है| 

देशों  के साथ भारत के रिश्ते तथा उनके अंदरूनी हालातों की जानकारी लेता है| 

प्रत्येक तिमाही या छमाही के आधार पर महत्वपूर्ण परिवर्तन हो रहा हो तो इसकी समीक्षा की जाती है| इसी वर्गीकरण के आधार पर वह प्रत्येक देश की क्रेडिट रेटिंग स्कोर तय करता है| 

यदि आप एक्सपोर्ट बिजनेस में ग्राहक ढूंढना चाहते हैं तो, यह पोस्ट पढ़ें: एक्सपोर्ट बिज़नेस में ग्राहक कैसे ढूंढे?

वर्गीकरण का तरीका

A1: इसमें बहुत ही “तुच्छ खतरों (Insignificant Risk)” को रखा जाता है| 

A2: इसमें बहुत ही “कम जोखिम (Low risk)” रखा जाता है|

B1: इसमें “मध्यम रूप से कम जोखिम (Moderately low risk)” रखा जाता है|

B2: इसमें “मध्यम जोखिम (Moderately risk)” रखा जाता है| 

C1: इसमें “मध्यम उच्च जोखिम (Moderate high risk)” रखा जाता है| 

C2: इसमें “भारी जोखिम (high risk)” रखा जाता है|

D: इसमें “बहुत अधिक जोखिम (very high risk)” रखा जाता है|

ECGC के मुख्य कार्य क्या हैं?

आइए दोस्तों अब समझते हैं एक्सपोर्ट बिजनेस में ईसीजीसी का क्या रोल है? (Role of ECGC in Export) 

निर्यात किए जाने वाले उत्पाद का इंश्योरेंस करना| 

एक्सपोर्ट बिजनेस में ECGC का role निर्यात किए जाने वाले उत्पाद के जोखिमों का इंश्योरेंस करना है| 

Buyer के पैसे न चुका पाने की स्थिति में होने पर सुरक्षा प्रदान करना|

कभी-कभी एक्सपोर्ट करने के बाद हमारी पेमेंट आने से पहले कुछ ऐसी घटनाएं घट जाती हैं  जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते| 

 ऐसी स्थिति में बायर के साथ कोई ऐसी घटना घट जाती है जिससे कि वह पैसे न चुका पाने की स्थिति में चला जाए,  ऐसी किसी स्थिति में लगने वाले नुकसान की भरपाई के लिए ईसीजीसी पॉलिसी करता है| 

राजनीतिक जोखिमों (Political risks) के लिए सुरक्षा प्रदान करना| 

किसी भी देश के एक्सपोर्ट इंपोर्ट में राजनीति का बहुत मुख्य रोल होता है|  राजनीतिज्ञ ही तय करते हैं कि किसी देश के साथ उसके संबंध कैसे होंगे| संबंध बहुत अच्छे होने पर व्यापार भी पड़ता है| प्रत्येक देश की यही सोच रहती है कि उसका विदेशी व्यापार बढ़े|

परंतु कभी-कभी स्थितियां इस प्रकार की आ जाती हैं जब कोई देश दूसरे देश  से आने वाले माल पर एकदम से प्रतिबंध लगा देता है|

अब! भारत के निर्यातकों को ऐसी किसी स्थिति में लगने वाले नुकसान से बचने के लिए एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी ऑफ इंडिया सुरक्षा प्रदान करता है| 

ऐसी कोई भी स्थिति अचानक से आ सकती है| इस प्रकार की कुछ स्थितियों के मैं उदाहरण दे रहा हूं| 

जैसे कि: 

1- युद्ध की स्थिति में 

2- Exchange transfer blockage स्थिति में 

3- किसी निर्यातक ने कोई आर्डर लिया, जिस देश  से उसने आर्डर लिया उसमें सत्ता का परिवर्तन हो गया| नई सत्ता ने कुछ ऐसे प्रतिबंध लगा दिए जिससे निर्यातक को नुकसान हो रहा है तो, ऐसी स्थिति में ईसीजीसी उसके नुकसान की भरपाई करता है| 

4- कोई देश इंपोर्ट पर बैन लगा दे|

5- किसी उत्पाद के लिए कुछ विशेष प्रतिबंध लगा दे|

6- किसी आयातक का इंपोर्ट लाइसेंस बैन हो जाने की स्थिति में| 

7- किसी उत्पाद के ज़ब्त (Expropriation) करने की स्थिति में| 

वाणिज्यिक जोखिमों (Commercial risks) के लिए सुरक्षा प्रदान करना| 

वाणिज्य जोखिमों के लिए भी ईसीजीसी मुख्य भूमिका अदा करता है| आइए समझते हैं कुछ उदाहरण जिनके माध्यम से हमें एक्सपोर्ट में Role of ecgc  पता चलेगा|

1- आयातक के दिवालिया होने की स्थिति में (The bankruptcy of the importer)

2- गैर-स्वीकृति या भुगतान न करने की स्थिति में (Non Acceptance or non payment)

3- लैटर ऑफ क्रेडिट ओपनिंग बैंक के दिवालिया होने पर (The bankruptcy of letter of credit opening Bank)

4- आयातक के भुगतान न करने की स्थिति में (The nonpayment of the importer)

यदि आप बिजनेस करते हैं तो! आपको लैटर ऑफ क्रेडिट के टर्म एंड कंडीशन के बारे में भी जानना बहुत आवश्यक है|

इन्हें पढ़ने के लिए इस पोस्ट पर क्लिक करें: लैटर ऑफ क्रेडिट के टर्म एंड कंडीशन्स क्या होते हैं?

5- विनिमय दर में उतार-चढ़ाव (Exchange rate fluctuation)

6- जनरल इंश्योरेंस में कवर होने वाले पार्ट जैसे कि लॉस एंड डैमेज इत्यादि|

ईसीजीसी कितने प्रकार की पॉलिसी देता है? (Types of ECGC policies) 

Export Credit Guarantee Corporation of India द्वारा चार प्रकार की पॉलिसी दी जाती है| 

  • मानक नीतियां (Standard Policies)
  • विशिष्ट नीतियां (Specific Policies)
  • वित्तीय गारंटी (Financial Policies)
  • विशेष योजना (Special plan)

ईसीजीसी निर्यातकों की कैसे मदद करता है?

विशेष नीतियां ईसीजीसी निर्यातकों को निम्नलिखित प्रकार की गारंटी प्रदान करती है:

1- निर्यात वित्त गारंटी (Export finance guarantee)

2- शिपमेंट के बाद निर्यात ऋण गारंटी (Post-shipment export credit guarantee)

3- पैकिंग क्रेडिट गारंटी (Packing credit guarantee)

4- निर्यात प्रदर्शन गारंटी (Export performance guarantee)

5- निर्यात उत्पादन वित्त गारंटी (Export production finance guarantee)

6- स्थानांतरण गारंटी (Transfer guarantee)

अब दोस्तों!  एक ऐसा सवाल जो आपके दिमाग में एक्सपोर्ट करने के दौरान हमेशा उमड़ता-घुमड़ता रहता है| 

एक्सपोर्टर को ECGC लेना चाहिए या LC लेना चाहिए? 

आइए दोस्तों! अब हम समझते हैं कि ECGC (Export Credit Guarantee Corporation of India)

लेना चाहिए या LC (Letter of credit) लेना चाहिए? 

लैटर ऑफ क्रेडिट के बारे में अधिक जानने के लिए यह पोस्ट पढ़ें: लैटर ऑफ क्रेडिट क्या होता है? 

यह दोनों ही तरीके, एक्सपोर्ट में पेमेंट को सेफ करने के हैं| 

मेरे अनुसार: यदि आपने लेटर ऑफ क्रेडिट एक्सेप्ट किया है, जिस बैंक ने लैटर ऑफ क्रेडिट में पेमेंट को कंफर्म किया है, उसकी क्रेडिट रेटिंग बहुत अच्छी है तो, आपको ईसीजीसी लेने की आवश्यकता नहीं है| वित्तीय जोखिम को  कम करने के लिए आप ईसीजीसी पॉलिसी भी ले लें| 

Disclaimer: यह एक वित्तीय मामला है| किसी भी प्रकार के वित्तीय मामले में आपको स्वयं अपनी समझ बूझ के साथ निर्णय लेना चाहिए| 

एक्सपोर्ट होने के बाद बायर माल ना ले तब क्या ECGC Policy अप्लाई होगी?

एक उदाहरण की मदद से समझते हैं|

मान लीजिए, आपने लेटर ऑफ क्रेडिट के ऊपर एक्सपोर्ट किया है|  आपका माल तय  डेस्टिनेशन पर पहुंच गया|  अब! आपका ग्राहक माल लेने से मना कर देता है| 

तो भाई लोगों, मना कर दे तो कर दे! हमें तो बैंक पेमेंट देगा| हमें सिर्फ एलसी की शर्तों को पूरा करना है, ग्राहक हमारी पेमेंट नहीं रोक सकता| 

अब ECGC की बात करते हैं! 

आपने जिन भी जोखिमों को ईसीजीसी की सारी तय नियम एवं शर्तों को पूरा करना पड़ेगा| जैसे कि आपने वही गुड्स भेजा हो, जिसका आर्डर लिया है|  गुड्स पूरा भेजा हो| इत्यादि इन नियमों के उल्लंघन पर ईसीजीसी आपकी पेमेंट का जिम्मेदार नहीं है|

इसके अलावा,यदि ग्राहक दिवालिया हो जाता है, ग्राहक का बैंक दिवालिया हो जाता है, देशों के बीच की बात बिगड़ जाती है इत्यादि विषयों में ईसीजीसी पेमेंट देगा| 

ECGC Video

ECGC के फ़ायदे
ECGC Role in Export-Import Business

निष्कर्ष: Role of ECGC

दोस्तों,  पूरी पोस्ट लिखने के बाद आपको एक्सपोर्ट में Role of ECGC  तो समझ में आ ही गया होगा! मेरे विचार से आपको अपने प्रत्येक कंटेनर लोड के लिए ईसीजीसी पॉलिसी अवश्य ही लेनी चाहिए| 

बहुत थोड़ी सी पूंजी लगाकर यदि आप जोखिमों से मुक्त हो जाते हैं तो इसमें हर्ज ही क्या है!! 

आप स्वयं हिसाब लगा लीजिए कि एक कंटेनर में आपकी कितने लाख रुपए का माल जाएगा? तथा उसके एवज में आपको ईसीजीसी पॉलिसी में कितना थोड़ा सा प्रीमियम देना पड़ रहा है?

नोट: 100% Advance Payment term के लिए आपको ECGC पॉलिसी लेने की कोई आवश्यकता नहीं है| 

एक कंटेनर में कितना माल जाएगा? इसका हिसाब लगाने के लिए यह पोस्ट पढ़ें: कंटेनर में कितना माल आएगा हिसाब कैसे लगाएं?

FAQs: ECGC

ECGC की फुल फॉर्म क्या है?

ECGC full form: “Export Credit Guarantee Corporation of India”

ECGC की हिंदी फुल फॉर्म क्या है?

निर्यात ऋण गारंटी निगम

ईसीजीसी किन जोखिमों पर गारंटी देता है?

Buyer के पैसे न चुका पाने की स्थिति में, राजनीतिक जोखिमों (Political risks), वाणिज्यिक जोखिमों (Commercial risks) पर गारंटी देता है|

ईसीजीसी क्या है?

ईसीजीसी भारत सरकार द्वारा बनाया गया एक ऐसा निगम है जो एक्सपोर्ट करने वाले लोगों को जोखिमों से बचाने में मदद करता है| इसके लिए वह इंश्योरेंस पॉलिसी जारी करता है| इससे निर्यातकों के मन से डर निकल जाता है तथा वह खुलकर व्यापार करने में समर्थ हो जाते हैं|

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

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आपने क्या सीखा? 

इस पोस्ट में आपने एक्सपोर्ट बिजनेस में ईसीजीसी की भूमिका (role of ecgc) बारे में पढ़ा|

उम्मीद करता हूं आपको यह पोस्ट ईसीजीसी की भूमिका (role of ecgc) बेहद पसंद आई होगी!

 इसी प्रकार बिजनेस से संबंधित अगली पोस्ट में मैं फिर मिलूंगा, तब तक के लिए नमस्कार

धन्यवाद

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