कंपनी प्रवर्तक के बारें में सारी जानकारी | Promoter meaning & definition in Hindi

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जब भी आप कंपनी के बारे में पढ़ते हैं तो प्रमोटर शब्द आपको बार-बार सुनाई देता है| तब! आपके मन में यह प्रश्न आते हैं की “Promoter meaning in Hindi क्या होता है?” “प्रमोटर आखिर कौन होता है?”

इन सवालों का जवाब ढूंढने के लिए सबसे पहले आप इंटरनेट पर टाइप करते हैं “Promoter meaning in Hindi” 

प्रमोटर का अर्थ एवं परिभाषा (Promoter meaning & definition)

इस टॉपिक को अच्छी तरह समझने के लिए सबसे पहले हम प्रमोटर का हिंदी में अर्थ तथा प्रमोटर की परिभाषा जान लेते हैं|

प्रमोटर का हिंदी अर्थ जान लेने के बाद आपको यह कांसेप्ट आधे से ज्यादा समझ में आ जाएगा| 

Promoter meaning in Hindi: “प्रवर्तक, संस्थापक, प्रोत्साहक, संरक्षक, सरपरस्त, उपकारी, बढ़ाने वाला, सहायक, मददगार, प्रतिपालक, बानी, उकसावा देनेवाला, आयोजक, वर्धक” 

प्रमोटर का हिन्दी अर्थ जान लेने के बाद, प्रमोटर कौन होता है? यह भी आपको समझ में आ गया होगा|

प्रमोटर की परिभाषा: “जिसके दिमाग में सबसे पहले किसी कंपनी को शुरू करने का आइडिया आया हो तथा उसने इस आइडिया को यथार्थ में लाने के लिए कुछ कदम उठाए हो|”

आइए! इसे और भी अच्छी तरह से समझ लेते हैं|

प्रमोटर कौन होता है?

वह व्यक्ति जो बहुत सारी बिजनेस अपॉर्चुनिटी में से एक बिजनेस अपॉर्चुनिटी को चुनता है, जो उसके लिए सबसे ज्यादा लाभकारी हो सकती है| 

मान लीजिए, एक इंसान जिसका नाम मिस्टर एक्स है| 

अभी मिस्टर एक्स Promoter नहीं बने हैं| मिस्टर एक्स के दिमाग में एक बिजनेस से संबंधित एक आइडिया आता है| 

अभी ठहरिये! केवल दिमाग में बिजनेस आइडिया आने से कोई प्रमोटर नहीं बन जाता| यदि केवल बिजनेस आइडिया आने से कोई प्रमोटर बन जाता तो प्रत्येक इंसान प्रमोटर कहलाता| 

क्योंकि बिज़नेस आईडिया तो सबके दिमाग में कोई ना कोई आता ही रहता है| 

तो फिर ऐसी कौन सी चीज है जो इसे प्रमोटर बनाएगी? 

मिस्टर एक्स को प्रमोटर बनने के लिए बहुत सारे कदम उठाने पड़ेंगे| आइए! जानते हैं कि मिस्टर एक्स किस प्रकार प्रमोटर बन सकते हैं?

इसके लिए इसे इन बिंदुओं पर भी फोकस करना पड़ेगा|

  • क्या यह बिजनेस फायदेमंद होगा?

इसके लिए मिस्टर एक्स को यह सोचना पड़ेगा कि यदि वह या बिजनेस खोल भी लेते हैं तो क्या यह बिजनेस फायदेमंद होगा?

इसे फायदेमंद बनाने के लिए क्या-क्या चीजें करनी पड़ेगी? मिस्टर एक्स को केवल सोचना नहीं है| इस विषय को अस्तित्व में लाने के लिए उन्हें पूरा प्लान बनाना पड़ेगा| 

  • इस बिजनेस को कैसे शुरू किया जा सकता है?

अब मिस्टर एक्स को इसे शुरू करने के बारे में सोचना है|  कौन सी चीज कहां से आएगी?, कैसे बिजनेस सेटअप तैयार होगा?, क्या क्या डॉक्यूमेंट लगेंगे इत्यादि| 

  • कंपनी का गठन

Promoter व्यवसाय करने के बारे में सोचता है और एक कंपनी बनाने के लिए सभी जरूरी कामों की पहल करता है।

यानी कि कंपनी का गठन करने के लिए अपनी तरफ से जितने काम करने पड़ते हैं, उतने काम प्रमोटर को करने पड़ेंगे| तभी यह प्रमोटर कहलाया जाएगा|

  • विश्लेषण (analysis) 

Promoter को कुछ विषयों का विश्लेषण करना भी आवश्यक है|

जैसे कि: 

  1. कितने धन की आवश्यकता होगी?
  2. किसी व्यवसाय में कितना जोखिम है?
  3. व्यवसाय का भविष्य क्या है?
  4. किन-किन साधनों की आवश्यकता पड़ेगी? 

इन सारे विषयों पर विश्लेषण करने की जिम्मेदारी प्रमोटर की होती है| 

क्या अकेला व्यक्ति ही प्रमोटर (प्रवर्तक) बन सकता है? 

Promoter के लिए संख्या महत्वपूर्ण नहीं है|

यानी कि प्रमोटर एक अकेला आदमी भी हो सकता है| लोगों का समूह भी प्रमोटर हो सकता है| कोई कंपनी भी प्रमोटर हो सकती है| 

चलिए, इसे थोड़ा अच्छी तरह समझ लेते हैं!

 यह जरूरी नहीं है कि किसी अकेले आदमी के दिमाग में ही बिजनेस का कोई आईडिया या हो! हो सकता है कि यह आइडिया 1 से अधिक लोगों के दिमाग में आया हो| इसके लिए इन सब ने साथ में मिलकर ऊपर दिए स्टेप्स को फॉलो किया हो तभी यह प्रमोटर की श्रेणी में आएंगे|

यह बिजनेस आइडिया, यदि किसी कंपनी के दिमाग में आया होता और इसके लिए उस कंपनी ने ऊपर दिए स्टेप्स को फॉलो किया होता तो वह कंपनी प्रमोटर कहलाती| 

कंपनी में प्रमोटर की क्या स्थिति होती है? (Position of promoter in company)

प्रमोटर कौन होता है? यह तो आप लोग जान ही चुके हैं|

अब इतना जानने के बाद दिमाग में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि “कंपनी में प्रमोटर की क्या स्थिति होती है|”  यदि मैं इसे सामान्य भाषा में कहूं तो मैं कहूंगा कि “कंपनी में प्रमोटर की कितनी चलती है?” 

  • एजेंट एवं ट्रस्टी

प्रमोटर्स ना तो कंपनी के एजेंट होते हैं और ना ही कंपनी के ट्रस्टी होते हैं| 

  • प्रमोटर की भूमिका 

प्रमोटर किसी कंपनी में एक जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका में होता है|

यानी कि कंपनी में प्रमोटर की स्थिति भरोसे पर आधारित होती है| प्रमोटर की है जिम्मेदारी होती है कि अपनी इस स्थिति का वह दुरुपयोग ना करें| 

  • कंपनी के गठन से पहले

मेंबर (शेयर होल्डर) तथा डायरेक्टर कंपनी के गठन के बाद कंपनी से जुड़ते हैं|

प्रमोटर्स का रोल कंपनी के गठन से बहुत पहले ही शुरू हो जाता है| बहुत बार ऐसा होता है कि प्रमोटर को बहुत सारे कॉन्टेक्ट्स बनाने पड़ते हैं| 

यह कॉन्ट्रैक्ट कंपनी की ओर से ही बनाए जाते हैं, जबकि कंपनी का अभी तक गठन नहीं हुआ है|

कंपनी का गठन अभी तक नहीं हुआ है इसलिए कंपनी की ओर से यह कॉन्ट्रैक्ट प्रमोटर्स ही बनाते हैं|

Note: इन सारे कॉन्टेक्ट्स को कंपनी के गठन के बाद पुष्टि करना (Ratify) करना पड़ता है|

यानी कि सामान्य अर्थ में समझाऊं तो इसका अर्थ है कि इसे अप्रूव करना पड़ता है| 

सारांश

यहां तक की कहानी समझे आप!!  देखिए, कंपनी का तो गठन हुआ नहीं है| जब कंपनी का गठन नहीं हुआ तो उसमें डायरेक्टर तथा शेयर होल्डर  भी नहीं होंगे| अब कंपनी को कुछ कॉन्टेक्ट्स भी बनाने पड़ सकते हैं| 

अब यारों! कोई बंदा इतनी मेहनत कर रहा है तो उसे इतना हक तो मिलना ही चाहिए कि कम से कम वह शुरुआत में यह सब काम कर सकें|

बाद में इन डाक्यूमेंट्स का निरीक्षण करके इनको वैलिड कर देंगे|

यदि कंपनी द्वारा इन डाक्यूमेंट्स की पुष्टि (Ratify) नहीं की जाती तो यह सारे कॉन्ट्रैक्ट रद्द करार दे दिए जाएंगे| 

अरे! रे रे रे रे!!!! 

एक और विडंबना देखिए कि यदि डाक्यूमेंट्स के रद्द होने पर किसी थर्ड पर्सन को नुकसान होता है, तो उस नुकसान की भरपाई उस प्रमोटर की जेब से की जाएगी| 

कंपनी उसकी भरपाई के लिए जिम्मेदार नहीं है| 

  • खुलासा (disclose)

अब दिमाग में एक सवाल रह रहकर उठ रहा है की “प्रमोटर कंपनी से क्या कोई फायदा ले सकता है?”

जी हां, प्रमोटर की स्थिति में रहने पर यदि उसे कंपनी से कुछ फायदा मिल रहा है तो वह अवश्य ले सकता है| 

परंतु इस बात का ख्याल रहे कि किसी भी प्रकार का मुनाफा वह कंपनी को बिना बताए नहीं ले सकता| 

यानी कि किसी भी प्रकार का सीक्रेट प्रॉफिट लेना विश्वासाश्रित संबंध (fiduciary relation) का दुरुपयोग माना जाएगा| 

विश्वासाश्रित संबंध: विश्वास पर आधारित संबंध  विश्वासाश्रित संबंध  कहलाते हैं| 

  • गैर-खुलासा (non-disclose)

अब!  एक बात और सोचो कि यदि प्रमोटर ने कंपनी के गठन से पहले एक ऐसा कांटेक्ट बना दिया जिससे कि उसे मुनाफा मिल रहा है| इस कॉन्ट्रैक्ट के बारे में इसने कंपनी में कोई खुलासा भी नहीं किया|  तब क्या होगा?

 देखो  भाई लोगों!  इस सवाल का जवाब ऊपर दिया हुआ है परंतु फिर भी इसे एक बार और बता देता हूं| 

आपने ऊपर पढ़ा था की कंपनी के गठन से पहले प्रमोटर्स के द्वारा बनाए गए सारे कॉन्ट्रैक्ट की पुष्टि की जाती है| कंपनी के गठन के बाद पुष्टि होने पर ही यह कॉन्टैक्ट्स लागू होते हैं| कंपनी द्वारा यह कॉन्ट्रैक्ट समाप्त किए जा सकते हैं| इसके बाद होने वाला नुकसान प्रमोटर को अपनी जेब से ही भरना पड़ेगा|

 चलो!  इसे एक उदाहरण द्वारा चित्र समझते हैं|

 मिस्टर एक्स एक्स प्रमोटर है| मिस्टर एक्स का एक भाई है, रामलाल| मिस्टर एक्स, जिस कंपनी के प्रमोटर बने वह कंपनी गद्दे बनाती थी| 

रामलाल, जो की मिस्टर एक्स भाई है, इसकी गद्दे का रॉ मैटेरियल का व्यवसाय है| मिस्टर एक्स ने अधिक दामों पर अपने भाई से रॉ मैटेरियल लेने का एक कांटेक्ट कर लिया| 

मिस्टर एक्स ने कंपनी से यह बात छुपाई कि जिस कंपनी से उसने रॉ मैटेरियल का कॉन्ट्रैक्ट किया है, वह कंपनी उसके भाई की है| 

कंपनी  को जब पता चला,  तो कंपनी द्वारा थोड़ी छानबीन भी की गई| कंपनी ने यह पाया कि रॉ मैटेरियल बहुत अधिक दामों पर खरीदा जा रहा है| इसके द्वारा कहीं ना कहीं प्रमोटर्स को गुप्त वित्तीय लाभ हो रहा है|

कंपनी ने तुरंत उस कॉन्ट्रैक्ट को रद्द कर दिया| 

कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने से पहले मिस्टर रामलाल कुछ ऐसा रॉ मैटेरियल तैयार करवा चुके थे, जिसको कंपनी द्वारा ना लेने पर उनको 10 लाख रुपए का नुकसान लगना तय था| 

अब यह नुकसान मिस्टर एक्स को देना पड़ेगा| 

अब! यहां पर आप यह मत सोचिए कि रामलाल तो मिस्टर एक्स का भाई है| जो नुकसान लगा है, वह आपस में सेटल कर लेंगे कि किस को, किस से, कैसे लेना है? 

  • कानूनी पहलू

कंपनी अधिनियम में कहीं पर भी यह नहीं लिखा है कि प्रमोटर द्वारा जो खर्चा किया गया है, कंपनी द्वारा उसको वापस किया जाएगा| जैसे कि कंपनी गठन में किया गया खर्चा| 

यानी कि कंपनी के लिए उनका जो भी खर्चा हुआ है वह कंपनी से उसका दावा नहीं कर सकते| यदि कंपनी चाहे तो आभार (gratitude) व्यक्त करते हुए प्रमोटर को उसका खर्चा वापिस दे सकती है| 

कंपनी प्रवर्तक के प्रमुख कार्य क्या हैं? (Responsibilities of Promoter)

दस्तावेज (Documents)

जैसा कि आप जानते हैं: कंपनी के तीन मुख्य दस्तावेज होते हैं|

  1. Memorandum of association
  2. Article of association
  3. Prospectus

संघ के ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर्ताओं को ठीक करना

  • हस्ताक्षर करने का अधिकार

प्रमोटर को इस बात का चयन करना होता है कि मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन पर किन लोगों के हस्ताक्षर लिए जाएंगे| 

हस्ताक्षर करने का अधिकार सबसे पहले मेंबर्स/स्क्राइबर के हाथों में आता है| जो भी शुरुआती मेंबर होते हैं वह मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन पर हस्ताक्षर करते हैं| 

इन सारे मेंबर की जानकारी प्रमोटर्स को ही देनी होती है| 

जैसा कि आप जानते हैं कि आमतौर पर जब कंपनी शुरू की जाती है तो अपने ही कुछ जानकार लोगों से पैसा इकट्ठा करके बनाई जाती है| 

यदि आप प्राइवेट लिमिटेड कंपनी खोल रहे हैं तो 2 लोग चाहिए| यदि आप पब्लिक लिमिटेड कंपनी खोल रहे हैं तो 7 लोग चाहिए| शुरुआत में तो इन्हीं लोगों के द्वारा पैसा इकट्ठा किया जाएगा| 

इन लोगों को इकट्ठा करने का काम भी प्रमोटर का ही होता है| 

  • डायरेक्टर का चयन 

इसमें यदि डायरेक्टर कौन होगा? यदि यह नहीं बताया जाता, तब! उस स्थिति में जिन लोगों को शुरुआत में हस्ताक्षर करने का अधिकार दिया गया है उन्हें ही डायरेक्टर के पद पर मान लिया जाएगा| 

कंपनी यदि चाहे तो बाद में डायरेक्टर की भर्ती अलग से भी कर सकती हैं| 

  • सहमति (Consent)

डायरेक्टर द्वारा लिखित में सहमति (Consent) लेने का कार्य भी प्रमोटर्स का ही होता है| इस सहमति में डायरेक्टर द्वारा यह कहा जाता है कि “वह दी गई कंपनी में डायरेक्टर बनने के लिए तैयार है|” 

प्रमोटर द्वारा पेशेवरों की नियुक्ति (appointment of professionals)

जब कंपनी का गठन होता है तो बहुत सारे पेशेवरों की नियुक्ति की जाती है| कंपनी का गठन कानून के अनुसार होता है इसलिए इसके लिए पेशेवर लोगों की जरूरत होती है| 

  • एजेंट तथा मर्चेंट बैंकर

ब्रोकर तथा मर्चेंट बैंकर को नियुक्त करने का कार्य भी प्रमोटर्स का ही होता है| 

  • वकील/अधिवक्ता (solicitors)

कौन लोग कंपनी के कानूनी पहलुओं पर गौर करेंगे| कंपनी पर केस दायर होने की स्थिति में या कंपनी द्वारा केस दायर करने की स्थिति में कौन लोग इस काम को करेंगे? 

साथ ही साथ बहुत सारे अनुपालन (compliances) पूरा करने के लिए भी इन लोगों की जरूरत पड़ती है| 

इस लोगों का चयन भी प्रमोटर्स के द्वारा ही किया जाता है|

  • वित्तीय व्यवहार (financial dealing)

कंपनी के सारे वित्तीय व्यवहार बैंक के द्वारा ही किए जाते हैं| किस कंपनी के लिए कौन सा बैंक उपयुक्त रहेगा इस बात का चयन भी प्रमोटर्स के द्वारा ही किया जाता है|

प्रमोटर द्वारा आवश्यक दस्तावेजों की तैयारी

किसी भी कंपनी के बहुत सारे आवश्यक दस्तावेज बनाने जरूरी होते हैं|

इन सारे आवश्यक दस्तावेजों की तैयारी का काम प्रमोटर्स का ही होता है| प्रमोटर्स के द्वारा ही इन दस्तावेजों को सुनिश्चित किया जाता है| 

दस्तावेज़ प्रस्तुतियाँ (documents submissions)

कंपनी के गठन के समय बहुत सारे दस्तावेजों को पूरा करने के बाद उन्हें ROC में जमा कराया जाता है|

इन सारे डाक्यूमेंट्स को समय पर तैयार करने के बाद जमा करवाने की जिम्मेदारी भी प्रमोटर्स की ही होती है|

मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशनआर्टिकल ऑफ एसोसिएशन तथा प्रोस्पेक्टस जैसे डाक्यूमेंट्स को तैयार करने की जिम्मेदारी भी प्रमोटर्स की ही होती है| 

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उम्मीद करता हूं! आपको यह पोस्ट Promoter के ऊपर आधारित यह पोस्ट पसंद आया होगा|

इससे आपको promoter meaning in Hindi: भी अच्छी तरह समझ में आ गया होगा|

अगली पोस्ट में मैं फिर मिलूंगा तब तक के लिए मैं नवीन कुमार आपसे इजाजत चाहता हूं, नमस्कार!

 धन्यवाद

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