प्राइवेट लिमिटेड कंपनी क्या होती है? | Pvt. Ltd. कंपनी खोलने के क्या फ़ायदे होते हैं?

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Private limited company: इस पोस्ट में आप पढ़ेंगे की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी क्या होती है? | पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा था कि वन पर्सन कंपनी क्या होती है? 

Private limited company एक तरह से वन पर्सन कंपनी का ही विस्तृत रूप होती है|

सरकार द्वारा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को भी दो कैटेगरी में डिवाइड कर दिया गया है| इसमें एक कैटेगरी Small Company भी होती है|

चलिए! अब बात करते हैं, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी क्या होती है?

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी क्या होती है?

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की परिभाषा कंपनी अधिनियम 2013 के sec 2(68) में दी गई है| 

इसमें आप शेयर को ट्रांसफर तो कर सकते हैं परंतु इसके लिए कुछ तय नियम होते हैं| 

Private limited company में मिनिमम 2 मेंबर ( या शेयर होल्डर भी कह सकते हैं) होने चाहिए तथा अधिकतम 200 मेंबर ही हो सकते हैं|

इसी clause के कारण शेयर ट्रांसफर के कुछ तरीके बताए गए हैं| 

जैसे कि उदाहरण के लिए मैं बता देता हूं:- 

यदि किसी कंपनी में 199 शेयर होल्डर हैं तथा इनमें से एक शेयर होल्डर के पास 200 शेयर्स हैं|

अब यह व्यक्ति केवल उतने ही लोगों को यह शेयर ट्रांसफर कर सकता है, जिससे की कंपनी के सारे शेरहोल्डर्स का टोटल 200 से ऊपर ना जाए|

* शेयर होल्डर की गिनती के समय उन उन शेयर होल्डर्स की गिनती नहीं की जाएगी जो कंपनी के कर्मचारी हो तथा जिन्होंने वर्तमान में या भूतकाल में कंपनी के शेयर खरीदे हो| 

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में तथा पब्लिक लिमिटेड कंपनी में सबसे बड़ा फर्क यह होता है कि Private limited company प्राइवेट लोगों द्वारा ही पैसा इकट्ठा कर सकती है जबकि पब्लिक लिमिटेड कंपनी आम जनता के समक्ष जाकर भी पैसे इकट्ठा कर सकते हैं|

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के अंत में उसके नाम के साथ “PRIVATE LIMITED” या “PVT. LTD.” शब्द जोड़ने अनिवार्य हैं| 

जैसे कि वन पर्सन कंपनी में “OPC” जोड़ना अनिवार्य है|  इसी वजह से लोग आसानी से  वन पर्सन कंपनी,  प्राइवेट लिमिटेड कंपनी तथा पब्लिक कंपनी में भेद कर पाते हैं| 

वन पर्सन कंपनी एक प्रकार से Private limited company का ही प्रकार है| 

प्राइवेट limited कंपनी के क्या नियम होते हैं? (Pvt ltd company rules)

यदि आप एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी खोलने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रुल्स जरूर पता होना चाहिए!

कभी-कभी आप कंपनी रजिस्ट्रेशन में एक छोटी सी गलती कर देते हैं| इस गलती के कारण आपको बहुत खामियाजा उठाना पड़ सकता है| इसलिए कंपनी खोलने के रूल्स के बारे में आपको अवश्य ही पता होना चाहिए| 

चलिए दोस्तों! बात करते हैं कुछ जरूरी pvt ltd company rules  के बारे में|

जैसा कि आप जानते हैं, कंपनी एक्ट 2013 एक लेटेस्ट अमेंडमेंट है| इसके अनुसार हम लेटेस्ट रूल्स के बारे में ही  समझेंगे| 

1: निदेशक (Director)

कंपनी एक्ट 2013 में सेक्शन 149 में डायरेक्टर के बारे में बताया गया है| 

इसके अनुसार आपके पास मिनिमम दो डायरेक्टर नियुक्त होने चाहिए| इनमें से एक डायरेक्टर भारतीय अवश्य होना चाहिए| 

2: ऑडिटर नियुक्त करें (Appoint auditor)

इसके अनुसार आपको एक  चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA)  नियुक्त करना बहुत ही जरूरी है| इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि आप उसे फुल टाइम सैलरी पर रखें| आप इसे कंपनी का मेंबर भी बना सकते हैं| 

3: पूंजी (Capital)

सेक्शन 2(68) में इसका उल्लेख (ention) किया गया है| 

इसके अनुसार पैड अप कैपिटल को डिसाइड करने का अधिकार केवल मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स को ही है| 

4: कंपनी का नाम (Name of the company)

ROC की गाइडलाइन के अनुसार चैप्टर नंबर थर्ड में, क्लोज फॉर में उल्लेखित किया गया है|

 इसके अनुसार आपकी कंपनी का नाम कानून के अनुसार होना चाहिए| 

जानने के लिए पढ़ें: कंपनी के लिए नाम कैसे चुनें?

5: स्थान (Location)

इसके अनुसार यह बताया गया है कि किसी भी बिजनेस के लिए एक जगह होना बहुत जरूरी है! यही स्थान आपका रजिस्टर्ड पता बनने वाला है|

  1.  इसके लिए  जगह किराए की हो सकती है|
  2.  आपकी अपनी हो सकती है|
  3.  लीज पर हो सकती है| 

इसका एक वैलिड प्रूफ आपके पास जरूर होना चाहिए| 

6: दस्तावेज़ीकरण (Documentation)

इसके लिए आपके पास कुछ दस्तावेजों का होना भी बहुत जरूरी है| 

1: MOA (मेमोरेंडम ऑफ आर्टिकल)

2: AOA ( आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन) 

7: सीमाएं (Limits)

एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में मिनिमम 2 मेंबर हो सकते हैं|  इनकी अधिकतम सीमा 200  से अधिक नहीं हो सकती| 

8: निषेध (Prohibition)

आप पब्लिक लिमिटेड कंपनी की तरह अपने शेयर इश्यू करने के लिए आम जनता को आकर्षित नहीं कर सकते| 

9: प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक:   K.M.P. (key managerial personnel)

यदि आप का Paid up share capital 5 करोड़ रुपए से ऊपर चला जाता है तो आपको 6 पदों की तुरंत नियुक्ति करनी पड़ेगी| 

1: CEO (chief executive officer)

2: WTD (Whole time director)

3: MD (Managing Director)

4: CS (Company Secretary)

5: CFO (chief finance officer)

6: Manager

पब्लिक कंपनी के मुकाबले Pvt. Ltd. Company के क्या फायदे हैं? 

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में केवल मिनिमम 2 मेंबर्स की ही जरूरत होती है जबकि पब्लिक लिमिटेड कंपनी के लिए मिनिमम 7 मेंबर्स होने चाहिए| * Private limited company के मिनिमम 2 मेंबर्स के मानदंड के कारण ही कंपनी अधिनियम 2013 में OPC को लाया गया था|

एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में मिनिमम डायरेक्टरों की संख्या 2 निर्धारित की गई है जबकि पब्लिक कंपनी में मिनिमम डायरेक्टर्स की संख्या 3 निर्धारित की गई है| 

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में मेंबर्स की इंडेक्सिंग करना अनिवार्य नहीं है| जैसे कि:-  नाम,  ईमेल आईडी, फोन नंबर,  पता, शेयर्स की वेल्यू, कितने के शेयर लिए हुए हैं, इत्यादि 

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को अपने मेंबर या डायरेक्टर को लोन देते समय सरकार की परमिशन की आवश्यकता नहीं होती| जबकि पब्लिक कंपनी को अपने मेंबर या डायरेक्टर को लोन देने के लिए सरकार की परमिशन लेना अनिवार्य है| 

पब्लिक कंपनी के मुकाबले Private limited company के कुछ विशेषाधिकार

  • प्राइवेट कंपनी में पारिश्रमिक तथा नियुक्ति पर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं है| 
  • पब्लिक कंपनी में प्रोस्पेक्ट्स जारी किया जाता है:- (प्रोस्पेक्ट्स एक ऐसा डॉक्यूमेंट होता है जिसमें कंपनी की बेसिक इनफार्मेशन जाती है)
  • जैसे कि:- डायरेक्टर कौन है?, कंपनी के लक्ष्य क्या है?, कितनी रकम लगी हुई है? इत्यादि) 

जबकि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में प्रोस्पेक्ट्स जारी नहीं किया जाता क्योंकि इसमें पब्लिक को शेयर खरीदने के लिए आमंत्रित नहीं किया जाता| 

  • जब भी कोई प्राइवेट कंपनी इन-कॉरपोरेशन के लिए R.O.C. को अप्लाई करती है और जैसे ही r.o.c. संतुष्ट होता है प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को इन-कॉरपोरेशन (निगमन)  सर्टिफ़िकेट मिल जाता है| 

जबकि पब्लिक कंपनी के इन-कॉरपोरेशन के लिए थोड़ा लंबा प्रोसेस होता है|

पब्लिक कंपनी को दो सर्टिफिकेट के लिए इंतजार करना पड़ता है|

1-  सर्टिफ़िकेट ऑफ इन-कॉरपोरेशन

2- COC (सर्टिफ़िकेट ऑफ कमेंसमेंट) 

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी खोलने के क्या फायदे हैं? | Pvt. ltd. में “लिमिटेड” शब्द का क्या अर्थ होता है?

यदि आप एक कंपनी खोलना चाहते हैं?, तो कंपनी खोलने का प्रोसीजर, मैं अपनी पिछली पोस्ट- कंपनी कैसे खोलें में बता चुका हूं|

इस पोस्ट में हम बात करते हैं कि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी खोलने के फायदे क्या होते हैं?

यदि आप किसी भी इंडिविजुअल बिज़नेस को करते हैं या फिर आपकी कोई पार्टनर शिप फर्म या लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म है तो इस केस में आपकी देनदारी अन-लिमिटेड होती है| 

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में इसी अन-लिमिटेड देनदारी को लिमिटेड बनाया गया है|

इसके लिए हम पहले limited का हिन्दी में अर्थ जानते हैं फिर उसके बाद Limited liability का अर्थ जानेंगे| इससे हमें समझने में और भी आसानी होगी|

Limited meaning in Hindi: “सीमित, परिसीमित, मर्यादित, संकुचित, घिरा हुआ, सीमाबद्ध”

Limited liability meaning in Hindi: “सीमित देयता, सीमित देनदारी, सीमित दायित्व, सीमित देयता, सीमित देयधन, सीमित देनदारी, सीमित आर्थिक जिम्मेदारी, सीमितआर्थिक दायित्व”

यानि की निश्चित देनदारी

चलिए! मैं इसे और थोड़ा अच्छी तरह से समझा देता हूं| 

मान लीजिए आपकी कोई प्रोपराइटरशिप या पार्टनर-शिप फर्म है|

अब आपने अपनी उस फर्म पर लोगों से उधार ले रखा है या बैंक से लोन ले रखा है| 

इस बात को बहुत ध्यान से समझिए!: आपकी फर्म के द्वारा लिए गए लोन के भुगतान के लिए आपकी निजी संपत्ति को भी बेचा जा सकता है| 

यानी बैंक आपकी निजी संपत्ति को बेच कर भी अपने पैसे वसूल कर सकता है|

किसी किसी भी प्रकार की कंपनी की यही ख़ासियत होती है कि – कंपनी की एक अलग लीगल एंटिटी होती है तथा आपकी अलग| 

कंपनी की अपनी अलग संपत्ति होती है तथा देनदारी होती है| आपकी अलग संपत्ति तथा देनदारी होती है| 

नोट:- इस बात का यह अर्थ नहीं है कि किसी कंपनी को अपना लोन नहीं चुकाना पड़ता|

चलिए! इस बात को भी समझ लेते हैं! – 

यदि किसी कंपनी के सामने ऐसी कोई स्थिति आती है तो कंपनी की संपत्ति को बेच कर उस लोन को चुकाया जाता है|

list of documents That are required for incorporation of a private limited company in India

आइए! अब! जानते हैं कि “भारत में एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के गठन करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की सूची के बारे में”

वैसे मैं इसके बारे में “कंपनी कैसे खोलें” वाली पोस्ट में कंपनी खोलने का पूरा प्रोसीजर लिख चुका हूं| 

Name approval

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी रजिस्टर्ड करने के लिए सबसे पहले नेम अप्रूवल लेना पड़ेगा| यही सबसे मुश्किल काम होता है| 

निदेशकों तथा शेयरधारकों के दस्तावेज (Directors & members documents)

पहचान प्रमाण पत्र (Identity Proof)

1) स्थायी खाता संख्या (पैन) कार्ड (PAN Card)

2) मतदाता पहचान पत्र (Voter card) / आधार कार्ड (aadhar card) / पासपोर्ट (Passport) / ड्राइविंग लाइसेंस (Driving license) / 

पता प्रमाण पत्र (Address proof)

1) मोबाइल बिल (Postpaid bill) / टेलीफोन बिल (Landline bill)

2)  पानी का बिल (Water bill) / बिजली बिल (Electricity bill)

3) पिछले 6 महीने की बैंक statement नवीनतम लेनदेन के साथ बैंक पासबुक / बैंक विवरण (दस्तावेजों में से कोई भी एक  जो दो महीने से अधिक पुराना न हो|)

4) पासपोर्ट साइज़ की फोटो: प्रत्येक की 3

नोट:

मोबाइल बिल / टेलीफोन बिल /  बिजली बिल / बैंक खाता विवरण आवेदक के नाम पर ही होने चाहिए और 2 महीने से अधिक पुराने नहीं होने चाहिए।

सभी दस्तावेजों की प्रतियां, आवेदक द्वारा स्वप्रमाणित होनी चाहिए।

यदि दस्तावेज़ अंग्रेजी भाषा में नहीं हैं, तो उनका अंग्रेजी में अनुवाद किया जाना चाहिए।

निदेशकों के द्वारा हस्ताक्षर किए जाने वाले दस्तावेज

1) निदेशक के रूप में कार्य करने की सहमति का पत्र: DIR-2

2) DIN (Director Identification Number) के लिए पूरा विवरण

3) DIN की घोषणा (उस स्थिति में: यदि DIN पहले से ही प्राप्त है)

शेयर होल्डर्स के  द्वारा हस्ताक्षर किए जाने वाले दस्तावेज की सूची 

1) डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र DSC (digital signature certificate) के लिए आवेदन

2) Subscribers और निदेशक द्वारा घोषणा NIC-9

एलएलपी / कंपनी / ट्रेडमार्क स्वामी से संबंधित कोई दस्तावेज, यदि कोई है

  1. मंडल प्रस्ताव (Board Resolution)  / व्यापार-चिह्न (Trademark) / नाम के उपयोग के लिए औपचारिक प्राधिकरण पत्र (Formal authorisation letter for use of Name) 
  2. 2) कंपनी से निष्पादन (execution) दस्तावेजों के लिए प्राधिकरण / लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप 

नोट: इन सभी पर संबंधितों द्वारा उनके लैटरहेड पर हस्ताक्षर किए जाएंगे अनिवार्य हैं|

रजिस्टर्ड ऑफिस का पता 

  1. जगह का मालिक ना होने की स्थिति में:  कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस के पते का उपयोग करने के लिए दिए गए पते के मालिक से उसको इस बात से कोई आपत्ति नहीं है इस बात का पत्र या ऑथराइजेशन लेना पड़ेगा
  2.  मालिक के नाम पर:  पता प्रमाण

टेलीफोन बिल (केवल स्थायी लाइन), बिजली बिल (Electricity bill), गैस बिल / पानी बिल (इन दस्तावेजों की अवधि 2 महीने से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए):

जगह के मालिक के हस्ताक्षर या पंजीकृत बिक्री विलेख (Deed) की कॉपी – साझा कार्यालय सेवा प्रदाता द्वारा हस्ताक्षरित होनी चाहिए / कर भुगतान की रसीद

नोट: यदि पता सुविधा एक साझा कार्यालय सेवा प्रदाता के द्वारा प्राप्त की जा रही है तो, कर रसीद / बिजली बिल की एक प्रति के साथ लीज समझौते की एक प्रति के साथ विशिष्ट (Specific) शक्तियों के साथ, कंपनियों के तहत रजिस्टर्ड ऑफिस के एड्रेस के रूप में स्थान / परिसर के उपयोग के लिए N.O.C. Letter जारी करना भी अधिनियम की आवश्यकता है।

FAQs: प्राइवेट लिमिटेड कंपनी

कंपनी अधिनियम 2013 के किस सेक्शन में Private limited company की परिभाषा दी गई है?

सेक्शन 2 (68) में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की परिभाषा दी गई है| 

Private limited company में मिनिमम कितने मेंबर  होने चाहिए?

मिनिमम 2 मेंबर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में होने चाहिए|

क्या Private limited company का भी मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन होना जरूरी है? 

जी हां,  प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का भी मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन होना जरूरी है|

क्या Private limited company में शाश्वत उत्तराधिकार का नियम लागू होगा?

जी हां,  प्राइवेट कंपनी में भी शाश्वत उत्तराधिकार का नियम लागू होता है|

Private limited company तथा पब्लिक कंपनी में मुख्यतः क्या अंतर है?

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में आप पब्लिक से शेयर को बेचकर पैसा इकट्ठा नहीं कर सकते जबकि पब्लिक कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर्ड होती है तथा वह आम पब्लिक को अपने शेयर खरीदने के यह कह सकती है जबकि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में शेयर की बिकवाली केवल अपनी जान पहचान के लोगों को ही हो सकती है|
पब्लिक लिमिटेड कंपनी को शेयर बाज़ार में लिस्ट करवा सकते हैं जबकि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को शेयर मार्केट में लिस्ट नहीं करवा सकते|

क्या किसी Private limited company को पब्लिक  कंपनी में चेंज किया जा सकता है?

जी हां,  कुछ क्राइटेरिया पूरा करने पर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को पब्लिक कंपनी में बदला जा सकता है| 

क्या Private limited company के नाम के अंत में प्राइवेट लिमिटेड शब्द लगाना जरूरी है?

जी हां, आपको प्राइवेट लिमिटेड कंपनी  में उसके नाम के पीछे प्राइवेट लिमिटेड लिखना आवश्यक है| इसे आप शॉर्ट फॉर्म में भी लिख सकते हैं जैसे कि PVT. LTD.

क्या कोई भी नाम अपनी Private limited company का रखा जा सकता है?

जी नहीं,  इसके लिए कुछ गाइडलाइंस का अनुपालन करना आवश्यक है|  आप को समझाने के लिए मैं कुछ उदाहरण दे देता हूं|  जैसे कि:- 
1- आप केवल अपने सरनेम को ही अपनी कंपनी में रजिस्ट्रेशन के लिए दे सकते हैं| यानी जो आपका सरनेम नहीं है  उस नाम के साथ आप कंपनी नहीं खोल सकते|
2- आप किसी भी ऐसे नाम के साथ कंपनी नहीं खोल सकते जिसे सुनकर यह भ्रम हो की है कंपनी सरकारी है|
3-  आप किसी भी ऐसे नाम को कंपनी में नहीं रख सकते जो किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करें इत्यादि

Conclusion

यह सारी चीजें जाने के बाद हम इस निर्णय पर पहुंचे हैं की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के फायदे बहुत है तथा यह पब्लिक कंपनी के मुकाबले कम औपचारिकताओं में बन जाती है| 

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी तथा पब्लिक कंपनी का अलग-अलग स्थान पर अलग-अलग महत्व है|

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

बैंक गारंटी क्या होती है?

कंपनी क्या होती है?

वन पर्सन कंपनी क्या होती है?

Small Company क्या होती है?

आपने इस पोस्ट में Private limited company के बारे में सीखा| प्राइवेट लिमिटेड कंपनी क्या होती है?, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के क्या फायदे हैं?, प्राइवेट limited कंपनी के क्या नियम होते हैं? (Pvt ltd company rules in Hindi), पब्लिक कंपनी के मुकाबले Pvt. Ltd. Company के क्या फायदे हैं?,

पब्लिक कंपनी के मुकाबले Private limited company के कुछ विशेषाधिकार, Pvt. ltd. में “लिमिटेड” शब्द का क्या अर्थ होता है?,

भारत में एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के गठन करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की सूची (list of documents That are required for incorporation of a private limited company in India) इत्यादि के बारे में पढ़ा|

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