Perpetual succession क्या होता है? | पर्पेच्यूअल सकसेशन का कंपनी में क्या महत्व है

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“perpetual succession” – यह शब्द सुनते ही हम लोग अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं कि आखिर perpetual succession क्या होता है? क्योंकि जब भी आप कोई नई कंपनी बनाने जाएंगे या कंपनी अधिनियम के बारे में पढ़ेंगे तो आपको यह शब्द बार-बार सुनाई देगा| 

तो दोस्तों, निश्चिंत रहिए! इस पोस्ट को पूरा पढ़ने के बाद आपको अच्छी तरह समझ में आ जाएगा कि कंपनी अधिनियम में perpetual succession  का क्या अर्थ होता है?

 तो चलिए दोस्तों, शुरू करते हैं! 

What is the perpetual succession

Perpetual meaning in Hindi: “सतत, लगातार, नित्य, बिना मीआद का, बिना अवधि का, निरंतर, चिर, लगातार होने वाला”

Succession meaning in Hindi: “उत्तराधिकार, उत्तरवर्तन, अनुक्रमण, पदारोहण, सिलसिला, राज्यारोहन, तांता, परिपाटी, वंश-क्रम”

Perpetual तथा Succession का हिन्दी अर्थ जानने के बाद हम perpetual succession का हिन्दी अर्थ जानते हैं|

perpetual succession meaning in Hindi: “शाश्वत उत्तराधिकार” (यानि लगातार चलने वाला उत्तराधिकार)

दोस्तों, यह तो इसका अर्थ हो गया| पर कंपनी से इसका क्या संबंध है? 

perpetual succession कंपनी का एक यूनीक फीचर होता है|

perpetual succession की वजह से कंपनी अन्य सभी ऑर्गेनाइजेशन के मुकाबले अद्वितीय बन जाती है| 

आपने पिछली पोस्ट कंपनी कैसे खोलें में पढ़ा कि यदि कंपनी के सभी मेंबरों की मृत्यु हो जाए तब भी कंपनी चलती रहती है|

या फिर यूं कहें की “मृत्यु, दिवालियापन, सदस्यता में बदलाव, पागलपन, किसी मालिक या सदस्य के व्यापार से बाहर निकलना या स्टॉक का कोई हस्तांतरण आदि होने पर भी कंपनी चलती रहती है|” इसे ही शाश्वत उत्तराधिकार कहते हैं|

 अब आपके दिमाग में एक प्रश्न जरूर आता होगा कि “यदि कंपनी के सभी मेंबर मर जाएंगे तो कंपनी कौन चलाएगा?”

तो दोस्तों, इसको और अच्छी तरह समझाने के लिए मैं आपको एक छोटी सी कहानी सुनाता हूं|

इससे आपको यह कंसेप्ट अच्छी तरह क्लियर हो जाएगा| 

इस कहानी में मैं वन पर्सन कंपनी के बजाय एक प्राइवेट कंपनी का उदाहरण लूँगा|

साथ ही यह अवश्य पढ़ें: वन पर्सन कंपनी क्या होती है तथा इसका लाभ कैसे लें?

एक प्राइवेट कंपनी के 5 शेयर होल्डर किसी काम से इकट्ठे एक ही कार में जा रहे थे|

दुर्भाग्यवश रास्ते में इनकी कार का एक्सीडेंट हो जाता है और इन पांचों शेरहोल्डर्स की इसमें मृत्यु हो जाती है| 

इन्हीं पांचों शेरहोल्डर्स में से 2 बोर्ड ऑफ डायरेक्टर थे|

यानी कि कंपनी के  सभी मेंबर तथा सभी डायरेक्टर की मृत्यु हो चुकी है| 

अब दिमाग में आता है कि क्या कंपनी चलेगी या बंद हो जाएगी? और यदि चलेगी तो कैसे चलेगी?, कौन उसे चलाएगा?

इसी सवाल का जवाब  हमें कंपनी अधिनियम 2013 के अनुसार perpetual succession यानी शाश्वत उत्तराधिकार को समझने के बाद मिलता है| 

तो दोस्तों,  इसका जवाब है|

कंपनी चलती रहेगी क्योंकि कंपनी का अस्तित्व तथा इसके सदस्यों का अस्तित्व अलग-अलग होता है| 

कंपनी अधिनियम 2013  में कहा गया है कि कंपनी में लोग आते जाते रहते हैं|

लोगों के आने जाने से कंपनी पर कोई फर्क नहीं पड़ता| इसे ही perpetual succession कहते हैं| 

perpetual succession का सामान्य भाषा में अर्थ– मेंबरों के चले जाने से उनकी मृत्यु हो जाने से भी कंपनी बंद नहीं होगी क्योंकि कंपनी की एक अलग लीगल एंटिटी होती है| 

सभी मेंबर्स की मृत्यु के बाद कंपनी कौन चलाएगा? 

 तो दोस्तों, अब बात करते हैं

आपके अगले सवाल की यदि सभी मेंबरों की मृत्यु हो जाए तो कंपनी कौन चलाएगा?

जैसा कि आपने पढ़ा कंपनी के 5 शेयर होल्डर थे | मृत्यु केवल शेरहोल्डर्स की हुई है, शेयर्स कि नहीं|

शेयर्स का अभी भी अस्तित्व है| 

अब उन शेयर में जो नॉमिनी होगा या कानूनी प्रतिनिधि  होगा वह कंपनी का स्वामी कहलाएगा वह शेयर इनके नॉमिनी को ट्रांसफर हो जाएंगे| 

जैसा कि आपने company formation के पोस्ट में पढ़ा होगा की शेयर ट्रांसफरेबल होते हैं| 

यानी कि यदि में सरल शब्दों में समझाऊं तो,

जब भी आप कोई शेयर लेते हैं तो उसमें एक अलग से कॉलम रहता है, जिसमें आपको आपके नॉमिनी का नाम लिखना होता है|

यह नॉमिनी, इन शेयर होल्डर्स के बच्चे, रिश्तेदार, दोस्त कोई भी हो सकता है| 

अब मान लो,

इन पांचों शेयर होल्डर्स में किसी भी नॉमिनी का नाम नहीं दिया 

कंपनी के सभी मेंबर्स तथा सभी नॉमिनी की मृत्यु के बाद कंपनी कौन चलाएगा?

मुझे पता है! आपके दिमाग में यह प्रश्न भी आ रहा होगा कि “यदि कंपनी के सभी मेंबर, सभी नॉमिनी, सभी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स किसी बिल्डिंग में पार्टी कर रहे थे और वह बिल्डिंग भूकंप के झटके में टूट गई इसमें सभी की मृत्यु हो गई! अब कंपनी कौन चलाएगा?

तो चलिए! इसका जवाब भी देता हूं| 

ऐसी स्थिति में यह कंपनी सरकार या इससे संबंधित विभाग के कब्जे में चली जाएगी| 

कब्जे से मेरा अभिप्राय यह है कि सरकार या संबंधित विभाग इसका स्वामी बन जाएगा|

अब सरकार या जिस विभाग के पास यह कंपनी गई है उसको यह निर्णय लेना है कि है कंपनी किस प्रकार चलानी है? 

या नहीं चलानी तो इसे बंद करने का निर्णय भी यही लोग लेंगे|

कंपनी को बंद करने का तरीका कंपनी अधिनियम 2013 में बताया गया है,

इसी के अनुसार कोई भी कंपनी बंद हो सकती है|

perpetual succession के कारण भी लोगों का कंपनी पर विश्वास बढ़ जाता है|

कंपनी की  इसी खूबी के कारण कंपनी का लोगों पर विश्वास बढ़ जाता है| चाहे घरेलू उद्योग या एक्सपोर्ट इंपोर्ट-बिज़नेस|

FAQs: Perpetual succession

कंपनी के सभी मेंबर्स की मृत्यु होने के पश्चात कंपनी को कौन चलाएगा?

कंपनी के सभी मेंबर्स की मृत्यु होने के बाद उनके शेयर में जिसका नाम नॉमिनी के रूप में दिया गया होगा वह कंपनी चलाएगा|

यदि कंपनी के मेंबर्स के साथ-साथ उनके सभी नॉमिनी की भी मृत्यु हो जाती है तब कंपनी को कौन चलाएगा?

तब वह कंपनी सरकार के हाथों में चली जाएगी या उससे संबंधित विभाग का उस पर अधिपत्य आ जाएगा अब वह ही निर्णय करेंगे कि कंपनी का क्या करना है?

क्या वन पर्सन कंपनी Perpetual succession का नियम लागू होता है?

इस बारे में आपको थोड़ा सा टेक्निकल तरीके से सोचना है| जैसा कि आपने वन पर्सन कंपनी के बारे में पढ़ा कि इसका एक ही शेयर होल्डर होता है| परंतु वन पर्सन कंपनी में एक क्लॉज़ अलग से खुला होता है जिसके अनुसार आपको आपके नॉमिनी का नाम देना होता है| यही नॉमिनी इस इकलौते शेयर होल्डर की मृत्यु के बाद कंपनी का स्वामी बन जाता है|

साथ ही यह अवश्य पढ़ें:

कंपनी क्या होती है?, भारत में कैसे खोले? तथा कंपनी तथा साझेदारी में क्या अंतर होता है?

वन पर्सन कंपनी क्या होती है तथा इसका लाभ कैसे लें?

Memorandum Of Association क्या होता है? इसमें क्या लिखा जाता है?

एक्सपोर्ट इंपोर्ट बिज़नेस कैसे शुरू करें?

दोस्तों, 

उम्मीद करता हूं, आप लोग अब अच्छी तरह Perpetual succession (शाश्वत उत्तराधिकार) के बारे में समझ गए होगे|

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धन्यवाद 

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