Partnership firm क्या होती है? | क्या हमें पार्टनरशिप फर्म खोलनी चाहिए?

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दोस्तों, इस पोस्ट के माध्यम से आप Partnership firm क्या होती हैपार्टनरशिप फर्म के क्या फायदे हैं? तथा क्या हमें पार्टनरशिप फर्म खोलनी चाहिए? जैसे सवालों के जवाब मिलेंगे|

 तो चलिए!  शुरू करते हैं! 

पार्टनरशिप फर्म क्या होती है?

दोस्तों, जब भी आप कोई बिज़नेस करते हैं तब आपको Partnership Firm के बारे में अवश्य ही पता होना चाहिए|

जब भी आपका व्यवसाय, इस लेवल पर पहुंच जाएगा कि आपको लगने लगे कि अब आपको अपने व्यवसाय को सोल प्रोपराइटरशिप या Partnership Firm फर्म से किसी कंपनी में तब्दील कर लेना चाहिए, उस समय आपको अपने व्यवसाय को किसी वन पर्सन कंपनी, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, या पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदलने में परेशानी नहीं होगी| 

यदि आप लोगों के उत्थान के लिए कुछ करना चाहते हैं तब आपको सेक्शन 8 कंपनी क्या होती है? इसके बारे में भी जान लेना चाहिए| 

पार्टनर-शिप फर्म तथा कंपनी में क्या अंतर होता है? यह भी आपको जानना जरूरी है| 

What is a partnership firm?

दोस्तों, जब भी आप कुछ व्यवसाय करना चाहते हैं| जैसे की:- Spring mattress का बिज़नेस- तब आपके दिमाग में यह प्रश्न जरूर आता होगा की आखिर “Partnership Firm क्या होती है?” 

तो इसका जवाब है-

“जब एक से अधिक लोग मिलकर किसी एक व्यवसाय को करते हैं जिसमें कि वह मुनाफ़े तथा नुकसान को अपने बीच में अपनी हिस्सेदारी के हिसाब से बांट लेते हैं|”  इस प्रकार के व्यवसाय को Partnership Firm कहा जाता है?

पार्टनरशिप फर्म कैसे बनती है?

दोस्तों,  आइए समझते हैं कि पार्टनरशिप फर्म का निर्माण किस प्रकार होता है

पार्टनर-शिप फर्म का निर्माण करना बहुत ही आसान है| 

यदि हम बात करें सोल प्रोपराइटरशिप के मुकाबले तब पार्टनर-शिप फर्म बनाना थोड़ा सा मुश्किल है| 

  • समझौता (Agreement)

सबसे पहले सब साझेदार (Partner) मिलकर आपसी सहमति द्वारा एक एग्रीमेंट करते हैं| इस एग्रीमेंट में  वह सभी द नियम एवं शर्तें लिख देते हैं| 

  • Indian Partnership act 1932

इंडियन पार्टनरशिप फर्म एक्ट 1932 में साझेदारी (partnership) फर्म के बारे में सभी कायदे कानून दिए गए हैं| 

इन सभी  क़ानूनों का पालन करने के बाद कोई पार्टनरशिप फर्म बनती है|

किसी भी Partnership firm की liability क्या होती है? 

  • Unlimited liability

जैसा कि आप जानते हैं कंपनी तथा अन्य संस्थानों में सबसे बड़ा फर्क देनदारी (Liability) का होता है| कंपनी में Limited liability होती है तथा किसी भी पार्टनरशिप फर्म या सोल प्रोपराइटरशिप फर्म में अन-लिमिटेड लायबिलिटी होती है|

यानी कि, यदि मैं साधारण भाषा में इसका अर्थ समझाऊं तो, इसका मतलब है यदि आपने अपने बिज़नेस के ऊपर किसी भी प्रकार का कोई लोन लिया है तो, उस लोन की रिकवरी के लिए, आपका घर मकान तक बिक सकता है!!

  • Jointly & Individually Liability

इसका अर्थ यह यदि चार पार्टनर ने मिलकर ₹8 लाख का लोन लिया हुआ है, तो प्रत्येक पार्टनर को अपने हिस्सेदारी के प्रतिशत के अनुसार वह लोन चुकाना पड़ेगा| 

जो चारों पार्टनर मिलकर लोन चुकाया उसे Jointly Liability आ जाएगा कहा जाएगा|

जो हिस्सा प्रत्येक सदस्य ने व्यक्तिगत रूप से चुकाया उसे Individually Liability  कहा जाएगा|

जोखिम की भरपाई कौन करेगा?

जितने भी पार्टनर सम्मिलित होंगे उन सबको मिलकर जोखिम की भरपाई करनी पड़ेगी| 

साझेदारी फर्म में निर्णय कौन लेगा?

पार्टनरशिप फर्म में जितने भी साझेदारी फर्म से संबंधित फैसले लिए जाएंगे वह सब साझेदारों की आपसी सहमति के बाद ही लिए जाएंगे|

ऐसा फैसला जो अपने सभी पार्टनरों में से किसी एक को या तो बिना बताए लिया गया हो या फिर उसके बिना सहमति के लिए आ गया हो- पार्टनरशिप एक्ट 1932 की अवहेलना करेगा|

किसी साझीदार की मृत्यु पर फर्म का क्या होगा?

जैसा कि आपने कंपनी एक्ट में Perpetual succession के बारे में पढ़ा| ठीक इसके उलट पार्टनर शिप फर्म में किसी भी एक मेंबर की मृत्यु होने या पागल होने पर वह पार्टनरशिप फर्म भंग हो जाती है|

यदि बाकी के पार्टनर चाहे हैं तो एक दूसरी पार्टनर-शिप फर्म का निर्माण कर सकते हैं| 

क्या पार्टनरशिप फर्म म्यूच्यूअल एजेंसी की तरह काम करती है?

जी हां,  सभी पार्टनर एक दूसरे के एजेंट की तरह कार्य कर सकते हैं| 

ऐसा इसलिए होता है जिससे कि एक ही काम के लिए सभी साझीदारों को साथ ना जाना पड़े| 

पार्टनरशिप फर्म के फायदे क्या हैं?

  • बनाना आसान (Formation)

कानूनी औपचारिकताएं ना के बराबर हैं| इसे बनाना बहुत आसान होता है| 

रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य नहीं होता परंतु यह सलाह दी जाती है कि आप रजिस्ट्रेशन करवा लीजिए|

  • समझौता (Agreement)

जैसे कंपनी में  आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन बनाया जाता है जिसमें बताया जाता है कि कंपनी अपना अंदरूनी कार्य किस प्रकार करेंगी|

ठीक उसी प्रकार पार्टनर शिप फर्म में एग्रीमेंट में नियम शर्तें लिख दी जाती हैं

  • धन (Funds)

पार्टनर-शिप में सदस्यों की संख्या एक से अधिक होने के कारण धन इकट्ठा करने में थोड़ा कठिनाई कम होती है|| 

  • निर्णय लेना (Decision Making)

इसको आप इस तरीके से समझें-  जैसे कि हर व्यक्ति  किसी का किसी न किसी विषय में औरों के मुकाबले समझ ज्यादा होती हैं| यही फायदा होता है कि जब भी पार्टनरशिप फर्म में कोई निर्णय लेना होता है तब पार्टनर शिप फर्म में सब अपना अनुभव साझा करते हैं|

एक दूसरे की बात पर विचार-विमर्श करते हैं तथा उचित निर्णय लेने में उन्हें आसानी होती है| 

  • जोखिम भी साझा

पार्टनरशिप फर्म में जोखिम भी सभी सदस्यों में बँटा हुआ होता है|

इसी कारण से चिंता,बोझ तथा तनाव भी बट जाते हैं|

  • गुप्तता (secrecy)

पार्टनरशिप फर्म में अपने अकाउंट स्टेटमेंटस को पब्लिक करना जरूरी नहीं है| 

पार्टनरशिप फर्म खोलने के क्या नुकसान होते हैं?

चलिए!  पार्टनरशिप फर्म खोलने के फायदे तो आपने जान लिए| अब जान लेते हैं कि पार्टनरशिप फर्म को खोलने के क्या नुकसान होते हैं

  • काम का बंटवारा

किसी भी पार्टनरशिप फर्म में यह बड़ा चुनोती का विषय होता है की कौन व्यक्ति क्या काम करेगा? हर किसी को लगता है की उसके हिस्से में कठिन काम आया है!

  • असीमित दायित्व (Unlimited Liability)

किसी भी पार्टनरशिप फर्म का यह सबसे बड़ा नुकसान होता है “अन-लिमिटेड लायबिलिटी”| किसी बिंदु की वजह से लोग कंपनी खोलना पसंद करते हैं  क्योंकि कंपनी में लिमिटेड लायबिलिटी होती है|

  • सीमित साधन (Limited Resources)

किसी भी सोल प्रोपराइटरशिप के मुकाबले इसमें साधन ज्यादा होते हैं परंतु कंपनी के मुकाबले इसमें साधन बहुत ही सीमित होते हैं क्योंकि इसमें सदस्यों की संख्या निर्धारित की गई है इस कारण से  कंपनी के मुकाबले धन मुहैया करने में दिक्कत हो सकती है|

  • टकराव, संघर्ष (Conflict)

मनुष्य का स्वभाव इस प्रकार से होता है कि वह किसी से भी असहमत हो सकता है|  यही बात धीरे-धीरे पार्टनरशिप में सदस्यों को आपस में टकराव या संघर्ष की स्थिति भी पैदा कर सकती है| 

इस नियम के कारण भी कंपनी के मुकाबले पार्टनरशिप फर्म पर लोगों का विश्वास कम होता है| 

  • लोगों का भरोसा (Public Confidence)

कंपनी के मुकाबले पार्टनरशिप फर्म पर लोगों का भरोसा कम होता है| इसका एक कारण तो मैं आपको ऊपर दिए बिंदु में बता चुका हूं तथा दूसरा कारण यह है कि पार्टनरशिप फर्म में हिसाब-किताब गोपनीय रख सकते हैं| यही मुख्य वजह है कि लोग उस पर भरोसा कम करते हैं| 

  • इन्श्योरेन्स

कोई भी कंपनी रिस्क कवर की तरफ मुख्य ध्यान देती है| जैसे की:- फायर इन्श्योरेन्स (अग्नि बीमा) इत्यादि परंतु पार्टनरशिप फर्म में यह पार्टनर्स को करना होता है|

इस कारण से भी लोगों कंपनी पर ज्यादा विश्वास करते हैं|

Partnership firm FAQs

पार्टनरशिप फर्म में कौन सा डॉक्यूमेंट अनिवार्य होता है?

पार्टनरशिप फर्म में सभी साझीदारों का आपस में एग्रीमेंट  करना अनिवार्य होता है|

पार्टनर शिप फर्म में मैक्सिमम कितने साझीदार हो सकते हैं?

पार्टनर शिप में मैक्सिमम 100 साझीदार हो सकते हैं परंतु अलग-अलग कंडीशन में यह संख्या  परिवर्तित हो सकती है| 

यदि साझेदारी फर्म का कोई सदस्य मर जाए तब फर्म का क्या होगा?

किसी भी साझेदार की मृत्यु होने या पागल होने के उपरांत साझेदारी भंग हो जाएगी|

साझेदारी फर्म किसी कंपनी से अलग किन दो कारणों से होती है?

पहला कारण Perpetual succession तथा दूसरा कारण Liability

क्या कोई साझेदार फर्म सेक्शन 8 कंपनी में सदस्य बन सकती है?

जी हां,  पार्टनर शिप फर्म सेक्शन 8 कंपनी में सदस्य बन सकती है| 

पार्टनर-शिप फर्म तथा कंपनी दोनों में से किस की जवाबदेही ज्यादा होती है|

किसी भी पार्टनर-शिप फर्म की जवाबदेही ज्यादा होती है क्योंकि कंपनी की तो लिमिटेड लायबिलिटी होती है|

क्या किसी पार्टनर शिप फर्म को कंपनी में बदला जा सकता है?

जी हां, पार्टनर शिप फर्म को तय नियमों का पालन करने के उपरांत कंपनी में बदला जा सकता है|

पार्टनरशिप फर्म के प्रकार कौन-कौन से हैं?

जनरल पार्टनरशिप, सीमित दायित्व भागीदारी, वसीयत में भागीदारी, विशेष भागीदारी

साथ ही यह अवश्य पढ़ें:

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी क्या होती है तथा इसके क्या फ़ायदे हैं?

Selling स्किल्स को निखारने के तरीके

बैंक गारंटी क्या होती है? बहुत ही आसान तरीके से समझें

Memorandum Of Association क्या होता है? इसमें क्या लिखा जाता है?

Conclusion

इसमें जो भी लिख रहा हूं यह अपने अनुभव के आधार पर लिख रहा हूं|  क्योंकि आप लोग मेरे पोस्ट करते हैं तथा मुझे इतना प्यार और सम्मान देते हैं इस कारण से मुझे आपको पार्टनरशिप फर्म के बारे में निष्कर्ष भी लिखना पड़ेगा|

यह मेरे निजी विचार हैं| 

यह मुझे अनुभवों द्वारा प्राप्त हुए हैं| 

इनको मानना ना मानना आपके अपने स्वयं के विचार हो सकते हैं इसके लिए मैं किसी को दबाव नहीं दे रहा हूं| 

यदि आप साझेदारी का बिज़नेस करने के बारे में सोच रहे हैं तब मैं आपको एक चीज क्लियर कर दूं कि साझेदारी बहुत ज्यादा लंबे समय तक नहीं चलती| 

जब यह खत्म होती है तो हमारे बहुत से संबंधों को खराब कर देती है|

यदि ठीक से लिखा पढ़ी ना हो तो आपके साझेदार द्वारा आपको धोखा भी लग सकता है| 

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 धन्यवाद

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