OMICRON का इकॉनमी और महंगाई पर क्या असर पड़ेगा?

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ओमिक्रॉन क्या है?

यह कोरोना वायरस का नया वैरिएंट है| इस नए वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) का खौफ धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल रहा है|

इसके संक्रमण की गति काफी ज्यादा तेज है| दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ और वैज्ञानिक कह रहे हैं कि “जब ओमिक्रॉन से पीड़ित व्यक्ति की जांच की जाए तो यह जानना जरूरी है कि क्या एस जीन (S Gene) ड्रॉप आउट हुआ है?”| 

यानी इस वायरस में S जीन मौजूद है या नहीं, क्योंकि इससे पता चलता है कि ये ओमिक्रॉन वैरिएंट हैं या कोरोना के पुराने किसी वैरिएंट में से एक है|

ओमीक्रोन पर एक्सपर्ट्स की राय

एक्सपर्ट्स का कहना है कि “इकॉनमी को ओमीक्रोन और महंगाई से बचाना होगा”

ओमिक्रोन वायरस का ज्यादा असर नहीं पड़ा तो ग्रोथ अनुमान से ज्यादा होगी! 

मुंबई: चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट अनुमान से बेहतर रही है| अधिकांश एजेंसियों द्वारा अनुमान लगाया था कि जीडीपी ग्रोथ 7 से 8 फीसदी की रहेगी, यह 8 फ़ीसदी से ज्यादा रही|  

मार्केट एक्सपर्ट और इकोनॉमिस्ट का कहना है कि अगर महंगाई नियंत्रण में रही और नए वेरिएंट का असर इकॉनमी पर ज्यादा ना पड़ा तो निश्चित रूप से चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 10 फ़ीसदी या उससे भी ज्यादा होकर सबको चौंका सकती है| इस लिहाज से अक्टूबर माह से दिसंबर माह तक की तिमाही काफी महत्वपूर्ण रहेगी|  

फेस्टिवल सीजन में लोगों की खरीदारी बढ़ी है| अगर ग्रोथ रेट में इसी प्रकार तेजी का माहौल रहेगा तो निश्चित रूप से ज्यादा संख्या में नौकरियां भी मार्केट में आएंगी| मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के साथ रियल्टी और अन्य सेक्टर में फिर से रोजगार के अवसर पैदा होंगे|

इकरा के चीफ इकोनॉमिस्ट आदित्य नायर का कहना है कि इसमें दो राय नहीं है कि इकॉनमी फिर से पटरी पर लौट रही है| 4 सेक्टरों के उत्पादन में तेजी इस बात का प्रमुख प्रमाण है|  

यह रिकवरी और भी तेज हो सकती है अगर महंगाई कम हो जाए| ऑटो सेक्टर जैसे अन्य सेक्टरों में तेजी आ जाए तो आने वाली दो तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े सभी अनुमानों को झुठला भी सकते हैं|

नौकरियों पर असर

अजमेरा रीयल्टी एंड इंफ्रा इंडिया के ग्रुप सीएफओ नितिन बाविसी का मानना है कि इस बार खास बात यह है कि तकरीबन सभी सेक्टरों के ग्रोथ में तेजी देखी गई है| रियल स्टेट में भी जिस तेजी के इंतजार में था, उसका आगाज हो चुका है| 

मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर भी तेजी से पटरी पर लौट रहे हैं| एक बात साफ है कि अब ग्रोथ के साथ नौकरीयां भी मार्केट में आनी तय हैं||

क्या करना होगा?

मिल गुड केयर इंटरनेशनल के सीईओ निश भट्ट के अनुसार इस वक्त सतर्कता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है| नीति निर्धारकों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि लिक्विडिटी में कमी ना आए|  

क्रेडिट ग्रोथ में जल्दी से तेजी लाने का प्रयास करना होगा| साथ ही ओमीक्रोन का असर देश के लोगों के साथ इकॉनमी पर भी कम पड़े उसकी पहले से तैयारी करनी होगी| 

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