पूंजी बाजार क्या होता है? | Money market instruments in Hindi

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Money market instruments: इस पोस्ट में आप जानेंगे कि मनी मार्केट क्या होती है? तथा कितने प्रकार के money market instruments होते हैं?

मनी मार्केट क्या होती है? (What is Money market)

1- यह एक ऐसी मार्केट होती है जो छोटी अवधि के लिए धन मुहैया कराती है| इन मौद्रिक संपत्तियों की मैच्योरिटी अधिकतम 1 वर्ष तक ही होती है| 

यानी कि मनी मार्केट छोटी अवधि के लिए धन का स्रोत है| 

इसमें लिखा अधिकतम समय बहुत ही महत्वपूर्ण है| सारे मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट 1 साल के लिए नहीं होते|

कुछ की अवधि 15 दिन की होती है| कुछ की अवधि 90 दिन की होती है| परंतु इनकी अधिकतम सीमा 1 वर्ष तक की होती है|

यानी कि मनी मार्केट में मोदक संपत्तियों की मैच्योरिटी की सीमा अधिकतम केवल 1 वर्ष तक ही जा सकती है|

2-  जो जितनी छोटी अवधि का फंड होता है उसको हम उतनी ही जल्दी नकदी में परिवर्तित कर सकते हैं| इनकी लिक्विडिटी बहुत हाई होती है|

यह नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट होते हैं| रिस्क भी बहुत कम होता है| यह अनसिक्योर्ड भी होती हैं| प्रतिदिन इनकी खरीद-फरोख्त होती है| 

3- मनी मार्केट शारीरिक रूप की तरह दिखाई देने वाला मार्केट नहीं है|

इसका पूरा संचालन टेलीफोन तथा इंटरनेट के माध्यम से ही होता है| 

4- यदि आपके पास थोड़े से समय के लिए ही अतिरिक्त पैसा है तो आप मनी मार्केट में पैसा लगाकर उससे मुनाफा कमा सकते हैं| 

उदाहरण:  मान लीजिए आपके पास 1 महीने के लिए 10 लाख रुपए हैं| आप इन ₹10 लाख को 1 महीने के लिए मनी मार्केट में डालकर मुनाफा कमा सकते हैं| 

बड़ी अवधि के लिए कैपिटल मार्केट सही प्लेटफार्म है| 

5- इसके मुख्य प्रतिभागियों (Participants) में  रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट गवर्नमेंट, कमर्शियल बैंक, नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनीज, लार्ज कॉरपोरेट हाउस तथा म्यूचुअल फंड्स है|

यह सभी मनी मार्केट में डील करते हैं तथा यहां से बहुत अधिक मुनाफा भी कमाते हैं| 

साथ ही यह भी अवश्य देखें: पूंजी बाजार और मुद्रा बाजार के बीच अंतर

मुद्रा बाजार के साधन क्या है? (Types of Money market instruments)

मुख्य पांच प्रकार के Money market instruments होते हैं|

  1. Call Money
  2. Commercial Bill
  3. Certificate Of Deposits
  4. Treasury Bills
  5. Commercial Paper

चलिए! अब Money market instruments के बारे में थोड़ा विस्तार से जान लेते हैं|

Call Money क्या होती है?

यह वह मनी होता है जो दो बैंक के Interbank Transactions में इस्तेमाल होता है| जब कोई दो बैंक आपस में कोई 

ट्रांजैक्शन करते हैं तो वह कॉल मनी इंस्ट्रूमेंट के द्वारा ही करते हैं| 

Call Money: यह एक शॉर्ट टर्म वित्तीय साधन होता है| कॉल मनी रिपेबल ऑन डिमांड होती है| 

यानी कि कॉल मनी फोन करने पर मिलती है, जब इसे वापस पाना होता है तो फोन पर ही वापस भी मिल जाती है|

इसका मैच्योरिटी पीरियड मिनिमम 1 दिन से लेकर अधिकतम 15 दिन तक का ही हो सकता है| 

बैंक को इसकी जरूरत क्यों पड़ती है?: बैंकों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास CRR तथा SLR मेंटेन करना होता है| इसी को मेंटेन करने के लिए बैंक कॉल मनी का सहारा लेते हैं| 

इसके द्वारा एक बैंक दूसरे बैंक को केवल एक फोन करके ही अपनी वित्तीय जरूरतों को आसानी से पूरा कर लेता है| 

कॉल मनी में कुछ रिटर्न (प्रतिफल) देना भी आवश्यक है|

कॉल मनी पर जो ब्याज दिया जाता है उसे कॉल रेट कहा जाता है| कॉल रेट में प्रतिदिन तथा घंटों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है| 

Treasury Bills क्या होते है?

ट्रेजरी का हिंदी अर्थ होता है: “ खजाना”

अब जैसा कि इसके नाम से ही प्रतीत हो रहा है| जैसा कि आप जानते ही हैं कि हमारे देश में खजाना सरकार के पास होता है|

भारत सरकार द्वारा जारी किए गए money market instruments को Treasury Bills  कहा जाता है|

आपकी एक कन्फ्यूजन और दूर कर देता हूं की  रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भारत सरकार का ही बैंक है|

भारत सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को ट्रेजरी बिल जारी करने की इजाजत दी हुई है| साथ ही साथ में आपको दोबारा याद दिला दूं कि इनकी वैलिडिटी 1 साल तक ही होती है| 

Treasury Bills: ट्रेजरी बिल का दूसरा नाम जीरो कूपन बॉन्ड भी होता है| शॉर्ट में इसको T. Bills भी बोलते हैं| 

सरकार को भी कभी-कभी थोड़े समय के लिए पैसों की आवश्यकता पड़ती है| 

मान लो कि सरकार को 60 दिनों के लिए या 90 दिनों के लिए  पैसों की जरूरत पड़ी| 

अब! ऐसी स्थिति में सरकार कहां से आसानी से पैसा जुटा सकती है? इसके लिए सरकार आम जनता के सामने ट्रेजरी बिल्स को लेकर आती है|

ट्रेजरी बिल को जारी करने का काम केंद्र सरकार की अनुमति द्वारा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया करता है| 

अब भाई लोगों, कोई भी बिना अपने फायदे के यह है जीरो कूपन बॉन्ड क्यों खरीदेगा?  खरीदेगा इसलिए क्योंकि इसके बदले में सरकार द्वारा उसको रिटर्न भी दिया जाएगा| इसका एक दूसरा मनोवैज्ञानिक कारण भी है|

सरकार द्वारा जारी किए गए बॉन्ड्स को बहुत ही सुरक्षित माना जाता है| इस कारण से आम आदमी इसमें निवेश करने में झिजकता नहीं है| 

ट्रेजरी बिल को प्रॉमिसरी नोट के रुप में पेश किया जाता है| 

निवेशक से Treasury Bill बिल पर अंकित मूल्य से कम कीमत ली जाती है| इसे डिस्काउंटेड प्राइस कहा जाता है| अदायगी के समय Treasury Bill पर अंकित मूल्य निवेशक को दे दिया जाता है| 

उदाहरण: 500  रुपए के ट्रेजरी बिल के लिए निवेशक से 2 महीने के समय के लिए ₹480 की मांग की गई|

दो महीने बाद निवेशक को ₹500 की अदायगी की जाएगी| इससे निवेशक को ₹20 का फायदा मिल जाएगा|

यानी कि ट्रेजरी बिल में डिस्काउंट के द्वारा फायदा दिया जाता है| 

Commercial Bills क्या होते हैं?

थोड़े समय के लिए अपने बिजनेस की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कमर्शियल बिल्स का सहारा लिया जाता है|

सामान्यतः वर्किंग कैपिटल को शॉर्ट टर्म फंडस के द्वारा ही मैनेज किया जाता है| वहीं पर फिक्स्ड असेट्स को मैनेज करने के लिए लॉन्ग टर्म लोन का या लॉन्ग टर्म फंड्स का सहारा लेते हैं| 

Commercial Bills: यह एक बिल ऑफ एक्सचेंज होता है| यह वर्किंग कैपिटल के लिए वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करता है|

यह भी एक नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट होता है| 

इस बिल ऑफ एक्सचेंज को बैंक में सिक्योरिटी के रूप में रखकर पैसा लिया जा सकता है|

जब तक दो व्यक्तियों के बीच में यह बिल चल रहा था तब तक इसे ट्रेड बिल कहा जा रहा था| जब इसे बैंक में सिक्योरिटी के रूप में रख दिया जाएगा तब यह कमर्शियल बिल बन जाएगा| 

Commercial Paper क्या होते हैं?

कमर्शियल पेपर Unsecured Promissory note कि फॉर्म में होता है| यानी कि है ज्यादा सुरक्षित नहीं होते|

यदि इसमें पैसा डूबा तो उसकी वापसी की कोई गारंटी नहीं है| यह एक नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट होता है| 

यानी कि इसके मैच्योरिटी पीरियड के अंतराल में हम इसे कितनी भी बार एक से दूसरे को ट्रांसफर कर सकते हैं| यह फिक्स मैच्योरिटी  पीरियड के साथ आते हैं| 

यह बड़ी और भरोसेमंद कंपनियों द्वारा मिनिमम 15 दिन से अधिकतम 1 साल तक के लिए ही जारी किए जाते हैं|

बड़ी-बड़ी कंपनियां बैंक से उधार लेने के बजाय मनी मार्केट द्वारा कमर्शियल पेपर जारी करके भी पैसा इकट्ठा कर सकती हैं| 

यह भी ट्रेजरी बिल की तरह डिस्काउंटेड प्राइस पर मिलती हैं तथा अंकित मूल्य (फेस वैल्यू) पर इनका भुगतान होता है|

इसका मुख्य उद्देश्य कम समय अवधि के लिए वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करना है|

यह कंपनी को सीजन में आवश्यक धन की उपलब्धता  करवाता है| 

ट्रेजरी बिल तथा कमर्शियल पेपर में मुख्य अंतर यह है कि “ट्रेजरी बिल सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं तथा कमर्शियल पेपर भरोसेमंद कंपनियों के द्वारा जारी किए जाते हैं|” 

पब्लिक लिमिटेड कंपनी जब भी आईपीओ लाती है तो फ्लोटेशन कॉस्ट की जरूरत को पूरा करने के लिए वह कमर्शियल पेपर का भी सहारा ले लेती है| 

यानी कि कैपिटल मार्केट में एंट्री करने के लिए वह मनी मार्केट से पैसा उठाती है|

इसे ब्रिज फाइनेंस कहा जाता है| 

Certificate Of Deposits क्या होते हैं?

कमर्शियल बैंक द्वारा सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट्स को जारी किया जाता है|

जब फिक्स डिपाजिट, RD  इत्यादि की तरह के सारे डिपॉजिट बैंक देता है तो, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट भी बैंक के द्वारा दिया जाएगा| 

सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट के बारे में अच्छी तरह समझने के लिए आपको बैंक की कार्यप्रणाली पर थोड़ा सा ध्यान देना चाहिए|

लोगों द्वारा बैंक में फिक्स डिपॉजिट किया जाता है तथा बैंक द्वारा उस FD को लोन के रूप में जरूरतमंद लोगों को दे दिया जाता है| 

अब बैंक के पास लोन लेने वाले ज्यादा है तथा बैंक के पास धन का अभाव है| ऐसी स्थिति में बैंक द्वारा सर्टिफिकेट ऑफ डिपाजिट जारी किए जाते हैं|

यह एक प्रकार का अनसिक्योर्ड, नेगोशिएबल, शॉर्ट टर्म इंस्ट्रूमेंट है जो कि कमर्शियल बैंक द्वारा जारी किया जाता है| 

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

शेयर क्या होता है?

शेयर कैपिटल क्या होती है?

शेयर तथा डिबेंचर में क्या अंतर होता है?

शेयर जारी (Issue) करने की प्रक्रिया जानें

आपने क्या सीखा? 

इस पोस्ट के माध्यम से आपने मुद्रा बाजार के साधन क्या है? (Money market instruments) के बारे में जाना|

उम्मीद करता हूं आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी|  कृपया इस पोस्ट को अधिक से अधिक मात्रा में शेयर अवश्य करें नमस्कार 

धन्यवाद 

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