मर्चेंट बैंकिंग क्या होती है? | व्यापारी बैंक क्या सेवाएं देता है?, इसका फायदा कैसे लें?

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Merchant banking in India: इस पोस्ट में आप मर्चेंट बैंकिंग क्या होती है?, मर्चेंट बैंक की परिभाषा क्या है?, व्यापारी बैंकों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं क्या हैं? के बारे में जानेंगे| 

यदि आप बिजनेस करते हैं तो आपको यह लेख अवश्य ही पूरा पढ़ना चाहिए| 

इससे आपको पता चलेगा कि किस प्रकार बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने बिजनेस को बड़ा करने के लिए बैंकों की सहायता लेती है?

तो चलिए दोस्तों! शुरू करते हैं| 

मर्चेंट बैंकिंग क्या है?

भारत में मर्चन्ट बैंकिंग क्या है?: “Merchant banking बैंकिंग और परामर्श सेवाओं (Consultancy services) का एक संयोजन (Combination) है| यह वित्तीय (financial), बिक्री (marketing) और कानूनी मामलों के लिए अपने ग्राहकों को परामर्श प्रदान करता है।”

परामर्श का अर्थ: सलाह (advice), मार्गदर्शन ( guidance) और सेवाएं प्रदान करना। यह एक व्यवसायी व्यक्ति (businessman) को व्यवसाय शुरु करने में मदद करता है।

इसको अच्छी तरह समझने के लिए पहले बैंकिंग का मतलब समझते हैं|

Banking क्या होती है?: “वह सारी एक्टिविटी जो बैंक हमें उपलब्ध करवाता है जो बैंक के अंदर होती हैं उन्हें हम बैंकिंग कहते हैं| 

जैसे कि: डिपॉजिट फैसिलिटी,  विड्रॉ फैसिलिटी,  लोन की फैसिलिटी,  क्रेडिट कार्ड की फैसिलिटी, डेबिट कार्ड की फैसिलिटी, ATM, Cheques, Currency exchange, Online payment इत्यादि| यह सारी सेवाएं मिलकर बैंकिंग कहलाती हैं|” 

अब समझते हैं कि मर्चेंट बैंकिंग क्या होती है? (Merchant banking in India)

Merchant Banking: मर्चेंट बैंकिंग में बैंकिंग सर्विस के साथ-साथ परामर्श (Consultancy) की सर्विस भी जोड़ देता है| 

परामर्श (Consultancy) मैं बैंक द्वारा  किसी बिजनेस के लिए सलाह (advice), मार्गदर्शन ( guidance) और सेवाएं प्रदान करना शामिल होता है| 

उदाहरण:

आपने आईपीओ क्या होता है? वाली पोस्ट में पढ़ा था कि जितनी भी कंपनियां आईपीओ लाती हैं इसमें मर्चेंट बैंकर की मुख्य भूमिका होती है|

IPO  जैसी प्रक्रिया में बहुत नियम कायदे कानून होते हैं साथ ही साथ यह प्रक्रिया बहुत उलझी हुई होती है|

इसी काम को मर्चेंट बैंकिंग द्वारा आसान बनाया जाता है| 

जब कोई बिजनेस नया होता है तो उसे कितनी बारीकियां तथा जानकारियां नहीं होती|

इसी कारण से मर्चेंट बैंकिंग की सुविधा का विकास हुआ| बैंक को इसके बदले में कुछ पैसा भी मिल जाता है| 

मर्चेंट बैंक की परिभाषा क्या है?

मर्चेंट बैंक की परिभाषा: “एक मर्चेंट बैंक को एक ऐसी वित्तीय संस्थान (financial institution) के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो मुद्रा बाजार की गतिविधियों हामीदारी और वित्तीय सलाह, ऋण देने, और निवेश इत्यादि की सेवाओं को आसान रूप से देने के लिए संगठित करता है| इस संगठन में पेशेवर कर्मचारी बहुत अधिक संख्या में होते हैं जो की बहुत शानदार तरीके से समस्याओं का सामना करने में कुशल होते हैं| मर्चेंट बैंक के प्रोफेशनल स्टाफ की समझ बूझ इतनी ज्यादा होती है कि वह वित्तीय समाधान में तेजी से निर्णय ले पाते हैं और उन्हें कार्यान्वित कर पाते हैं|”

व्यापारी बैंकों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं क्या हैं? (services provided by merchant banks) 

आइए! जानते हैं व्यापारी बैंकों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं क्या-क्या है? 

परियोजना परामर्श (Project counseling)

जब भी हम कोई प्रोजेक्ट स्टार्ट करते हैं तो  मर्चेंट बैंक द्वारा हमको शुरुआती स्टेज पर प्रोजेक्ट में सहायता दी जाती है| 

जब भी कोई नई कंपनी या व्यक्ति कोई प्रोजेक्ट पहली बार शुरू करता है तो उसे कुछ पता ही नहीं होता कि उसे करना क्या है? इसी कार्य में मर्चेंट बैंक द्वारा सहायता दी जाती है| 

इसमें मूल्यांकन (appraising) करना, आवेदन पत्र भरना ( filling up of application forms), यहां तक की सरकारी अनुमोदन (obtaining government approvals) प्राप्त  करने में भी मर्चेंट बैंक सहायता करता है| 

ऋण समूहन (Loan syndication)

मान लीजिए आप कोई ऐसा बिजनेस शुरू कर रहे हैं जिसके लिए आपको बहुत बड़ी धनराशि चाहिए| अब! जाहिर सी बात है कि यदि धनराशि बहुत बड़ी है तो कोई एक बैंक तो इसे देगा नहीं! 

ऐसे ही किसी स्थिति से निपटने के लिए बैंक कर्ज का एक समूह बनता है| यह समूह मिलकर हमें उस धनराशि को मुहैया करवाता है|

इसमें जरूरी नहीं है कि सभी बैंक समानरुप से लोन दे| 

बैंकों द्वारा मिलकर केवल लोन की उस धनराशि को एकत्र करना होता है| इसमें कोई बैंक कम तो कोई बैंक ज्यादा दे सकता है| 

इस तरह एक से ज्यादा बैंकों के मिलकर ऋण देने को ही ऋण समूहन (loan syndication) कहते हैं| 

जनता के मुद्दों की हामीदारी (Underwriting of public issues)

Underwriting को हम गारंटी भी बोल सकते हैं| कोई एक ऐसा पर्सन चाहिए होता है जो किसी बिजनेस की गारंटी ले| 

जैसे कि:  जब कोई कंपनी पब्लिक इश्यू लाती है तो जनता पर भरोसा जमाने के लिए उसे एक गारंटर की आवश्यकता होती है| यहां पर यह भरोसा जमाने वाला काम मर्चेंट बैंक द्वारा किया जाता है|

शेयर जारी करने की प्रक्रिया में जनता के मुद्दों की हामीदारी (underwriting of public issues)

यह बहुत ही महत्वपूर्ण होता है! 

जब शेयर मार्केट में शेयर्स को इशू किया जाता है तब SEBI भी यही चाहती है कि कोई ऐसी संस्था इसमें जुड़ी होनी चाहिए जो हमें गारंटी दे की यदि शेयर नहीं बिके तो ऐसे बचे हुए शेयर को खरीदने वाला भी कोई होना चाहिए|

जब तक ऐसे हामीदार (underwriter) नियुक्त नहीं हो जाता तब तक Public issue भी फाइनल नहीं माना जाता| 

इसलिए जनता के मुद्दों की हामीदारी (Underwriting of public issues) करने वाला भी बहुत जरुरी होता है| 

प्रबंधक, सलाहकार या मुद्दे के सलाहकार (Managers, consultants, or advisers to the issue)

किसी प्रस्पेक्टस की ड्राफ्टिंग करनी है, किसी एप्लीकेशन फॉर्म को भरना है, कंपनी अधिनियम की सारी शर्तों को पूरा करना है इत्यादि|

इन सभी विषयों को मर्चेंट बैंकर द्वारा पूरा किया जाता है| 

इस प्रकार देखा जाए तो मर्चेंट बैंक एक प्रबंधक, सलाहकार की तरह व्यवहार करता है| 

निवेश सूची (Portfolio management)

पोर्टफोलियो विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियों जैसे शेयर, डिबेंचर, या विभिन्न कंपनियों द्वारा जारी किए गए बॉन्ड में निवेश को सूचित करता है।

सबसे पहले एक निवेशक केरुप में हमारा मुख्य काम लाभ कमाना होता है|

हम सभी यह सोचते हैं कि कम से कम जोखिम में हमें ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके| 

अब मान लीजिए हमने किसी ऐसी जगह निवेश कर रखा है जहां पर हमें ज्यादा रिटर्न नहीं मिल रहा है|

ऐसी स्थिति में हमें उस निवेश को उस जगह से निकालकर ज्यादा प्रॉफिट वाली जगह पर निवेश करना होता है| 

यहां पर भी हमें मर्चेंट बैंक सहायता करता है|  

पुनर्गठन रणनीतियों (Restructuring strategies)

मर्चेंट बैंक किसी घाटे में जा रही कंपनी या किसी आर्थिक रुप से कमजोर इंडस्ट्री को विलय (merger), अधिग्रहण (acquisition) और नियंत्रण मे लेना (takeovers) वाली विभिन्न गतिविधियों के द्वारा पुन: लाभ कमाने वाली कंपनी में बदलने में मदद करता है| 

यह सब काम करने के लिए मर्चेंट बैंक दो कंपनियों के मध्य मोल भाव  करने के लिए एक मिडिल मैन की भूमिका निभाता है| 

जैसे कि: मान लीजिए यदि कोई कंपनी घाटे में जा रही है तो वह उस कंपनी को किसी प्रॉफिट वाली कंपनी के साथ Joint venture (संयुक्त उद्यम) के रुप में जोड़ देता है|

साथ ही अवश्य पढ़ें:

मनी मार्केट क्या होती है?

Capital market क्या है?

फाइनेंशियल मार्केट क्या होता है?

पूंजी बाजार और मुद्रा बाजार के बीच अंतर

उम्मीद करता हूं आप सभी मित्रों को यह पोस्ट Merchant banking in India बहुत पसंद आई होगी| 

अगली पोस्ट में मैं फिर मिलूंगा, तब तक के लिए मैं नवीन कुमार आपसे इजाजत चाहता हूं| नमस्कार 

धन्यवाद

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