Maternity benefit act क्या है | Maternity benefit amendment act 2017 in Hindi

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यदि आप बिजनेस करते हैं तो आपके पास में एंप्लॉई जरूर होंगे इसलिए आपको maternity benefit act 1961 तथा maternity benefit (amendment) act, 2017 के बारे में अवश्य ही पता होना चाहिए| 

इसके बारे में ना पता होने पर  आपके द्वारा किसी कानून का उल्लंघन हो सकता है|

कानून के बारे में एक बात में अच्छी तरह बता दूँ की “ कानून हमेशा यह मानकर चलता है कि उस देश में रहने वाले सब लोगों को सभी प्रकार के कानूनों का ज्ञान है|”

आप यह कह कर किसी कानून का उल्लंघन नहीं कर सकते कि आपको उस कानून के बारे में नहीं पता था|

क्योंकि फिर तो आप किसी का मुंह तोड़ दो और कह दोगे कि “आपको पता नहीं था कि मुंह तोड़ना क्राइम है!” 

इसलिए हो सके तो यह आर्टिकल पूरा पढ़ लो आपको कम से कम “प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 के तथा प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 के संशोधन के बारे में तो पता चल ही जाएगा| 

और हां एक बात और हो सकता है कि आपका एम्प्लोयी भी इस वक्त यह आर्टिकल पढ़ रहा हो! 

एक बात और बता देता हूं!

सोच तो रहा था कि आर्टिकल के अंत में कहीं पर लिखूंगा परंतु बहुत से बुद्धिजीवियों का ज्ञान वर्धन भी तो करना जरूरी है!

यारों!! 

अब नए कानून में संशोधन के बाद किसी भी एंप्लॉयर को अपने एंप्लॉई को उसके इस कानूनी अधिकार के बारे में अवगत कराना अनिवार्य है|

यानी साधारण शब्दों में बतलाऊँ तो काम देने वाले को ही बताना पड़ेगा कि “आपके लिए सरकार ने इस तरह के कानून बनाए हैं|”

 है ना मजेदार बात!! 

तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं!! आज का यह टॉपिक “प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 (maternity benefit act 1961)” 

वर्ष1961 में प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम (maternity benefit act) बनाया गया था| 

जब यह एक्ट बनाया गया था| उस वक्त इसको बनाने का मुख्य मकसद महिलाओं को लाभ पहुंचाने से था| 2017 के संशोधन के बाद इसमें काफी बदलाव भी किए गए हैं| 

इनका जिक्र हम बाद में करेंगे| 

पहले हम समझ लेते हैं कि आखिर प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम (maternity benefit act) होता क्या है?

मातृत्व की वजह से हमेशा ही मां का दर्जा काफी महत्वपूर्ण होता है|  

जब भी कोई महिला मां बनने वाली होती है और वह किसी प्रकार की नौकरी कर रही होती है तो उसको सुविधा देने के मकसद से maternity benefit act, 1961 बनाया गया है|

Maternity benefit act 1961
maternity benefit act, 1961: in Hindi

ऐसा नहीं है कि 1961 से पहले मैटरनिटी बेनिफिट का कोई एक्ट नहीं था|

1961 से पहले भी बहुत सारे एक्ट थे परंतु यह स्टेट लेवल पर थे| 

आप जितने भी लोग इस समय पोस्ट पढ़ रहे हैं वह अच्छी तरह जानते होंगे कि “एक मां द्वारा एक बच्चों को पैदा होने से लेकर पैदा होने के कुछ सालों तक कितनी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती है|”

इस कथन से मेरा यह तात्पर्य बिल्कुल नहीं है कि उसके पिता की जिम्मेदारियां कुछ भी नहीं होती|

इसी बात को ध्यान में रखते हुए ही इस एक्ट में संशोधन भी किया गया है|

सरकार की नैतिक तथा कानूनी जिम्मेदारी होती है कि वह उस अजन्मे बच्चे का ध्यान रखा जाए|  

अब!!  दोस्तों जो बच्चा अभी तक इस दुनिया में नहीं आया उसका ध्यान सरकार किस प्रकार रखेगी| इसके लिए गवर्नमेंट ने एक वेबसाईट भी बना रखी है|

तो यह आप लोग आसानी से समझ रहे होंगे कि “सीधी सी बात है भाई उसकी मां का ध्यान रखेगी!!”

इसके लिए सरकार द्वारा कुछ बिंदुओं को ध्यान में रखना पड़ता है|  

जैसे कि:- 

गर्भपात (miscarriage) 

सबसे पहला टास्क तो यह होता है कि गर्भपात (miscarriage) ना हो जाए| 

बहुत सारी महिलाएं इस प्रकार के कार्य करती हैं जिसमें बहुत देर तक खड़े रहना,  चलना,  ज्यादा वजन उठाना शामिल हो सकता है| 

अब इस समस्या से बचने के लिए सरकार ने एक समय अवधि यानी कि टाइम पीरियड ऐसा तय कर दिया है जिसमें की उस गर्भवती महिला को किसी भी प्रकार का काम ना करने दिया जाए| 

यानी कि बच्चे के जन्म से कुछ समय पहले तथा बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद तक कुछ काम ना करने दिया जाए| 

अब यह वाला पॉइंट जरा ध्यान से  पढ़ो – ”इस दी गई तय समय अवधि के अंदर किसी भी प्रकार का कोई कार्य करने के लिए ना दिया जाए| यदि गर्भवती महिला स्वयं भी कहती है कि उसे कुछ काम दे दिया जाए तब भी उसको कुछ काम करने के लिए आप ना कहें|” 

यदि एंपलॉयर उसे काम करने के लिए देता है तो एंपलॉयर के ऊपर ही मुकदमा बनेगा|

अब इस प्रकार के कानून तो बहुत सारे बने हुए थे परंतु सब के सब कानून अलग-अलग स्टेट में अलग-अलग तरीके से लागू थे|

इन सारे इधर-उधर पड़े कानूनों को एक ही सूत्र में पिरो दिया गया और इन को समान रूप से पूरे देश में लागू कर दिया गया इसे ही प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 (maternity benefit act, 1961) कहते हैं|

साथ ही साथ साल 1988 में maternity benefit act, 1961 में काफी (drastically) बदलाव किए गए| 

 किस क्षेत्र में लागू होगा 

  • यह कानून हर फैक्ट्री, माइंस तथा प्लांटेशन पर लागू होता है| 
  • सरकार द्वारा स्थापित हर संस्थान पर यह लागू होता है| 
  • हर उस क्षेत्र में लागू होगा जहां पर बैलगाड़ी तथा घोड़ा गाड़ी द्वारा कोई काम किया जाता है| 
  • सर्कस में करतब दिखाने  पर|
  • कोई भी ऐसा खेल जिसमें घुड़सवारी की तरह कुछ खेल खेला जाता हो| 
  • ऐसा कोई भी काम जिसमें की शारीरिक मेहनत लगती हो| 
  • साथ ही साथ यह हर उस संस्थान पर लागू होगा जिसमें पिछले 1 साल के अंदर 10 या उससे ज्यादा लोग कार्यरत थे| (इनकी गिनती करने के लिए टोटल एम्प्लॉइज को गिनना है ना कि पुरुषों को अलग पर महिलाओं को अलग) 

नोट:- राज्य सरकार के पास यह शक्ति होती है कि वह केंद्र सरकार से परमिशन लेकर किसी भी प्रकार के ऑर्गेनाइजेशन पर यह कानून लागू कर सकती है| चाहे वह इंडस्ट्रियल हो, एग्रीकल्चर हो, कमर्शियल हो

इसके लिए राज्य सरकार द्वारा कम से कम 2 महीने पहले एक नोटिस जारी किया जाएगा| 

साथ ही यह अवश्य पढ़ें: एक्सपोर्ट इंपोर्ट बिज़नेस कैसे शुरू करें?

मातृत्व लाभ के भुगतान का अधिकार (Right to payment of maternity benefit)

किसी भी महिला को मातृत्व लाभ के भुगतान का जब प्रश्न आता है तो हमारे दिमाग में बहुत सारे सवाल उमड़ने घुमड़ने लगते हैं|

 इन्हीं सवालों के जवाब मैं नीचे दे रहा हूं| 

लाभ राशि की गणना ( Calculation of maternity benefit) कैसे होगी? 

सबसे पहला प्रश्न तो हमारा दिमाग में यह है आता है कि “मातृत्व लाभ के लिए एंपलॉयर द्वारा कितना भुगतान किया जाएगा?”

1- वेतन के आधार पर

2- औसत के आधार पर 

जो भी बच्चे को जन्म देने की तारीख होगी जो कि डॉक्टर द्वारा दी गई होगी उसे एक्सपेक्टेड डेट कहते हैं|

इस एक्सपेक्टेड डेट की मैटरनिटी लीव पर जाने से 3 महीने पहले उसने प्रत्येक दिन जितना वेतन लिया होगा उसकी गणना की जाएगी| 

इसने इन 3 महीने के दौरान जितना भी वेतन लिया होगा उसके टोटल को 3 महीने से भाग कर दिया जाएगा| प्रत्येक महीने के वेतन में से प्रत्येक दिन का औसत वेतन (Average daily wages) निकाल लिया जाएगा| 

अब बच्चा पैदा होने के 6 हफ्ते बाद तक तथा बच्चा पैदा होने से पहले जब वह छुट्टी पर गई थी तब तक उसको प्रत्येक दिन के औसत वेतन के हिसाब से प्रत्येक दिन का वेतन दिया जाएगा| 

मातृत्व लाभ पर अधिकतम सीमा (The maximum limit on maternity benefits) कितनी होगी? 

किसी भी मातृत्व का लाभ लेने के लिए अधिकतम सीमा क्या होगी?

मातृत्व का लाभ लेने के लिए मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 में अधिकतम सीमा 12 हफ्ते तक रखी गई थी जिसको बाद में संशोधित कर दिया गया है| 

योग्यता (Eligibility) क्या होनी चाहिए? 

दूसरा प्रश्न यह आता है कि “क्या हर महिला को यह लाभ मिल जाएगा?”

इस बिंदु को जानना इसलिए जरूरी है कि कोई भी गर्भवती महिला किसी कंपनी में नई जॉइनिंग करती है तो क्या उसे भी यह लाभ मिल जाएगा?

तो दोस्तों इस प्रश्न का उत्तर है कि उस गर्भवती महिला ने कम से कम उस संस्थान में 80 दिन काम किया हो| 

यानी कि एक्सपेक्टेड डेट से पहले 1 साल के अंदर कम से कम 80 दिन काम किया हो| 

नोट:- ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद Layoff (जबरी छुट्टी, अस्थायी छंटनी, कामबंदी) राष्ट्रीय अवकाश (national holidays) के दिनों को इन 80 दिनों में गिना जाएगा| 

न्यूनतम कार्यदिवस (Minimum workdays) कितने दिन होने चाहिए? 

कोई भी महिला किसी भी नौकरी को ज्वाइन करते के साथ ही क्या मातृत्व का लाभ ले सकती है? 

मातृत्व की अपेक्षित तिथि (expected date of maternity)

बच्चे को जन्म देने की अपेक्षित तिथि कौन सी मानी जाएगी? 

जीवन के संदर्भ में 

इस बिंदु के दौरान हमारे  सामने 4 तरह की स्थिति पैदा हो सकती है|

इनमें से कुछ बिंदु अत्यंत विचलित करने वाले हैं परंतु मैं क्या करूं?  मुझे तो इस आर्टिकल के माध्यम से आपको सारी स्थिति समझानी है इसलिए मुझे तो लिखना ही पड़ेगा!! 

  1. मां की मृत्यु/ बच्चे की मृत्यु 

इस प्रकार की  शोकाकुल स्थिति में मृत्यु की तिथि तक नॉमिनी को पैसा मिलेगा| 

  1. मां भी जिंदा/ बच्चा भी जिंदा 

इस खुशनुमा स्थिति में  मातृत्व लाभ मिलेगा| 

  1. मां की मृत्यु/ बच्चा जिंदा

इस प्रकार की अत्यंत शोकाकुल  स्थिति में भी मातृत्व का लाभ मिलेगा| 

  1. मां जिंदा/ बच्चे की मृत्यु 

इस प्रकार की दु:खद स्थिति में मां को मातृत्व का लाभ मिलेगा| मान लीजिए कि बच्चा 2 हफ्ते तक तो जिंदा था परंतु इसके उपरांत उसकी मृत्यु हो जाती है तब ऐसी स्थिति में जिस दिन बच्चे की मृत्यु हुई उस दिन तक का मातृत्व लाभ का पैसा मिलेगा|

साथ ही यह अवश्य पढ़ें: एक्सपोर्ट बिज़नेस में ग्राहक कैसे ढूंढे?

how to write maternity leave: मातृत्व लाभ और भुगतान का दावा करने के लिए नोटिस (Notice to claim Maternity Benefit & Payment)

यह सेक्शन 6 है| 

इस पॉइंट को मैं इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि हो सकता है इसे पढ़ने वाला लॉ का स्टूडेंट हो और वह labor law के विषय में पढ़ रहा हो तो उसे इस बिंदु के बारे में जानना बहुत ही आवश्यक है|

  • सबसे पहले उस महिला कर्मचारी द्वारा लिखित में एक नोटिस दिया जाएगा जिसे मातृत्व का लाभ लेना हो| 
  • यह नोटिस उस एंपलॉयर को दिया जाएगा किसके द्वारा मातृत्व का लाभ लिया जाना है|
  • इसमें उस महिला द्वारा नॉमिनी का नाम भी दिया जाना चाहिए|
  • उस महिला के द्वारा यह लिखा जाना अनिवार्य है कि इस दौरान वह किसी और संस्थान में कार्य नहीं करेगी| 
  • यदि उस महिला को होने वाले बच्चे के पैदा होने की तारीख डॉक्टर द्वारा दी गई है तो उसे यह भी बताना पड़ेगा कि वह कब से मैटरनिटी लीव पर जाएगी| 
  • यह जरूरी नहीं है कि उसे एक्सपेक्टेड डेट से पहले ही नोटिस देना अनिवार्य है| वह यह नोटिस डिलीवरी के बाद भी दे सकती हैं| 
  • किसी भी सूरत में यदि वह महिला नोटिस नहीं दे पाती है तो इसके बावजूद भी मातृत्व का लाभ लेने का उसको अधिकार है| 
  • नोटिस ना देने की स्थिति में यदि एंप्लॉय और पैसा देने को मना करता है तो वह महिला सीधे पुलिस से कंप्लेंट कर सकती है|
  • पुलिस द्वारा सीधे ही उस एंपलॉयर को भुगतान करने के लिए बाध्य किया जा सकता है| 
  • इस नोटिस को देने के बाद कुछ पेमेंट एडवांस में होगी तथा कुछ डिलीवरी के बाद हो सकती है| 
  • एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी से पहले की जो भी पेमेंट बनती है वह एडवांस के रूप में दी जाएगी| 
  • एडवांस के बाद जो भी बकाया बचेगा, यह बकाया बच्चे के पैदा होने की सूचना (जो कि सबूतों के साथ होगी) देने के 48 घंटे के भीतर एंप्लॉयर को देना होगा|

What is maternity benefit act 2017: प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम संशोधन 2017 क्या है?

किसी भी कानून को बनाने के पीछे का मक़सद समाज को लाभ पहुंचाना होता है|  इसी कारण से maternity benefit act 1961 लाया गया था|

परंतु हर कानून में समय के साथ बदलाव करने बहुत जरूरी होते हैं| पहले इन पुराने कानूनों की समीक्षा की जाती है फिर निर्णय के आधार पर इनमें संशोधन किया जाता है| 

पुराने कानून में से कुछ कमियों को हटाकर या फिर यूं कहें तो जिन विषयों में थोड़े सुधार की आवश्यकता है उन्हें चेंज किया जाता है|

 इन सुधारों को ही संशोधन कहते हैं|

maternity benefit act 1961  में 2017 में हुए संशोधनों (amendment) के बाद उसे प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम संशोधन 2017 कहा जाता है| 

आइए बात करते हैं!! और समझने की कोशिश करते हैं उन संशोधनों के बारे में| 

साथ ही यह अवश्य पढ़ें: एमएसएमई के बारे में सारी जानकारी

Maternity benefit (amendment) act, 2017: प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम संशोधन 2017

प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम संशोधन 2017 में बहुत छोटे-छोटे संशोधन हुए थे परंतु यह काफी लाभदायक थे| 

वैतनिक अवकाश (Paid leave)

  • संशोधन से पहले – 12 हफ्ते 
  • संशोधन के बाद – 26 हफ्ते 

इसमें जो सबसे बड़ा संशोधन हुआ था वह था पुराने मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट में मिलने वाली पैड लीव को 12 हफ्तों से बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया गया है|

लेकिन यह सब के लिए लागू नहीं है इस बात को समझने के लिए इसे हम दो भागों में बांट लेते हैं| 

1- वह माताएं जिनके पहले से 2 बच्चे हैं और वह उम्मीद से हैं (यानी कि गर्भवती है)| 

2- वह माताएं जिनके दो से कम बच्चे हैं और वह उम्मीद से हैं (यानी कि गर्भवती है)| 

अब!  इन दोनों परिस्थितियों में वह माताएं जिनके पहले से दो बच्चे हैं उनको मिलने वाली मैटरनिटी लीव 12 हफ्ते ही रहेगी| 

परंतु वह माता है जिनके दो से कम बच्चे हैं उनको मिलने वाली पैड मैटरनिटी लीव 26 हफ्ते हो गई है| 

ऐसा करने के पीछे सरकार की मंशा जनसंख्या को कंट्रोल में रखने से है|

पैड लीव लेने का तरीका 

  • जिनके पहले से 2 बच्चे नहीं हैं- वह बच्चे के पैदा होने की तारीख से अधिकतम 8  हफ्ते पहले यह छुट्टियां ले सकते हैं| बाकी बची हुई छुट्टियां में बच्चा पैदा होने के बाद ले सकती हैं|  टोटल वह 26 हफ्ते की मेटरनिटी लीव ले सकती हैं|

 यानी यदि वह डिलीवरी डेट से 6 हफ्ते पहले छुट्टियां लेती हैं तो डिलीवरी डेट के बाद वह 20 हफ्ते की छुट्टियां ले सकती हैं|

  •  जिनके पहले से दो बच्चे हैं- वह टोटल 12 हफ्ते की ही छुट्टियां ले सकती हैं| जिसमें वह डिलीवरी डेट अधिकतम 6 हफ्ते पहले ही छुट्टियां ले सकती हैं| बाकी बची हुई 6 हफ्ते की छुट्टियां वह डिलीवरी के बाद ले सकती हैं| 

बच्चा गोद लेने वाली महिला के लिए पैड मैटरनिटी लीव 

अब दोस्तों एक सवाल दिमाग में यह भी आता है कि मान लीजिए कोई महिला किसी छोटे बच्चे को गोद लेती है तो क्या उसको यह अधिकार नहीं है?  सोचने वाली बात है!!

 तो दोस्तों सरकार ने इसके लिए भी एक प्रावधान किया है अब इसको थोड़ा ध्यान से समझ लीजिए|

  • किसी मां द्वारा ऐसा बच्चा गोद लिया जाता है जिसकी उम्र 3 महीने से कम है| उस बच्चा गोद लेने वाली मां को भी गोद लेने की तारीख से 12 हफ्ते तक मैटरनिटी लीव मिलेगी| 

सरोगेट मदर के लिए पैड मैटरनिटी लीव

ऐसी मां जिसको दुर्भाग्यवश कुछ ऐसे शारीरिक कमी होती है या फिर उसके पति में कुछ प्रकार की कमी होती है कि वह बच्चा पैदा करने में अक्षम है| 

ऐसी परिस्थिति में है बच्चा गोद में लेकर सरोगेसी का रास्ता अपनाती है| इस प्रक्रिया में मां के अंडे लिए जाते हैं तथा पिता के शुक्राणु लिए जाते हैं|

सरोगेसी प्रक्रिया में जैविक माता-पिता तो वही रहेंगे केवल सरोगेट मदर की कोख (बच्चेदानी) इस्तेमाल में ली जाएगी|

कानूनी भाषा में इस सरोगेट मदर को कमीशनिंग मदर कहा जाएगा| 

  • इस कमीशनिंग मदर को भी 12 हफ्ते की पैड लीव दी जाएगी|

घर से काम करने का विकल्प 

मान लीजिए कि यदि 26 हफ्ते बीतने के बाद भी मां को और छुट्टियां चाहिए तो इसके लिए उसके पास में क्या विकल्प खुले हुए हैं|

  •  पहला-  यदि काम की प्रकृति इस प्रकार की है कि घर से भी काम किया जा सकता है जिसे हम work-from-home कहते हैं तो इस प्रकार के लाभ को लिया जा सकता है| 
  • वर्क फ्रॉम होम के लिए एंपलॉयर तथा एंप्लोई दोनों में रजामंदी (Mutually Understanding) होनी अनिवार्य है| 

शिशु-गृह सुविधा (Creche facility)

यदि वर्क फ्रॉम होम की सुविधा ना मिले और मां को आना ही पड़े तब!!

  • Maternity benefit (amendment) act, 2017: प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम संशोधन 2017 में जिस भी संस्थान में 50 या उससे ज्यादा कार्य करने वाले कर्मचारी हैं  उस संस्थान में शिशु-गृह सुविधा (Creche facility) देना अनिवार्य है| 

शिशु-गृह सुविधा:- यह एक ऐसी जगह होती है जहां पर छोटे बच्चों के लालन-पालन के लिए उपयुक्त  वस्तुएं दी जाती हैं| 

  • इस शिशु-गृह में मां 1 दिन में 4 बार जा सकती है जिसमें Rest interval शामिल है| 
  • Maternity benefit (amendment) act, 2017: प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम संशोधन 2017 के अनुसार जो भी महिला कर्मचारी किसी संस्थान में कार्यरत होगी उस संस्थान के एंपलॉयर द्वारा उस महिला को उसके मातृत्व अधिकार के बारे में शिक्षित करना अनिवार्य है|

 यानी कि मालिक को यह बताना अनिवार्य कर दिया गया है कि वह किस प्रकार मातृत्व का लाभ ले सकती है?  तथा उसके क्या क्या अधिकार है?

देखा!  मैंने ऊपर लिखा था ना इस आर्टिकल को पूरा अवश्य पढ़ें!

मेरा इस बात से अभिप्राय यही था कि आपको किसी भी प्रकार के बिज़नेस में क्या कानून सरकार द्वारा बनाए गए हैं? इनके बारे में अवश्य पता होना चाहिए| 

चलिए! अब थोड़े से अन्य सवालों के जवाब भी इस आर्टिकल में ले ही लेते हैं!!

साथ ही यह अवश्य पढ़ें: फायर इंश्योरेंस के बारे में जानकारी

FAQ: Maternity benefit act

सबसे पहला व्यक्ति  कौन है जिसने महिलाओं के लिए Maternity benefit act को लाने के लिए  शुरुआत की?

Narayan Malhar Joshi (5 June 1879 – 30 May 1955) 

सबसे पहले किस राज्य ने Maternity benefit act की शुरुआत की?

मुंबई में सन 1929 में सबसे पहले मेटरनिटी बेनिफिट एक्ट की शुरुआत हुई| इसके बाद सन 1930 में मध्य प्रदेश में मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट की शुरुआत की|

सबसे पहले केंद्र सरकार द्वारा किस क्षेत्र में महिलाओं के लिए Maternity benefit act लाया गया था?

खानों (Mines) क्षेत्र में सन 1941 में सबसे पहले केंद्र सरकार द्वारा मातृत्व लाभ अधिनियम लाया गया था| 

Maternity benefit act 1961 किन-किन क्षेत्रों में लागू होगा?

प्रत्येक फैक्ट्री,  खानों (mines), घुड़सवार (equestrian), कलाबाजी (acrobatic), इत्यादि में तथा जहां पर भी 10 या इससे अधिक लोग काम करते हो उन सभी संस्थाओं में मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 लागू होगा| 

Maternity benefit act 1961 के अनुसार वेतन (Wages) में क्या-क्या चीजें शामिल होंगी? 

वेतन में सम्मिलित चीजें- महंगाई भत्ता (Dearness allowances), मकान किराया भत्ता (House Rent Allowance), प्रोत्साहन बोनस (incentive bonus), खाद्यान्नों की आपूर्ति का मूल्य (the money value of the supply of food grains)

Maternity benefit act 1961 के अनुसार वेतन (Wages) में क्या-क्या चीजें शामिल नहीं होंगी?

वेतन में सम्मिलित न होने वाली चीजें- प्रोत्साहन के अलावा कोई बोनस (any bonus other than incentives), अधिक समय तक कमाई (Overtime earnings), भविष्य निधि (provident fund), पेंशन योजना का योगदान (Pension scheme contributions), ऐच्छिक दान (Any gratuity)

Maternity benefit act: 2017 में क्या क्या मुख्य संशोधन (amendment) हुए हैं?

1- मैटरनिटी लीव का समय 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते किया गया है| यह केवल उन महिलाओं के लिए हैं जिनके दो से कम बच्चे हैं| 
2- एक महिला जिसने 3 महीने से कम उम्र का बच्चा गोद लिया है उसको भी 12 हफ्तों की पेड मैटरनिटी लीव मिलेगी|
3- कमीशनिंग मदर को भी 12 हफ्तों की पैड मैटरनिटी लीव का लाभ मिलेगा|
4- वर्क फ्रॉम होम की सुविधा भी प्रदान की गई है|  परंतु इसके लिए एंपलॉयर तथा एम्पलाई दोनों ही रजामंद होने चाहिए|
5- शिशु ग्रह की सुविधा-  जहां पर 50 या इससे अधिक एंप्लोई है वहां पर एंप्लॉयर को शिशु ग्रह की सुविधा देना अनिवार्य है|
6- एंपलॉयर को किसी भी महिला कर्मचारी की नियुक्ति के समय उसे maternity benefit (amendment) act, 2017 के बारे में शिक्षित करना अनिवार्य है| 

दोस्तों,

इस पोस्ट में मैंने maternity benefit act, 2061 तथा maternity benefit (amendment) act, 2017 के सभी बिंदुओं के बारे में अच्छी तरह बताने की कोशिश की है|

यदि भाषा की कोई त्रुटि रह गई हो या गलत शब्दों का चुनाव किया हो तो मैं उसके लिए आपसे क्षमा मांगता हूं|

 आप कृपया अपने विचार भी मेरे साथ साझा करें जिससे कि मुझे और अच्छी-अच्छी पोस्ट लिखने की प्रेरणा मिले|

 इसी के साथ मैं नवीन कुमार आपसे इज़ाजत चाहता हूं|

 धन्यवाद

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