Marine insurance के बारे में जानना बहुत जरुरी है | समुद्री बीमा के प्रकार कौन से हैं?

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समुद्री बीमा क्या होता है?

समुद्री बीमा का संबंध समुद्री जल मार्गों से होता है| समुद्री जलमार्ग द्वारा वस्तुओं को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने पर के समय यदि कोई नुकसान हो जाता है तो उस नुकसान की भरपाई करने के लिए किए जाने वाले इंश्योरेंस को Marine Insurance (समुद्री बीमा) कहते हैं| 

अर्थात समुद्री बीमा संविदा से तात्पर्य उस संविदा से है जिसके अंतर्गत जहाज, माल या भाड़े से संबंधित समुद्रिक संकटों के प्रति सुरक्षा प्रदान की जाती है| 

जैसा कि आपको मैं ऊपर बता चुका हूं marine insurance भी एक्सपोर्ट इंपोर्ट में लगने वाले डाक्यूमेंट्स में से एक डॉक्यूमेंट होता है|

मरीन इंश्योरेंस को थोड़ी देर के लिए आप बैंक गारंटी मान लीजिए|

जैसा कि आप जानते हैं बैंक गारंटी में बैंक का रोल जब शुरू होता है जब सामने वाला पैसे देने में विफल हो जाता है|

ठीक उसी प्रकार इंश्योरेंस में भी इंश्योरेंस कंपनी का दायित्व जब शुरू होता है जब कोई ऐसी घटना घट जाती है जिसके विरुद्ध आपने इंश्योरेंस लिया हुआ है| 

मान लीजिए आप इनमें से कोई एक है|

  1. सोल प्रोपराइटरशिप फर्म
  2. पार्टनरशिप फर्म 
  3. स्मॉल कंपनी 
  4. वन पर्सन कंपनी
  5. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी
  6. पब्लिक लिमिटेड कंपनी 

आपने किसी वस्तु का निर्यात (Export) जल मार्ग द्वारा किया| समुद्री जल मार्ग में एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचने में बहुत सारी समस्याएं आ सकती हैं| 

यदि समुद्री रास्ते में कोई ऐसी अप्रिय घटना घट घट जाए जिसमें आपका नुकसान हो जाए, ऐसी परिस्थिति से बचने के लिए ही मरीन इंश्योरेंस लिया जाता है| 

नोट: जैसे पोर्ट रजिस्ट्रेशन के लिए CHA आपकी सहायता करता है ठीक उसी प्रकार मरीन इंश्योरेंस लेने में भी कस्टम हाउस एजेंट आपकी सहायता करता है| 

marine insurance meaning

Marine Insurance (समुद्री बीमा) ऐसा इंश्योरेंस होता है जो समुद्री नुकसान के विरुद्ध लिया जाता है|

इसे marine insurance इसलिए कहते हैं क्योंकि यह समुद्री जलमार्गों के लिए होता है| 

जैसे:- “घरेलू बिज़नेस में हम fire insurance, चोरी का इन्श्योरेन्स तथा अन्य इसी प्रकार के जोखिमों के विरुद्ध इन्श्योरेन्स लेते है उसी प्रकार समुद्री जोखिमों के लिए मरीन इन्श्योरेन्स लिया जाता है|”

Marine insurance meaning in Hindi (मरीन इंश्योरेंस का हिंदी अर्थ होता है) – “समुद्री बीमा” 

मरीन इंश्योरेंस में मुख्यतः किन-किन चीजों को कवर किया जाना चाहिए? 

मरीन इंश्योरेंस लेने से पहले आपको इंश्योरेंस कंपनी से यह अवश्य पता कर लेना चाहिए कि वह किन-किन चीजों पर इंश्योरेंस दे रही है|

नीचे दी हुई लिस्ट में मुख्यतः इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा कुछ इन बिंदुओं को ध्यान में रखकर इंश्योरेंस दिया जाता है|

आपको भी इन बिंदुओं पर अवश्य ध्यान देना चाहिए|

यदि आप कोई अन्य जोखिम भी marine insurance में कवर करवाना चाहते हैं तो वह आप करवा सकते हैं| 

ऐसा नहीं है इन बिंदुओं के अलावा किसी और अन्य बिंदु का इंश्योरेंस नहीं हो सकता| 

कुछ अन्य परिस्थितियों के हिसाब से भी कुछ बिंदु घट या बढ़ जाते हैं| 

जैसा कि आपने एक्सपोर्ट इंपोर्ट बिजनेस में इस्तेमाल किए जाने वाले इनकोटर्म्स के बारे में पढ़ा ही होगा कि किस प्रकार इनकोटर्म्स में यह तय किया जाता है कि Seller का रिस्क किस पॉइंट से buyer पर ट्रांसफर हो जाएगा| 

एक्सपोर्ट इंपोर्ट बिजनेस में इंश्योरेंस लेना अनिवार्य है जबकि लघु उद्योग में इंश्योरेंस लेना या ना लेना व्यक्ति के ऊपर निर्भर करता है| 

  • जहाज की टक्कर (collision of ship)

मान लीजिए  भारत से मसाले या जूट एक्सपोर्ट करते हैं तथा जिस जहाज के द्वारा आपके कंटेनर जा रहे हैं उसकी टक्कर किसी दूसरे जहाज से हो जाती है| 

उस टक्कर में आपका कंटेनर समुद्र में डूब जाता है| 

इस प्रकार के नुकसान से बचने के लिए इस बिंदु को मरीन इंश्योरेंस पॉलिसी में जोड़ा जाता है| 

  • दुश्मन द्वारा जहाज पर  हमला किया जाना (Ship attacked by enemy)

मान लीजिए आप एक मर्चेंट एक्सपोर्टर या मैन्युफैक्चरर एक्सपोर्टर है|

आपका कुछ सामान समुद्री जलमार्ग द्वारा जा रहा है| आपने इसका marine insurance करवाया हुआ है|  

इसमें आपने दुश्मन द्वारा जहाज पर हमले किए जाने की स्थिति को इंश्योरेंस में शामिल किया हुआ है|

अब यदि कोई दुश्मन देश समुद्री मार्ग में अवरोध उत्पन्न करके आपके जहाज पर हमला कर देता है तथा आपके सामान को लूट लेते हैं|

इस स्थिति में आपका होने वाला नुकसान आपको मरीन इंश्योरेंस द्वारा वापस मिल जाएगा| 

  • समुद्री डाकूओं द्वारा हमला (Pirates attack)

आज भी विश्व में बहुत सारे मुल्क ऐसे हैं जिनके समुद्री मार्ग से निकलने पर अक्सर व्यापारिक जहाजों को लूट लिया जाता है|

इस प्रकार के नुकसान की भरपाई के लिए भी अक्सर मरीन इंश्योरेंस में इस बिंदु को कवर किया जाता है

इसलिए आपको अपने marine insurance में समुद्री डाकुओं द्वारा हमला (Pirates attack) को अवश्य शामिल करना चाहिए| 

  • जहाज का गायब होना (Disappearance of ship)

समुद्री जलमार्ग में जहाज खो भी सकते हैं| आपने बरमूडा ट्रायंगल का नाम तो अवश्य ही सुना होगा|

यह समुद्र में एक ऐसा क्षेत्र है जो कि आज भी रहस्य बना हुआ है| 

इस समुद्री मार्ग पर आज तक कोई भी जहाज गया वह गायब हो गया| 

यह खतरनाक इलाका त्रिभुज के आकार में है| 

यानी इस त्रिभुज के अंदर से होकर कोई जहाज निकलता है तो वह गायब हो जाता है|  

यदि आपका समुद्री जलमार्ग बरमूडा ट्रायंगल के आसपास है तो आपको जहाज खो जाने का भी इंश्योरेंस अवश्य कराना चाहिए| 

  • जहाज को नुकसान (Damage to ship)

जैसा कि आप जानते हैं समुंदर में बहुत भयंकर तूफान भी आते रहते हैं| 

इन तूफानों के द्वारा यदि आपके सामान को कुछ नुकसान पहुंचता है तो इसकी भरपाई समुद्री बीमा द्वारा हो जाएगी| 

Principal of marine insurance: समुद्री बीमा के मूल

  1. क्षतिपूर्ति का अनुबंध (contract of indemnity)

इसमें क्षतिपूर्ति का अनुबंध किया जाता है| इस अनुबंध में इंश्योरेंस कंपनी द्वारा यह कहा जाता है कि जिन चीजों को इंश्योरेंस में कवर किया गया है, 

उन घटनाओं के घटने से यदि आपका कोई नुकसान होता है तो इंश्योरेंस कंपनी आपको घटना घटने से पहले आप जिस स्थिति में थे उस स्थिति में खड़ा कर देगी| 

यानी यदि आपने अपने गुड्स पर ₹100 का मरीन इंश्योरेंस लिया था|  

अब इसमें आपको ₹50 का नुकसान हो गया, तो कंपनी आपके ₹50 के नुकसान की भरपाई करेगी ना कि ₹100 की|

  1. अच्छी भावना (utmost good faith)

इंश्योरेंस लेने वाले तथा इंश्योरेंस देने वाले दोनों में अच्छी भावना होनी चाहिए|

दोनों ही पक्षों को एक दूसरे से कुछ भी नहीं छुपाना चाहिए| 

 जैसे कि इंश्योरेंस लेने वाले को अपने गुड्स के बारे में सभी बातें अच्छी तरह बता देनी चाहिए| 

उदाहरण के लिए आपका गुड्स ज्वलनशील है, पानी से बहुत जल्दी खराब होने वाला प्रोडक्ट है इत्यादि| 

इंश्योरेंस देने वाले को भी सारी छुपी नियम शर्ते बता देनी चाहिए| 

साथ ही साथ उसे किसी अन्य संबंधित समस्या के बारे में भी इंश्योरेंस लेने वाले को बता देना चाहिए| 

  1. बीमापात्र हित (insurable interest )

इंश्योरेंस ऐसे व्यक्ति को लेना चाहिए जिसको वास्तविक क्षति होने पर नुकसान लग रहा हो तथा वह उसी नुकसान की भरपाई के लिए इंश्योरेंस ले रहा हो| 

  1. निकटतम कारण (causa Proxima )

जिन जोखिमों का आपने इंश्योरेंस लिया है केवल उन्हीं जोखिमों के द्वारा होने वाले नुकसान की भरपाई इंश्योरेंस कंपनी द्वारा की जाएगी| 

उदाहरण:-  मान लीजिए आपने समुद्री डाकुओं द्वारा माल लूटे जाने का इंश्योरेंस नहीं लिया| 

तब आपको माल लूट जाने की स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी द्वारा कुछ नहीं मिलेगा| 

मरीन इंश्योरेंस के प्रकार कौन से हैं? | Types of marine insurance  

जब भी आप समुद्री जलमार्ग द्वारा कुछ सामान मंगाते हैं तो उसमें कई तरह का नुकसान होने संभव होते हैं| 

इन्हीं नुकसानों की भरपाई के लिए मरीन इंश्योरेंस में इन जोखिमों को सम्मिलित किया जाता है| 

चलिए! देखते हैं की ये कौन से जोखिमों है?

  1. पोत-बीमा (Ship or Hull insurance)

समुद्री जलमार्ग में जहाज के डूबने की आशंका हमेशा बनी रहती है| इसी जोखिम की भरपाई के लिए जहाज का बीमा किया जाता है| 

यानी,  पोत का नुकसान होने पर इंश्योरेंस कंपनी द्वारा उसकी भरपाई की जाएगी| 

  1. जहाज में लदे माल का बीमा (Cargo Insurance) 

कंटेनर में माल का नुकसान होने पर यह नुकसान कार्गो इंश्योरेंस द्वारा कवर किया जाता है| जैसे:- माल चोरी हो जाना, खराब हो जाना 

  1. भाड़ा बीमा (Freight Insurance)

फ्रेट इंश्योरेंस में  भाड़े के जोखिम को कवर किया जाता है|

यदि कोई गुड्स खराब स्थिति में ग्राहक के पास पहुंचता है तथा वे उसको लेने से मना कर देता है तब उसके पास तक पहुंचे किराए के जोखिम को कवर करने के लिए भाड़ा बीमा किया जाता है| 

नोट: यदि आप चाहें तो एक ही मरीन इंश्योरेंस में इन जोखिमों को कवर्ड कर सकते हैं| 

जरूरी सूचना

जो मेरे भाई लोग इंपोर्ट करते हैं, उन्हें मरीन इंश्योरेंस अपनी कंट्री में ही लेना चाहिए|  

ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि इंश्योरेंस का क्लेम में यदि कोई दिक्कत होती है तो आपको उस कंट्री में जाना पड़ेगा जहां से वह इंश्योरेंस पॉलिसी जारी की गई है| 

समुद्री बीमा पत्र की प्रमुख शर्तें क्या लिखी होती हैं?

क्योंकि समुद्री बीमा पत्र विभिन्न प्रकार के जोखिमों को हानि से बचाने के लिए बनाए जाते हैं इसलिए समुद्री बीमा कुछ शर्तों पर आधारित होता है| 

अतः इन बीमा पत्रों में किसी विशेष आवश्यकता को पूरा करने के लिए कुछ विशेष शर्ते लिखी जाती हैं|

 कुछ बीमा-पत्रों में चढ़ते एक समान होती हैं तथा कुछ शर्ते बीमा पत्र के प्रकृति के अनुसार बदलती रहती हैं| 

मरीन इंश्योरेंस की जरूरतों को देखते हुए अधिकतर मुद्रित बीमा की शर्तों में कुछ हेरफेर करना ही होता है| 

अतः छपे हुए बीमा पत्र की मूल भाषा में कोई परिवर्तन न करके नए खंड जोड़ दिए जाते हैं|

यह इस प्रकार होते हैं|

मैं इसमें कुछ जरूरी बिंदुओं को ही अंकित करूंगा| 

 नाम वाक्य (Name Sentence)

इस वाक्य में  एजेंट या उसका बीमा कराने वाले का नाम लिखा जाता है|  समुद्री  बीमा अधिनियम की धारा 23 के अनुसार, इसके लिए स्थान छोड़ दिया जाता है तथा  बाद में बीमा कराने वाले या एजेंट का नाम भर दिया जाता है|

बीमा- पत्र को वैधानिक रूप सामान्य होने के लिए इसमें जो खाली स्थान छोड़े गए हैं उन्हें भरा जाना आवश्यक होता है|

 यदि इसमें नाम ना भरा जाए तो यह महत्व इन होता है|

 जहाज का नाम वाक्य (Ship name sentence) 

बीमा- पत्र में जहाज का नाम लिखना अनिवार्य है|  यदि माल दूसरे जहाज में भेज दिया जाएगा तो बीमा कंपनी अपने दायित्व से मुक्त हो जाती है|

 परंतु रास्ते में माल की सुरक्षा के लिए पुराने जहाज के नाम के स्थान पर नए जहाज का नाम लिख दिया जाता है| 

हस्तांकन  वाक्य (Signature sentence)

इसके अनुसार समुद्र में हुई हानि का भुगतान उस व्यक्ति को होगा जिसका नाम क्षतिपूर्ति के समय बीमा-पत्र में लिखा होगा|

यानी कि नुकसान होने की स्थिति में पैसा किसको मिलेगा? 

मूल्यांकन वाक्य (Evaluation sentence)

इसमें बीमित की गई वस्तु का मूल्य लिखा जाता है| 

स्पर्श और टिकाव वाक्य (Touch and hold sentence)

इसमें यह लिखा जाता है कि जहाज किन-किन बंदरगाहों से होकर निकलेगा तब तक किन-किन बंदरगाहों पर रुक सकता है| 

क्षति हुई हो या नहीं वाक्य (Whether the damage occurred or not)

यह बिंदु आपको बहुत ध्यान से समझना चाहिए|  

इसके अनुसार कभी-कभी  मरीन इंश्योरेंस तब किया जाता है जब माल समुद्री यात्रा कर रहा हो| 

अब ऐसे में पक्षकारों को यही नहीं पता होता कि माल अभी तक सुरक्षित है या नहीं|

बीमा पत्र में यदि यह वाक्य सम्मिलित है तथा बीमा पत्र जारी रहने के पूर्व बीमित वस्तु को यदि क्षति पहुंच चुकी है तो दोनों पक्षकारों के अधिकारों और दायित्व पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा|

अर्थात बीमा कंपनी बीमादार को क्षति पूर्ति करेंगी|

यात्रा का वर्णन (Description of travel)

यदि बीमा पत्र में “ सिर्फ से”  लिखा हुआ हो  तो इंश्योरेंस कंपनी का दायित्व जहाज को बंदरगाह छोड़ने के बाद शुरू होगा|

 परंतु यदि “ पर और से”  वाक्य लिखा हो तो जहाज पर माल लदने के साथ ही बीमा कंपनी का दायित्व शुरू हो जाता है| 

चलिए! मैं ऐसे थोड़ी और अच्छी तरह समझा देता हूं|

 एक जहाज गुजरात बंदरगाह पर खड़ा हुआ है|

जहाज में यात्रा शुरू करने से पहले ही उसमें आग लग गई और वह जलकर नष्ट हो गया|

 अब यदि इंश्योरेंस पॉलिसी में “ पर और से”  लिखा हुआ होगा तो बीमा कंपनी को पैसे देने पड़ेंगे|

 परंतु यदि बीमा पत्र में केवल “ से”  वाक्य लिखा हुआ था तो ऐसे केस में बीमा कंपनी क्षतिपूर्ति के लिए उत्तरदाई नहीं होगी| 

example- Kandla Port पर से Port of Houston – अब इसमें माल लदने के साथ ही बीमा कंपनी का दायित्व शुरू हो जाता है|

प्रीमियम वाक्य (बीमा-मूल्य)

इसमें बीमा-प्रीमियम की राशि लिखी जाती है| 

समुद्र में किस प्रकार के जोखिम आ सकते हैं?

इन बिंदुओं को मैं इसलिए अंकित करना चाहता हूं ताकि यदि किसी को मरीन इंश्योरेंस लेना हो तो उसे सारे जोखिमों का ध्यान रहे|

 जब भी कोई व्यक्ति मरीन इंश्योरेंस करवाना चाहता हो तो वह इन बिंदुओं को ध्यान में रखकर आसानी से चुनाव कर सकता है कि उसे किस चीज का इंश्योरेंस कवर लेना चाहिए? या किस चीज का इंश्योरेंस कवर नहीं लेना चाहिए?

तो चलिए! दोस्तों शुरू करते हैं 

प्रकृति द्वारा उत्पन्न जोखिम 

  • जहाज का समुद्र के अंदर छुपे चट्टानों से टकराना
  • जहाज का तला रेत में फंस जाना 
  • किसी अन्य जहाज से टकरा जाना
  •  आंधी
  •  तूफान
  •  समुद्री जीवों द्वारा होने वाली हानि 

आग द्वारा आपत्तियां 

  • विस्फोट के कारण आग लग जाना 
  • बिजली गिरने से
  • जहाज को चलाने वाले कोयले या तेल द्वारा आग लग जाना 

मनुष्य द्वारा उत्पन्न आपत्तियां 

इसे दो भागों में बांट लेते हैं|

1- जहाज के व्यक्तियों द्वारा 2-  बाहरी व्यक्तियों द्वारा

जहाज के व्यक्तियों द्वारा

जेटिसन– यानी कि इसके अंदर जहाज का कप्तान यात्रियों को  आपत्ति से बचाने के लिए जहाज पर लदे हुए अतिरिक्त सामान को जहाज से बाहर फेंकने की प्रक्रिया को कहते हैं| 

बेरेट्री– जहाज में लदे माल में से चोरी करना,  जहाज में आग लगाना,  कप्तान द्वारा माल को समुद्र में फेंक ना,  जहाज में लगा  कुछ माल भेज देना, जहाज को लेकर कहीं भाग जाना,  माल बेचकर उसकी रकम खुद इस्तेमाल करना, बंदरगाह का शुल्क दिए बिना जहाज को रवाना कर देना|

यानी कि ऐसे कार्य जो जहाज के कप्तान द्वारा या मालिक की बिना अनुमति के किए जाते हैं बेरेट्री कहलाते हैं| 

नोट:- बेरेट्री द्वारा बीमा कंपनी द्वारा भुगतान जभी किया जाता है जब इसके विरुद्ध बीमा लिया गया हो| 

बेरेट्री के अंदर भी दो बातें होना आवश्यक है|

1-  यह कार्य जहाज के मालिक की बिना अनुमति को किया गया हो तथा मालिक को इस कार्य से नुकसान हुआ हो फायदा नहीं|

2- यह कार्य जहाज के कप्तान ने कर्मचारियों द्वारा जानबूझकर किया गया हो|

बाहरी व्यक्तियों द्वारा

इसे हम तीन भागों में बांट लेते हैं|

1- शत्रु,  समुद्री लुटेरे आदि का जोखिम

2- युद्ध का जोखिम

3- चोरी का जोखिम

शत्रु,  समुद्री लुटेरे आदि का जोखिम

इसके अंदर वह सभी व्यक्ति आते हैं जो जहाजों पर हथियारों के साथ हमला करते हैं तथा उस पर लगा हुआ माल लूट लेते हैं| 

युद्ध का जोखिम

एक देश दूसरे देश के माल को युद्ध के समय नष्ट कर सकता है| 

चोरी का जोखिम

इसका तात्पर्य समुद्री मार्ग में लुटेरों द्वारा हुई हानि से है|  यह चोरी खुलेआम तथा बल के साथ होनी चाहिए|

 जहाज के किसी यात्री या कर्मचारी द्वारा की गई चोरी को चोरी नहीं माना जाता है| 

FAQ: Marine insurance

Marine insurance क्या होता है?

समुद्री जलमार्ग में यात्रा के दौरान जोखिमों के विरुद्ध जो इंश्योरेंस लिया जाता है उसे मरीन इंश्योरेंस कहते हैं|

अग्नि बीमा और Marine insurance के बीच क्या अंतर होता है?

अग्नि बीमा आग के जोखिमों के विरुद्ध लिए जाते हैं और समुद्री बीमा  समुद्री जलमार्ग को के जोखिमों के विरुद्ध लिया जाते हैं|

Marine insurance: समुद्री जोखिम क्या है?

समुद्री जोखिमों से अभिप्राय-  जहाजों की आपस में टक्कर,  तूफानों द्वारा जहाज का डूब जाना,  समुद्री लुटेरों द्वारा व्यापारिक जहाजों को लूट लिया जाना, पोत में आग लग जाना, माल भाड़े का नुकसान –  इत्यादि से होता है|

Marine insurance: समुद्री बीमा कानून को किस नाम से जाना जाता है?

समुद्री-बीमा अधिनियम, 1963 ( Marine Insurance Act, 1963 )

Marine insurance के प्रकार कौन से हैं? 

पोत-बीमा (Ship or Hull insurance), जहाज में लदे माल का बीमा (Cargo Insurance), भाड़ा बीमा (Freight Insurance) – मरीन इंश्योरेंस के प्रकार हैं|

Marine insurance लेने के क्या फायदे हैं?

यदि आपका कुछ समय समुद्री जलमार्ग के द्वारा जा रहा है|  आपने उस माल के विरुद्ध मरीन इंश्योरेंस किया हुआ है|  इस इंश्योरेंस में आपने पोता डूबना,  आग लगना,  लुटेरों द्वारा माल को लूट लेना इत्यादि जोखिमों को कवर किया हुआ है|  अब यदि इनमें से किसी भी प्रकार का नुकसान आपके माल को लगता है तो उस  नुकसान की भरपाई इंश्योरेंस कंपनी द्वारा की जाएगी|

Marine insurance क्या इंश्योरेंस कंपनी द्वारा जीतने का इंश्योरेंस किया है कंपनी उतने का क्लेम दे देती है? 

जी नहीं,  मान लीजिए आपका ₹100 का माल का इंश्योरेंस आपने किया हुआ था|  अब आप का नुकसान हुआ ₹50 का|
 तो बीमा कंपनी केवल वास्तविक नुकसान का हर्जाना देगी|
 यानी, बीमा कंपनी आपको उस स्थिति में खड़ा कर देगी जिस स्थिति में आप इंश्योरेंस लेने से पहले थे| 

यदि Marine insurance में मेरा कुछ माल चोरी हो जाता है, कंपनी उसका क्लेम भी दे देती है, कुछ दिनों बाद में है माल प्राप्त हो जाता है तो उस माल पर किस का मालिकाना हक होगा?

इंश्योरेंस कानून के अनुसार- “ जब कंपनी द्वारा बीमित माल की क्षतिपूर्ति कर दी जाती है उसके बाद उस माल पर वह सारे मालिकाना अधिकार इंश्योरेंस कंपनी को स्थानांतरित हो जाते हैं|”  याने की प्राप्त माल पर इंश्योरेंस कंपनी का अधिकार होगा|

Marine insurance: जेटिसन क्या होता है?

जब व्यक्तियों को आपत्ति से बचाने के लिए अतिरिक्त सामान को जहाज के कप्तान द्वारा आदेश दिया जाता है कि इसे समुद्र में फेंक दें-  इस प्रक्रिया को जेटिसन कहते हैं|

Marine insurance: बेरेट्री किसे कहते हैं? 

बेरेट्री-  जहाज में आग लगाना,  जहाज में लदे माल में से चोरी करना, कप्तान द्वारा माल को समुद्र में फेंक ना,  जहाज को लेकर कहीं भाग जाना, जहाज में लगा  कुछ माल भेज देना, माल बेचकर उसकी रकम खुद इस्तेमाल करना, बंदरगाह का शुल्क दिए बिना जहाज को रवाना कर देना|
यानी कि इस प्रकार के कार्य जो जहाज के  मालिक या कप्तान की बिना अनुमति के किए जाते हैं बेरेट्री कहलाते हैं| 

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आपने क्या सीखा?

इस लेख के द्वारा  आपको समुद्री बीमा क्या होता है? (What is marine insurance), मरीन इंश्योरेंस में मुख्यतः किन-किन चीजों को कवर किया जाना चाहिए?, समुद्री बीमा पत्र की प्रमुख शर्तें क्या लिखी होती हैं?, समुद्र में किस प्रकार के जोखिम आ सकते हैं? इत्यादि विषयों को समझा है|

आशा करता हूं मेरा यह लेख आपको पसंद आया होगा|

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 धन्यवाद 

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