एलएलपी Vs पार्टनरशिप फर्म Vs प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के बीच अंतर जानें | llp Full Form

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इस पोस्ट में आप जानेंगे की llp क्या होती है? LLP full form क्या होती है?, एलएलपी का क्या अर्थ होता है? तथा लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म कैसे खोलें? यह परंपरागत पार्टनरशिप से किस प्रकार अलग होती है? इत्यादि

जब भी हम कोई अपना नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं या कोई नई कंपनी बनाना चाहते हैं तब हमारे दिमाग में कई तरह के कई प्रश्न आते है कि

जैसे की: हम किस प्रकार की कंपनी बनाएं?, क्या हमें प्रोपराइटरशिप फर्म बनानी चाहिए? या पार्टनरशिप फर्म खोलनी चाहिए?, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप शुरू करें?, वन पर्सन कंपनी बनायें? प्राइवेट लिमिटेड कंपनी खोले?, या हमें सेक्शन 8 कंपनी खोलनी चाहिए? 

तो दोस्तों, इन्हीं सवालों के जवाब आपको इस पोस्ट में मिलेंगे| 

  • यदि आप अकेले स्वामित्व वाला व्यवसाय करना चाहते हैं तो आप प्रोपराइटरशिप फर्म रजिस्टर्ड कराकर बिजनेस शुरू कर सकते हैं|
  • अगर आप दो या दो से ज्यादा लोग एक साथ व्यवसाय करने के बारे में सोच रहे हैं तो आपके सामने तीन विकल्प होते हैं|
  1. पार्टनरशिप फर्म
  2. LLP (LIMITED LIABILITY PARTNERSHIP) एलएलपी 
  3. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी 

इस पोस्ट में मैं आपको लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप के बारे में बताऊंगा| 

Limited liability partnership को हम short में LLP (एलएलपी) भी बोलते हैं| 

इस पोस्ट के माध्यम से आपको यह भी पता चलेगा कि llp किस प्रकार पारंपरिक साझेदारी फर्म तथा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के साथ किस प्रकार मुकाबला करती है|

साथ ही साथ आपको इन सवालों के भी जवाब मिल जाएंगे|

किस प्रकार के व्यवसाय में हमें पार्टनरशिप फर्म स्टार्ट करनी चाहिए? कैसा बिजनेस हमें LLP (Limited liability partnership) के साथ स्टार्ट करना चाहिए? तथा किस प्रकार का बिजनेस समय प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के साथ में शुरू करना चाहिए?

इसके लिए दोस्तों इस पोस्ट को कृपया पूरा पढ़ें|

तो चलिए दोस्तों!  शुरू करते हैं आज का हमारा टॉपिक – LLP (limited liability partnership) 

साथ ही इसे अवश्य पढ़ें:

स्मॉल कंपनी क्या होती है? इसकी परिभाषा तथा फ़ायदे क्या हैं? तथा कौन सी कंपनी स्मॉल कंपनी मानी जाएगी

llp full form

सबसे पहले हम बात करते हैं एलएलपी फुल फॉर्म llp full form क्या होती है?

llp full form: “Limited liability partnership”

llp full form जानने के बाद हमको llp meaning क्या होता है? इसके बारे में भी जान लेना चाहिए|

LLP meaning in Hindi | What is LLP in Hindi | LLP means in Hindi

चलिए दोस्तों!! अब! बात करते हैं llp meaning की इसके साथ ही हमे llp का अर्थ भी समझ में आ जाएगा|

सबसे पहले इसे अच्छी तरह समझने के लिए इसके अलग-अलग शब्दों के अलग-अलग अर्थ समझ लेते हैं!

Limited meaning in Hindi: “सीमित, लिमिटेड, परिसीमित, मर्यादित, परिमित, घिरा हुआ, संकीर्ण, तंग, सीमाबद्ध, कोताह, संकुचित”

Liability meaning in Hindi: “दायित्व, देनदारी, आर्थिक दायित्व, आर्थिक जिम्मेदारी, देयता, उत्तरदायित्व, ऋण, जवाबदेही, जिसके लिए उत्तरदायित्व हो”

Partnership meaning in Hindi: “भागीदारी, साझेदारी, सहकारिता, सम्मिलित धंधा, भागिता, सहभागिता”

LLP meaning in Hindi: Limited liability partnership को मिलाकर इसका अर्थ निकलता है: “सीमित दायित्व भागीदारी” या “सीमित देयता भागीदारी”

Limited liability partnership की परिभाषा या एलएलपी का अर्थ होता है: “2 या 2 से अधिक लोगों का किसी एक ही व्यवसाय में संयुक्त रूप से सीमित दायित्व के साथ साझेदारी होना” 

इसके साथ ही आपको Firm का हिन्दी अर्थ भी पता होना चाहिए इससे आपका थोड़ा सा और ज्ञानवर्द्धन होगा|

Firm meaning in Hindi: फर्म, व्यवसाय-प्रतिष्ठान, प्रतिष्ठान, कंपनी, कम्पनी, व्यापारिक कंपनी, साझे का व्यवसाय, व्यवसाय-संघ, पेड़ी, कोठी, दृढ़, ठोस, स्थिर, अटल, मज़बूत, कठोर, स्थायी, स्थित, अचल, संगीन”

आशा करता हूं आप एलएलपी क्या होता है? इसके बारे में अच्छी तरह समझ गए होंगे|

 चलिए! आगे बढ़ते हैं|

एल एल पी बनाने का विचार कहां से आया?

LLP के आने से पहले यदि 2 या 2 से ज्यादा लोग एक साथ किसी व्यवसाय को करना चाहते थे तो उनके पास केवल दो चॉइस रहती थी|

1-  पार्टनरशिप फर्म 2- प्राइवेट लिमिटेड कंपनी

पार्टनरशिप फर्म के अपने फायदे होते हैं तथा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के अपने फायदे होते हैं|

पार्टनरशिप फर्म में लचीलापन बहुत अधिक होता है| जैसे कि:- आप एक ही दिन में अपनी फर्म स्टार्ट कर सकते हैं| कंप्लायंसेज बहुत कम होते हैं| 

इसी के मुकाबले प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कंप्लायंस से तो ज्यादा होते हैं परंतु आपका व्यवसाय पेशेवर लगता है| साथ ही साथ यदि आप भविष्य में अधिक पूंजी अपने बिजनेस के लिए इकट्ठा करना चाहते हैं तो यह भी संभव हो जाता है| 

अब लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप के अपने फायदे होते हैं तथा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के अपने फायदे होते हैं| इन दोनों के मिश्रण द्वारा ही LLP (Limited liability partnership) का निर्माण हुआ| 

लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप नियंत्रित होती है- LLP ACT 2008  के द्वारा 

limited liability partnership की कुछ खास बातें

  • प्राइवेट लिमिटेड कंपनी  के रजिस्ट्रेशन की तरह ही llp  का रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है|
  • llp registration भी ROC  के द्वारा ही होता है|
  • एलएलपी के लिए कम से कम 2 पार्टनर तथा दो डायरेक्टर होने अनिवार्य है|
  • LLP के लिए मैक्सिमम पार्टनर की कोई अधिकतम सीमा संख्या निर्धारित नहीं की गई है| 
  • लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप में विदेशी पार्टनर की भी अनुमति है|
  • LLP में भी Perpetual succession का सिद्धांत लागू होता है| जिससे इसकी वैल्यू और बढ़ जाती है जबकि पार्टनरशिप फर्म में ऐसा नहीं होता| 

साथ ही इसे अवश्य पढ़ें: सेक्शन 8 कंपनी क्या होती है?

LLP VS Partnership Firm VS Private limited company

पार्टनरशिप फर्म, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप तथा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का अंतर समझाने के लिए मैं आपको एक चार्ट बना कर दे देता हूं| 

इस चार्ट के द्वारा आप आसानी से अपनी जरूरत के हिसाब से आपको किस प्रकार की कंपनियां फार्म खोलने चाहिए यह निर्णय कर पाएंगे| 

LLP VS Partnership Firm VS Private limited company अंतर चार्ट

S.no.PointsPartnershipLLPPVT. LTD. CO.
1)Liability of partnersपार्टनरशिप फर्म में सभी पार्टनर की अनलिमिटेड लायबिलिटी होती है|यानी कि साधारण भाषा में यदि मैं समझाऊं तो किसी भी लोन या कर्ज को चुकाने के लिए सभी पार्टनर्स की पर्सनल संपत्ति को भी बेचा जा सकता है| नोट:- इसी कारण से मैं इसे Disadvantage की श्रेणी में डाल रहा हूं| लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप  में पार्टनर्स की लायबिलिटी लिमिटेड होती है|कर्जा चुकाने के लिए पार्टनर्स की संपत्ति को बेचा नहीं जा सकता|  कंपनी के नाम पर जितनी भी संपत्ति है केवल उनको ही बेचा जा सकता है| प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में भी लायबिलिटी लिमिटेड होती है|किसी भी प्रकार के कर्ज की नीलामी के समय केवल कंपनी की संपत्ति को ही बेचा जा सकता है| शेयर होल्डर की संपत्ति को नहीं बेच सकते|
2)Joint Liabilityपार्टनरशिप फर्म ए ज्वाइंट लायबिलिटी होती है| उदाहरण के लिए:-  यदि रमेश, महेश तथा सुरेश किसी कंपनी में पार्टनर हैं|रमेश का 60 परसेंट का शेयर हैं|महेश तथा सुरेश का 20-20 परसेंट का शेयर है|अब किसी कर्ज को चुकाने के लिए रमेश के पास एक भी रुपए की संपत्ति नहीं है| ऐसी स्थिति में महेश तथा सुरेश की सारी संपत्ति  बेचकर उस कर्ज को चुका या जाएगा|नोट:- इसी कारण से मैं इसे भी Disadvantage की श्रेणी में डाल रहा हूं| इसमें ज्वाइंट लायबिलिटी नहीं होती| केवल जितने प्रतिशत  के शेयर हैं उतनी ही देनदारी होती है| इसमें भी ज्वाइंट लायबिलिटी नहीं होती| केवल जितने प्रतिशत के शेयर हैं उतनी ही लायबिलिटी होती है| 
3)Compliance(Roc, Audit, Tax)पार्टनरशिप फर्म में इस प्रकार के अनुपालन (compliances) बहुत ही कम होते हैं लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप में इस प्रकार के अनुपालन (compliances)  पार्टनरशिप फर्म के मुकाबले ज्यादा होते हैं तथा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मुकाबले कम होते हैं|नोट:-  यह टर्नओवर बढ़ने पर भी बढ़ सकते हैं| प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को इस प्रकार के सभी अनुपालन करने अनिवार्य हैं| 
4)Governmentपार्टनरशिप पर में एक डीड बनाई जाती है|इस डीड में पार्टनर की हिस्सेदारी तथा अन्य प्रकार की फर्म की अंदरूनी जिम्मेदारियों का जिक्र होता है| इसी प्रकार लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप में भी एग्रीमेंट के आधार पर कुछ चीजें तय हो जाती हैं| इसमें प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मुकाबले कम डाक्यूमेंट्स की जरूरत होती है| प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में एक मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MoA) बनाया जाता है|एक दूसरा  डॉक्यूमेंट आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन (AoA) बनाया जाता है| इसमें एक शेयर होल्डर एग्रीमेंट भी बनाया जाता है| 
5)Ownership & MGMT.पार्टनरशिप फर्म के अंदर जो पार्टनर होते हैं वही फर्म  के मालिक होते हैं तथा पार्टनर्स के द्वारा ही बिज़नेस का संचालन किया जाता है| llp में भी  सारा मालिकाना हक पार्टनर्स का होता है तथा कंपनी का संचालन भी पार्टनर के द्वारा ही किया जाता है| प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में मालिक तथा मैनेजमेंट अलग-अलग हो सकते हैं| 
LLP VS Partnership Firm VS Private limited company

नोट: यदि आप आम जनता के द्वारा धन इकट्ठा करना चाहते हैं तो आपको पब्लिक लिमिटेड कंपनी खोलनी पड़ेगी क्योंकि इसमें आप IPO के माध्यम से बहुत अधिक धन भी इकट्ठा कर सकते हैं! साथ ही आप किसी आईपीओ (IPO में निवेश की रणनीति) में पैसा लगाकर कंपनी में हिस्सेदार भी बन सकते हैं|

एल एल पी कैसे शुरु करें? |How to start llp (Limited liability partnership)

LLP को स्टार्ट करने के लिए आपको निम्न प्रकार के स्टेप्स लेने पड़ेंगे| 

  • DIN or DPIN के लिए एप्लीकेशन देनी पड़ेगी|
  • MCA के द्वारा आपको Digital signature certificates (DSC) रजिस्टर करना पड़ेगा|
  • ई फॉर्म भरने के लिए न्यू यूजर रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा|
  • LLP के लिए नाम रजिस्टर्ड करवाना पड़ेगा|
  • एलएलपी एग्रीमेंट भरना पड़ेगा| 

एल एल पी को बंद कैसे करें? | How to close llp (Limited liability partnership)

एलएलपी को बंद करने के लिए आपको कुछ स्टेप्स लेने पड़ेंगे|

  1. Form 24 भरकर जमा कराना होगा|
  2. व्यवसायिक गतिविधि रोकनी होगी|
  3. बैंक खाता बंद करने होंगे|
  4. Affidavits & Declaration फॉर्म बनवाना होगा|
  5. फॉर्म 24 के साथ इनकम टैक्स रिटर्न तथा एलएलपी डीड जरूर लगी होनी चाहिए तथा बिल्कुल लेटेस्ट होनी चाहिए|
  6. सभी प्रकार के पेंडिंग डॉक्युमेंट्स को clear कर देना चाहिए|
  7. Chartered Accountant का Certificate अवश्य लगा होना चाहिए|

लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप के लिए क्या-क्या डॉक्युमेंट्स चाहिए? | Documents required for LLP 

  • LLP Agreement की कॉपी फर्म PAN CARD के साथ
  • सभी पार्टनर्स के फोटोग्राफ, PAN card तथा आधार कार्ड  
  • बैंक डीटेल – बैंक स्टैट्मन्ट या कैन्सल चैक 
  • मुख्य आवास स्थान का Address proof और बिज़नेस के अन्य स्थानों की डीटेल 

खुद के ऑफिस के लिए – बिजली के बिल/landline bill/ पानी का बिल / MUNICIPAL CORPORATION property tax receipt

किराये के ऑफिस के लिए – रेंट अगगरेमेंट और बिजली के बिल की कॉपी / संपत्ति के कानूनी दस्तावेज़ (Property Legal Document)

  • Board resolution copy, साझीदारों (Partners) के अग्रीमेंट की कॉपी (With Digital Signature & Director Identification number, DIN), Registration Certificate of the LLP, 
  • Proof of appointment of authorized signatory- letter of authorization

साथ ही इसे अवश्य पढ़ें: एक्सपोर्ट इंपोर्ट बिज़नेस कैसे शुरू करें?

निष्कर्ष 

अब हम बात करते हैं कि हमें अपने बिजनेस के लिए किस प्रकार के प्लेटफार्म को अपनाना चाहिए| 

  • छोटे बिजनेस के लिए पार्टनरशिप फर्म खोल सकते हैं|  हस्बैंड-वाइफ भी पार्टनरशिप फर्म खोल सकते हैं, दोस्त मिलकर भी पार्टनरशिप फर्म खोल सकते हैं परंतु यह सभी पार्टनर विश्वासपात्र होना चाहिए|  
  • यदि आप प्रोफेशनल तरीके से काम करना चाहते हैं और आपके पास में सही प्रकार से बिजनेस करने का अनुभव भी है साथ ही साथ आप कम से कम फॉर्मेलिटी के साथ बिजनेस करना चाहते हैं तो आप लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप को चुन सकते हैं| 
  • यह बिजनेस करने का सबसे प्रोफेशनल तरीका होता है| जब भी अपने व्यवसाय को आप बड़ा करना चाहते हैं वह आपके साथ को जॉइंट वेंचर करना चाहता है तो वह L.L.P.  के मुकाबले प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को ज्यादा तवज्जो देता है|

क्योंकि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में शेरहोल्डर्स की जिम्मेदारी तय होती है तथा मालिक और मैनेजमेंट में अंतर होता है| 

FAQs: LLP

क्या किसी पार्टनरशिप फर्म को एलएलपी में परिवर्तित कर सकते हैं?

जी हां, पहले से चल रही किसी पार्टनरशिप फर्म को एलएलपी में कन्वर्ट किया जा सकता है|

क्या पहले से चल रही किसी प्राइवेट कंपनी को एलएलपी में परिवर्तित किया जा सकता है?

जी हां,  पहले से चल रही प्राइवेट कंपनी को एलएलपी में परिवर्तित किया जा सकता है| 

क्या कोई विदेशी एलएलपी में पार्टनर हो सकता है?

जी हां,  विदेशी व्यक्ति l.l.p. में पार्टनर हो सकता है|

क्या एलएलपी के लिए जीएसटी लेना अनिवार्य है?

जी हां,  एलएलपी के लिए जीएसटी लेना अनिवार्य है|

क्या एलएलपी एक अच्छा आईडिया है?

जी हां यह पारंपरिक पार्टनरशिप से अच्छा आईडिया है|

क्या पति-पत्नी एलएलपी में पार्टनर हो सकते हैं?

जी हां,  पति-पत्नी l.l.p. में पार्टनर हो सकते हैं| 

पार्टनरशिप फर्म के मुकाबले एलएलपी का सबसे बड़ा फायदा क्या है?

पार्टनरशिप फर्म में अनलिमिटेड लायबिलिटी होती है जबकि एलएलपी में लिमिटेड लायबिलिटी होती है|

कौन सा फीचर एलएलपी को पार्टनरशिप फर्म के मुकाबले यूनिक बनाता है? 

पर्पेच्ऊअल सकसेशन एलएलपी को पार्टनरशिप से यूनीक बनाता है| 

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धन्यवाद

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