लैटर ऑफ क्रेडिट क्या होता है? | Letter of credit कैसे काम करता है?: LC के फ़ायदे

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दोस्तों, इस पोस्ट के माध्यम से मैं आपको Letter of credit के विषय में बताऊंगा| इसके साथ ही लैटर ऑफ क्रेडिट किस प्रकार काम करता है? इसके विषय में भी आपको सारी जानकारी दूंगा| 

तो चलिए दोस्तों, शुरू करते हैं!

लेटर ऑफ क्रेडिट क्या है?

हमारे दिमाग में Letter of credit का ख्याल आते ही सबसे पहले यह सवाल दिमाग में आता है की “What is LC?” या ”letter of credit meaning” क्या होता है?

आइए! सबसे पहले लैटर ऑफ क्रेडिट का हिन्दी अर्थ जानते हैं!

letter of credit meaning in Hindi: “साख-पत्र, साखपत्र उधारपत्र, रेहन का पत्र, गिरवी का पत्र, साखपत्र “

हम क्रेडिट का हिन्दी अर्थ भी जान लेते हैं|

Credit meaning in Hindi: “उधार, बैंक के खाते मे जमा राशि, बैंक द्वारा उधार दी गयी राशि, ख्याति नेकनामी, श्रेय लेना, विश्वास भरोसा, विश्वास दिलाना, श्रेय देना, मान्यता, किसी खाते में जमा करना, साख, प्रत्यय, जमा धन, आकलन करना, (धन) जमा करना, जमा खाते लिखना, प्रसिद्धि”

Letter Of Credit | Page Contents
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What is LC full form

तो दोस्तों, अब! लैटर ऑफ क्रेडिट की फुल फॉर्म क्या होती है? भी जान लेते हैं|

LC full form: “Letter of credit”

अब! बात करते हैं “What is a letter of credit?” या “letter of credit meaning” से तात्पर्य एक non fund based credit guarantee से होता है जो किसी bank द्वारा दी जाती है| 

परंतु यह बैंक गारंटी से बिल्कुल भिन्न होती है बहुत से लोग इसमें कंफ्यूज हो जाते हैं इसलिए वह letter of credit तथा bank guarantee को एक ही चीज समझने लगते हैं|

यह दोनों अलग-अलग financial instruments है तथा इनका उद्देश्य भी अलग-अलग होता है| जब हम export import करते हैं तो हमें ना तो अपने ग्राहक पर भरोसा होता और ना ही ग्राहक को हम पर भरोसा नहीं होता |

इसके साथ ही ऐसा भी होता है कि आपके पास में एकदम से पैसा ना हो, अपनी गुड्स की पेमेंट करने के लिए|

अब exporter बिना पैसे लिए तो आपको product export नहीं करेगा और आप भी चाहते हैं कि प्रोडक्ट आपके पास आ जाए जब आप पेमेंट करें|

Buyer और Seller एक दूसरे को ट्रस्ट नहीं करते| 

Buyer सोचता है कि “यदि मैंने पैसे दे दिए तो हो सकता है Seller माल ना भेजें या टाइम पर न भेजे|”

यही Seller सोचता है कि “यदि मैंने माल भेज दिया तो हो सकता है Buyer पेमेंट ना करें या टाइम पर पेमेंट न करे|” 

ऐसी स्थिति से निपटने के लिए लैटर ऑफ क्रेडिट का इस्तेमाल किया जाता है| यह export import करने का एक सेफ तरीका है|

इसमें बैंक द्वारा एक गारंटी हो जाती है कि Buyer Seller को पेमेंट देगा तथा Seller Buyer को प्रोडक्ट की सप्लाई करेगा|

कुछ क्राइटेरिया पूरे होने के बाद बैंक ही seller को पेमेंट कर देता है| इसके लिए आपको लैटर ऑफ क्रेडिट की सारी नियम शर्तें पूरी करनी होती है|

जैसे की:- गुड्स को शिप करने के बाद डॉक्यूमेंटस को बैंक में प्रजेंट करना होता है|

इस तरीके से सारा प्रोसेस कंप्लीट होता है|

लैटर ऑफ क्रेडिट में दो-तीन बैंक involve हो जाते हैं|

तो आइए! विस्तार से समझते हैं यह पूरा प्रोसेस कैसे होता है?

Letter of credit video

letter of credit | letter of credit procedure explained in Hindi

लैटर ऑफ क्रेडिट कैसे काम करता है? (letter of credit process chart)

इस इमेज के माध्यम से भी letter of credit का पूरा प्रोसेस समझाया गया है| आप आसानी से देखकर भी इस प्रोसेस को समझ सकते हैं!

letter of credit process step by step

आइए दोस्तों, अब letter of credit का process चरणबद्ध तरीके से समझते हैं|

LC process Step 1: ग्राहक तथा विक्रेता को क्या कहते हैं?

Buyer/Importer को इसमे Applicant कहा जाएगा|

Seller/Exporter को इसमे Beneficiary कहा जाएगा|

Applicant अपने बैंक के पास जाएगा तथा उससे लैटर ऑफ क्रेडिट की रिक्वेस्ट करेगा|

इस प्रोसेस को LC Open भी कहते हैं| 

यह बैंक Opening Bank/Issuing Bank कहलायेगा| 

आपको लैटर ऑफ क्रेडिट के सभी टाइप्स के बारें में भी पता होना चाहिए – जानने के लिए पढ़ें – लैटर ऑफ क्रेडिट के सभी प्रकार

Step 2: Bank का क्या रोल होता है?

  • इसमें एक Beneficiary का बैंक भी शामिल होता है इसे Advising Bank कहते हैं| 
  • Advising Bank को Opening Bank/Issuing Bank लैटर ऑफ क्रेडिट भेज देगा|
  • Beneficiary Bank (Advising Bank) इसकी सत्यता की जांच करेगा कि क्या यह सही है? जैसे की:- नाम सही है?,  प्रोडक्ट का नाम सही है? इत्यादि

Step 3: Bank LC को कहाँ भेजेगा?

  • Advising Bank इस लैटर ऑफ क्रेडिट को Seller/Beneficiary के पास भेज देगा|
  • अब सेलर को विश्वास हो जाता है कि Buyer Genuine है क्योंकि इसमें बैंक की इंवॉल्वमेंट हो जाती है|

Step 4: Seller को Bill Of Lading (BL) कब मिलता है?

  • Seller को अपनी पेमेंट सेफ लगने लगती है तथा वह गुड्स को एक्सपोर्ट कर देता है| 
  • क्योंकि एक्सपोर्ट Goods को Buyer तक पहुंचने में टाइम लगता है इस बीच यह प्रोसेस भी जारी रहता है| 
  • Goods Ship होने पर Bill Of Lading (BL) Seller को मिलता है| 

Step 5: Bill Of Lading मिलने के बाद क्या करना होता है?

  • इस Bill Of Lading को Seller Nominated Bank/Negotiating Bank में जमा करवाता है| 
  • यह  Nominated Bank/Negotiating Bank अलग भी हो सकता है तथा Advising Bank  भी हो सकता है|
  • Nominated Bank/Negotiating Bank चेक करता है कि कहीं डाक्यूमेंट्स में कुछ कमी तो नहीं रह गई है| छोटी मोटी त्रुटि होने पर वह भुगतान रोक सकता है या वह ठीक हो सकती हो तो उसके लिए कुछ चार्ज लेता है|
  • इसलिए आपको लैटर ऑफ क्रेडिट में किन-किन चीजों का ध्यान रखना है यह पता होना चाहिए| 
  • इन्हे जानने के लिए पढ़ें – लैटर ऑफ क्रेडिट में नियम एवं शर्तें
  • सारे डॉक्यूमेंट सही होने के बाद Nominated Bank/Negotiating Bank सेलर को पेमेंट कर देता है|

Step 6: सारे डॉक्युमेंट्स जमा होने के बाद बैंक क्या करता है?

  • Nominated Bank/Negotiating Bank सारे डाक्यूमेंट्स को Opening Bank/Issuing Bank में भेज देता है और पेमेंट की डिमांड करता है| 
  • Opening Bank/Issuing Bank यह सारे डाक्यूमेंट्स Applicant/Buyer/Importer को भेज देता है तथा अप्रूवल लेता है|
  • Applicant/Buyer/Importer चेक करता है कि जो प्रोडक्ट उसने मंगाया था वही प्रोडक्ट है, सारी डिटेल सही है या नहीं? 

Step 7: अप्रूवल मिलने के बाद opening bank क्या करता है?

  •  Applicant/Buyer/Importer का अप्रूवल मिलने के बाद Opening Bank/Issuing Bank ऐप्लिकन्ट से पेमेंट की डिमांड करता है|

Step 8: Importer किसको पेमेंट करता है?

  •  Applicant/Buyer/Importer अपनी पेमेंट Opening Bank/Issuing Bank को देता है| 

Final Step 9: सेलर को अपनी पेमेंट कब मिलती है?

चलिए अब! letter of credit process final step भी जान लेते हैं|

  • Opening Bank/Issuing Bank यह पेमेंट Nominated Bank/Negotiating Bank को दे देता है| 

इस प्रकार पूरी ट्रांजैक्शन कंप्लीट हो जाती है|

seller को अपनी पेमेंट मिल जाती हैं तथा Buyer को अपने गुड्स मिल जाते हैं|

कुछ अन्य त्रुटियां 

कभी-कभी Advising Bank किन्ही कारणों से Opening Bank/Issuing Bank पर भरोसा नहीं करता या तो उसे वह बैंक छोटा लगता है या फिर उसकी Credit Rating उसे ठीक नहीं लगती|

 तब वह Opening Bank/Issuing Bank से कहता है कि आप किसी बड़े बैंक से या जिसकी क्रेडिट रेटिंग अच्छी हो उससे Guarantee की डिमांड करता है|

यह गारंटी देने वाला बैंक Confirming Bank कहलाता है|

अब यदि Opening Bank/Issuing Bank किसी केस में लैटर ऑफ क्रेडिट के ऊपर डिफॉल्ट करता है तो Confirming bank सारी पेमेंट करता है| 

क्या बैंक LC जारी करने के बदले में कुछ लेता है?

अब! आपके मन में प्रश्न आ रहा होगा की क्या Bank, Letter Of Credit Collateral & Charges भी लेता है?

  • जब भी कोई बैंक लैटर ऑफ क्रेडिट issue करता है तो वह Collateral के against ही करता है| जैसे की:- बैंक डिपॉजिट, फिक्स डिपाजिट इत्यादि|
  • लैटर ऑफ क्रेडिट जारी करने के बदले में बैंक हमेशा कुछ चार्जेस लेता है| चार्जेस इस बात पर निर्भर करते हैं कि लैटर ऑफ क्रेडिट किस प्रकार का है?
  • क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इस्तेमाल होता है इसलिए इंटरनेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) द्वारा गाइडलाइंस जारी की जाती हैं|

यदि एल सी में गलती हो जाए तो क्या होगा? (Correctness Of LC or amendment in lc)

  • Name of seller, Date, Amount, product name, quantity इत्यादि अच्छी तरह लिखा होना चाहिए|
  • Precise and clear सब कुछ साफ-साफ भाषा में लिखा होना चाहिए कुछ भी स्पेलिंग की गलती नहीं होनी चाहिए|
  • Seller का नाम, Product के नाम में स्पेलिंग मिस्टेक होने पर बैंक पेमेंट नहीं करता| 
  • शिपिंग तय टाइम पर ना होने में भी बैंक पेमेंट नहीं करेगा|
  • इस सारे प्रोसेस में बैंक केवल डाक्यूमेंट्स को चेक करता है यदि सारे डाक्यूमेंट्स में सब डिटेल क्लियर है तो पेमेंट मिल जाएगी|  बैंक का goods और services से कोई मतलब नहीं होता| यानी गुड्स में डिफेक्ट होने या सर्विस खराब होने पर बैंक पेमेंट नहीं रोकता| 
  • यदि कोई गुड्स डैमेज आ जाता है या कम आ जाता है तो उसकी जिम्मेदारी बैंक की नहीं होती वह ग्राहक और विक्रेता आपस में ही सॉल्व करेंगे| 

लैटर ऑफ क्रेडिट के क्या फ़ायदे हैं? (Advantages Of LC)

  • यदि Buyer Default  कर जाता है तो Seller को बैंक पेमेंट कर देगा| 
  • Buyer ऑर्डर कैंसिल नहीं कर सकता यदि करता भी है तो बैंक आपको पेमेंट करेगा इस कारण से प्रोडक्शन रिस्क खत्म हो जाता है| 
  • Buyer को इस बात का भरोसा हो जाता है कि उसको प्रोडक्ट सही समय पर प्राप्त होगा| 
  • विक्रेता को पेमेंट करने के लिए थोड़ा सा टाइम मिल जाता है| 

Types

एक्सपोर्ट इम्पोर्ट बिजनेस में हम लैटर ऑफ क्रेडिट को lc भी कहते हैं|

  • Commercial Letter Of Credit
  • Standby Letter of credit
  • Revocable LC
  • Unconfirmed LC
  • Transferable LC
  • Back to Back LC
  • Red Clause LC
  • Green Clause LC
  • Revolving LC
  • Sight LC
  • Deferred Payment LC (or Usance LC)

FAQ: Letter Of Credit

क्या letter of credit एक सेफ तरीका है एक्सपोर्ट इंपोर्ट करने के लिए?

जी हां, लैटर ऑफ क्रेडिट के द्वारा आपको इस बात की एश्योरेंस मिल जाती है कि आपकी पेमेंट डूबेगी नहीं

यदि मेरा सामान टूटा हुआ या डिफेक्ट मिले तो क्या Buyer letter of credit की पेमेंट रोक सकता है?

जी नहीं, Buyer आपकी पेमेंट नहीं रोक सकता परंतु हर समस्या में कुछ ना कुछ असाधारण नियम भी होते हैं|
दूसरी बात सबसे ज्यादा पेमेंट क्लोज fob खुला हुआ होता है यानी कि free on board पर seller अपनी पेमेंट को पाने के लिए अधिकृत हो जाता है तो फिर Buyer माल कैसे चेक करेगा? 

letter of credit के लिए क्या-क्या जानना जरूरी है?

लैटर ऑफ क्रेडिट टाइप्स, लैटर ऑफ क्रेडिट प्रोसेस, लैटर ऑफ क्रेडिट नियम शर्तें और लैटर ऑफ क्रेडिट पेमेंट टर्म्स

letter of credit issue करने के लिए Bank द्वारा Buyer से क्या मांगा जाता है?

बैंक लैटर ऑफ क्रेडिट जारी करने के लिए अपनी पेमेंट की सेफ्टी का ध्यान भी रखता है इसलिए वह या तो  कुछ Collateral  के तौर पर रखेगा, कोई एफडी या कोई बैंक डिपॉजिट की डिमांड करेगा|

letter of credit का क्या फायदा है?

Buyer और Seller  एक दूसरे को नहीं जानते परंतु वह दोनों ही बैंक पर विश्वास करते हैं|  लैटर ऑफ क्रेडिट में बैंक के इंवॉल्वमेंट हो जाती है इसलिए दोनों का एक दूसरे पर ट्रस्ट स्थापित हो जाता है| यदि Buyer  के पास एकदम से देने के लिए पैसे नहीं है तो लैटर आफ क्रेडिट के माध्यम से यह समस्या सॉल्व हो जाती है|

एक शुरुआती बिजनेसमैन को letter of credit में किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए?

सबसे पहले तो lc का टाइप irrevocable होना चाहिए, Lc at sight होनी चाहिए, payment term FOB से आगे की स्टेज पर नहीं होनी चाहिए|

क्या बैंक फ्री में letter of credit जारी करता है?

जी नहीं,  आप जितनी भी  लैटर ऑफ क्रेडिट बनवाएंगे बैंक आपसे कुछ तय परसेंटेज के हिसाब से चार्ज लेगा|

यदि letter of credit में कोई गलती हो जाती है तो क्या बैंक से फ्री में ठीक कर देता है?

जी नहीं,  इसीलिए लैटर ऑफ क्रेडिट बनवाते समय बहुत ज्यादा ध्यान रखना चाहिए क्योंकि आपसे हर गलती के एवज में बैंक द्वारा कुछ राशि ली जाएगी|  इससे एक फायदा यह भी होता है कि लैटर ऑफ क्रेडिट के विषय में दोनों ही पार्टियां बहुत सजग रहती हैं|

Credit को हिन्दी में क्या कहते हैं?

“उधार, बैंक के खाते मे जमा राशि, बैंक द्वारा उधार दी गयी राशि, श्रेय लेना, श्रेय देना, मान्यता, किसी खाते में जमा करना, जमा धन, जमा खाते लिखना”

लेटर ऑफ क्रेडिट क्या है?

एक्सपोर्ट इंपोर्ट बिजनेस में ग्राहक को सेलर पर विश्वास नहीं होता तथा सेलर को ग्राहक पर विश्वास नहीं होता, इसी विश्वास को बनाने के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट इस्तेमाल किया जाता है| इसके द्वारा ग्राहक की पेमेंट सिक्योर हो जाती है, तथा सेलर का प्रोडक्ट सिक्योर हो जाता है| इसके लिए बैंक एक मध्यस्थ का काम करता है|

साख पत्र कितने प्रकार के होते हैं?

1- Commercial Letter Of Credit 2- Back to Back LC 3- Red Clause LC 4- Sight LC 5- Unconfirmed LC 6-Standby Letter of credit 7- Revocable LC 8- Transferable LC 9- Green Clause LC 10- Revolving LC 11- Deferred Payment LC (or Usance LC)

साख की परिभाषा क्या है?

साख : एक दस्तावेज होता है, जिसमें ऋणदाता द्वारा कर्जदार को पैसा, माल अथवा सेवाएँ भविष्य में अपने किए गए वायदे के अनुसार वापस लौटाने के लिए देता है।

साथ ही यह अवश्य देखें:

लैटर ऑफ क्रेडिट के टर्म एंड कंडीशन्स

सभी टाइप्स के लैटर ऑफ क्रेडिट के बारे में आसान तरीके से समझिए

एक्सपोर्ट इम्पोर्ट बिजनेस कैसे शुरु करें?

CHA (कस्टम हाउस एजेंट) का एक्सपोर्ट इंपोर्ट बिजनेस में क्या रोल होता है?

ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप क्या होती है?, इसके फ़ायदे तथा इसे कैसे बेचें?

Conclusion of lc

मेरी राय में lc के बारे में इतना जानना ही काफी नहीं है| आपको LC Types के बारे में भी पढ़ना चाहिए इससे आपका Export import business रिस्क low हो जाएगा|

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नोट: इसमें मैंने की जगह लैटर को “लेटर” लिखा है|

धन्यवाद|

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