लैटर ऑफ क्रेडिट के नियम एवं शर्तें | LC Payment terms & conditions

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दोस्तों, यदि आप एक्सपोर्ट इंपोर्ट बिज़नेस के शुरुआती दौर में हैं तो आपको Letter of credit terms & conditions तथा Lc payment terms इन दोनों विषयों को बहुत अच्छी तरह समझ लेना चाहिए|

 इस पोस्ट को पूरा पढ़ने के बाद आपको Letter of credit में terms & conditions का महत्व पता चल जाएगा| साथ ही आप यह भी समझ जाओगे कि लैटर ऑफ क्रेडिट में कौन सी टर्मस एंड कंडीशनस Buyer के फेवर में होती है? तथा कौन सी टर्मस एंड कंडीशनस Seller के फेवर में होती हैं|

तो चलिए दोस्तों,  शुरू करते हैं कि आपको Letter of credit में किन terms & conditions का ध्यान रखना है| 

इस पोस्ट को आप Letter of credit checklist की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं इससे आपको बहुत फायदा होगा| 

पोस्ट शुरू करने से पहले मैं आपको एक सुझाव देना चाहता हूं|

जब भी आप LC पर एक्सपोर्ट-इंपोर्ट करना चाहते हैं तो, फाइनल LC बनवाने से पहले दोनों पक्षों को (Buyer & Seller) को उसकी ड्राफ्ट कॉपी से ही शुरुआत करनी चाहिए| 

जब दोनों पार्टियां तय नियम और शर्तों पर सहमत हो जाएं तभी Final LC बनवानी चाहिए|

क्योंकि बार-बार करेक्शन करवाने पर बैंक चार्ज लेगा तथा इससे आपका समय भी बहुत ज्यादा नष्ट हो जाएगा| 

लैटर ऑफ क्रेडिट procedure के बारें में जानने के लिए पढ़ेंलैटर ऑफ क्रेडिट कैसे काम करता है?

लैटर ऑफ क्रेडिट के क्या नियम होते है? | LC payment terms in Hindi

  • लैटर ऑफ क्रेडिट में पेमेंट टर्म का बहुत महत्व होता है|  इसमें यह लिखा होता है कि Buyer किस इनकोटर्म पर पेमेंट देगा|
  • Incoterm की सारी जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें- Incoterms की सारी जानकारी
  • लेखक का सुझाव-  Exporter को FOB से आगे के स्टेप पर नहीं जाना चाहिए| 
  • Lc payment terms में दूसरा पॉइंट आपको यह भी ध्यान रखना है कि LC में पेमेंट टाइम कितने दिनों बाद का लिखा है|
  • लेखक का सुझाव – Exporter को Sight LC को ही महत्व देना चाहिए|

इस एल सी में जब भी आप सारे डॉक्यूमेंट के साथ बैंक में lc को प्रजेंट करेंगे तो आपको तुरंत पेमेंट मिल जाएगी| ( तुरंत से अभिप्राय बैंक के कागज  चेक करने तक- यानी लगभग एक हफ्ता) 

लैटर ऑफ क्रेडिट कितने प्रकार के होते हैं? | Types of letter of credit

  • Letter of credit terms & conditions में आपको LC types के बारे में अवश्य पता होना चाहिए| 
  • इसमें एक टाइप Irrevocable भी होता है|

lc types जानने के लिए पढ़ें – लैटर ऑफ क्रेडिट कितने प्रकार के होते हैं?

 वैसे by default सभी lc Irrevocable ही होती हैं| जब तक इसमें सम्मिलित सभी पार्टियां एक-दूसरे से रजामंद नहीं होती तब तक irrevocable lcrevocable lc में नहीं बदल सकती|

लैटर ऑफ क्रेडिट में क्या-क्या चीजें अच्छी तरह से चेक कर लेनी चाहियें?

Date Of Issue role in LC terms & conditions

Letter of credit terms & conditions में आपको date of issue जरूर चेक करना चाहिए|

तभी तो आपको उसकी वैलिडिटी के बारे में ठीक से पता चल पाएगा|

Beneficiary Detail

Letter of credit terms & conditions में आपको बेनेफिशरी की डिटेल अच्छी तरह चेक कर लेनी चाहिए| 

साथ ही आपको नाम की स्पेलिंग तथा एड्रेस की स्पेलिंग भी अच्छी तरह चेक करनी चाहिए|

Currency Code

Letter of credit terms & conditions में आपको करंसी कोड अवश्य चेक करना चाहिए क्योंकि हर करेंसी का मूल्य अलग अलग होता है|

 मान लो आप Euro में व्यापार कर रहे हैं और उसी के हिसाब से कैलकुलेशन लगा रहे हैं और आपकी LC में USD  मेंशन है तो आपको बहुत ज्यादा नुकसान लग सकता है| 

Letter of credit terms & conditions

Shipment Mode 

Letter of credit terms & conditions में आपको शिपमेंट मोड का हमेशा ध्यान रखना है| 

आपको यह अच्छी तरह चेक कर लेना चाहिए कि किस प्रकार की शिपमेंट allow की गई है|

Partial Shipment allow है या Transshipment allow है|

Port name/port of loading/airport of departure any port of India 

Letter of credit terms & conditions में आपको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी विशेष पोर्ट को ही तो लोडिंग के लिए allow नहीं किया गया है| 

 आपको इस बात की संतुष्टि कर लेनी चाहिए कि आप जिस देश से एक्सपोर्ट करना चाहते हैं क्या आप उसके किसी भी पोर्ट से माल की लोडिंग कर सकते हैं?

Port of discharge/Airport of discharge

Letter of credit terms & conditions में आपको हमेशा पोर्ट ऑफ डिस्चार्ज भी अच्छी तरह कंफर्म कर लेना चाहिए|

Shipment Date 

लैटर ऑफ क्रेडिट टर्म्स एण्ड कंडिशन्स में आपको शिपमेंट डेट हमेशा चेक करनी चाहिए| 

Description of goods

लैटर ऑफ क्रेडिट टर्म्स एण्ड कंडिशन्स में आपको Quantity, Unit, Price इन तीनों चीजों को अच्छी तरह से समझकर चेक करना चाहिए| 

Export Packing Charge & Airfreight charge

लैटर ऑफ क्रेडिट टर्म्स एण्ड कंडिशन्स में आपको एक्सपोर्ट पैकिंग चार्ज क्या है? एयर फ्रेट चार्ज क्या है? इन बिंदुओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए| 

इन सब का मिलान आपको Proforma Invoice द्वारा करना चाहिए|

Delivery Terms 

अक्सर नए व्यापारी payment terms तथा डिलीवरी टर्म्स में भेद नहीं कर पाते|

आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि पेमेंट टर्मस का मतलब है आपको किस इनकोटर्म के पॉइंट पर पेमेंट मिलेगी तथा डिलीवरी टर्म का अर्थ यह है कि किस इनकोटर्म तक की जिम्मेदारी आपकी है| 

लैटर ऑफ क्रेडिट बैंक में प्रजेंट करने के समय क्या-क्या डॉक्यूमेंट चाहिए?

  1. Signed Commercial invoice Six copies in English
  2. Certifying merchandise third party inspection certificate (if mentioned)
  3. Bill of entry -( इसमें सभी चीजें सही लिखी हों जैसे की :- HSN CODE, DATE, PRODUCT NAME ETC.
  4. Full set of a clean bill of lading
  5. Insurance covered by the applicant
  6. Origin Certificate (Coo)
  7. Packing List

Additional Conditions

यदि आप exporter हैं तो आप को इन कंडीशनस को अपनी एल सी में खुलवा देना चाहिए| 

  • Shipment किस डेट को होना है| आप पहले भी शिपमेंट नहीं कर सकते|
  • गुड्स की पैकिंग स्टैंडर्ड तरीके से होनी चाहिए|
  • Invoice  में  क्वालिटी, क्वांटिटी, प्राइस तथा अन्य जानकारी अच्छी तरह मेंशन होनी चाहिए|
  • International मानकों के अनुसार Shipment  होनी चाहिए
  •  इंग्लिश लैंग्वेज में ही सारे डाक्यूमेंट्स होने चाहिए
  • Invoice  में freight charge, exw price अलग अलग लिखा होना चाहिए|
  • Bill में शार्ट फॉर्म, Black Back इत्यादि चीजें स्वीकार नहीं की जाती 
  • लाभ पाने वाले व्यक्ति का Name & address  बिल्कुल ठीक होना चाहिए| 
  • सारे Charges importer country के हिसाब से होंगे|
  • Period of LC presentation

साथ ही यह भी अवश्य पढ़ें:

CIN नंबर क्या होता है?

KPO क्या होता है?

BPO क्या होता है?

गद्दे बनाने की फैक्ट्री कैसे लगायें?

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