जॉइंट वेन्चर क्या होता है? | Joint venture meaning in Hindi

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इस पोस्ट के माध्यम से हम जानेंगे “Joint venture (संयुक्त उद्यम) क्या होता है?, संयुक्त उद्यम के क्या फ़ायदे हैं? ज्वाइंट वेंचर का हिंदी अर्थ क्या होता है?

आइए! सबसे पहले ज्वाइंट वेंचर के हिंदी अर्थ से शुरुआत करते हैं!

जॉइंट वेन्चर का हिन्दी अर्थ क्या होता है?

Joint venture meaning in Hindi: “संयुक्त उद्यम”

संयुक्त उद्यम (ज्वाइंट वेंचर) क्या होता है?  

यदि मैं इसको सामान्य से भाषा में समझाऊं तो, “अपनी व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करने के मकसद से जब कोई कंपनियां आपस में गठबंधन कर लेती है तो उसे हम ज्वाइंट वेंचर कह सकते हैं|” यानी की दो कंपनियों का आपस में हाथ मिलाना Joint venture कहलाता है| 

  • यह आपसी लाभ के लिए बनाया जाता है| 
  • इसमें संघर्ष (conflict) से बचने के लिए समझौता (Agreement) होता है| भविष्य में किसी प्रकार का आप से झगड़ा ना हो इसलिए इसमें एग्रीमेंट बनाया जाता है| 

चलिए! एक उदाहरण की सहायता से इसे और अच्छी तरह समझ लेते हैं!

मान लीजिए, दो मोटर साइकिल बनाने वाली कंपनी है| इनमें से एक कंपनी मोटर साइकिल का इंजन बहुत अच्छा बनाती है| दूसरी कंपनी मोटर साइकिल के अन्य पार्ट्स बहुत अच्छे बनाती है|

अब यह दोनों कंपनियां आपस में collaborate (एक दूसरे से एक साथ कार्य करना) कर लें| यह दोनों कंपनियां साथ मिलकर एक उम्दा मोटरसाइकिल का निर्माण कर सकती हैं| इनके संयुक्त उद्यम द्वारा जो मोटर साइकिल बनेगी इसकी बाजार में डिमांड बहुत बढ़ जाएगी!

इस उदाहरण में आपने देखा कि किस प्रकार दो संगठनों ने आपस में हाथ मिलाया तथा साथ में मिलकर व्यवसाय किया| इसे ही हम Joint venture (संयुक्त उद्यम) कहते हैं| 

ज्वाइंट वेंचर किस प्रकार की कंपनियों के बीच हो सकता है? 

ज्वाइंट वेंचर किसी भी कंपनी के बीच हो सकता है|  यह जरूरी नहीं है कि केवल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ही ज्वाइंट वेंचर कर सकती हैं|

ज्वाइंट वेंचर करने वाली निम्न कंपनियां हो सकती हैं: जैसे की: 

एक प्राइवेट कंपनी + एक सरकारी कंपनी 

एक प्राइवेट कंपनी + एक फॉरेन कंपनी

एक सरकारी कंपनी + एक फॉरेन कंपनी

एक प्राइवेट कंपनी + एक पब्लिक कंपनी

एक प्राइवेट कंपनी + एक प्राइवेट कंपनी 

संयुक्त उद्यमों के क्या फायदे हैं? (Joint venture benefits)

आइए! संयुक्त उद्यमों के फ़ायदों के बारे में भी जान लेते हैं!

नए बाजारों तक पहुंच (Access to new markets)

सीधी सी बात है! हर कंपनी का अपना एक बाजार होता है! जब दो कंपनियां आपस में संगठित हो जाती है तो उनकी एक दूसरे के बाजार तक पहुंच भी हो जाती है|

उदाहरण

(1)  मान लीजिए एक कंपनी केरल की है तथा दूसरी कंपनी उत्तर प्रदेश की है| तो सीधी सी बात है! केरला वाली कंपनी की वॉच उत्तर प्रदेश के बाजार तक हो जाएगी तथा उत्तर प्रदेश वाली कंपनी की पहुंच केरल के बाजार तक हो जाएगी| 

(2)  मान लीजिए एक गद्दे (Mattress) की कंपनी भारत की है तथा दूसरी कंपनी अमेरिका की है| इस स्थिति में भी दोनों कंपनियों की पहुंच एक दूसरे के देश के बाजार तक हो जाएगी| 

संसाधनों और क्षमता में वृद्धि (Increased resources and capacity)

जब दो कंपनियां आपस में Joint venture करती हैं तो इनके संसाधनों में तथा कार्य करने की क्षमता में वृद्धि होती है|  जैसा कि मैंने ऊपर मोटरसाइकिल बनाने वाली कंपनियों को एग्जांपल दिया था| उसके अनुसार मान लीजिए एक कंपनी एक लाख मोटरसाइकिल बनाती थी| तो दोनों कंपनियां मिलकर 2 लाख मोटरसाइकिल प्रतिवर्ष बना देती थी|

अब!  ज्वाइंट वेंचर में इनकी उत्पादन क्षमता भी बढ़ सकती है|  साथ ही साथ इनके संसाधनों में तो वृद्धि हो ही जाएगी|

तकनीक तक पहुंच (Access to technology) 

इसके द्वारा कंपनियों को नई तकनीक मिल जाती है| जब कोई दो कंपनियां आपस में Joint venture करती हैं तो वह एक दूसरे को अपनी तकनीक भी दे सकती हैं| 

जैसे कि:  मोटरसाइकिल का अच्छा इंजन बनाने वाली कंपनी, इंजन बनाने की टेक्निक दूसरी कंपनी को दे देगी| अन्य पार्ट्स अच्छे बनाने वाली कंपनी यह टेक्निक इंजन बनाने वाली कंपनी को दे देगी| 

इस प्रकार से तकनीक का आदान-प्रदान आसानी से हो जाता है| 

नवपरिवर्तन (Innovation)

दो कंपनियों के ज्वाइंट वेंचर होने पर इन कंपनियों की  प्रोडक्ट में सुधार हेतु इनोवेशन करने की शक्ति भी बढ़ जाती है|  दोनों कंपनियां जब एक हो जाती हैं तो वह उत्पाद में एक नयापन ला  सकती हैं|  इससे कंपनियों को तो फायदा होता ही है साथ ही उपभोक्ताओं को भी फायदा होता है| 

उत्पादन की कम लागत (Low cost of production)

ज्वाइंट वेंचर वाली कंपनियां एक दूसरे के संसाधनों का इस्तेमाल करके उत्पादन की लागत को कम भी कर सकती हैं| बहुत सारे ऐसे कारण होते हैं जिनसे प्रोडक्ट की कॉस्ट बढ़ जाती है| दोनों कंपनियां एक दूसरे को लाभ पहुंचाने के मकसद से एक दूसरे के संसाधनों का इस्तेमाल  कर सकती हैं| 

उत्पादन की लागत कम होती है तो निश्चित रूप से उत्पाद मूल्य भी कम हो जाता है| उत्पाद मूल्य कम होने से कंपनियों की बिक्री में भी वृद्धि हो सकती है| 

स्थापित ब्रांड नाम (Established brand name)

जैसा कि मान लीजिए कोई अपनी Mattress मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का kurl-on के साथ ज्वाइंट वेंचर कर ले| अब जैसा कि आप जानते हैं कि गधों के मामले में करलोन एक जाना माना ब्रांड है| तो दूसरी कंपनी को निश्चित रूप से ही इसका फायदा मिलेगा| उसे इस ब्रांड नेम के द्वारा प्रसिद्धि अवश्य मिलेगी| 

विशाल परियोजना (Huge project)

हो सकता है कि एक कंपनी बहुत बड़ी परियोजना को पूरा करने में सक्षम ना हो| ज्वाइंट वेंचर के द्वारा बहुत बड़ी परियोजनाओं को भी पूरा किया जा सकता है| इसके द्वारा विशाल परियोजनाओं में लगने वाले धन की पूर्ति हो जाती है तथा श्रम शक्ति  जैसी समस्याओं का निदान भी हो जाता है| 

प्रतिस्पर्धा में कमी (Lack of competition)

यदि ज्वाइंट वेंचर करने वाली कंपनियां आपस में प्रतिस्पर्धी हैं तो निश्चित तौर पर ही उनमें प्रतिस्पर्धा आपस में खत्म हो जाएगी|  

संयुक्त उद्यम कितने प्रकार के होते हैं? (Types of joint venture)

दो प्रकार के ज्वाइंट वेंचर होते हैं|

  1. संविदा संयुक्त उद्यम (Contractual joint venture)
  2. इक्विटी-आधारित संयुक्त उद्यम (Equity-based joint venture)

संविदा संयुक्त उद्यम (Contractual joint venture)

जैसा कि  इसके नाम से ही आपको प्रतीत हो रहा होगा कि यह किस बारे में है? इसमें संविदा (Contract) शब्द के प्रयोग से हमें एक चीज तो समझ में आ जाती है कि इस प्रकार का ज्वाइंट वेंचर कॉन्ट्रैक्ट पर आधारित होता है| 

  • यानि जब दो कंपनियां एक दूसरे से हाथ मिला लेती हैं परंतु एक नई कंपनी का निर्माण नहीं करती| इस प्रकार  के जॉइंट वेंचर संविदा संयुक्त उद्यम (Contractual joint venture) कहलाते हैं| 
  • केवल साथ में काम करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया गया है| यानी कि यह दोनों कंपनियां एक दूसरे से हाथ तो मिला रही हैं परंतु एक दूसरे की कंपनी में हस्तक्षेप नहीं करेंगी| 

फ्रेंचाइजी इसका एक बहुत अच्छा उदाहरण है| 

इक्विटी-आधारित संयुक्त उद्यम (Equity-based joint venture)

इसमें दोनों ऑर्गेनाइजेशन मिलकर एक नई ऑर्गेनाइजेशन को बनाते हैं| केस में एक नए अस्तित्व (Entity)का उदय होता है| 

  • इसमें ज्वाइंट ओनरशिप चलती है|  यानी कि इसमें इन दोनों ऑर्गेनाइजेशन का स्वामित्व होगा|
  • दोनों ऑर्गेनाइजेशन मिलकर इस नई कंपनी का प्रबंधन (management) करेंगे| 
  • लाभ तथा हानि दोनों का Share (हिस्सा) बांटा जाएगा| 
  • जिम्मेदारियों को भी संयुक्त रूप से बांटा जाएगा|

जॉइंट वेंचर करने के पीछे क्या उद्देश्य होता है?

उम्मीद करता हूं! वैसे तो आपको इस सवाल का जवाब मिल गया होगा कि ज्वाइंट वेंचर कंपनियां क्यों करती हैं? 

परंतु इस पोस्ट को और अच्छी तरह समझाने के लिए मैं इसे एक बार और क्लियर कर देता हूं| ज्वाइंट वेंचर करने के पीछे कंपनियों का उद्देश्य दूसरी कंपनियों से फायदा लेना होता है| 

अलग-अलग कंपनियों की अलग अलग खूबी होती है|  

अलग-अलग क्षमता होती है तथा अलग-अलग कार्यप्रणाली होती है| 

किसी कंपनी के पास में ग्राहक ज्यादा होते हैं और उसकी प्रोडक्शन क्षमता कम होती है|  

किसी कंपनी की प्रोडक्शन क्षमता कम होती है परंतु उसके पास ग्राहक ज्यादा होते हैं|  

इस प्रकार की स्थितियों में दोनों कंपनियां एक दूसरे की पूरक साबित हो सकती हैं| पूरक का अर्थ:  पूरक को आप इस उदाहरण की सहायता से समझ सकते हैं: मान लीजिए आपके पास में ₹96 हैं|  ₹100 होने में ₹4 कम है|  ऐसी स्थिति में ₹4 पूरक कहलाएंगे क्योंकि इन्हीं ₹4 की बदौलत ₹96 ₹100 में बदल सकते हैं| 

यह बात दोनों कंपनियों पर लागू होती है|

जैसे कि:

एक कंपनी भारत की है तथा एक कंपनी अमेरिका की है| इस स्थिति में अमेरिका की कंपनी को भारत के बाजार के विषय में नहीं पता होगा| 

यही स्थिति भारत की कंपनी के साथ भी होगी| जब यह दोनों कंपनियां आपस में हाथ मिला लेंगी या ज्वाइंट वेंचर कर लेंगी तो भारत की कंपनी के लिए अमेरिका में माल बेचना आसान हो जाएगा तथा अमेरिका की कंपनी के लिए भारत में माल बेचना आसान हो जाएगा| 

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

पब्लिक लिमिटेड कंपनी के फ़ायदे तथा नुकसान

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लघु उद्योग क्या होता है तथा इसमें कौन कौन से प्रोडक्ट आते हैं?

CHA (कस्टम हाउस एजेंट) का एक्सपोर्ट इंपोर्ट बिजनेस में क्या रोल होता है?

उम्मीद करता हूं यह पोस्ट आपको पसंद आया होगा!  अगली पोस्ट में फिर मिलेंगे तब तक के लिए मैं नवीन कुमार आपसे इजाजत चाहता हूं| नमस्कार!

 धन्यवाद 

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