औद्योगिक विवाद अधिनियम क्या है? | Industrial disputes act 1947 in Hindi

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यदि आप बिज़नेस करते हैं तो आपको industrial disputes act 1947 बारे में भी अवश्य ही पता होना चाहिए| यह लेबर लॉ का बहुत ही महत्वपूर्ण अधिनियम है|

तो चलिए दोस्तों!! शुरु करते हैं आज का टॉपिक “औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947

औद्योगिक विवाद अधिनियम क्या है?

सबसे पहले हमें इस industrial disputes act, 1947 को समझने से पहले disputes तथा industrial का अर्थ समझना पड़ेगा!

Disputes meaning in Hindi: “विवाद, झगड़ा, मतभेद, तकरार, विचार, झमेला, विचार-विमर्श, संदेह करना, प्रकट करना, विचार-विमर्श करना, तर्क-वितर्क करना, विवाद करना, कलह, वाद-विवाद”

Industrial meaning in Hindi: “औद्योगिक, व्यावसायिक, व्यवसायिक, उद्योग संबंधी”

इन दोनों के अर्थ मिलाने पर हमें ऐसा ज्ञात होता है जैसे कि किसी औद्योगिक झगड़े के बारे में industrial disputes act 1947 बना हो| 

यानि industrial disputes act 1947 का हिन्दी अनुवाद हुआ -“औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947”

अब आप सोच रहे होंगे कि “औद्योगिक क्षेत्र में किन किन लोगों के बीच झगड़ा हो सकता है?” 

उद्योगों में झगड़ा किस-किस के बीच हो सकता है? (Dispute between)

Industrial disputes act 1947 बनाने का मुख्य मकसद नीचे दी गई पार्टियों के बीच झगड़ों के निपटारे के लिए बनाया गया था| 

  1. Employer (काम देनेवाला,नियोक्ता,मालिक) तथा Employee (कर्मचारी,मुलाजिम,काम करने वाले) के बीच 
  2. Employee (कर्मचारी,मुलाजिम,काम करने वाले) तथा Employee (कर्मचारी,मुलाजिम,काम करने वाले) के बीच 
  3. Employer (काम देनेवाला,नियोक्ता,मालिक) तथा Employer (काम देनेवाला,नियोक्ता,मालिक) के बीच 

औद्योगिक विवाद के कारण क्या होते हैं? (Dispute cause)

आखिर! ऐसी वह क्या मुख्य वजहें हो सकती हैं जिनके कारण औद्योगिक क्षेत्र में वाद-विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है| 

कुछ मुख्य वजहें मैं आपको नीचे बता रहा हूं| 

काम (Work)

जैसे:- 1-ज्यादा काम करवाने को लेकर विवाद हो सकता है| 

        2-  बहुत ही ज्यादा कठिन परिस्थितियों में काम कराने को लेकर विवाद हो सकता है| 

वेतन (Wages)

जैसे:- 1- ज्यादा काम करवा कर बदले में कम वेतन देने को झगड़ा हो सकता है| 

        2- टाइम पर तनख्वाह ना देने पर भी विवाद हो सकता है| 

नुकसान भरपाई (compensation)

जैसे:- 1-जबरी छुट्टी (Layoff) के द्वारा काम देने को मना कर दिया तथा उसके नुकसान की भरपाई भी नहीं की| 

        2- छंटनी (retrenchment) के बहाने काम से अचानक निकाल देना|

       3- दुर्घटना ( Accident) जैसी स्थिति में नुकसान की भरपाई ना करना| 

आखिर! industrial disputes act 1947 को बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?

दोस्तों!  उम्मीद करता हूं! अब तक की पोस्ट पढ़ने के बाद आपको इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 1947 क्या है?  के बारें में अच्छी तरह समझ में आ गया होगा| 

अब बात करते हैं की “ industrial disputes act 1947 को बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?”

जब औद्योगिक क्षेत्र में ऊपर दी गई पार्टियों के बीच में झगड़ा होता है तो उसका परिणाम होता है कि उन दोनों ही पार्टियों के बीच संबंध बहुत खराब हो जाते हैं| 

इन खराब संबंधों के परिणाम और भी खतरनाक होते हैं| 

 1- एंपलॉयर अपने एम्पलाई को काम देने से मना कर सकता है| इसके लिए वह अपने कर्मचारी को कह सकता है कि “उसके पास उसे देने के लिए काम नहीं है|” या “ उसने उसे काम से निकाल दिया है|” 

2- कर्मचारी अपने मालिक को कह सकता है कि वह अब उसके पास काम नहीं करेगा|  ऐसा हो सकता है कि उस समय जिस कंपनी में वह कर्मचारी काम करता है उस कंपनी में कोई अर्जेंट ऑर्डर मिला हुआ हो|

3- कर्मचारी कंपनी में हड़ताल भी करवा सकता है|

 अब! आपको क्या लगता है? इन सब विवादों के बाद दोनों पार्टियों के मध्य संबंध सुधरेंगे और ज्यादा बिगड़ जाएंगे? 

जाहिर सी बात है!  संबंधों की स्थिति पहले से भी और खतरनाक हो जाएगी| 

यहां तक कि व्यवसाय को बंद करने तक की भी नौबत आ सकती है!! 

इन सब परिस्थितियों में क्या प्रभाव पड़ेगा?

1 सबसे पहला प्रभाव एंपलॉयर पर पड़ेगा| हो सकता है उस उद्योग क्षेत्र में लिप्त अन्य मालिक मिलकर उन कर्मचारियों के खिलाफ कामना देने का प्रस्ताव पास कर दें|

2– इसके साथ- साथ एंपलाई भी परेशान होगा| अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के मालिकों के साथ आने पर मजदूर यूनियन भी हमेशा एक हो जाती है|

3– अगला नंबर होगा उनके उद्योग का|  उद्योग भी इससे प्रभावित होगा|  अब तक तो कहां एक छोटे से उद्योग की बात थी और यह बात बढ़ते बढ़ते पूरी इंडस्ट्री में चक्का-जाम की स्थिति पैदा कर सकती है| 

4– जब यह तीनों प्रभावित होंगे तो ऐसा नहीं हो सकता कि जिस राज्य में उद्योग है, उस राज्य पर प्रभाव ना पड़े! वह राज्य भी प्रभावित अवश्य होगा|

5–  किसी भी राष्ट्र के एक राज्य में परेशानी होने पर या किसी उद्योग धंधे में प्रभावित होने पर ऐसा कतई मुमकिन नहीं है कि राष्ट्र पर कुछ फर्क ना पड़े!

एक छोटी सी चिंगारी बढ़ते बढ़ते एक राष्ट्र को नुकसान पहुंचाने तक की सीमा पर पहुंच सकती है|

इन्हीं सब परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए  industrial disputes act 1947 बनाया गया है|

 इस एक्ट में सभी पार्टियों के हितों का ध्यान रखकर क़ानूनों को बनाया गया है| 

औद्योगिक क्षेत्र के विवादों का हल इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 1947 में दिया गया है| 

यदि मैं संक्षेप में समझाऊं तो industrial disputes act 1947 को बनाने का मकसद भविष्य में औद्योगिक क्षेत्र में होने वाले झगड़ों को शांतिपूर्ण ढंग तथा न्याय पूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए तथा भूतकाल से चल रहे और औद्योगिक मसलों को हल करना है| 

साथ ही यह अवश्य पढ़ें:

कंपनी क्या होती है?, कंपनी तथा साझेदारी में क्या अंतर होता है?

Equal remuneration act 1976 क्या है?

न्यूनतम मजदूरी अधिनियम: 1948 क्या है?

workmen’s compensation act क्या है?

आपने क्या सीखा?

इस पोस्ट में आपने industrial disputes act, 1947: “औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947” के बारे में पढ़ा|

उम्मीद करता हूँ मेरे द्वारा दी गई जानकारी से आप संतुष्ट होंगे|

मैं नवीन कुमार अब आपसे इज़ाजत चाहूँगा|

अगली बिज़नेस से संबंधित पोस्ट में फिर मिलेंगे|

धन्यवाद

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