Incoterms: इनकोटर्म्स क्या होती हैं? | Incoterms की परिभाषा एवं हिन्दी अर्थ

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Incoterms | incoterms in Hindi | incoterms in export -2021 latest post | इस पोस्ट के माध्यम से आपको Incoterms के बारे में पता चलेगा| इसे आप  incoterms charts के माध्यम से भी आसानी से समझ सकते हैं? इस पोस्ट में आपको export import business में use होने वाली सारी इनकोटर्म्स के बारे में हिन्दी में समझाया गया है|

इनकोटर्म्स क्या होती हैं? | What is incoterms in Hindi

इनकोटर्म्स 2020 नियम इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) द्वारा प्रकाशित आधिकारिक शब्द हैं| दुनिया भर में वाणिज्य (व्यावसायिक/व्यापार) को सुविधाजनक बनाने के लिए, इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) ने Incoterms का एक सेट प्रकाशित किया है, जिसका मकसद व्यापारिक प्रथाओं में अंतर तथा विभिन्न देशों के व्यापारियों के बीच कानूनी व्याख्याओं के कारण नियमावली का एक आम सेट उपलब्ध करवाना है| गलतफहमी, विवाद और मुकदमेबाजी को रोकना इसका मुख्य मकसद है| इन सभी नियमों को प्रतिभागियों को आसानी से समझ में आना चाहिए| इन्हे आधिकारिक तौर पर अन्य वाणिज्यिक शर्तों (Commercial terms) के रूप में जाना जाता है। ओह! हो!! यह समझने में थोड़ा सा कठिन हो गया!

तो चलिए! इसे आसान बनाने के लिए पहले इसका हिन्दी में अर्थ समझ लेते हैं|

इनकोटर्म्स का हिन्दी अर्थ क्या होता है?

Incoterms meaning in Hindi: “Incoterms तीन शब्दों: In=International + Co=Commerce + Terms=Term से मिलकर बना है| इन शब्दों के अलग-अलग अर्थ निकालने पर हमे इनकोटर्म्स का यह हिन्दी अर्थ मिलता है: अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य शर्तें “  यहाँ पर वाणिज्य का अर्थ: व्यावसायिक या व्यापार से है| 

Incoterms meaning: “International commercial Terms”

Incoterms Definition in Hindi: वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त, Incoterms खरीदारों (Buyer) और विक्रेताओं (Seller) के दायित्वों (The obligations) को स्पष्ट करके विदेशी व्यापार अनुबंधों (Trade contracts) में भ्रम (ग़लतफहमी) को रोकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में शामिल पार्टियाँ आमतौर पर एक दूसरे को समझने में, मदद करने के लिए और अपने व्यापार की व्यवस्था की सटीक शर्तों के रूप में इनकोटर्म्स का इस्तेमाल करती हैं।

इनकोटर्म्स का साधारण भाषा में अर्थ: (International trading terms) एक देश से दूसरे देश में माल बेचने पर buyer तथा seller में से किसकी ज़िम्मेदारी कहाँ पर खत्म होगी? कौन कहाँ तक goods को deliver करेगा?, यह इँकोटर्म के माध्यम से आसानी से समझ में आ जाती है| यानि Risk, Responsibility or cost किसको कहाँ तक देना है?, यह incoterms के माध्यम से आसानी से समझ में आ जाता है|

उदाहरण: मान लीजिए FOB(Free on board) इनकोटर्म के अनुसार “mudra port FOB” पर डील तय हुई| इसके अनुसार Buyer (ग्राहक) को पता होता है कि Seller (विक्रेता) मुद्रा पोर्ट पर खड़े हुए शिप में माल लोड कर देगा| एक बार शिप के किसी भी हिस्से में माल लोड करने के बाद Seller (विक्रेता) की ज़िम्मेदारी खत्म हो जाएगी| यानि की मुद्रा पोर्ट पर एक बार शिप में माल लोड होने के बाद जोखिम (Risk), ज़िम्मेदारी (Responsibility) या लागत (Cost) Seller से Buyer में ट्रांसफर हो जाएगी|

FOB का स्पष्टीकरण: “एक बार शिप के किसी भी हिस्से में माल लोड करने के बाद का अर्थ: एक बार माल शिप कंही भी रख देना माना जाएगा| चाहें बाद में उसका स्थान कहीं भी चेंज होता रहे”

कुछ इनकोटर्म्स परिवहन के सभी साधनों पर लागू होते हैं; कुछ पानी में परिवहन के लिए सख्ती से लागू होती है।

ICC नियमित रूप से Incoterms को अपडेट करता है, इसलिए अनुबंधों (contracts) को यह निर्दिष्ट (Specified) करना चाहिए कि वे किस संस्करण (Edition) का उपयोग कर रहे हैं, जैसे, Incoterms 2020.

इसके अलावा, ध्यान रखें कि विभिन्न देशों में उपयोग किए जाने वाले व्यापार की शर्तें सतह पर समान दिखाई दे सकती हैं, लेकिन वे घरेलू रूप से उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं।

इस पोस्ट में आप इनकोटर्म्स के बारे में हिन्दी भाषा में जान सकते हो|

incoterms chart
EXW (EX works Place) incoterm chart

Incoterms के क्या Rules होते हैं?

  • Incoterms- Export Import Business की Standard Terms होती हैं|
  • Delivery Point से Buyer की Responsibility शुरू हो जाती है|
  • Incoterms की Full-Form होती है – International Commercial Terms
  • इनके अनुसार यह तय किया जाता है कि Seller के लिए Cargo Delivery Point क्या होगा?
  • यह Terms International Chamber Of Commerce तय करता है|
  • कहने का अर्थ यह है- की उस Cargo Delivery Point से Risk, Seller से Buyer में Transfer हो जाता है|
  • Total Eleven Incoterms होती हैं|
  • हर Incoterms में Seller का Delivery Point तय किया जाता है|
  • इनमे उस पॉइंट पर  Responsibility, Cost & Risk  Seller से Buyer में Transfer हो जाता है|
  • यदि इसे साधारण भाषा में समझना हो तो हम यह कह सकते हैं कि हमको केवल एक Incoterm तय करनी होती है
  • तथा Buyer और Seller दोनों ही समझ जाते हैं की माल की Resposibity, Cost & Risk किसका कहां पर transfer हो जाएगा?

Incoterm Video

Incoterms in Hindi video

All Incoterm full forms

साथ ही यह अवश्य पढ़ें: एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बिज़नेस शुरु करने से पहले क्या तैयारी कर लेनी चाहिए

  • EXW full form: “Ex Works”
  • FCA full form: “Free Carrier”
  • FAS full form: “Free Along Side”
  • FOB full form: “Free On Board”
  • CFR full form: “Cost & Freight”
  • CIF full form: “Cost, Insurance and Freight”
  • CPT full form: “Carriage Paid To”
  • CIP full form: “Carriage and Insurance Paid To (Place)”
  • DAT full form: “Delivered At Terminal”
  • DAP full form: “Delivered At Place”
  • DDP full form: “Delivered Duty Paid”

मान लीजिए एक Importer इंडिया से Spring Mattress आयात करना चाहता है| 

यह Importer (आयातक) कोई Proprietorship firm, पार्टनरशिप फर्म, कंपनी, स्मॉल कंपनी, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या वन पर्सन कंपनी कोई भी हो सकता है| 

  • अब Incoterm के माध्यम से आसानी से यह पता लग सकता है की Seller की Responsibility कहां से कहां तक है?
  • Seller किस Point तक की Cost देगा?
  • Risk किस Point से Importer की तरफ शिफ्ट हो जाएगा
  • Delivery Point तक Seller की Responsibility होती है|

सबसे पहले हमें Transportation Chain को समझने के लिए हमे Services क्या-क्या होती हैं? यह समझना पड़ेगा|

Seller क्या-क्या सर्विस देगा? तथा वह किस-किस Service की Payment देगा? 

Note:- Seller जिस भी Service की पेमेंट देगा उसको अपने Product की Cost में जोड़ देगाकहने का अर्थ यह है कि वह किसी भी भुगतान को अपनी जेब से नहीं देगा|

Incoterms को समझने के लिए मैंने इस पोस्ट में Incoterms Chart बनाएँ है|

Incoterms Chart के माध्यम से आपको सारी चीजें सरलता के साथ समझ में आ जाएंगी|

Note :- नीचे दी गई 4 Incoterms केवल Ocean Freight के लिए Applicable होंगी|

  • FAS Free Along Ship (Port)
  • FOB Free On Board (Port)
  • CFR – Cost & Freight (Port)
  • CIF – Cost, Insurance & Freight (Port)

इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट बिज़नेस सर्विसेज़ में कौन सी सर्विस आएंगी ?

  • Warehouse Services- इसमे Packing भी शामिल होती है|
  • Loading At The Origin कौन करेगा?
  • Inland Transportation
  • Forwarder & Customs
  • Terminal Charges
  • Loading On Vessel
  • Ocean / Air Freight
  • Insurance
  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

सारी इनकोटर्म्स का ब्योरा

चलिए! अब एक-एक करके सारी इनकोटर्म्स के बारे में अच्छी तरह से समझते हैं|

EXW – Ex Works (Place)

इस Incoterm EXW – Ex Works (Place) में Seller, Cargo (माल से भरा कंटेनर) केवल अपने Warehouse में Buyer को  Provide करवा देगा|

इसमे Packing भी Seller की ही जिम्मेदारी है|

इसके बाद की सारी Services Buyer को ही handle करनी पड़ेंगी|

EXW में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Loading At The Origin
  • Inland Transportation
  • Forwarder & Customs
  • Terminal Charges
  • Loading On Vessel
  • Ocean / Air Freight
  • Insurance
  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

अब आप ऊपर दिए Incoterms Chart  में समझ गए होंगे की Seller के डिलीवरी पॉइंट पर उसकी क्या जिम्मेदारियां खत्म होती हैं? तथा Buyer की क्या जिम्मेदारियां शुरू होती है? 

साथ ही यह अवश्य पढ़ें: ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप क्या होती है तथा इसे कैसे इस्तेमाल करें?

FCA – Free Carrier At (Place)

इस Incoterm- FCA – Free Carrier At (Place) में Place Define करना बहुत जरूरी होता है| 

FCA में दो Case बन जाते है|

1- पहला केस–  या तो Seller Cargo अपने Premises ही cargo Deliver करेगा| इसमें Charges Seller के होंगे|

2- दूसरा केस–  यदि Place Mumbai Port Define हो तो Seller को मुंबई पोर्ट तक कार्गो की डिलीवरी देनी पड़ेगी|

यदि मुंबई पोर्ट से पहले Buyer का कोई और Warehouse है तो Seller को वहां तक डिलीवरी देनी होगी|

इसमें जो Inland Transportation का खर्चा है वह Buyer को ही देना होगा|

FCA में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Inland Transportation
  • Forwarder & Customs
  • Terminal Charges
  • Loading On Vessel
  • Ocean / Air Freight
  • Insurance
  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

FAS – Free Along Ship (Port)

यह Incoterm केवल Ocean Freight  में ही Use होगी|

इसमें Sea Port  का नाम लिखना होता है|

Sea Port एक्सपोर्टर की Country का ही होता है|

सामान्यतः यह Incoterm केवल Bulk Cargo के लिए ही Use होती है| 

Container Cargo में इसका इस्तेमाल नहीं होता| 

इस Incoterm में Buyer को निम्न जिम्मेदारियाँ स्वयं ही उठानी पड़ती है|

  • Loading On Vessel
  • Ocean / Air Freight
  • Insurance
  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes
  • इसमे Vessel पर Loading Charges Seller को देने होते हैं| 

FOB- Free On Board

FOB- Free On Board
FOB- Free On Board incoterm

यह बहुत ज्यादा Use होने वाली Incotermहै|

FOB full form – Free on board 

यह सबसे चर्चित incoterms में से एक है|

FOB meaning –  Export Import Business में exporter को FOB incoterm के तहत Seller को Cargo को vessel के किसी भी हिस्से में load करवाना होता हैं|

जैसा की इसके नाम से ही हमे प्रतीत हो रहा है free on board यानि vessel पर loading तक free|

FOB- Free on board में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई है|

  • Ocean / Air Freight
  • Insurance
  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

CFR – Cost & Freight (Port)

इस Incoterm में Seller की Country के पोर्ट तक का Freight  देगा|

ऊपर दिए चार्ट के अनुसार शंघाई पोर्ट तक का Freight Seller को देना होगा|

CFR मैं कार्गो के Insurance की Responsibility Seller की नहीं होती|

CFR में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Insurance
  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

साथ ही यह अवश्य पढ़ें: Port registration या AD Code registration की पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में जानें

CIF – Cost, Insurance & Freight

CIF - Cost, Insurance & Freight
CIF – Cost, Insurance & Freight incoterm

इस Incoterm के अनुसार Insurance भी Seller को ही लेना होता है|

CIF में Unloading की जिम्मेदारी Buyer की होती है|

इसमे ocean freight तथा insurance की जिम्मेदारी Seller की होती है|

इससे हमे Seller का Delivery point भी पता चलता है|

CIF Full form Cost Insurance & freight होती है|

बिना incoterms के Seller का Delivery Point समझना बहुत ही मुश्किल है|

CIF में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

CPT – Carriage Paid To (Place)

इस Incoterm के अनुसार Place Mention करना होता है|

 इसमें एक थोड़ा सा विषय देखने वाला है|

आप  देखेंगे तो Loading & Unloading को Incoterm Chart में मैंने Seller  और Buyer दोनों की जिम्मेदारियों को Mention किया है|

इसका अर्थ यह है कि यह विषय (Loading & Unloading) Negotiable होता है|

यदि Buyer लोडिंग अनलोडिंग पर Agree होता है तो Buyer Pay  करेगा वर्ना Seller Pay करेगा|

CPT में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Insurance
  • Unloading & Loading 2 – (Buyer / Seller)
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

साथ ही यह अवश्य पढ़ें: Merchant Exporter तथा Manufacturer exporter के फ़ायदे तथा नुकसान

CIP – Carriage & Insurance Paid To (Place)

इस Incoterm के अनुसार Place Mention करना होता है|

Place Mention करने पर Seller की जिम्मेदारी उस Place तक की तय हो जाती है|

इसमें एक थोड़ा सा विषय देखने वाला है की CIP और CPT में केवल Insurance का अंतर होता है| CIP में Insurance Seller को लेना होता है|

CIP में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Unloading & Loading 2 – (Buyer / Seller)
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

DAT – Delivered At Terminal

इस Incoterm में बल्क कार्गो यूज नहीं किया जाता|

इसमें Unloading का charge seller को ही देना होता है|

यदि Buyer ने Place में अपना गोडाउन दिया है तब Seller को उसके गोडाउन तक डिलीवरी देनी पड़ेगी|

इसमें Delivery Place का बहुत महत्व है| 

DAT में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

DAP – Delivered at place

इस केस के अंदर सारी जिम्मेदारियां  Seller की होती हैं |

Buyer को केवल Duties तथा taxes चुकाने होते हैं|

पर इसमें भी एक कंडीशन होती है|

मान लो, यदि Buyer ने Delivery Place अपना Warehouse न चुनकर Sanghai Port ही चुन लिया हो तो Buyer केवल वहां तक की ज़िम्मेदारी ही लेगा| 

पर final unloading Buyer को ही करनी होगी|

Final unloading से मतलब Buyer का godown से है|

DAP में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

DDP – Delivered Duty Paid (Place)

DDP - Delivered Duty Paid (Place)
DDP – Delivered Duty Paid (Place) incoterm

यह Incoterms की आखरी term होती है|

इसमें Seller को ही सारी Duties तथा Taxes, Pay करने होंगे|

पर जो final unloading है वो Buyer को ही Pay करनी होगी|

यह Incoterm केवल वही लोग use करते हैं जिनका Buyer की country में भी ऑफिस होता है ताकि वह customs इत्यादि चीज़ों को आसानी से handle कर लें|

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प्यारे दोस्तों, मैं नवीन कुमार एक बिज़नेस ट्रैनर हूँ| अपने इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपको - आयात-निर्यात व्यवसाय (Export-Import Business), व्यापार कानून (Business Laws), बिज़नेस कैसे शुरु करना है?(How to start a business), Business digital marketing, व्यापारिक सहायक उपकरण (Business accessories), Offline Marketing, Business strategy, के बारें में बताऊँगा|| साथ ही साथ मैं आपको Business Motivation भी दूंगा| मेरा सबसे पसंदीदा टॉपिक है- “ग्राहक को कैसे संतुष्ट करें?-How to convince a buyer?" मेरी तमन्ना है की कोई भी बेरोज़गार न रहे!! मेरे पास जो कुछ भी ज्ञान है वह सब मैं आपको बता दूंगा परंतु उसको ग्रहण करना केवल आपके हाथों में है| मेरी ईश्वर से प्रार्थना है की आप सब मित्र खूब तरक्की करें! धन्यवाद !!