Incoterms: इनकोटर्म्स क्या होती हैं?, परिभाषा एवं हिन्दी अर्थ

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इस पोस्ट के माध्यम से आपको import-export business में इस्तेमाल की जाने वाली incoterms के बारे में पता चलेगा| Incoterms को आप incoterms charts के माध्यम से और भी आसानी से समझ सकते हैं? इस पोस्ट को पूरा पढ़ने के बाद आपको इनकोटर्म्स से जुड़े सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे|

इनकोटर्म्स क्या होती हैं? (What is incoterms)

इनकोटर्म्स 2020 नियम इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) द्वारा प्रकाशित आधिकारिक शब्द हैं| दुनिया भर में वाणिज्य (व्यावसायिक/व्यापार) को सुविधाजनक बनाने के लिए, इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) ने Incoterms का एक सेट प्रकाशित किया है, जिसका मकसद व्यापारिक प्रथाओं में अंतर तथा विभिन्न देशों के व्यापारियों के बीच कानूनी व्याख्याओं के कारण नियमावली का एक आम सेट उपलब्ध करवाना है| गलतफहमी, विवाद और मुकदमेबाजी को रोकना इसका मुख्य मकसद है| इन सभी नियमों को प्रतिभागियों को आसानी से समझ में आना चाहिए| इन्हे आधिकारिक तौर पर अन्य वाणिज्यिक शर्तों (Commercial terms) के रूप में जाना जाता है। ओह! हो!! यह समझने में थोड़ा सा कठिन हो गया!

तो चलिए! इसे आसान बनाने के लिए पहले इसका हिन्दी में अर्थ समझ लेते हैं| इसके लिए पहले इंटरनेशनल का हिन्दी अर्थ जान लेते हैं|

International meaning in Hindi: “अंतर्राष्ट्रीय, देशों के बीच का”

इनकोटर्म्स का हिन्दी अर्थ क्या होता है?

Incoterms meaning in Hindi: “Incoterms तीन शब्दों: In=International + Co=Commerce + Terms=Term से मिलकर बना है| इन शब्दों के अलग-अलग अर्थ निकालने पर हमे इनकोटर्म्स का यह हिन्दी अर्थ मिलता है: अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य शर्तें “  यहाँ पर वाणिज्य का अर्थ: व्यावसायिक या व्यापार से है| 

Incoterms Definition in Hindi: वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त, Incoterms खरीदारों (Buyer) और विक्रेताओं (Seller) के दायित्वों (The obligations) को स्पष्ट करके विदेशी व्यापार अनुबंधों (Trade contracts) में भ्रम (ग़लतफहमी) को रोकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में शामिल पार्टियाँ आमतौर पर एक दूसरे को समझने में, मदद करने के लिए और अपने व्यापार की व्यवस्था की सटीक शर्तों के रूप में इनकोटर्म्स का इस्तेमाल करती हैं।

इनकोटर्म्स का साधारण भाषा में अर्थ: (International trading terms) एक देश से दूसरे देश में माल बेचने पर buyer तथा seller में से किसकी ज़िम्मेदारी कहाँ पर खत्म होगी? कौन कहाँ तक goods को deliver करेगा?, यह इँकोटर्म के माध्यम से आसानी से समझ में आ जाती है| यानि Risk, Responsibility or cost किसको कहाँ तक देना है?, यह incoterms के माध्यम से आसानी से समझ में आ जाता है|

उदाहरण: मान लीजिए FOB(Free on board) इनकोटर्म के अनुसार “mudra port FOB” पर डील तय हुई| इसके अनुसार Buyer (ग्राहक) को पता होता है कि Seller (विक्रेता) मुद्रा पोर्ट पर खड़े हुए शिप में माल लोड कर देगा| एक बार शिप के किसी भी हिस्से में माल लोड करने के बाद Seller (विक्रेता) की ज़िम्मेदारी खत्म हो जाएगी| यानि की मुद्रा पोर्ट पर एक बार शिप में माल लोड होने के बाद जोखिम (Risk), ज़िम्मेदारी (Responsibility) या लागत (Cost) Seller से Buyer में ट्रांसफर हो जाएगी|

FOB का स्पष्टीकरण: “एक बार शिप के किसी भी हिस्से में माल लोड करने के बाद का अर्थ: एक बार माल शिप कंही भी रख देना माना जाएगा| चाहें बाद में उसका स्थान कहीं भी चेंज होता रहे”

कुछ इनकोटर्म्स परिवहन के सभी साधनों पर लागू होते हैं; कुछ पानी में परिवहन के लिए सख्ती से लागू होती है।

ICC नियमित रूप से Incoterms को अपडेट करता है, इसलिए अनुबंधों (contracts) को यह निर्दिष्ट (Specified) करना चाहिए कि वे किस संस्करण (Edition) का उपयोग कर रहे हैं, जैसे, Incoterms 2020.

इसके अलावा, ध्यान रखें कि विभिन्न देशों में उपयोग किए जाने वाले व्यापार की शर्तें सतह पर समान दिखाई दे सकती हैं, लेकिन वे घरेलू रूप से उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं।

इस पोस्ट में आप इनकोटर्म्स के बारे में हिन्दी भाषा में जान सकते हो|

Incoterms के क्या Rules होते हैं?

  • Export-Import Business की Standard Terms होती हैं|
  • Delivery Point से Buyer की Responsibility शुरू हो जाती है|
  • इनके अनुसार यह तय किया जाता है कि Seller के लिए Cargo Delivery Point क्या होगा?
  • यह Terms International Chamber Of Commerce तय करता है|
  • कहने का अर्थ यह है- की उस Cargo Delivery Point से Risk, Seller से Buyer में Transfer हो जाता है|
  • Total Eleven incoterms होती हैं|
  • हर incoterms में Seller का Delivery Point तय किया जाता है|
  • इनमे उस पॉइंट पर  Responsibility, Cost & Risk  Seller से Buyer में Transfer हो जाता है|
  • यदि इसे साधारण भाषा में समझना हो तो हम यह कह सकते हैं कि हमको केवल एक Incoterm तय करनी होती है
  • तथा Buyer और Seller दोनों ही समझ जाते हैं की माल की Responsibility, Cost & Risk किसका कहां पर transfer हो जाएगा?

Incoterm Video

Incoterms in Hindi video

All Incoterm full forms

EXW full form: “Ex Works”

FCA full form: “Free Carrier”

FAS full form: “Free Along Side”

FOB full form: “Free On Board”

CFR full form: “Cost & Freight”

CIF full form: “Cost, Insurance and Freight”

CPT full form: “Carriage Paid To”

CIP full form: “Carriage and Insurance Paid To (Place)”

DAT full form: “Delivered At Terminal”

DAP full form: “Delivered At Place”

DDP full form: “Delivered Duty Paid”

मान लीजिए एक importer इंडिया से Spring Mattress आयात करना चाहता है| 

यह Importer (आयातक) कोई Proprietorship firm, पार्टनरशिप फर्म, कंपनी, स्मॉल कंपनी, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या वन पर्सन कंपनी कोई भी हो सकता है| 

  • अब Incoterm के माध्यम से आसानी से यह पता लग सकता है की Seller की Responsibility कहां से कहां तक है?
  • Seller किस Point तक की Cost देगा?
  • Risk किस Point से importer की तरफ शिफ्ट हो जाएगा
  • Delivery Point तक Seller की Responsibility होती है|

सबसे पहले हमें Transportation Chain को समझने के लिए हमे Services क्या-क्या होती हैं? यह समझना पड़ेगा|

Seller क्या-क्या सर्विस देगा? तथा वह किस-किस Service की Payment देगा? 

Note:- Seller जिस भी Service की पेमेंट देगा उसको अपने Product की Cost में जोड़ देगा “कहने का अर्थ यह है कि वह किसी भी भुगतान को अपनी जेब से नहीं देगा|”

Incoterms को समझने के लिए मैंने इस पोस्ट में Incoterms Chart बनाएँ है|

Incoterms Chart के माध्यम से आपको सारी चीजें सरलता के साथ समझ में आ जाएंगी|

Note :- नीचे दी गई 4 Incoterms केवल Ocean Freight के लिए Applicable होंगी|

  • FAS Free Along Ship (Port)
  • FOB Free On Board (Port)
  • CFR – Cost & Freight (Port)
  • CIF – Cost, Insurance & Freight (Port)

इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट बिज़नेस सर्विसेज़ में कौन सी सर्विस आएंगी ?

  • Warehouse Services- इसमे Packing भी शामिल होती है|
  • Loading At The Origin कौन करेगा?
  • Inland Transportation
  • Forwarder & Customs
  • Terminal Charges
  • Loading On Vessel
  • Ocean / Air Freight
  • Insurance
  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

सारी इनकोटर्म्स का ब्योरा

चलिए! अब एक-एक करके सारी इनकोटर्म्स के बारे में अच्छी तरह से समझते हैं|

EXW – Ex Works (Place)

EXW (Ex Works Place) में Seller, Cargo (माल से भरा कंटेनर) केवल अपने Warehouse में Buyer को Provide करवा देगा|

इसमे Packing भी Seller की ही जिम्मेदारी है|

इसके बाद की सारी Services Buyer को ही handle करनी पड़ेंगी|

EXW में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Loading At The Origin
  • Inland Transportation
  • Forwarder & Customs
  • Terminal Charges
  • Loading On Vessel
  • Ocean / Air Freight
  • Insurance
  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

अब आप ऊपर दिए Incoterms Chart  में समझ गए होंगे की Seller के डिलीवरी पॉइंट पर उसकी क्या जिम्मेदारियां खत्म होती हैं? तथा Buyer की क्या जिम्मेदारियां शुरू होती है? 

FCA – Free Carrier At (Place)

इFCA – Free Carrier At (Place) में Place Define करना बहुत जरूरी होता है| 

FCA में दो Case बन जाते है|

1- पहला केस-  या तो Seller Cargo अपने Premises ही cargo Deliver करेगा| इसमें Charges Seller के होंगे|

2- दूसरा केस-  यदि Place Mumbai Port Define हो तो Seller को मुंबई पोर्ट तक कार्गो की डिलीवरी देनी पड़ेगी|

यदि मुंबई पोर्ट से पहले Buyer का कोई और Warehouse है तो Seller को वहां तक डिलीवरी देनी होगी|

इसमें जो Inland Transportation का खर्चा है वह Buyer को ही देना होगा|

FCA में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Inland Transportation
  • Forwarder & Customs
  • Terminal Charges
  • Loading On Vessel
  • Ocean / Air Freight
  • Insurance
  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

FAS – Free Along Ship (Port)

यह Incoterm केवल Ocean Freight  में ही Use होगी|

इसमें Sea Port का नाम लिखना होता है|

Sea Port एक्सपोर्टर की Country का ही होता है|

सामान्यतः यह Incoterm केवल Bulk Cargo के लिए ही Use होती है| 

Container Cargo में इसका इस्तेमाल नहीं होता| 

इस Incoterm में Buyer को निम्न जिम्मेदारियाँ स्वयं ही उठानी पड़ती है|

  • Loading On Vessel
  • Ocean / Air Freight
  • Insurance
  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes
  • इसमे Vessel पर Loading Charges Seller को देने होते हैं| 

FOB- Free On Board

यह बहुत ज्यादा Use होने वाली incotermहै|

FOB meaning: “Export Import Business में exporter को FOB incoterm के तहत Seller को Cargo को vessel के किसी भी हिस्से में load करवाना होता हैं|”

जैसा की इसके नाम से ही हमे प्रतीत हो रहा है free on board यानि vessel पर loading तक free.

FOB- Free on board में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई है|

  • Ocean / Air Freight
  • Insurance
  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

CFR – Cost & Freight (Port)

इस Incoterm में Seller की Country के पोर्ट तक का Freight  देगा|

ऊपर दिए चार्ट के अनुसार शंघाई पोर्ट तक का Freight Seller को देना होगा|

CFR में कार्गो के Insurance की Responsibility Seller की नहीं होती|

CFR में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Insurance
  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

CIF – Cost, Insurance & Freight

इसमें Insurance भी Seller को ही लेना होता है|

CIF में Unloading की जिम्मेदारी Buyer की होती है|

इसमे ocean freight तथा insurance की जिम्मेदारी Seller की होती है|

इससे हमे Seller का Delivery point भी पता चलता है|

बिना incoterms के Seller का Delivery Point समझना बहुत ही मुश्किल है|

CIF में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Unloading & Loading 2
  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

CPT – Carriage Paid To (Place)

इसमें Place Mention करना होता है|

इसमें एक थोड़ा सा विषय देखने वाला है|

आप  देखेंगे तो Loading & Unloading को Incoterm Chart में मैंने Seller और Buyer दोनों की जिम्मेदारियों को Mention किया है|

इसका अर्थ यह है कि यह विषय (Loading & Unloading) Negotiable होता है|

यदि Buyer लोडिंग-अनलोडिंग पर Agree होता है तो Buyer Pay करेगा वरना Seller Pay करेगा|

CPT में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Insurance
  • Unloading & Loading 2 – (Buyer / Seller)
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

CIP – Carriage & Insurance Paid To (Place)

इसमें भी Place Mention करना होता है|

Place Mention करने पर Seller की जिम्मेदारी उस Place तक की तय हो जाती है|

इसमें एक थोड़ा सा विषय देखने वाला है की CIP और CPT में केवल Insurance का अंतर होता है| CIP में Insurance Seller को लेना होता है|

CIP में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Unloading & Loading 2 – (Buyer / Seller)
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

DAT – Delivered At Terminal

इसमें बल्क कार्गो यूज नहीं किया जाता|

इसमें Unloading का charge seller को ही देना होता है|

यदि Buyer ने Place में अपना गोडाउन दिया है तब Seller को उसके गोडाउन तक डिलीवरी देनी पड़ेगी|

इसमें Delivery Place का बहुत महत्व है| 

DAT में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Transport To Destination
  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

DAP – Delivered at place

इस केस के अंदर सारी जिम्मेदारियां  Seller की होती हैं |

Buyer को केवल Duties तथा taxes चुकाने होते हैं|

पर इसमें भी एक कंडीशन होती है|

मान लो, यदि Buyer ने Delivery Place अपना Warehouse न चुनकर Sanghai Port ही चुन लिया हो तो Buyer केवल वहां तक की ज़िम्मेदारी ही लेगा| 

पर final unloading Buyer को ही करनी होगी|

Final unloading से मतलब Buyer का godown से है|

DAP में Buyer की जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं|

  • Custom Clearance
  • Import Duties & Taxes

DDP – Delivered Duty Paid (Place)

यह Incoterms की आखरी term होती है|

इसमें Seller को ही सारी Duties तथा Taxes, Pay करने होंगे|

पर जो final unloading है वो Buyer को ही Pay करनी होगी|

यह incoterm केवल वही लोग use करते हैं जिनका Buyer की country में भी ऑफिस होता है ताकि वह customs इत्यादि चीज़ों को आसानी से handle कर लें|

FAQs: Incoterms

Incoterms full form क्या होती है?

Incoterms full form होती है: International Commerce Terms: “In=International (अंतरराष्ट्रीय) + Co=Commerce ( वाणिज्य) + Terms (शर्तें)”

इनकोटर्म्स का हिन्दी मीनिंग क्या होता है?

Incoterms meaning in Hindi: “अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य शर्तें”

FOB की फुल फॉर्म क्या होती है?

FOB full form: “Free on board”

Ex-works price का क्या अर्थ होता है?

Ex-works price meaning in hindi: कोई व्यक्ति जब किसी फैक्ट्री को आयात करने के लिए ऑर्डर देता है तो, Seller, Cargo (माल से भरा कंटेनर) केवल अपने Warehouse में Buyer को Provide करवा देगा| इसमे Packing भी Seller की ही जिम्मेदारी है| Warehouse से  प्रोडक्ट ले जाने के लिए सारी Services Buyer को ही handle करनी पड़ेंगी|

CIF की फुल फॉर्म तथा अर्थ क्या होता है?

CIF full form: “Cost, Insurance and Freight”
अर्थ: इसमें प्रोडक्ट की कीमत तथा भाड़ा उसके इंश्योरेंस के साथ जुड़ा होता है|

DDP फुल फॉर्म क्या होती है?

DDP full form: “Delivered Duty Paid”
अर्थ: इसमें Buyer को कुछ नहीं करना होता| Seller की सारी जिम्मेदारी होती है| Seller उसके वेयरहाउस तक उसके प्रोडक्ट को पहुंचा कर देगा|

Freight का हिंदी में क्या अर्थ होता है?

Freight meaning in Hindi: “किराया, माल का किराया, एक जगह से दूसरी जगह माल पहुंचाने का किराया, सामान एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का किराया, भाड़ा, बोझ, लादू, माल का भाड़ा, भाड़े का कुल माल, जहाज या रेलगाड़ी पर लदा हुआ माल”

Seller का हिंदी में क्या अर्थ होता है?

Seller meaning in Hindi: “विक्रेता, सामान बेचने वाला, बेचनेवाला, बनिया, ताजिर, विक्रयशील माल, विक्रयी”

कस्टम क्लीयरेंस का क्या अर्थ होता है?

कस्टम क्लीयरेंस का अर्थ होता है: “आयातित या निर्यातित वस्तु के बारे में कस्टम को सभी जरूरी जानकारी उपलब्ध करवाना तथा सभी जरूरी बिलों का भुगतान करने के बाद वस्तु को अपने अधिकार में लेना|”

एक्सपोर्ट में CPT की फुल फॉर्म तथा अर्थ क्या होता है?

CPT full form in export: “Carriage Paid To”
अर्थ: इसमें (Loading & Unloading) Negotiable होता है| यदि Buyer लोडिंग-अनलोडिंग पर Agree होता है तो Buyer Pay करेगा वर्ना Seller Pay करेगा|

C&F (cost and freight) meaning in Hindi

c&f meaning in Hindi: “लागत और माल ढुलाई”

fob meaning in export in Hindi & fob meaning in export

fob meaning in export in Hindi: “जहाज़ पर निःशुल्क”, fob का अर्थ: यानि की माल जहाज पर लोड करने तक का भाड़ा नि:शुल्क है| इसे पहले ही exporter लागत में जोड़ लेता है|

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