सूत्रधारी कंपनी क्या होती है?: अर्थ एवं परिभाषा | Holding company in Hindi

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इस पोस्ट में आप पढ़ेंगे Holding company क्या होती है?होल्डिंग कंपनी का हिंदी अर्थ क्या है?सूत्रधारी कंपनियों के क्या फायदे हैं?, सूत्रधारी कंपनियों के क्या नुकसान हैं? इत्यादि 

Holding company meaning in Hindi

इस कॉन्सेप्ट को अच्छी तरह समझने के लिए सबसे पहले आपको होल्डिंग का हिंदी अर्थ पता होना चाहिए|

Holding meaning in Hindi: “स्वामित्व, अधिकार, संपत्ति, मालिकपन, जायदाद, जागीर, शेयर पूंजी, धारित राशि, जोत-क्षेत्र, धारण काल, टीके की भूमि, जमा पूंजी, जोत क्षेत्र, पट्टा, अधिकारी”

इन अर्थों को देखने के बाद देखते हैं कि होल्डिंग कंपनी का क्या अर्थ निकलता है?

Holding company meaning in Hindi: “अधिकार वाली कंपनी, नियंत्रक कंपनी, धारण कंपनी, कम्पनी जो शेयर को अपने नियन्त्रण में रखती है, नियंत्रक कंपनी सूत्रधारी कंपनी”

इससे हमें एक चीज स्पष्ट हो गई की होल्डिंग कंपनी का मतलब यह निकलता है कि “वह कंपनी जिसका किसी और कंपनी पर भी नियंत्रण है|”

चलिए! इसे और थोड़ा अच्छी तरह समझ लेते हैं| 

होल्डिंग कंपनी क्या होती है? | सूत्रधारी कंपनी क्या होती है?

holding company meaning in hindi
Holding company meaning in Hindi

किसी कंपनी का स्वामित्व प्राप्त करने के लिए उस कंपनी के 51% या उससे अधिक के शेयर खरीदने पड़ेंगे| 

अब मान लीजिए: किसी कंपनी A ने कंपनी B के 51% शेयर खरीद लिए तो वह B कंपनी की स्वामी बन जाएगी तथा कंपनी A सूत्रधारी कंपनी (Holding company) कहलाएगी| कंपनी B सहायक कंपनी (Subsidiary Company)  मानी जाएगी| 

कंपनी अधिनियम 2013 के अनुसार होल्डिंग कंपनी को ही समेकित बैलेंस शीट (Consolidated balance sheet) तथा प्रस्तावना (Preamble) बनाना पड़ेगा|

इसका यह मतलब नहीं है कि कंपनी B किसी प्रकार का बैलेंस शीट नहीं बनाना पड़ेगी| 

इनका अस्तित्व एक दूसरे से पृथक माना जाएगा| 

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 2(46) के अनुसार होल्डिंग कंपनी की परिभाषा: कंपनी दूसरी कंपनी की सूत्रधारी कंपनी तभी मानी जाती है जब दूसरी कंपनी उसकी सहायक कंपनी हो| 

होल्डिंग कंपनी परिभाषा (Holding company definition)

एक होल्डिंग कंपनी एक ऐसी कंपनी होती है जिसका किसी अन्य कंपनी के 51% या आधे से अधिक के शेयरों पर नियंत्रण होता है। इस कंपनी का उद्देश्य, वास्तव में, अन्य कंपनियों की संपत्ति पर प्रशासन (स्वामित्व) है।

सूत्रधारी कंपनी क्या होती है: चलिए! दोस्तों, अब मैं इसे और भी आसान बना देता हूं|

 मान लीजिए दो कंपनी है|

1- सूर्या प्राइवेट लिमिटेड

2- चंद्रमा प्राइवेट लिमिटेड

अब! सूर्या प्राइवेट लिमिटेड ने चंद्रमा प्राइवेट लिमिटेड के 51% शेयर खरीद लिए| ऐसी स्थिति में सूर्या प्राइवेट लिमिटेड होल्डिंग कंपनी मानी जाएगी| 

चलिए!  एक और स्थिति देखते हैं! 

इस कड़ी में मैं एक और कड़ी जोड़ देता हूं| 

भैया! चंद्रमा प्राइवेट लिमिटेड ने भी एक अन्य कंपनी जिसका नाम तारा प्राइवेट लिमिटेड है उसके 51% शेयर खरीद रखे हैं| 

अब! ऊपर वाले फार्मूले के हिसाब से तो चंद्रमा प्राइवेट लिमिटेड, तारा प्राइवेट लिमिटेड की होल्डिंग कंपनी बन गई|

अब यहां पर सवाल यह उठता है कि “तारा प्राइवेट लिमिटेड का स्वामित्व किसके पास चला जाएगा?”  यानी की इन दोनों कंपनियों का स्वामित्व किसके पास चला गया?

भाई लोगों!, सूर्या प्राइवेट लिमिटेड के के पास दोनों कंपनियों की होल्डिंग आ गई| 

सूत्रधारी कंपनियां कितने प्रकार की होती हैं? (Types of holding company)

शुद्ध (Pure holding company)

एक कंपनी जो मुख्य रूप से सहायक कंपनियों को एकजुट करने और नियंत्रित करने के लिए बनाई गई है।

नहीं समझ में आया ना!  चलिए से थोड़ा सा आसान तरीके से समझाता हूं|

मान लीजिए चार कंपनियां है| यह चारों कंपनियां मिलकर एक नई कंपनी का निर्माण करती है| इस नई कंपनी का कार्य केवल उनके स्टॉक को रखना है| इस नई कंपनी का कार्य इन कंपनियों को या तो नियंत्रित करना हो सकता है, या केवल इनके स्टॉक को रखना हो सकता है| इसके अलावा यह कंपनी कोई भी अन्य व्यवसाय नहीं करती| 

Intermediate holding company

यह एक ऐसे होल्डिंग फर्म होती है जो किसी अन्य कंपनी की होल्डिंग कंपनी है और बड़े निगम की सहायक कंपनी है|

एक इंटरमीडिएट होल्डिंग कंपनी को वित्तीय रिकॉर्ड को छोटे समूह की सूत्रधारी कंपनी के रूप में प्रकाशित करने से छूट दी जा सकती है| 

मिश्रित 

यह कंपनी ने केवल किसी अन्य फर्म को नियंत्रित करती है बल्कि अपने खुद का संचालन भी करती है| इसे होल्डिंग-ऑपरेटिंग कंपनी भी कहा जाता है| 

तत्काल

यह कंपनी वह है जो वोटिंग स्टॉक या किसी अन्य कंपनी के नियंत्रण को बनाए रखती है| जबकि यह कंपनी खुद एक अन्य कंपनी द्वारा पहले से ही नियंत्रित है|  

साधारण शब्दों में यदि मैं कहूं तो यह एक प्रकार की ऐसी होल्डिंग कंपनी होती है जो पहले से ही किसी कंपनी की सहायक कंपनी है| 

सूत्रधारी कंपनी के क्या लाभ है? (Holding Company & Its Benefits Explained)

इस पोस्ट को अब तक पढ़ने के बाद आपके दिमाग में यह प्रश्न भी आ रहा होगा कि आखिर “होल्डिंग कंपनी का क्या लाभ है?”

गठन में आसानी

होल्डिंग कंपनी बनाना काफी आसान होता है| प्रवर्तक (Promoter) इसके शेयर को खुले बाजार में खरीद सकते हैं| 

अधिक पूंजी

सूत्रधारी कंपनी (Holding company) और सहायक कंपनियों (Subsidiary Company) के वित्तीय संस्थानों को एक साथ रखा  जा सकता है|

इसके साथ ही कंपनी अधिक  लाभ कमाने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर भी परियोजना शुरू कर सकती है| 

प्रतियोगिता से बचाव 

सहायक कंपनी और होल्डिंग कंपनी के बीच कंपटीशन से बचा जा सकता है, यदि दो कंपनियां एक ही प्रकार का काम कर रही हैं|

विशाल पैमाने पर संचालन की अर्थव्यवस्था 

होल्डिंग तथा सहायक कंपनी की खरीद बिक्री को केंद्रीकृत किया जा सकता है| जब थोक में बहुत अधिक मात्रा में माल खरीदा जाता है तो निश्चित तौर पर ही वह सस्ता भी हो जाता है| 

यानी खरीदारी के मामले में इस पैटर्न में बचत हो जाती है| 

गोपनीयता

जब दोनों कंपनियों के मुख्य फैसले एक कंपनी के द्वारा लिए जाएंगे तो निश्चित तौर पर ही वह गुप्त रहेंगे| 

जोखिम से बचाव 

यदि सहायक कंपनियां जोखिम भरा व्यवसाय करती है और असफल रहती है तो निश्चित तौर पर नुकसान तो लगेगा ही| ऐसी स्थिति में यह नुकसान होल्डिंग कंपनी को प्रभावित नहीं करता|

सूत्रधारी कंपनियों के क्या नुकसान होते हैं? (Disadvantages of holding companies)

किसी भी चीज के यदि कुछ फायदे होते तो नुकसान भी अवश्य होते हैं|

सूत्रधारी कंपनियों के फायदे तो आपने जान लिए|  

आइए! अब जानते हैं होल्डिंग कंपनियों को नुकसान क्या होता है?

पूंजीकरण

क्योंकि होल्डिंग कंपनी और उसकी सहायक कंपनी की पूंजी एक साथ जमा हो सकती है,  इस कारण से इसमें पूंजीकरण अधिक हो सकता है|

इसका प्रभाव यह पड़ता है कि शेयरधारकों को उनकी  इन्वेस्टमेंट में उचित रिटर्न नहीं मिल पाता| 

शक्ति का दुरुपयोग

एक सूत्रधारी कंपनी के सदस्यों द्वारा शक्ति का दुरुपयोग संभव है| 

आर्थिक शक्ति का केंद्रीकरण

होल्डिंग कंपनी का प्रबंधन करने वाले के हाथों में आर्थिक एकाग्रता की शक्ति होती है| आर्थिक शक्ति की ऐसी एकाग्रता सामान्यतः आर्थिक कल्याण के लिए बहुत ही हानिकारक है| 

गुप्त एकाधिकार 

इसके द्वारा गुप्त एकाधिकार का निर्माण हो सकता है|  यह गुप्त एकाधिकार  प्रतियोगियों को खत्म करने और नई  कंपनियों के प्रवेश को रोकने की कोशिश कर सकते हैं| 

इसके द्वारा वह अनुचित मूल्य वसूल कर उपभोक्ताओं का शोषण कर सकते हैं| 

शोषण 

एक सूत्रधारी कंपनी अपनी सहायक कंपनी का बहुत ही आराम से शोषण कर सकती है, क्योंकि इनका नियंत्रण सूत्रधारी कंपनी के हाथों में होता है| 

जैसे कि: सूत्रधारी कंपनी द्वारा अपनी सहायक कंपनी को  महंगा माल खरीदने के लिए मजबूर किया जा सकता है|

इसके साथ ही उन्हें अपने उत्पाद बहुत कम कीमत पर बेचने के लिए भी मजबूर किया जा सकता है| 

चालबाजी

सब्सिडी कंपनियों की जानकारी का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए भी किया जा सकता है|

जैसे कि: सहायक कंपनियों के फाइनेंशियल स्टेटमेंट की जानकारी का सट्टा गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सकता है|

सहायक कंपनी क्या होती है? (What is subsidiary company)

Subsidiary company meaning in Hindi: “सहायक कंपनी, नियंत्रित कम्पनी”

सहायक कंपनी को हम daughter कंपनी के नाम से भी जानते हैं| यह वही कंपनी होती है जिस पर होल्डिंग कंपनी (Parent company) का नियंत्रण होता है|

इस कंपनी के मुख्य फैसलों पर होल्डिंग कंपनी ही फैसला करती है|

सहायक कंपनी की परिभाषा: “इसे हम subsidiary कंपनी या daughter कंपनी के नाम से भी जानते हैं| इस पर होल्डिंग कंपनी का स्वामित्व होता है| इसके नियम बनाने तथा मुख्य फैसलों को लेने में होल्डिंग कंपनी मदद करती है| यह एक कंपनी, कॉर्पोरेशन या LLC हो सकती है| इसके Sole owner या Several owner में से एक owner भी हो सकते हैं|”

यदि parent कंपनी द्वारा इसके 100% stakes को रखा जाता है तो इसे “Wholly Owned Subsidiary” कंपनी कहा जाएगा|

साथ ही यह भी देखें:

वन पर्सन कंपनी क्या होती है तथा इसका लाभ कैसे लें?

पार्टनरशिप फर्म क्या होती है? इसे खोलने के फ़ायदे तथा नुकसान क्या होते हैं?

सेक्शन 8 कंपनी क्या होती है?

कंपनी क्या होती है?, भारत में कैसे खोले? तथा कंपनी तथा साझेदारी में क्या अंतर होता है?

उम्मीद करता हूं आपको यह पोस्ट बहुत पसंद आई होगी|

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धन्यवाद| 

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