GST full form | जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) तथा GST के प्रकार क्या है?

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इस पोस्ट के माध्यम से आप जानेंगे की जीएसटी क्या है, GST full form क्या होती है? जब भी आप बिजनेस करने जाते हैं तो आपको जीएसटी के बारे में जानना बहुत ही जरूरी है| 

वैसे तो जीएसटी के बारे में समझना बहुत आसान है परंतु,  इसे सही तरीके से समझाने वाला होना चाहिए|

इसीलिए जीएसटी को समझाने के लिए मैंने पोस्ट लिखने का निर्णय लिया है| मैं जीएसटी को बहुत ही सरल भाषा में समझाने का प्रयत्न करूंगा|

मैं ऐसा मानकर चल रहा हूं कि आप जीएसटी के बारे में बिल्कुल भी नहीं जानते,  इसलिए मैं इस पोस्ट के हर एक टॉपिक को कवर करुंगा|

GST cover topics 

1- GST full form in English

2- GST full in Hindi

3- GSTIN full form

4- GSTN full form

5- जीएसटी क्या है?

6- Types of GST (जीएसटी कितने प्रकार की होती है?)

7- GSTIN (GST identification number) क्या होता है?

8- GSTN (Goods and Service Tax Network) क्या होता है?

9- Input GST क्या होता है?

10- Output GST क्या होता है?

11- GST के कितने slab होते हैं

दोस्तों, सबसे पहले जीएसटी फुल फॉर्म के विषय में जान लेते हैं|

GST full form in English

GST full form in English: “Goods and Services Tax”

जीएसटी की हिंदी फुल फॉर्म: “वस्तु एवं सेवा कर”

चलिए आगे बढ़ते हैं!!

GST क्या है?

यह इस बात को आधार मानकर बनाया गया है कि “एक देश एक टैक्स” 

सरकार के पास आमदनी का मुख्य स्रोत टैक्स होता है| 

Taxes भी दो प्रकार के होते हैं|

1- Direct taxes: Direct tax वह होता है जो इंसान से सीधे तौर पर ले लिया जाता है| 

2- Indirect taxes: Indirect tax वह होता है जो किसी वस्तु या सर्विस की खरीद-फरोख्त में लिया जाता है| 

जीएसटी के लिए सरकार ने इनडायरेक्ट टैक्सेस को जीएसटी में इंक्लूड कर दिया| इससे इनडायरेक्ट टैक्स खत्म होकर उसके स्थान पर जीएसटी आ गया|

जिन इनडायरेक्ट टैक्सेस को जीएसटी में इंक्लूड किया गया है उसकी लिस्ट में नीचे दे रहा हूं|

Indirect taxes list
Custom Duty
Excise Duty
Service Tax
Sales Tax
Vat

GST किसको देना पड़ेगा?

1- जिसका सालाना लेन-देन (turnover) 20 लाख रुपए से ज्यादा है| कुछ स्पेशल केस में यह राशि अलग (10 लाख रुपए) भी है| 

2- एक राज्य से दूसरे राज्य में माल बेचने पर|  यदि आप किसी एक राज्य से दूसरे राज्य में कितनी भी राशि का माल  बेचते हैं तो आपको जीएसटी भरना पड़ेगा| 

3- यदि आप Online platform पर कितने रुपए की बिक्री करते हैं तो आपको जीएसटी भरना पड़ेगा| 

Types of GST (जीएसटी कितने प्रकार की होती है?)

 जीएसटी चार प्रकार की होती है| 

  1. Central GST (C-GST)
  2. State GST (S-GST)
  3. Union territory GST (U-GST)
  4. Integrated GST (I-GST)

चार प्रकार की जीएसटी होने के कारण लोगों को यह भ्रम हो गया कि उन्हें चारों प्रकार की जीएसटी देनी है परंतु, वास्तव में ऐसा नहीं है!

चलिए दोस्तों! इन्हें थोड़ी अच्छी तरह समझ लेते हैं|

एक ही राज्य में खरीद बेच पर किस हिसाब से जीएसटी लगेगा? 

मान लीजिए, आप भारत देश के किसी एक ही राज्य में business करते हैं| आपका लेन-देन भी केवल उसी राज्य में है| 

ऐसी स्थिति में आपको केवल दो ही तरह का टैक्स देना है|

Same state = C-GST + S-GST

यहां पर आपको एक चीज अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए| अक्सर लोग यहीं पर भ्रमित हो जाते हैं|

मान लीजिए, आपके product पर 18% का GST लगता है| 

तो,  9% C-GST +  9% S-GST = 18% GST लगेगा 

इसमें 9% जीएसटी केंद्र सरकार (Central) को मिलेगा तथा 9% जीएसटी राज्य सरकार (State government) को मिलेगा| 

पूरे भारत गणराज्य में यही रुल लगेगा| 

एक राज्य से दूसरे राज्य में खरीद बेच पर किस हिसाब से जीएसटी लगेगा?

जब आप एक राज्य से दूसरे राज्य में माल बेचेंगे तो आपको Integrated GST (I-GST) देना पड़ेगा|

मान लीजिए, आप  एक राज्य से दूसरे राज्य में माल बेचते हैं|

ऐसी स्थिति में आपको केवल Integrated GST (I-GST) देना पड़ेगा|

इंटीग्रेटेड जीएसटी को बनाने का मकसद केवल 2 राज्यों के बीच टैक्स को लेकर हुए विवाद को रोकना था|

इंटीग्रेटेड जीएसटी CGST तथा SGST का ही मिश्रण है|

C-GST + S-GST = Integrated GST (I-GST)

इसमें केंद्र सरकार पहले सारा टैक्स खुद ले लेगी तथा, बाद में  राज्य (State) का हिस्सा उसको दे देगी| 

इस प्रकार सरकार सबको win win situation में लाने के लिए कार्य करती है| 

जैसे कि:  जहां पर वह प्रोडक्ट बना होगा, उस राज्य को रोजगार मिल गया होगा तथा जहां पर वह प्रोडक्ट बिकेगा उसे टैक्स मिल जाएगा! 

एक से ज्यादा राज्य में खरीद बेच पर किस हिसाब से जीएसटी लगेगा?

यदि कोई प्रोडक्ट किसी एक राज्य में बना, कोई बिजनेसमैन उसे दूसरे राज्य में ले गया| उसने वह प्रोडक्ट किसी तीसरे राज्य में  बेच दिया अब ऐसी स्थिति में किस हिसाब से जीएसटी लगेगा?

तो दोस्तों इसे एक उदाहरण द्वारा अच्छी तरह समझते हैं|

मान लीजिए, 

एक product दिल्ली में बना|

उत्तर प्रदेश का कोई व्यापारी उसे खरीद कर ले गया तथा उसने मध्यप्रदेश में यह प्रोडक्ट बेच दिया| 

ऐसी स्थिति में! उस प्रोडक्ट पर Integrated GST (I-GST) लगेगा|

Integrated GST (I-GST) उस राज्य को मिलेगा जिस राज्य में वह माल आखिर में बिका है| जैसे कि: हमारे उदाहरण में मध्य प्रदेश इस उत्पाद को बेचने वाला आखिरी राज्य है|

अब! इससे दो फायदे होते हैं|

1- एक फायदा यह होता है कि जिस राज्य के लोगों ने टैक्स दिया है, उसी राज्य को उसका बेनिफिट मिलता है|

2- दूसरा फायदा यह होता है कि पूरे देश में एक ही टैक्स स्लैब रहता है|

पहले  अलग अलग राज्य सरकारें अलग-अलग टैक्स दरों के हिसाब से टैक्स लेती थी| कहीं पर tax ज्यादा होता था तो वह प्रोडक्ट महंगा हो जाता था| 

इसको मैं एक उदाहरण के माध्यम से अच्छी तरह समझा देता हूं| 

उदाहरण

केंद्र सरकार द्वारा अभी कुछ उत्पादों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है| इसमें से एक है शराब (Liquor)

इसके लिए कुछ राज्यों ने शराब पर बहुत कम टैक्स लगाया हुआ है तथा कुछ ने बहुत अधिक टैक्स लगाया हुआ है|

 जैसे कि:

 1- हरियाणा ने शराब पर बहुत कम टैक्स लगा रखा है|

 2- दिल्ली ने शराब पर हरियाणा से थोड़ा ज्यादा टैक्स लगा रखा है|

 3- उत्तर प्रदेश ने शराब पर दिल्ली से भी ज्यादा टैक्स लगा रखा है| 

अब! इसके कुछ प्रभाव इस प्रकार पड़ते हैं|

1- यूपी के दिल्ली बॉर्डर से सटे लोग, दिल्ली से ही शराब खरीदते हैं| 

2- दिल्ली के हरियाणा बॉर्डर से सटे लोग हरियाणा से ही शराब खरीदते हैं| 

3- दिल्ली तथा यूपी के लोग यदि उन्हें अधिक मात्रा में शराब चाहिए होती है तो वह हरियाणा से शराब खरीदना पसंद करते हैं| 

अब! इसके दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं| 

1- एक राज्य से दूसरे राज्य में एक तय मात्रा से ज्यादा शराब ले जाना जुर्म है|

2- जिस राज्य में शराब की बिक्री होगी टैक्स उसी राज्यों को मिलेगा इससे एक राज्य की कमाई घटती है|

3- इससे देश में तस्करी बढ़ती है| 

नोट: “ यह मैंने केवल गणना की है| ऐसा हो भी सकता है और नहीं भी!  क्योंकि, “पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए|” 

Input GST क्या होता है?

मुझे खुद को यह समझने में बहुत अधिक टाइम लग गया था| बात ऐसी नहीं है कि यह समझना बहुत मुश्किल है,  बात यह है कि इसे किसी ने ठीक से समझाया ही नहीं|

चलिए! अब देखते हैं कि मैं समझा पाता हूं कि नहीं?????? 

परंतु इसे समझने के लिए आपको Output GST तथा Input GST दोनों को समझना पड़ेगा| 

चलिए इसे मैं एकदम सिंपल भाषा में समझाने की कोशिश करता हूं| 

इससे पहले मैं आपके 2 सवालों का जवाब दे देता हूं, जिससे यह टॉपिक समझना और भी आसान हो जाएगा|

हमें कितना जीएसटी देना पड़ेगा?

इसका एक लाइन में जवाब दे देता हूं, इसके बाद आपको इनपुट जीएसटी और आउटपुट जीएसटी अच्छी तरह से समझ में आ जाएगा|

हमें केवल अपने Profit (उत्पाद जिस मूल्य पर खरीदा है तथा जिस मूल्य पर बेचा है उसका अंतर) पर जीएसटी देना पड़ेगा, सीधे तौर पर वह भी हम अपनी जेब से नहीं देंगे ग्राहक से ही लेंगे| 

अब! यहां पर एक दूसरा सवाल भी आपके दिमाग में आ रहा होगा कि “लोग जीएसटी चोरी कैसे करते हैं” 

लोग GST में चोरी कैसे करते हैं?

इसका भी सीधा सा जवाब यह है कि लोग अपना प्रॉफिट कम (जिस मूल्य पर बेचा है) दिखाकर जीएसटी में चोरी करते हैं| 

चेतावनी: कृपया कभी भी किसी भी तरह की चोरी करने की कोशिश ना करें!! अन्यथा अपनी औलाद से भी कह कर जाओगे कि “बेटा कुछ भी गलत-सलत चलत ना करियो वरना सरकार अगला पिछला सब निकाल लेगी!!”

चलिए! अब! समझते हैं इनपुट जीएसटी तथा आउटपुट जीएसटी क्या होता है

Input GST की सरल शब्दों में परिभाषा: “जब भी आप कोई वस्तु खरीद कर लाते हैं तो, उस पर दिया गया GST Input GST होता है|”

उदाहरण:

कोई वस्तु आप ₹100 की खरीद कर लाए| इसमें 18 रुपए जीएसटी इंक्लूड था| अब यह ₹18 आपकी Input GST कहलाएंगे| 

Output GST क्या होता है?

ऊपरवाले उदाहरण से ही समझ लेते हैं| 

जो वस्तु आप ₹100 की खरीद कर लाए थे उसमें 18 पर्सेंट जीएसटी दिया था, इसके हिसाब से ₹18 इनपुट जीएसटी में जुड़ गए| 

यह वस्तु आपने ₹200 की बेची इस पर जीएसटी 18% के हिसाब से ₹36 बना| 

यह ₹36 का जीएसटी आउटपुट जीएसटी कहलाएगा| 

अब इसमें सवाल यह उठता है कि आपको कितना जीएसटी देना है?

तो दोस्तों, जीएसटी तो आपको ₹36 ही देना है| इसमें से ₹18 आप अपनी इनपुट जीएसटी में से कटवा सकते हैं| 

कितना देना जीएसटी है, इसे निकालने का आसान तरीका क्या है? 

आपको 1 महीने में कितना जीएसटी देना है इसे निकालने के लिए मैं बिल्कुल सिंपल तरीका बता रहा हूं| उम्मीद करता हूं आपको यह समझ आ जाएगा|

यदि नहीं समझ में आए तो आप मुझे ईमेल कर सकते हैं| 

  • 1 महीने में आपने एक लाख का माल खरीदा जिस पर आपने ₹18000 का जीएसटी दिया|
  • 18000 का जीएसटी आपके इनपुट जीएसटी में जुड़ गया|
  • अगले महीने आपने फिर एक लाख का माल खरीदा जिस पर आपने फिर से 18 परसेंट का जीएसटी दिया|
  • यह भी  ₹18000 आपके जीएसटी इनपुट में जुड़ गए|
  • अब! आपका टोटल इनपुट जीएसटी हो गया 36000 रुपए
  • मान लीजिए, अब तक आपका कुछ भी माल नहीं बिका है|
  • अब अगले महीने आपका डेढ़ लाख रुपए का माल बिका|  इस पर 18% के हिसाब से ₹27000 जीएसटी बना|
  • आपका टोटल इनपुट जीएसटी था- ₹36000 
  • टोटल Input GST जीएसटी में से ₹27000 घटा दीजिए! अब आपका टोटल इनपुट जीएसटी ₹9000 रह गया|

नोट: सरकार के नियम के अनुसार जीएसटी बिल्कुल लास्ट की कड़ी वाला व्यक्ति देगा| यानी कि वह उपभोक्ता जैसे उस वस्तु को इस्तेमाल करना है|

Reverse GST के बारे में जानने के लिए यह पोस्ट पढ़ें: Reverse GST calculation formula क्या है?

GST tax slabs in India

भारत में जीएसटी के पाँच टैक्स स्लैब है|

  1. 0% (Exempt)
  2. 5%
  3. 12%
  4. 18%
  5. 28%

GSTIN क्या होता है?

सबसे पहले GSTIN full form जान लेते हैं|

GSTIN full form: “Goods and Service Tax Identification Number”

यानी कि गुड्स एंड सर्विस टैक्स आईडेंटिफिकेशन नंबर

  • GSTIN 15 digit का एक नंबर होता है|
  • इसमें शुरुआत के 2 डिजिट उस राज्य के बारे में बताते हैं जिस राज्य में हम BUSINESS  कर रहे हैं|
  • इसके बाद के 10 डिजिट उस व्यक्ति के पैन कार्ड के होते हैं|
  • आखिरी के 3 अंक GSTIN यूनिक अंक होते हैं| 

GSTN क्या होता है?

GSTIN full form: “Goods and Service Tax Network”

जीएसटी का एक बहुत बड़ा नेटवर्क होता है| इस जीएसटी नेटवर्क को ही जीएसटीएन कहते हैं| 

GSTN की website पर अप्लाई करने 1 हफ्ते के अंदर हमें अपना जीएसटी नंबर प्राप्त हो जाता है| 

जीएसटी नेटवर्क के द्वारा पैसे के लेन-देन का पूरा लेखा-जोखा रखा जाता है| 

Goods and service tax council

GST council (गुड्स एंड सर्विस टैक्स काउंसिल) का गठन करने का मकसद जीएसटी में उत्पन्न हुए विवादों का निपटारा करना है|

  • इसमें टोटल सदस्यों की संख्या 33 है|
  • इसका अध्यक्ष यूनियन मिनिस्टर (finance minister) होता है| भारत का केन्द्रीय मंत्री मण्डल इस प्रकार होता है|
  • एक सदस्य केंद्र सरकार का राज्य मंत्री  होता है| 
  • सभी 28 राज्यों के finance minister इसके सदस्य होते हैं| 
  • केंद्र शासित प्रदेश जिनमें विधानसभा के चुनाव होते हैं, उनके वित्त मंत्री भी इसके सदस्य होते हैं|  जैसे कि:  दिल्ली, पांडुचेरी तथा जम्मू एंड कश्मीर 

FAQs: GST

किस देश ने सबसे पहले GST  की शुरुआत की थी?

फ्रांस ने सबसे पहले सन 1954 में GST की शुरुआत की थी| 

भारत में किस समिति की सिफारिश पर जीएसटी लागू हुआ था?

केलकर समिति की सिफारिश पर लागू हुआ था|

GST में कितने प्रकार के indirect taxes को शामिल किया गया है? 

GST में 17 प्रकार के indirect taxes को शामिल किया गया है|

भारत में जीएसटी कब लागू हुआ था?

1 जुलाई 2017 को भारत में जीएसटी लागू हुआ था|

भारत  किस देश का GST MODEL फॉलो करता है? 

भारत देश कनाडा का GST MODEL फॉलो करता है|

जीएसटी चोरी करने पर कितने साल की सजा है?

जीएसटी चोरी करने पर 5 साल की सजा का प्रावधान है| 

GST full form क्या है?

GST की full form है: “Goods and Services Tax”

GST की हिन्दी full form क्या है?

GST की हिन्दी full form है: “वस्तु एवं सेवा कर”

क्या सरकारी कार्य में मेंटेनेंस कार्य के लिए जीएसटी बिल जरूरी है?

जी हाँ, सरकारी कार्य में मेंटेनेंस कार्य के लिए जीएसटी बिल जरुरी है?

बिल की पेमेनट नही हो तो जीएसटी जमा करनी चाहिए या नही

करनी चाहिए, बिल की पेमेनट नही हो तो जीएसटी जमा करनी चाहिए| पेमेंट लेना ना लेना आपका काम है सरकार का नहीं|

क्या सरकारी कर्मचारी जीएसटी नंबर ले सकता है?

इस सवाल का जवाब ठीक से समझें|
सरकारी कर्मचारी जीएसटी नंबर ले सकता है परंतु, उसकी नौकरी चली जाएगी| ऐसा इसलिए किया गया है की सरकारी कर्मचारी, सरकारी तंत्र का आसानी से फायदा उठा सकता है|
जैसे की:
GST department का कोई कर्मचारी जीएसटी नंबर अपने नाम पर ले-ले तो वह बहुत फायदा भी उठा सकता है|
पर वह अपने घर के किसी अन्य सदस्य के नाम पर जीएसटी नंबर ले सकता है, और फायदा तब भी उठा सकता है| हा-हा-हा-हा
परंतु जीएसटी में फायदा उठाना इतना आसान नहीं है|

क्या गुड्स और सर्विस दोनों के लिए एक जीएसटी नंबर अप्लाई किया जा सकता है?

जी हाँ, गुड्स और सर्विस दोनों के लिए एक जीएसटी नंबर अप्लाई किया जा सकता है|

जीएसटी में उपभोक्ता का क्या मतलब होता है?

जीएसटी में उपभोक्ता से मतलब उस व्यक्ति से होता है जो उस जीएसटी लगी वस्तु का आखिर में उपभोग (इस्तेमाल) करता है|

क्या जीएसटी का पूरा कर अंतिम कस्टमर को ही pay करना पड़ता है?

जी हाँ, जीएसटी का पूरा कर अंतिम कस्टमर को ही pay करना पड़ता है|

भारत कहाँ की जीएसटी को फॉलो कर रहा है?

कनाडा का GST MODEL फॉलो करता है

जीएसटी पुराने कर से अच्छा है या नही?

निश्चित तौर पर जीएसटी पुराने कर से अच्छा है|

जीएसटी से पहले कितने प्रकार के कर लेते थे?

जीएसटी से पहले 17 प्रकार के अलग-अलग कर लेते थे|

साथ ही आपको यह भी अवश्य देखें:

e-Rupi क्या है?

Customer base क्या होता है?

GDP क्या है तथा GDP meaning in Hindi

खुद का बिजनेस कैसे शुरु करें? (How to start a business)

दोस्तों,  यदि आपको यह पोस्ट पसंद आई हो और आपको लगता है कि, यह पोस्ट किसी और के भी काम आ सकती है तो कृपया इसे अधिक से अधिक मात्रा में शेयर अवश्य करें| 

इसी प्रकार business  से संबंधित अगली पोस्ट में, मैं फिर मिलूंगा तब तक के लिए नमस्कार 

धन्यवाद 

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