अग्नि बीमा के प्रकार | Fire insurance policy types in Hindi

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अग्नि बीमा के प्रकार (Fire insurance policy types)

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अग्नि बीमा के प्रकार

1- मूल्यवान पॉलिसी (Valued policy)

इस पॉलिसी के अंतर्गत उन वस्तुओं का बीमा किया जाता है जिनकी कीमत समय के अनुसार घटती या बढ़ती रहती है| 

या फिर हम ऐसा भी कह सकते हैं कि “मूल्य नीति उन वस्तुओं के लिए ली जाती है जिनका मूल्य आग से नुकसान की स्थिति में गणना करना मुश्किल हो जाता है|” 

जैसे कि: पेंटिंग, आर्ट वर्क, मूर्तिकला इत्यादि 

अब!  यहां पर एक सवाल यह होता है कि “जब किसी वस्तु की कीमत का निर्धारण करना मुश्किल है तो उसके लिए इंश्योरेंस पॉलिसी कैसे ली जाती है?” 

तो इसके लिए जिस वक्त इंश्योरेंस लिया जाता है उस वक्त उस वस्तु की एक कीमत का निर्धारण किया जाता है| 

उदाहरण: मान लीजिए, किसी पेंटिंग की कीमत ₹10,000 निर्धारित की गई तो आग से नुकसान लगने की स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी द्वारा ₹10,000 तक की भरपाई की जाएगी! 

2- औसत नीति (Average policy)

संपत्ति के मूल्य से कम राशि के लिए पॉलिसी लेने के लिए बीमित व्यक्ति को दंडित करने के लिए एक औसत खंड जोड़ा जाता है।

ऐसा लोग यह सोचकर करते हैं कि इससे बीमा का प्रीमियम कम हो जाएगा! 

परंतु वह इस बात की तरफ ध्यान नहीं देते की नुकसान लगने की स्थिति में केवल इतने रुपए का भुगतान कंपनी द्वारा किया जाएगा जितने का आपने इंश्योरेंस लिया है! 

यानी कि: आपकी संपत्ति का मूल्य है ₹2000,00 और आपने पॉलिसी करवाई है ₹1000,00 की या ₹2000,00 से कम की! 

इस स्थिति में आग के द्वारा नुकसान लगने पर आपको उस राशि के अनुसार ही बीमा मिलेगा जितने की आपने इंश्योरेंस पॉलिसी ली है!

उदाहरण: मान लीजिए, आपने दो लाख रुपए की संपत्ति के विरुद्ध एक लाख रुपए की पॉलिसी ली है|

यानी कि आपने वास्तविक मूल्य के मुकाबले 50% कम की इंश्योरेंस पॉलिसी ली है!

अब!  दुर्घटनावश आग लग जाती है और इसमें 50 हजार रुपए का सामान जलकर खाक हो जाता है! 

ऐसी स्थिति में कंपनी द्वारा केवल 25 हजार रुपए का ही भुगतान किया जाएगा! 

नोट: बीमा पॉलिसी कंपनियां अंडरवैल्यू पॉलिसी को हतोत्साहित करना चाहती हैं!

3- विशिष्ट बीमा (specific Policy)

इस पॉलिसी के तहत, एक विशिष्ट राशि के लिए जोखिम का बीमा किया जाता है। संपत्ति के नुकसान के मामले में, बीमाकर्ता नुकसान का भुगतान करेगा यदि यह निर्दिष्ट राशि से कम है।

यानी कि इस बीमा के तहत एक निश्चित राशि का बीमा किया जाता है| 

उदाहरण: मान लीजिए, आपकी  संपत्ति का मूल्य एक लाख रुपए है|

आपने बीमा कंपनी को इसका वास्तविक मूल्य सही-सही बताया तथा साथ ही आप ने यह कहा कि आप केवल ₹50,000 का ही बीमा लेना चाहते हैं!

अब!  नुकसान कितने का भी लगे कंपनी केवल ₹50,000 तक का ही भुगतान करेगी! 

4- अस्थायी पॉलिसी (floating policy)

इसे tailor-made policy भी कहा जाता है| किसी की भी जरूरत के हिसाब से कोई चीज बनाई जाती है तो उसे टेलर मेड कहते हैं|

इस पॉलिसी को भी ग्राहक की मांग के अनुसार तैयार किया जाता है| 

यह बीमा पॉलिसी आयात और निर्यात कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए तैयार की गई है।

इस पॉलिसी के अंतर्गत अलग-अलग स्थानों पर गोदामों में रखे हुए माल का बीमा होता है|

ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि पॉलिसी होल्डर को अलग-अलग गोदाम में रखे हुए माल के लिए अलग-अलग पॉलिसी ना लेनी पड़े!

नुकसान होने की स्थिति में कंपनी द्वारा वास्तविक नुकसान के मूल्य का भुगतान किया जाएगा| 

5- अतिरिक्त बीमा (excess policy)

जब किसी वस्तु के दाम उतरते चढ़ते रहते हैं ऐसी स्थिति में उस वस्तु के उच्चतम स्तर तथा निम्नतम स्तर के मूल्य का बीमा इस पॉलिसी के अंतर्गत किया जाता है|

यानी कि इसमें दो पॉलिसी ली जाती हैं जिसमें एक पॉलिसी निम्नतम स्तर की मूल्य के लिए जाती है तथा एक उच्चतम स्तर के मूल्य के लिए ली जाती है| 

उदाहरण:

आपके गोदाम में ₹1 लाख की आतिशबाजी का सामान रखा है|

दिवाली के महीने में इस सामान की कीमत ₹3 लाख तक पहुंच जाती है| ऐसी स्थिति में आप ₹1 लाख की पूरे साल की पॉलिसी लेंगे तथा दिवाली सीजन के लिए ₹3 लाख का बीमा करवा सकते हैं! 

6- प्रतिस्थापन बीमा (replacement/Reinstatement policy)

यह एक प्रकार की पॉलिसी है जहां बीमाकर्ता को आग से दुर्घटना के नुकसान होने पर बीमा कंपनी द्वारा सामान के बदले सामान दिया जाता है|

उदाहरण:  मान लीजिए, आपकी कंपनी में एक मशीन है जो आग के द्वारा जलकर नष्ट हो गई है| अब! उस मशीन की कीमत चाहे जो मर्जी हो! आपको अग्नि बीमा कंपनी द्वारा वह नई मशीन दी जाएगी| 

इस इंश्योरेंस का प्रीमियम थोड़ा ज्यादा होता है! 

7- व्यापक बीमा (comprehensive policy)

इस फायर इंश्योरेंस में आग के साथ-साथ अन्य कई कारणों द्वारा नुकसान होने का भी इंश्योरेंस  किया जाता है|

यानी कि इस पॉलिसी के द्वारा  एक साथ कई सारे जोखिमों को कवर किया जाता है| 

जैसे कि:  भूकंप, दंगे, विस्फोट, चोरी, सेंधमारी, श्रम अशांति इत्यादि 

8- Consequential loss policy (परिणामी हानि बीमा)

इस पॉलिसी के द्वारा आग की घटना के कारण फैक्ट्री का काम ठप होने की स्थिति में होने वाले नुकसान के लिए बीमा किया जाता है|

उदाहरण: मान लीजिए किसी कंपनी में आग लग गई! अब! इसके अलावा भी कंपनी पर बहुत सारे अन्य खर्चे चालू रहते हैं जैसे कि: किराया, बिजली का बिल इत्यादि

इसमें बीमा कंपनी द्वारा प्रत्येक दिन का एक एवरेज खर्चा निकाल लिया जाता है और उसको प्रिंसिपल अमाउंट द्वारा गणना करके भुगतान किया जाता है|

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

अग्नि बीमा किसे कहते हैं?

समुद्री बीमा क्या होता है?

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