ज्वाइंट स्टॉक कंपनी क्या होती है? | features of joint stock company

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Features of joint stock company: इस पोस्ट में हम ज्वाइंट स्टॉक कंपनी क्या होती है?, ज्वाइंट स्टॉक कंपनी की क्या विशेषताएं होती हैं?, संयुक्त स्टॉक कंपनी के फायदे, संयुक्त स्टॉक कंपनी के नुकसान  इत्यादि के बारे में पढ़ेंगे|

ज्वाइंट स्टॉक कंपनी क्या होती है?

Joint Stock company को कंपनी के नाम से भी जाना जाता है| इसमें बहुत सारी फर्म, ऑर्गेनाइजेशन एवं लोग मिलकर बिजनेस करने के लिए एक साथ हाथ मिलाते हैं|

इसके द्वारा जो बिजनेस लीगल एंटिटी बनती है, यह लीगल एंटिटी कानून की नजर में सेपरेट लीगल एंटिटी होती है| यदि इस कंपनी को खुद के नाम पर कोई संपत्ति खरीदनी है तो, वह खरीद सकती है| खुद के नाम पर दायित्व (Liability) ले सकती है| खुद के नाम से किसी के ऊपर केस करना हो तो कर सकती हैं| 

साधारण भाषा में ज्वाइंट स्टॉक कंपनी का अर्थ: “ऐसी बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन जिसमें अलग-अलग प्रकार के लोग बिजनेस करने के लिए हाथ मिलाते हैं| इस प्रकार की बनी हुई फर्म को अलग से एक लीगल स्टेटस भी दिया जाता है| इसकी एक सेपरेट लीगल एंटिटी बन जाती है| इसे हम कंपनी या ज्वाइंट स्टॉक कंपनी कहते हैं|” 

ज्वाइंट स्टॉक कंपनी को किस कानून के द्वारा नियंत्रित किया जाता है?

कंपनी अधिनियम 1956 के अनुसार इसको नियंत्रित किया जाता था|

समान समय में यह कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत अधिनियमित है| 

शेयर्स

कंपनी धन के लिए शेयर जारी करती है| इस प्रकार शेयर कैपिटल इकट्ठा किया जाता है|

इस प्रकार से कंपनी के साथ शेयर होल्डर्स जुड़ जाते हैं| शेयरहोल्डर को कंपनी का मेंबर या सदस्य भी कह सकते हैं|

संचालन

क्योंकि कंपनी एक कृत्रिम व्यक्ति होती है इसलिए इसे चलाने के लिए प्राकृतिक व्यक्तियों की आवश्यकता होती है| कंपनी में डायरेक्टर का अहम रोल होता है| 

कंपनी के बेहतर मैनेजमेंट के लिए डायरेक्टर्स की नियुक्ति की जाती है| डायरेक्टर का मुख्य काम कंपनी का मैनेजमेंट देखना होता है| 

कंपनी अधिनियम 2013 के अनुसार किसी कंपनी में डायरेक्टर बनने के लिए शेयर होल्डर होना आवश्यक नहीं है| 

ज्वाइंट स्टॉक कंपनी की क्या विशेषताएं होती हैं? (Features of joint stock company)

कृत्रिम व्यक्ति

ज्वाइंट स्टॉक कंपनी भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनीपब्लिक लिमिटेड कंपनी या वन पर्सन कंपनी की तरह कृत्रिम व्यक्ति होती है| 

अलग कानूनी अस्तित्व

कानून की नजर में इसे किसी व्यक्ति की तरह ही देखा जाता है| जैसे कि: इस पर केस दायर भी किया जा सकता है और इस पर केस दायर भी हो सकता है| 

यदि ज्वाइंट स्टॉक कंपनी द्वारा किसी  बैंक से लोन लिया जाता है और किसी समय पर है ज्वाइंट स्टॉक कंपनी बंद होने की कगार पर पहुंच जाती है तो केवल इसकी संपत्ति को बेच कर ही बैंक अपनी भरपाई कर सकता है| इसके सदस्यों की संपत्ति को छुआ तक नहीं जाएगा| 

गठन और नियंत्रण

इसका गठन भी कंपनी अधिनियम 2013 के अनुसार ही होता है| 

इसकी पूरी प्रक्रिया के बारे में मैं कंपनी कैसे खोलें? वाली पोस्ट में लिख चुका हूं| 

सामान्यतः बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के हाथ में सारे निर्णय लेने का अधिकार होता है|

इसको बनाना थोड़ा सा खर्चीला होता है इसके साथ ही इसमें समय भी अधिक लगता है| 

शाश्वत उत्तराधिकार

यह भी किसी सामान्य कंपनी की तरह शाश्वत उत्तराधिकार के नियम पर ही चलती है| 

सार्वमुद्रा

कंपनी कि सहमति हस्ताक्षर द्वारा मानी जाती है| 

अब! क्योंकि कंपनी तो कृत्रिम व्यक्ति है तो यह हस्ताक्षर कौन करेगा| तो यह हस्ताक्षर कंपनी के डायरेक्टर करते हैं, कंपनी की पुष्टि के लिए ही उस पर कंपनी की एक मोहर लगा देते हैं, इसे कंपनी के सार्वमुद्रा भी कहते हैं|

दायित्व

आप दायित्व (Liability) के आधार पर कंपनियों के प्रकार आप पढ़ चुके हैं|

यह एक प्रकार की लिमिटेड यबिलिटी के नेचर वाली कंपनी होती है| 

संयुक्त स्टॉक कंपनी के फायदे

सीमित देयता (limited liability)

इसकी लिमिटेड लायबिलिटी  की वजह से लोन ना चुकता करने की स्थिति में इसके मेंबर्स की संपत्ति सुरक्षित रहती है|

हित का हस्तांतरण (transfer of interest)

इसमें कभी भी अपने शेयर को आसानी से बेच सकते हैं|

जैसे कि: पार्टनरशिप फर्म में अपना हिस्सा बेचने के लिए सभी पार्टनर्स की रजामंदी जरूरी होती है| इस तरह की कोई भी रजामंदी ज्वाइंट स्टॉक कंपनी में नहीं चाहिए होती| 

सतत उत्तराधिकार (perpetual succession)

ज्वाइंट स्टॉक कंपनी लगातार चलते रहने वाली कंपनी होती है| 

जिस प्रकार इसको नियमों के द्वारा बनाया जाता है इसी प्रकार इसको नियमों के अनुसार ही बंद कर सकते हैं| इसकी यह खूबी इसके फायदों में गिनी जाती है| 

पेशेवर प्रबंधन (professional management)

बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की नियुक्ति शेयरहोल्डर्स द्वारा चुनकर ही की जाती है|

इस कारण से कंपनी में एक्सपर्ट लोगों की ही भर्ती हो पाती है|  इन लोगों को एक बेहतर तरीके का प्रबंधन आता है| 

संयुक्त स्टॉक कंपनी के नुकसान 

गठन जटिल (formation complex) 

संयुक्त स्टॉक कंपनी को बनाने के लिए बहुत सारे फॉर्मेलिटी को पूरा करना पड़ता है| 

इसका गठन बहुत ही ज्यादा पेचीदा है| बहुत सारे डाक्यूमेंट्स इकट्ठा करने के बाद उन्हें आर ओ सी के पास अप्रूवल के लिए भेजना पड़ता है| इसमें बहुत ज्यादा समय तथा धन लगता है, इसलिए इसे मैं इसका नुकसान मानूंगा| 

गोपनीयता की कमी (lack of secrecy) 

क्योंकि संयुक्त स्टॉक कंपनी में बहुत सारी फॉर्म तथा लोगों की हिस्सेदारी हो जाती है, इसलिए कभी-कभी बहुत सारी बात गोपनीय बातें बाहर निकलने का डर रहता है|

कई नियम (numerous regulations)

सारे अनुपालन (compliances) पूरे करने पड़ते हैं|

सरकार की सभी गाइड लाइन को पूरा करना पड़ता है| कंपनी अधिनियम 2013 के सारे नियमों को पूरा करना पड़ेगा| 

निर्णय लेने में देरी (delay in decision making) 

जैसे: सोल प्रोपराइटरशिप में आसानी से कोई भी निर्णय लिया जा सकता है| संयुक्त स्टॉक कंपनी में ऐसा होना मुमकिन नहीं है|

मुख्य मुद्दों पर बोर्ड मीटिंग,  जनरल मीटिंग तथा वार्षिक जनरल मीटिंग में निर्णय लिए जाते हैं| इस कारण से कई बाहर बहुत सारे मुख्य निर्णय को लेने में देरी हो जाती है| 

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

MSME की सारी जानकारी

सेक्शन 8 कंपनी क्या होती है?

आईपीओ क्या होता है?

बैंक गारंटी क्या होती है?

आपने क्या सीखा?

इस पोस्ट के माध्यम से आपने  ज्वाइंट स्टॉक कंपनी क्या होती है?, ज्वाइंट स्टॉक कंपनी की क्या विशेषताएं होती हैं? (Features of joint stock company), संयुक्त स्टॉक कंपनी के फायदे, संयुक्त स्टॉक कंपनी के नुकसान  इत्यादि के बारे में जाना|

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