समान पारिश्रमिक अधिनियम क्या है? | Equal remuneration act 1976 in Hindi

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दोस्तों,  इस पोस्ट के माध्यम से हम equal remuneration act 1976: यदि आप बिज़नेस करते हैं तो आपको इस एक्ट के बारे में अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि सरकार के द्वारा समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 क्यों बनाया गया?

यदि आप Business Laws के बारे में जानना चाहते हैं या आप लेबर लॉ के बारे में अध्ययन कर रहे हैं तो इस पोस्ट के माध्यम से आप  equal remuneration act 1976 के बारे में बहुत ही आसान हिंदी भाषा में जानकारी ले सकते हैं| 

सबसे पहले हमें किसी भी कानून को समझने से पहले उस कानून के शब्दों का अर्थ समझना जरूरी है|

तो चलिए दोस्तों शुरू  करते हैं!!

Equal remuneration meaning in Hindi

Remuneration meaning in Hindi: “पारिश्रमिक, प्रतिफल, पुरस्कार, पारितोषिक, मुआविज़ा, मेहनताना “

Equal meaning in Hindi: “ समान, बराबर, समकक्ष, समरूप, बराबर होना “

यानी कि मैं अब इन दोनों शब्दों को मिलाकर इनका एक हिंदी अर्थ बनाता हूं तो आपको इस कानून के संबंध में अच्छी तरह पता चल जाएगा कि यह कानून किस चीज के ऊपर बना है|

Equal remuneration meaning in Hindi: समान पारिश्रमिक, बराबर मेहनताना, समरूप प्रतिफल, बराबर मुआविज़ा”

अब आप equal remuneration का अर्थ जान गए हैं तो आपको इतना तो समझ आ ही गया होगा की यह कानून किस विषय के लिए बना है|

Equal remuneration act 1976 बनाने का मकसद क्या था?

यदि किसी भी संस्थान के अंदर आदमी तथा औरत साथ में काम करते हैं तो उन दोनों को “ यदि वह एक ही प्रकार का काम कर रहे हैं, Same nature का काम कर रहे हैं “ तो उनके वेतन (Wages) में लिंग आधार पर किसी भी प्रकार का पक्षपात (भेदभाव-discrimination) नहीं होना चाहिए| 

इसी बात को सुनिश्चित (Ensure)  बनाने के लिए इक्वल रैम्यूनरेशन एक्ट 1976 को बनाया गया है| 

सेक्शन 1 के अनुसार: यह ऐक्ट पूरे भारत में समान रूप से लागू होगा| इस एक्ट का नाम Equal remuneration act 1976 है|

Remuneration क्या होता है?

सेक्शन 2 के अनुसार: रैम्यूनरेशन की परिभाषा: Remuneration के अंदर “ बेसिक सैलेरी, बेसिक वेजेस, वेतन के रूप में किसी भी प्रकार का भत्ता “ यह सारी चीजें सम्मिलित मानी जाएंगी| चाहे यह लिखित हो अथवा अलिखित| 

एक ही प्रकृति का काम

अब हमें यह कैसे माना जाएगा कि जो काम किया जा रहा है वह सेम नेचर का है|  

1- इसके लिए कानून में लिखा गया है कि जिस भी किसी काम में यह तीन चीजें – “ कौशल (Skill) प्रयास (Effort) ज़िम्मेदारी (Responsibilityt) “ समान हों| इस प्रकार के काम को  सेम नेचर का काम माना जाएगा| 

2- साथ ही साथ यही काम समान काम करने की स्थिति (Similar working condition) में भी किया जाना जरूरी है| 

जैसे:– एक आदमी को मैट्ट्रेस बनाने का काम साधारण तापमान में करवाया जा रहा हो तथा वही काम दूसरे व्यक्ति द्वारा बहुत तेज धूप में करवाया जा रहा हो| 

उदाहरण:

इस उदाहरण द्वारा आप इस पूरे बिंदु को बहुत अच्छी तरह समझ जाएंगे| मान लीजिए किसी कंपनी में किसी महिला डायरेक्टर की नियुक्ति हुई| 

इस एक्ट के अंदर सभी संस्थान आएँगे चाहे वह स्मॉल कंपनी हो, वन पर्सन कंपनी, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी हो, पब्लिक लिमिटेड कंपनी हो या कोई पार्टनरशिप फर्म हो| 

इसी कंपनी में  5 डायरेक्टर की भर्ती हुई जिसमें एक महिला डायरेक्टर भी नियुक्त की गई|

इन पांचों डायरेक्टर का कंपनी में एक ही प्रकार का कार्य था तथा एक ही प्रकार के नेचर में सबको काम करना था|

अब हुआ यूं कि महिला डायरेक्टर को छोड़कर सबको समान वेतन तय हुआ क्योंकि वह एक महिला थी इसलिए उसे बाकी डायरेक्टर के मुकाबले कम वेतन तय किया गया| 

इसी भेदभाव को खत्म करने के मकसद से समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 बनाया गया है| 

Equal Remuneration Act, 1976 Section 3

Act to have overriding effect: अधिभावी प्रभाव के लिए अधिनियम

जैसा की आप लोगों को पता है कि हमारे देश में बुद्धिजीवियों की कोई कमी है तो  नहीं है! 

 परंतु हम क्या करें सरकार जब कानून बनाती है तो इन बुद्धिजीवियों के दिमाग के ऊपर विशेष ध्यान देती है|

Equal Remuneration Act, 1976 के Section 3 में इन बुद्धिजीवियों का विशेष ध्यान रखा गया है|

आइए जानते हैं! समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 का सेक्शन 3 क्या कहता है|

इस अधिनियम के प्रावधानों में किसी अन्य कानून या किसी पुरस्कार, समझौते या सेवा के किसी भी पुरस्कार अनुबंध का प्रभाव नहीं होगा (any award contract of service shall not have the effect), चाहे वह इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले या बाद में, या किसी भी उपकरण में किसी भी प्रभाव में होने के बावजूद निहित किसी भी चीज के बावजूद प्रभावी होगा।

अर्थ:  यानी के आप कोई भी Contract (अनुबंध) नहीं बना सकते जिसमें लिंग के आधार पर इस कानून की अवहेलना की गई हो| 

अर्थात यह कानून “ किसी भी पुरस्कार, सेवा के किसी भी अन्य अनुबंध पर, रोज़गार के किसी भी अन्य शर्तों पर” सबसे ऊपर रहेगा| कोई भी इस प्रकार का कॉन्ट्रैक्ट नहीं बना सकता जिसमें लिंग के आधार पर पारिश्रमिक भेदभाव किया गया हो| 

इतना समझ लीजिए! कि “ कोई भी संस्थान योग्यता (Merit)  के आधार पर तो भेदभाव कर सकती है परंतु लिंग के आधार पर कतई भेदभाव नहीं कर सकती “

Equal Remuneration Act, 1976: Section 4

नियोक्ता कर्तव्य (Employer Duty) 

1- समान कार्य या कार्य की प्रकृति के लिए पुरुषों और महिला श्रमिकों को समान पारिश्रमिक का भुगतान करने के लिए नियोक्ता (Employer) का कर्तव्य:

यदि किसी संस्थान के अंदर एक आदमी तथा औरत दोनों काम कर रहे हैं इनको नकद तथा वस्तु (in-kind) के रूप में दोनों तरीके से भुगतान किया जाता है|  

यदि वह दोनों एक ही प्रकार की परिस्थितियों में काम कर रहे हैं तो इन दोनों कर्मचारियों (महिला तथा पुरुष) को  समान रूप से पारिश्रमिक दिया जाना आवश्यक है|  

2- पहले मिल रही सैलरी में कमी करना:

सेक्शन 4 कहता है कि कोई employer पहले से मिल रही सैलरी में लिंग के आधार पर reduction (कमी) भी नहीं कर सकता| 

नोट: इस कानून के आने से पहले पारिश्रमिक में भेदभाव हो रहा था तो इस स्थिति में जो भी उच्च दर होगी उसके हिसाब से पारिश्रमिक दिया जाएगा| 

Equal Remuneration Act, 1976: Section

भर्ती (recruiting)

सेक्शन 5 के अनुसार: महिला और पुरुषों श्रमिकों की भर्ती करते समय कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

यानी कि पारिश्रमिक में लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकते परंतु साथ ही साथ भर्ती करने में भी भेदभाव नहीं किया जा सकता|

साथ ही साथ यह  पदोन्नति (Promotion), स्थानांतरण (Transfer), प्रशिक्षण (Training) पर भी समान रूप से लागू होगा| 

अपवाद (exception): केवल उन्हीं जगहों पर भेदभाव किया जाएगा जो कानून में  व्याख्यित हैं|

जैसे कि:-  किसी खतरनाक जगह पर काम करना है जहां महिलाओं के लिए प्रतिबंध लगाया गया है| 

नोट: यह SC/ST reservation act को प्रभावित नहीं करता है| यानी SC/ST एक्ट के अंतर्गत किसी को पदोन्नति की जा रही है तो उस पर equal Remuneration Act लागू नहीं होगा|

Equal Remuneration Act, 1976: Section 6

सलाहकार समिति (Advisory Committee) 

महिलाओं के लिए जो रोज़गार के अवसर हैं इनको जो भी उपयुक्त सरकार होगी वह एक या एक से ज्यादा सलाहकार समिति नियुक्त कर सकती है|

इस सलाहकार समिति में कम से कम 10 सदस्य होने चाहिए तथा इनमें से आधे नियुक्ति महिलाओं के लिए आरक्षित है| 

ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि महिलाएं महिलाओं के परेशानियों को थोड़ा अच्छी तरह समझ सकती हैं| 

एडवाइजरी समिति  का कार्य

किसी संस्थान में कितनी महिलाएं काम करती हैं?, ऐसी स्थिति में काम करना पड़ रहा है?,  कितने घंटे काम करना पड़ रहा है?, कौन सा रोज़गार महिलाओं के लिए ज्यादा उपयुक्त है?, महिलाओं के लिए रोज़गार के अवसर कैसे बढ़ाया जाए?

नोट:- यह एडवाइजरी समिति स्वयं अपने आप को नियंत्रित (Regulate) कर सकती है| 

समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976: अनुभाग 7

उपयुक्त सरकार की शक्ति (Power of appropriate Government)

शिकायतों, दावे की सुनवाई और निर्णय लेने के लिए अधिकारियों को नियुक्त करने के लिए उपयुक्त सरकार की शक्तियाँ

Section 7 के अनुसार यदि किसी भी संस्थान में वेतन में भेदभाव किया जाता है, “ पदोन्नति करते समय भेदभाव किया जाता है,  ट्रांसफर करते समय भेदभाव किया जाता है ”  

इस स्थिति में उपयुक्त सरकार इन शिकायतों तथा दावों की सुनवाई और निर्णय लेने के लिए किसी अधिकारी को नियुक्त कर सकती है|

  1. 1- नियुक्त अधिकारी कम से कम लेबर ऑफिसर के रैंक का होना चाहिए|
  2. इस नियुक्त अधिकारी के क्या अधिकार हैं? कहां तक इसकी सीमा है? यह भी सरकार द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा|
  3. कौन सा कार्य सेम नेचर का है? इसका फैसला भी इस नियुक्त अधिकारी द्वारा किया जाएगा|
  4. जितने भी राशि का वेतन में भेदभाव किया जा रहा होगा उतनी राशि को पीड़ित व्यक्ति को दे दिया जाएगा चाहे वह महिला हो चाहे वह पुरुष|  जैसे कि किसी काम के लिए पुरुष को ₹25000 मिल रहे हैं तथा सेम नेचर के उसी काम को करने के लिए महिला को ₹20000 मिल रहे हैं| अब इसके अंदर ₹5000 का अंतर आ रहा है|  इस राशि का हिसाब निकाल कर महिला को भुगतान करवा दिया जाएगा| 
  5. इस प्राधिकारी के पास CPC (The Code of Civil Procedure) के समान शक्तियां होती हैं| 
  6. इस सेक्शन में employer तथा employee दोनों में से यदि किसी को अपने केस के लिए अपील करनी है तो यह भी उपयुक्त सरकार द्वारा बताया जाएगा कि वह अपील कहां कर सकता है?
  7. -industrial disputes act 1947  के अधिनियम के अनुसार पैसे की रिकवरी की जाएगी|

नोट: 30 दिनों के भीतर (Date of order से)  वह हायर अथॉरिटीज को अपील दायर कर सकते हैं| यह हायर अथॉरिटी उपयुक्त सरकार द्वारा एक नोटिफिकेशन के जरिए बताई जाएगी| 

यदि कोई इन 30 दिनों के भीतर अपील दायर नहीं कर पाता तो उसको 30 दिनों का अतिरिक्त समय भी मिल सकता है| इसके बाद आगे समय नहीं मिलेगा| 

समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976: अनुभाग 8 

काम देने वाले के कर्तव्य (Employer duties )

इसके अनुसार एंपलॉयर का कर्तव्य होता है कि वह अपने एंपलाई की सभी सामान्य जानकारियों का ब्यौरा अपने पास रखें|

जैसे उसकी जन्म तिथि,  रहने का स्थान,  वह क्या काम कर रहा है?,  उसे कितना मेहनताना दिया जा रहा है इत्यादि 

Section 9 in The Equal Remuneration Act, 1976

निरीक्षक (Inspector)

सेक्शन 9 के अंदर निरीक्षकों के विषय में बताया गया है| 

उपयुक्त सरकार के  नोटिफिकेशन के द्वारा निरीक्षकों की तैनाती कर सकती है| सरकार द्वारा इंस्पेक्टर के अधिकार-क्षेत्र (jurisdiction) के बारे में भी बताया जाएगा|

इंस्पेक्टर सदैव लोक सेवक (public servant) की परिभाषा के अंतर्गत माना जाएगा| 

इस सेक्शन के अंदर इंस्पेक्टर की शक्तियां भी वर्णित की गई हैं| 

जैसे कि:- वह किसी एंपलॉयर से एम्पलाई का रजिस्टर मंगा सकता है, उपयुक्त समय के अंदर ही संस्थान में आ सकता है, सबूतों की खोजबीन में वह संस्थान के किसी भी क्षेत्र में जा सकता है, जरूरी कागज़ात की मांग कर सकता है, एंपलॉयर का निरीक्षण कर सकता है, रजिस्टर की कॉपी बनवा कर ले जा सकता है| इत्यादि 

Section 10 in The Equal Remuneration Act, 1976

दंड (Penalties)

सेक्शन 10 के अंदर दंडो का प्रावधान किया गया है|

इसे तीन कैटेगरी में बाँटा गया है| 

  1. 1-यदि कोई एंपलॉयर रजिस्टर में एंट्री नहीं कर रहा 2- इंस्पेक्टर के मांगने पर वह रजिस्टर को नहीं दे पा रहा 3- एंपलॉयर सबूत देने से मना कर देता है 4- वह अपने एजेंट सर्वेंट को भी सबूत देने से मना करता है|

इस स्थिति में उसे 1 महीने की तक की साधारण सजा या अधिकतम ₹10000 का जुर्माना (या दोनों) लग सकता है|

  1. 1- यदि कोई एंपलॉयर लिंग के आधार पर भर्ती में भेदभाव कर देता है| 2- लिंग के आधार पर वेतन में भेदभाव करता है| 3- किसी अन्य प्रकार का ऐसा भेदभाव करता है जो कि इस अधिनियम का उल्लंघन करता है| 4- उपयुक्त सरकार के दिशा निर्देशों का पालन नहीं करता|  

इस स्थिति में मिनिमम ₹10000 से अधिकतम ₹25000 तक का जुर्माने का प्रावधान है| कम से कम 3 महीने की कैद का प्रावधान है जिसे 1 साल तक बढ़ाया जा सकता है| परंतु यदि आप दोबारा यह जुर्म कर रहे हैं तो आपको 2 साल तक की सजा भी हो सकती है| 

  1. कोई भी व्यक्ति जो इंस्पेक्टर के रजिस्टर मांगने पर उसे मना करता है उस पर ₹500 तक का जुर्माना लग सकता है| 

Section 11 in The Equal Remuneration Act, 1976

कंपनियों द्वारा अपराध (Offenses by companies)

यदि किसी कंपनी द्वारा इस अधिनियम का उल्लंघन किया जाता है| चाहे वह वन पर्सन कंपनी हो,  स्मॉल कंपनी हो,  प्राइवेट लिमिटेड कंपनी हो या फिर पब्लिक लिमिटेड कंपनी हो|

तो उस समय जो भी व्यक्ति उस समय कंपनी का इंचार्ज होगा या कंपनी को चला रहा होगा| जैसे डायरेक्टर,  मैनेजर इत्यादि 

तो वह व्यक्ति दोषी माना जाएगा| इस व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा|

1- यदि वह व्यक्ति यह सिद्ध कर देता है कि उसने भेदभाव नहीं किया है तथा ऐसा हो सकता है कि उसने ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाया तथा इसके उपरांत भी यह अपराध घटित हो गया जिसका उसे संज्ञान नहीं था तो उस पर मुकदमा नहीं चलाया जाएगा| 

2- यदि ऐसा पाया जाता है कि इस अपराध के अंदर और भी लोग सम्मिलित हैं तो  उन सब पर मुकदमा चलाया जाएगा|  यह सभी प्रकार के संस्थानों पर लागू होगी| LLP ( लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप)  भी इसके अंदर  आएँगी| 

Section 12 in The Equal Remuneration Act, 1976

अपराधों का संज्ञान और परीक्षण (Cognizance and trial of offences)

1- अपराधों का संज्ञान आपराधिक मामलों की तरह होगा| मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी का न्यायिक मजिस्ट्रेट इसकी न्यायिक जांच करेगा|

2- स्वत: संज्ञान तथा किसी के द्वारा की जाने वाली कंप्लेंट को वर्णित किया गया है|

Section 13 equal remuneration act, 1976

केंद्र सरकार को नियम तथा कानून बनाने की शक्तियां दी गई है|

Section 14 equal remuneration act, 1976

इसके अंदर केंद्र सरकार राज्य सरकार को यह कानून पालन करने के लिए दिशा निर्देश दे सकती है| 

Section 15 equal remuneration act, 1976

इस सेक्शन के अनुसार यह एक्ट कुछ परिस्थितियों में अप्लाई नहीं होगा| जैसे:- जहां पर महिलाओं को किसी दूसरे एक्ट में कुछ स्पेशल बेनिफिट दिया जा रहा हो| इसका एक उदाहरण है: मेटरनिटी बेनिफिट एक्ट

equal remuneration act, 1976 Section 16 

इसमें उपयुक्त सरकार को यह शक्ति दी गई है कि यदि सरकार को यह दिख रहा है कि किसी विशेष मामले में इस कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा|

केवल बाहर से देखने पर ऐसा लगता है कि लिंग के आधार पर भेदभाव हो रहा है परंतु वास्तव में ऐसा नहीं है वह स्किल के आधार पर भी हो सकता है ऐसी स्थिति में सरकार यह घोषित  कर सकती है कि इस काम में कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा है|

equal remuneration act, 1976 Section 17 

इस कानून को अप्लाई करने में यदि कोई भी दिक्कत आती है तो केंद्र सरकार इसको नोटिफिकेशन के माध्यम से पास कर सकती है| 

equal remuneration act, 1976 Section 18 

क्योंकि यह कानून 1976 में आया था परंतु इससे पहले भी रैम्यूनरेशन एक्ट 1975 था| इससे पहले एक्ट के अंतर्गत यदि कोई आदेश पास हुआ था या दिशा निर्देश दिया गया था तो वह आदेश या  दिशा निर्देश मान्य  रहेंगे| 

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

एक्सपोर्ट इंपोर्ट बिज़नेस कैसे शुरू करें?

Memorandum Of Association क्या होता है? इसमें क्या लिखा जाता है?

Perpetual succession क्या होता है तथा कंपनी में इसका क्या महत्व है?

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दोस्तों,  उम्मीद करता हूं आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा

 मैं नवीन कुमार बिज़नेस के क़ानूनों के बारे में इसी प्रकार लिखता रहूंगा|

अगली पोस्ट में फिर मिलेंगे|

 धन्यवाद 

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