कर्मचारी राज्‍य बीमा अधिनियम क्या है | Employees state insurance act 1948

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यदि आप बिजनेस करते हैं या फिर आप लेबर लॉ के बारे में पढ़ रहे हैं तो यह पोस्ट employees state insurance act 1948 आपके बहुत काम आ सकती है! 

इसके पोस्ट के माध्यम से हम जानेंगे: employees state insurance act 1948 की परिभाषा, the employees state insurance act 1948 का इतिहास, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 के फायदे, इत्यादि के बारे में|  

तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं!

What is ESIC Act 1948

Employees state insurance act 1948 (ESIC ACT 1948) लेबर लॉ का एक महत्वपूर्ण अधिनियम है|

 इस अधिनियम के द्वारा कर्मचारियों के सामाजिक बीमा (Social insurance) का ध्यान रखा गया है|

यह इस प्रकार से बनाया गया है कि इसमें बीमारी (disease), मातृत्व (maternity), अपंगता (disablement), रोजगार की चोट के कारण मृत्यु (Death due to employment injury) और बीमाकृत व्यक्ति और उनके परिवारों को पूर्ण चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के खतरों के खिलाफ एक सामाजिक सुरक्षा प्रदान की गई है| 

जैसे: फायर इन्श्योरेन्स तथा मरीन इन्श्योरेन्स वित्तीय सुरक्षा प्रदान करते हैं इसी प्रकार यह अधिनियम सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है|

चलिए मैं इसको थोड़ा सा आसान भाषा में समझा देता हूं!

ऊपर दिए गए  कारण किसी भी कर्मचारी के जीवन में अस्थिरता ला सकते हैं|

इन सब कारणों से कर्मचारी ही नहीं उसके ऊपर निर्भर व्यक्तियों पर भी बहुत अत्यधिक प्रभाव पड़ता है|

 इस अधिनियम के द्वारा इन सब सामाजिक खतरों को ध्यान में रखते हुए यह कानून बनाया गया जिसको लेबर डिपार्टमेंट द्वारा शासित किया जाता है|

यदि किसी कर्मचारी के साथ कोई ऐसी दुखद घटना घट जाती है तो इस कानून के द्वारा उसको सहायता का प्रबंध किया गया है| 

Employees state insurance act का इतिहास

सबसे पहले हम इस अधिनियम के इतिहास के बारे में जानते हैं|

  1. इस एक्ट के बारे में सबसे पहली शुरुआत B.P. Adarkar जी के द्वारा 1943 में ली गई थी| इनका साथ उस वक्त के हेल्थ डिपार्टमेंट कमेटी के हेड Joseph Bhore जी के द्वारा दिया गया था|
  2. इन दोनों ने अपने इस अधिनियम के बारे में “ इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस तथा स्टैंडिंग लेबर कमेटी “  को बताया|
  3.  इन सब के प्रयासों के द्वारा 6 नवंबर 1946 को यह बिल पेश किया गया| 
  4. इस बिल को “ The workmen’s state insurance bill “ के नाम से पेश किया गया था|
  5. उस वक्त के लेबर मिनिस्टर द्वारा यह कथन कहा गया था “ The bill is a beginning of a scheme of social security on the lines followed in countries much more advanced economically (यह बिल आर्थिक रूप से अधिक उन्नत देशों की तर्ज पर सामाजिक सुरक्षा की एक योजना की शुरुआत है) “ 
  6. सिलेक्टिंग कंपनी द्वारा इसका नाम बदलकर “ employees state insurance bill “  रख दिया गया| 
  7. 19 अप्रैल 1948 को यह बिल प्रभाव में आया| 
  8. संशोधन (amendments)
  9. 1951
  10. 1966- इस बिल को चलाने में जो भी प्रशासन संबंधी दिक्कतें आ रही थी उनको संशोधित किया गया|
  11. 1975
  12. 1984
  13. 1989
  14. 2010- फैमिली मेंबर को भी मेडिकल सुविधाओं की मंजूरी दी गई| 

Employees state insurance act 1948: applicability of the act यह पूरे भारत में समान रूप से लागू है|

  • सभी फैक्ट्रियों में लागू होगा (सीजनल फैक्ट्री, तथा रेलवे रनिंग शेड को छोड़कर)
  • केंद्र सरकार ESI Corporation द्वारा विचार विमर्श करने के बाद किसी भी फैक्ट्री में से लागू कर सकती है तथा राज्य सरकार केंद्र सरकार की परमिशन लेकर 1 महीने का नोटिस देकर इसे किसी भी फैक्ट्री में लागू कर सकती है| 

छूटने की शक्ति (Power to exempt)

  • उपयुक्त सरकार किसी भी संस्थान को इस एक्ट से बाहर रख सकती है| परंतु यह छूट 1 साल से अधिक समय के लिए नहीं हो सकती|
  • यह छूट बढ़ाने के लिए उसे हर साल उसे रिन्यू करना पड़ेगा|
  • छूट देने के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा कारण बताना भी अनिवार्य है| 
  • सेक्शन 90 – यदि सरकार को लगता है किसी संस्थान में इस एक्ट के बिना भी पहले से ही काफी ज्यादा सुविधाएं दी जा रही हैं तो वह उस संस्थान को इस एक्ट से बाहर रख सकती है|

योगदान (Contribution)

  •  केंद्र सरकार द्वारा अंशदान (Contribution) की गणना की जाएगी|
  • employee द्वारा अपने वेतन का 0.75%  तथा employer द्वारा एंप्लोई के वेतन का 3.75%

Employees state insurance act 1948: Benefits 

आइए जान लेते हैं कि कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948: में कर्मचारियों को क्या-क्या लाभ दिए गए हैं?

1- चिकित्सा लाभ (Medical Benefit) 

  • किसी भी मेडिकल ट्रीटमेंट के  खर्चे का ⅛  भाग राज्य सरकार द्वारा खर्च किया जाएगा बाकी का खर्च ESI द्वारा वहन किया जाएगा|
  • राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने वाला ⅛ भाग 1 साल में 12 सौ रुपए से अधिक नहीं दिया जाएगा| यानी कि 1 बटा 8 भाग ₹5000 बनता है तब भी राज्य सरकार द्वारा ₹12 ही दिए जाएंगे|
  • यदि मुख्य एंपलॉयर अपने हिस्से की राशि का अंशदान नहीं करता है तो उस पर उस रकम की देनदारी बन जाएगी जिसको उसे 12% या इससे अधिक ब्याज के साथ चुकता करना पड़ेगा| 

2- अंतिम संस्कार (Funeral benefit)

पुराने समय में यहां तक देखा गया है कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार करने तक के उसके परिवार वालों के पास पैसे नहीं होते थे|

इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा ईएसआईसी में  अंतिम संस्कार के लिए भी एक राशि रखी गई है| 

समय-समय पर इसको महंगाई के अनुसार बदला जाता रहता है| वर्तमान समय में Rs. 15,000/ की धनराशि है|

3- मातृत्व लाभ: Maternity benefit

इसके अनुसार मातृत्व लाभ भी महिला कर्मचारी के लिए इस कानून में रखा गया है| 

4- विकलांगता लाभ (disablement benefit)

कर्मचारी के विकलांग होने की स्थिति में इस अधिनियम में उसके हितों का ध्यान रखा गया है| 

5- निर्भर लाभ (dependent benefit)

यदि कोई कर्मचारी नौकरी करते समय दुर्घटना में मर जाता है, अपंग हो जाता है तो ऐसी स्थिति में उसके परिवार में उसके साथ-साथ उसके ऊपर निर्भर लोगों की भी बहुत दुर्गति हो जाती है| 

इस अधिनियम में कर्मचारी के ऊपर निर्भर लोगों को भी लाभ दिया जाता है| 

6- बीमारी और बीमारी का विस्तार (sickness and extend sickness benefits)

यदि कोई ऐसी दुर्घटना घट जाती है जिससे कि कर्मचारी ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है कि वह ठीक से चल भी ना सके या खड़ा भी ना हो सके|

साथ ही साथ उसकी स्थिति भी सुधर ना रही हो तो ऐसी स्थिति में भी इस अधिनियम में कर्मचारी के हितों का ध्यान रखा गया है|

7- अपंगता (Disablement)

यदि कार्य करने के दौरान हुई दुर्घटना में कुछ समय बाद कर्मचारी अपंग हो जाता है तब भी उसके हितों की रक्षा करने के लिए इस कानून में उसके लिए नियम बनाए गए हैं| 

लेखक के विचार 

मैंने अपनी पूरी ईमानदारी के साथ इस पोस्ट को लिखने का प्रयास किया है| 

यदि आप बिजनेस करते हैं तो आपको इन सब विषयों के बारे में अच्छी तरह जानकारी होनी चाहिए|

बिजनेस करने का मतलब केवल प्रॉफिट नहीं होता| इन सब पोस्ट को लिखकर मैं आपको जागरूक करना चाहता हूं|

लेबर लॉ के बारे में लिखने का मेरा मकसद यह है कि इसके द्वारा आप अपने तथा अपने कर्मचारियों के हितों को जान पाएंगे| 

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

Equal remuneration act 1976 क्या है?

न्यूनतम मजदूरी अधिनियम: 1948 क्या है?

मजदूरी भुगतान अधिनियम: 1936 क्या है

workmen’s compensation act क्या है?

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 मैं नवीन कुमार अब आपसे इजाजत चाहता हूं!

अगली पोस्ट में फिर मिलूंगा तब तक के लिए नमस्कार!

धन्यवाद|

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