Dimensions of business environment in Hindi | कारोबारी माहौल के आयाम

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इस पोस्ट में हम जानेंगे “dimensions of business environment” के बारे में| Business Studies का यह बहुत महत्वपूर्ण topic है|

किसी भी business को करने के लिए “कारोबारी पर्यावरण के महत्व” को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए|

यदि आप इस पोस्ट को पूरा पढ़ लेंगे तो आपको पता चलेगा कि, किसी भी बिजनेस को करने के लिए business environment को समझना कितना जरूरी है|

आप लोगों ने अक्सर सुना होगा कि फलां आदमी बाहर से business studies का course करके आया है, इसलिए उसमें बिज़नेस करने की अधिक समझ है! 

आखिर! business studies में यह लोग ऐसा क्या पढ़ते हैं? जिससे इनकी बिजनेस करने की योग्यता और बढ़ जाती है|

आप भी यह जानना चाहते हैं तो, इस ब्लॉग पर घर बैठे आप business से समबंधित articles पढ़ सकते हैं|

तो शुरुआत आप इस पोस्ट से कीजिए और अपने बिजनेस में तरक्की कीजिए| 

Business environment क्या होता है?

किसी भी business इर्द-गिर्द होने वाले विषय, जिनके होने या ना होने से कोई भी business प्रभावित हो सकता है, उसे business environment कहते हैं| 

यदि मैं आपको, केवल बिजनेस कैसे करना है? इसके बारे में ही बताता रहूं, 

इस बात की आपको कोई जानकारी ना दूँ कि आपके द्वारा किए गए कामों के अलावा भी बहुत सारे तथ्य ऐसे होते हैं जिनसे बिजनेस प्रभावित हो सकता है, तो इसका मतलब मैं आपको अधूरी जानकारी दे रहा हूं|

किसी भी business को फलने-फूलने के लिए एक अच्छे environment की भी आवश्यकता होती है|  

Business environment के बहुत सारे Dimensions (आयाम) होते हैं| आइए! एक-एक करके समझते हैं की बड़े-बड़े business houses environmental scanning कैसे करते हैं?

इनमें से कुछ प्रमुख हैं:

1- Economic environment (आर्थिक माहौल)

2- Legal environment (कानूनी माहौल)

3- Political environment (राजनीतिक वातावरण)

4- Social environment (सामाजिक वातावरण)

5- Technological environment (तकनीकी वातावरण)

Economic business environment (आर्थिक कारोबारी माहौल)

Consumer economic survey 

एक पूरे Business environment में एक ऐसा हिस्सा जो economy से संबंध रखता है, Economic environment (आर्थिक माहौल) कहलाता है|

यहाँ पर ऐसे तत्वों के बारे में बात हो रही है जो economy से संबंधित होते हैं| 

उदाहरण

Economic environment (आर्थिक माहौल)  के लिए consumer की economic condition का आकलन किया जाता है| 

जैसे कि:  कोई भी business industry किसी भी देश में बिजनेस लगाने से पहले वहां के लोगों की खर्च करने की क्षमता को देखती है| इसी के आकलन के आधार पर वह products deliver करते हैं| 

जब लोगों के पास ज्यादा पैसे होते हैं तो वह ज्यादा खर्च करते हैं! 

यानी कि business houses यह देखते हैं कि जहां पर वह business शुरू करने जा रहे हैं, उसके आसपास के लोगों की economic condition क्या है?

क्या वह उनके द्वारा बनाए गए products को आसानी से खरीद सकते हैं? 

यदि उनकी research में यह सामने आता है कि consumer की जेब में काफी अधिक पैसा है, तो वह high value quality products का निर्माण करते हैं|

परंतु यदि कहीं consumers आर्थिक स्थिति ज्यादा ठीक नहीं है तो, वह थोड़े low budget वाले goods का निर्माण करेंगे|

Economic affected elements

आर्थिक वातावरण में शामिल होने वाले तत्व हैं|

1- GDP (gross domestic products): “एक निश्चित समय अवधि में, एक देश में उत्पादित होने वाली वस्तु एवं सेवाएं” यानी कि, मान लीजिए, 1 साल के अंदर किसी देश में कितनी वस्तुएं एवं सेवाएं उत्पादित (Produced) हुई है| 

GDP के बारे में अधिक जानने के लिए यह पोस्ट पढ़ें: GDP क्या है तथा GDP meaning in Hindi

2- Income level at national level & per capita level (राष्ट्रीय स्तर पर और प्रति व्यक्ति आय का स्तर): “प्रत्येक व्यक्ति 1 साल में प्रतिदिन लगभग कितना कमाता है?) 

3- Profit earning (लाभ अर्जन): किसी उत्पादित की जाने वाली वस्तु पर कितना लाभ मिल रहा है| 

4- Productivity (Productivity): किसी वस्तु का कितना उत्पादन हो रहा है? 

5- Employment rate (रोज़गार दर): किसी देश, में प्रत्येक इंसान में से कितने लोग बेरोजगार हैं? 

6- Industrial 

7- Monetary and fiscal policy of the government (सरकार की मौद्रिक और राजकोषीय नीति): Business industry के लिए सरकार द्वारा बनाए गए ऐसी कोई भी नहीं थी जिससे उसके व्यापार पर असर पड़े| 

आर्थिक वातावरण के कुछ पहलू (Some aspects of economic environment)

अब हम कुछ ऐसे आर्थिक वातावरण के पहलुओं को समझते हैं जिनके कारण या तो बिजनेस प्रभावित हो सकता है या हो चुका है|

इन्हें समझने से हम अपने business करने में economic environment का क्या महत्वपूर्ण योगदान है, इसके बारे में अच्छी तरह समझ जाएंगे| 

  • किसी भी देश की GDP जब बढ़ जाती है तो, इसका सीधा सा मतलब होता है कि लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसा भी बढ़ गया है! जब भी कोई business house इस स्थिति को समझ कर, business की दिशा में आगे कदम बढ़ाता है, इसका मतलब उसने business के आर्थिक वातावरण का अध्ययन कर लिया है| 
  • मुद्रास्फीति (Inflation) का अध्ययन करना: 

मुद्रास्फीति के बारे में अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट पढ़ें: Inflation: मुद्रास्फीति तथा अपस्फीति क्या होती है?

  • जब भी interest rate घटती है, उस समय पर ज्यादा लोग bank से loan लेना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें पहले की तुलना में bank को कम पैसा चुकाना पड़ेगा! 

Business loan लेना चाहते हैं तो यह पोस्ट पढ़ें: Business loan कैसे मिलेगा?

  • GST Bill आने की वजह से शुरुआत में business organization को बहुत परेशानी हुई थी| हालांकि, बाद में यह बिजनेस के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुआ, परंतु इसकी कार्यान्वयन (implementation) का तरीका ठीक नहीं था| 
  • Demonetization (विमुद्रीकरण): एक दिन भारत सरकार ने अचानक ही 500 तथा ₹1000 करेंसी नोट का चलन बंद कर दिया था| इस प्रकार के economic environment वातावरण में बिजनेस बहुत तेजी से प्रभावित हुए थे| 
  • बैंकिंग क्षेत्र में सुधार (Banking sector reforms): यह business industry को बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया एक अच्छा कदम है| इसके द्वारा bank loan को और अधिक सुगम बनाया गया है| इसका नतीजा यह हुआ कि जब लोगों को लोन आसानी से मिलने लगे, और उनके हाथ में अतिरिक्त पैसा आ गया तो उन्होंने खरीदारी भी जमकर की|

तो चलिए दोस्तों!  अब बात करते Social environment  के बारे में|

Social environment (सामाजिक माहौल)

अब! हम किसी भी बिजनेस के चारों तरफ सामाजिक माहौल क्या भूमिका अदा करता है? 

किसी भी बिजनेस को स्टार्ट करने से पहले Social business environment (सामाजिक कारोबारी माहौल) का विश्लेषण करना अत्यधिक आवश्यक है| 

इसके लिए उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के रीति-रिवाज का अध्ययन करना बहुत आवश्यक है| 

परंपरा (tradition)

किसी भी बिजनेस को शुरू करने से पहले उस क्षेत्र की परंपराओं को अवश्य ही ध्यान में रखना चाहिए| 

उदाहरण:

जैसे कि भारत के दक्षिणी प्रांत में “लूंगी” को पहनना उनकी परंपरा का हिस्सा है| ऐसे में वहां पर जींस पैंट का उत्पादन करने वाला बिजनेस प्रभावित हो सकता है|

नोट: यह उदाहरण मैंने केवल इस बिंदु को समझाने के लिए दिया है| मैं ऐसा नहीं कह रहा है कि भारत के दक्षिण प्रांत के लोग जींस पैंट नहीं पहनते| 

व्यक्तिगत जानकारी (personal Information)

जहां पर बिजनेस हो रहा है उसके आसपास के लोगों के रहने का तौर तरीका कैसा है?(living standard), उनकी पसंद ना पसंद क्या है? (choice, taste), उनकी शिक्षा का स्तर कितना है? (education level) इत्यादि विषय भी किसी बिजनेस को प्रभावित कर सकते हैं|

इन सभी विषयों को यदि आप नजरअंदाज करते हैं तो, हो सकता है इसका तुरंत असर ना पड़े, परंतु एक लंबे समय के बाद इसका अवश्य ही असर होगा| 

उदाहरण:

दिवाली, ईद, गुरु नानक पर्व, रक्षा बंधन, क्रिसमस डे, फ्रेंडशिप डे जैसे अवसरों को नजरअंदाज करना, अपने ही बिजनेस को प्रभावित करना है| 

सामान्य तथ्य (common factors)

अब! बात करते हैं कुछ ऐसे सामाजिक तथ्यों के बारे में जिनसे हमारा business social environment चेंज हो सकता है| 

1- आरक्षण (reservations): किसी क्षेत्र में यदि अल्पसंख्यक और महिलाओं को आरक्षण देने की आवश्यकता है तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए| 

2- महिलाओं को भी पुरुषों की भांति समान मेहनताना पाने का हक है| अब तो! इसके लिए Law भी बन चुका है| इसे अच्छी तरह समझने के लिए आपको यह पोस्ट पढ़नी चाहिए: Equal remuneration act 1976 क्या है?

3- मध्यमवर्गीय परिवारों में ऑटोमेटिक मशीन तथा लग्जरी आइटम की डिमांड का बढ़ना|

4- social movements की वजह से बालिकाओं में भी शिक्षा का स्तर बढ़ना| इससे stationary business इजाफा हो सकता है|  

5- Health and fitness संबंधी विषयों को trend में आने की वजह से भी हमारा social business environment चेंज होता है| 

6- जीवन की गुणवत्ता में बदलाव होने से भी business environment  प्रभावित होता है| 

7- कार्यबल में महिलाओं का महत्व या स्थान में बिजनेस एनवायरमेंट को प्रभावित करता है| 

8- जन्म दर,  मृत्यु दर तथा बढ़ती जनसंख्या से भी social business environment प्रभावित होता है|

9- ग्राहकों की नई खोज के विषय में सोच, उनका जीवन जीने का तरीका भी सोशल एनवायरमेंट का हिस्सा है|

10- किसी भी क्षेत्र का education and literacy graph (शिक्षा और साक्षरता ग्राफ) का घटना या बढ़ना बिजनेस को प्रभावित कर सकता है|

11- लोगों की आदतें, उनके रीति रिवाज, जीवन जीने के तौर तरीके से भी बिजनेस प्रभावित होता है|

जैसे कि: पुराने समय में लोग नीम के दातुन से दांत साफ करते थे, उस समय पर tooth brush की डिमांड नहीं थी| ऐसे में यदि कोई इंडस्ट्री, टूथ ब्रश बनाने लगती तो उसका प्रोडक्ट बिकता ही नही|

राजनीतिक कारोबारी माहौल

राजनीतिक व्यावसायिक माहौल (Political business environment) क्या होता है?

सत्ता में जो सरकार है उसके द्वारा लिया गया हर वह फैसला जिससे कि बिजनेस प्रभावित होता है उसे Political business environment (राजनीतिक कारोबारी माहौल) कहा जाता है|

किसी भी business में political environment क्या रोल निभाता है? इसके बारे में जान लेते हैं| 

कोई भी बिजनेस अपने आसपास होने वाली बहुत सारे कारकों से प्रभावित होता है|  

यानि की बिजनेस के आसपास होने वाली गतिविधियों द्वारा प्रभावित होना| 

Social business environment तो एक बार के लिए आपको तुरंत प्रभावित नहीं करता परंतु political business environment से किसी भी बिजनेस पर तुरंत प्रभाव पड़ जाता है| 

उदाहरण:

सरकार द्वारा पॉलिथीन बैन करना तथा PVC scrap  पर पाबंदी लगाने से, प्लास्टिक इंडस्ट्री तुरंत ही प्रभावित हो गई थी| 

उस समय तक मैं भी अपने एक दोस्त के import के काम का मैनेजमेंट करता था| उस समय हमारे 6 कंटेनर pvc scrap पहुंचने वाले थे| 

सरकार द्वारा पॉलिथीन के इस्तेमाल के लिए G.S.M. में नए दिशा-निर्देश जारी किए गए| इससे हमारा माल तो हमारे पास आ गया, परंतु उसका इतना तुरंत प्रभाव पड़ा कि उसमें से काफी माल अभी तक नहीं बिका है|

चलिए अब! हम जानते हैं कि Political business environment (राजनीतिक कारोबारी माहौल) का बिजनेस पर और क्या असर पड़ता है? 

कानून (Law)

जैसे कि आप इस ब्लॉग पर business laws के बहुत सारे आर्टिकल पढ़ चुके हैं| किसी भी देश की जमीन पर business करने के लिए बनाए गए laws द्वारा,  बिजनेस पर प्रभाव पड़ता है| 

यदि आप भारत में कोई business खोलना चाहते हैं तो आपको यहां के कानूनों का पालन अवश्य ही करना पड़ेगा|

यदि आप, business laws अनदेखी करते हैं या अज्ञानता वश इनको तोड़ते हैं तो निश्चित ही आपका बिजनेस घाटे में चला जाएगा| 

ऐसा भी होना मुमकिन है कि बिजनेस गड्ढे में चला जाए और आप जेल में चले जाएं! 

उदाहरण:

मान लीजिए, आप भारत में एक कंपनी खोलना चाहते हैं| इसके लिए आपको कंपनी अधिनियम 2013 का अनुसरण करना ही पड़ेगा|

भारत में कंपनी खोलने के लिए यह पोस्ट पढ़े: कंपनी क्या होती है?, भारत में कंपनी कैसे खोले?

यहां तक कि कंपनी बंद करने के लिए भी आपको कानून का पालन करना पड़ेगा|

कंपनी बंद करने का क्या तरीका होता है?, जानने के लिए यह पोस्ट पढ़े: कंपनी को बंद करने का क्या प्रोसीजर होता है?

फैक्ट्री कानून के बारे में जानने के लिए यह पोस्ट पढ़ें: factory act 1948 क्या है?

कानूनी वातावरण में शामिल विषय (Topics covered in the legal environment)

1- किसी भी बिजनेस में सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी प्रशासनिक आदेश का उल्लंघन भी अपराध माना जाएगा| 

जैसे कि: 

1 (1) कोरोना वायरस महामारी के दौरान, प्रशासन ने selected business industries को बंद करने का आदेश दे दिया था| 

1 (2) किसी भी ऐसी वस्तु का निर्यात (export) रोक देना जिसकी देश में बहुत ज्यादा जरूरत है| 

 यदि आप एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बिजनेस करना चाहते हैं तो उसके लिए यह पोस्ट पढ़ें: Export import business कैसे शुरू करें?

2- न्यायालय के फैसलों, विभिन्न कमीशन एजेंसीज के द्वारा लिए गए फैसले, केंद्र सरकार, राज्य सरकार द्वारा लिए गए फैसले भी business legal environment का हिस्सा हैं|

उदाहरण:

नशे से संबंधित पदार्थों पर चेतावनी लिखना जरूरी है|  

व्यापारिक नीति (business policy)

  1. सरकार द्वारा business  को बढ़ाने के लिए नई-नई नीतियों का निर्माण होता रहता है| जैसे अभी हाल ही में MSMEs  के बिजनेस को बढ़ाने के लिए सरकार ने नई नीतियां बनाई है|

एमएसएमई के बारे में अधिक जानने के लिए यह पोस्ट पढ़े: MSME क्या है तथा Msme full form

  1. विदेशी व्यापारिक नीतियां (foreign trade policies): फॉरेन ट्रेड पॉलिसी का एक्सपोर्ट तथा इंपोर्ट दोनों बिज़नेस में बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है| यदि आप इंपोर्ट के लिए नीतियां कठोर बनाते हैं तो कहीं ना कहीं उसका एक्सपोर्ट पर भी थोड़ा सा असर पड़ता है|

अब! आप मेरी इस बात पर थोड़ा सा कंफ्यूज हो गए  है कि इंपोर्ट के लिए कठोर नीति बनाने से एक्सपोर्ट पर कैसे प्रभाव पड़ेगा?

तो दोस्तों, मैंने ऊपर बताया था कि हम प्लास्टिक स्क्रैप का इंपोर्ट करते थे|  उसी प्लास्टिक स्क्रैप को हम एक्सपोर्ट भी करते थे| अब! जब हमारा इंपोर्ट ही बंद हो गया तो, उस प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट हम कैसे करेंगे?

चलिए!  यह तो एक कारण हो गया|

सभी देश अपना एक्सपोर्ट बनाना चाहते हैं|  यदि हम अमेरिका से import  होने वाले product  पर import duty  बढ़ा दे या अन्य ऐसे विकल्प कर दें जिससे  की USA  उसे इंपोर्ट करना मुश्किल हो जाए|

तो भाई लोगों!  ऐसी स्थिति में अमेरिका भी ऐसे नियम कानून बना देगा कि हम उसके यहां एक्सपोर्ट ना कर सके| 

इसलिए  आयात निर्यात व्यवसाय में फॉरेन ट्रेड पॉलिसी का बहुत अधिक महत्व है| 

एक्सपोर्ट में ग्राहक कैसे मिलेगा यह जानने के लिए यह पोस्ट पढ़ें: Export business में buyer कैसे ढूंढे?

अब तक हम! “dimensions of business environment” के काफी सारे बिंदुओं को कवर कर चुके हैं| 

अगले टॉपिक में हम “Technological business environment (तकनीकी कारोबारी माहौल)” के विषय में जान लेते हैं|

इसके जाने बिना यह टॉपिक अधूरा ही रह जाएगा|

Technological business environment (तकनीकी कारोबारी माहौल)

वैज्ञानिक सुधार (Scientific improvements)

किसी भी business की growth के लिए उसमें निरंतर वैज्ञानिक सुधार होने आवश्यक है| यदि business में वैज्ञानिक सुधार (Scientific improvements) ना हो तो, कुछ समय बाद बिजनेस बंद हो जाएगा| 

चलिए! Technological business environment में वैज्ञानिक सुधार ((Scientific improvements) को एक उदाहरण की मदद से अच्छी तरह समझते हैं| 

उदाहरण: (1)

Light business में पहले एलिमेंट वाले बल्ब का चलन होता था| 

फिर उसके बाद CFL  चलन में आए|

अब! LED  वाले बल्ब चलन में है| 

क्या आप अभी एलिमेंट वाले बल्ब का इस्तेमाल करना चाहेंगे?  यदि करना भी चाहेंगे तो उसे खरीदेंगे कहां से?

किसी भी बिजनेस में technology के महत्व को समझाने के लिए यह एक perfect example है|

उदाहरण: (2)

बिजनेस में technology environment  का महत्व समझने के लिए एक और उदाहरण देख लेते हैं|

आपने Nokia के मोबाइल के बारे में अवश्य ही सुना होगा|

एक समय ऐसा था जब नोकिया Mobile industry पर राज करती थी| बस! नोकिया ने वैज्ञानिक सुधार (Scientific improvements) को महत्व नहीं दिया| 

इस कारण नोकिया कंपनी रेस में सब से पिछड़ गई| उसने सोचा कि उसका नाम चलता है| अरे भाई! नाम के साथ-साथ लगातार उत्पादों में सुधार करना आवश्यक है|

शायद! कंपनी के संचालकों ने “dimensions of business environment” के विषय में कुछ भी नहीं पढ़ा होगा|

यदि वह dimensions of business environment के विषय में पढ़ लेते तो उनसे इतनी बड़ी गलती कभी नहीं होती|

Online platform

अपने देश के लोगों को business में उन्नत बनाने के लिए, Online business के बारे में, मैंने बहुत सारी पोस्ट लिख रखी है| 

यदि आप “dimensions of business environment” के Technological environment के विषय को अच्छी तरह समझ गए हैं तो आपको इन पोस्ट्स को अवश्य ही पढ़ना चाहिए|

यदि आप इन्हें पढ़ना चाहते हैं तो यह पोस्ट इस प्रकार से हैं| 

E-Business क्या होता है?

E-business के क्या फायदे होते हैं?

Scope of e business ई व्यवसाय का दायरा कितना है?

E-business की सीमाएं तथा नुकसान क्या हैं?

Business के लिए website कैसे बनाये?

बिना website बनाये कैसे online business करें?

फ्री में Business का Online promotion कैसे करें?

E-Marketing कैसे करें?

Payment gateway procedure क्या है?

FAQs: Dimensions of business environment

कारोबारी माहौल के पाँच प्रमुख घटक कौन से हैं?

1- कानूनी वातावरण (legal environment)
2- आर्थिक वातावरण (Economic environment)
3- सामाजिक वातावरण (Social environment)
4- राजनीतिक वातावरण (Political environment)
5- प्रौद्योगिकीय वातावरण (Technological Environment)

वातावरण एवं व्यवसाय में क्या सम्बन्ध है?

व्यवसाय से तात्पर्य उस आर्थिक गतिविधि से होता है जो, किसी आर्थिक लाभ के उद्देश्य से किया जाता है। किसी व्यवसाय को संचालित करने के लिए की गई आर्थिक क्रियाएं (economic activities) जिस वातावरण (environment) में संपन्न की जाती हैं, वह व्यवसायिक वातावरण कहलाता है। व्यवसाय तथा वातावरण का आपस में इतना गहरा संबंध है कि यदि किसी बिजनेस के लिए उपयुक्त वातावरण नहीं है तो, बिजनेस भी नहीं चल पाएगा|

बाह्य वातावरण से क्या आशय है?

किसी भी बिजनेस के लिए उसके आसपास के सभी बाहरी विषयों में होने वाली वह गतिविधियां, दिल से वह बिजनेस प्रभावित हो सकता है उन्हें बाह्य वातावरण कहते हैं|

किसी भी बिजनेस में कारोबारी माहौल के आयाम (dimensions of business environment) की स्टडी करने से क्या फायदा है?

यदि आप कोई बिजनेस करना चाहते हैं तो,  वह बिजनेस बहुत सारे तरीकों से प्रभावित हो सकता है|  कुछ विषय बिजनेस के अंदरूनी कमियां हो सकती हैं,  तथा कुछ बाहरी विषय हो सकते हैं|  इन्हीं कारोबारी माहौल के आयाम की स्टडी करने के बाद हम उस बिजनेस में नुकसान की संभावनाओं को कम कर सकते हैं| 
 साथ ही साथ हमें बिजनेस को बढ़ाने के लिए जरूरी चीजों का पता चल जाता है| 

आपने क्या सीखा?

इस पोस्ट के माध्यम से सीखा कि किसी भी business को करने से पहले किन-किन विषयों पर अध्ययन कर लेना चाहिए?, क्या कारोबारी माहौल के आयाम होने चाहिए? (What should be the dimensions of the business environment?) 

यदि आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर अवश्य करें|

इसी प्रकार बिजनेस से संबंधित नई पोस्ट में, मैं आपसे फिर मिलूंगा, तब तक के लिए नमस्कार 

धन्यवाद

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