कंपनी खोलनी है तो! प्राइवेट लिमिटेड कंपनी तथा पब्लिक कंपनी के अंतर को समझें!

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इस पोस्ट में हम जानेंगे कि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी तथा पब्लिक कंपनी में क्या अंतर होता है? (difference between private and public company)|

इससे पिछले पोस्ट में आप प्राइवेट लिमिटेड कंपनी तथा पब्लिक लिमिटेड कंपनी के विषय में जान चुके हैं|

इस पोस्ट के माध्यम से आप आसानी से जान पाएंगे कि सार्वजनिक और निजी कंपनी के बीच क्या अंतर (difference between public and private company) होता है|

निजी कंपनी और सार्वजनिक कंपनी के बीच अंतर (difference between private company and public company) को समझने के लिए हमें टेबल का सहारा लेंगे|

 इस फोटो के माध्यम से आपको पब्लिक लिमिटेड कंपनी तथा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मुख्य अंतर समझ में आ जाएंगे|

आइए! अंतरों पर थोड़ा सा खुलकर समझ लेते हैं| इसके बाद आपको कभी भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी तथा पब्लिक लिमिटेड कंपनी के बीच का अंतर समझने में दिक्कत नहीं होगी|

Difference table between private and public company

मूलभूत (Basics)प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पब्लिक लिमिटेड कंपनी 
नाम (Name)इसमें कंपनी के नाम के पीछे प्राइवेट लिमिटेड (Pvt. Ltd) शब्द लगाना जरूरी है| इसमें कंपनी के नाम के पीछे प्राइवेट शब्द लगाना जरूरी नहीं है| आप चाहे तो पब्लिक लिमिटेड कंपनी लिख सकते हैं या फिर खाली लिमिटेड कंपनी भी लिख सकते हैं| 
न्यूनतम सदस्य(Minimum Members)दो (Two)प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कम से कम 2 सदस्य होने चाहिए| एक व्यक्ति को यदि कंपनी खोलनी है तो उसे OPC (वन पर्सन कंपनी)  खोलनी पड़ेगी!सात (Seven)पब्लिक लिमिटेड कंपनी में कम से कम 7 सदस्य  होने चाहिए| इन सदस्यों को हम शेयर होल्डर भी कह सकते हैं| 
अधिकतम सदस्य(Maximum Members)दो सौ (Two hundred) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में अधिकतम शेरहोल्डर्स की संख्या 200 ही हो सकती है| अनंत (Infinite)इसमें  शेयर होल्डर्स की संख्या पर कोई भी प्रतिबंध नहीं है| 
न्यूनतम निदेशक(Minimum Directors)दो (Two)इसमें कम से कम 2 डायरेक्टर होने चाहिए| तीन (Three)इसमें कम से कम 3 डायरेक्टर होने चाहिए|
अधिकतम निदेशक(Maximum Directors)पंद्रह (Fifteen)इस संख्या के अलावा भी निदेशकों की भर्ती की जा सकती है| इनकी संख्या को जनरल मीटिंग में स्पेशल रेजोल्यूशन पास करके बढ़ाया जा सकता है| पंद्रह (Fifteen)इसमें भी डायरेक्टर्स की संख्या को जनरल मीटिंग में स्पेशल रेजोल्यूशन पास करके बढ़ाया जा सकता है| 
शेयरों का हस्तांतरण(Transfer of shares)सीमित (Restricted)इसमें सीमित तरीके से ही शेयरों को ट्रांसफर किया जा सकता है|  शेयरों को ट्रांसफर करने का तरीका कंपनी अधिनियम में बताया गया है| अनुमितप्राप्त (permitted)पब्लिक कंपनी का सबसे बड़ा बेनिफिट यही है कि इसमें शेयर फ्रिली ट्रांसफरेबल होते हैं| शेयर मार्केट में लिस्टेड होने के बाद पब्लिक कंपनी के शेयर बहुत ही आसानी के साथ ट्रांसफर किए जा सकते हैं| 
जनता को निमंत्रण(Invitation to public )अनुमति नहीं (Not allowed)यदि आपको अधिक धन की आवश्यकता है तो आप आम जनता से अपनी कंपनी में धन लगाने की अपील नहीं कर सकते| यानी कि इसमें केवल अपनी जान पहचान के लोगों को ही पर्सनली मिलकर अपनी कंपनी  के शेयर लेने के लिए कह सकते हैं| अनुमति (Allowed)पब्लिक कंपनी का सबसे बड़ा बेनिफिट यही होता है कि उसमें आम जनता को अपनी कंपनी में धन लगाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है| इस कार्य को करने के लिए प्रस्पेक्टस का इस्तेमाल किया जाता है| शेयर बाजार में लिस्टेड होने के बाद कंपनी आम जनता को अपनी कंपनी में पैसा लगाने के लिए उत्साहित करती है|लिस्टेड होने के बाद कंपनी अपना IPO (Initial public offering)  ला सकती है| 
निजी और सार्वजनिक कंपनी के बीच अंतर तालिका: हिंदी में

दोस्तों उम्मीद करता हूं| “लिमिटेड और प्राइवेट लिमिटेड के बीच का अंतर” आपको अच्छी तरह से समझ में आ गया होगा|

साथ ही यह भी देखें:

कंपनी क्या होती है?

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी क्या होती है तथा इसके क्या फ़ायदे हैं?

सेक्शन 8 कंपनी क्या होती है?

पब्लिक लिमिटेड कंपनी के फ़ायदे तथा नुकसान

इसी प्रकार के अगली पोस्ट में फिर मिलेंगे तब तक के लिए मैं आपसे इजाजत चाहता हूं| नमस्कार!

धन्यवाद

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