Intraday Trading क्या होती है? | Difference between intraday and delivery

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Difference between intraday and delivery: शेयर मार्केट में Intraday Trading क्या होती है?, Intraday तथा delivery (Interday) में क्या अंतर होता है?, Intraday तथा delivery (Interday) में से कौन सी टर्म आपके लिए फायदेमंद है? इन सवालों के जवाब आपको इस पोस्ट को मिलेंगे|

आइए दोस्तों! सबसे पहले शुरुआत करते हैं कि आखिर! इंट्राडे ट्रेडिंग क्या होती है?

Difference between intraday and delivery?

इंट्राडे ट्रेडिंग तथा डिलीवरी के बीच अंतर समझने के लिए हम दोनों को अलग-अलग समझते हैं| 

Intraday Trading क्या होती है?

इसे मैं आपको बहुत ही सामान्य भाषा में समझाता हूं| ज्यादा लंबी चौड़ी बात बताने से आप कंफ्यूज हो सकते हैं| 

Intraday Trading: “इंट्राडे ट्रेडिंग का अर्थ होता है कि आपने जिस दिन शेयर खरीदा है उसी दिन बेच दिया है|” Intraday Trading को Day trading तथा Same day buy Same day sell भी कहते हैं| 

Delivery/Interday Trading क्या होती है?

Delivery/Interday Trading: “डिलीवरी ट्रेडिंग का अर्थ होता है कि आपने जिस दिन शेयर खरीदा है उस दिन को छोड़कर किसी दिन भी बेच देना|” Delivery Trading को Intraday trading तथा Long term investment भी कहते हैं|

यदि आप एक मध्यस्थ (Intermediate) या Beginner हैं तो इसके बारे में आपको थोड़ी सी और भी जानकारी ले लेनी चाहिए| 

मेरा ऐसा मानना है कि किसी भी बिजनेस में घाटे तथा नुकसान के बारे में बहुत ही गहराई से जानना चाहिए| 

Intraday Trading का उदाहरण: आपने स्टॉक मार्केट खुलते के साथ ही ₹10 के मूल्य पर 5000  शेयर खरीद लिए|

नोट: आप कितने भी शेयर खरीद सकते हैं|

मार्केट बंद होने से पहले उस शेयर का भाव ₹11 हो गया| आपने यह सारे शेयर बेच दिए| आपको प्रत्येक शेयर पर ₹1 का मुनाफा मिल गया| 

यानी कि आपने 1 दिन में ₹5000 का प्रॉफिट कमा लिया| 

अब! इसे थोड़ा सा उल्टा कर देते हैं|  मान लीजिए वह शेयर मार्केट बंद होने से पहले ₹9 का रह गया| तब! प्रति शेयर आपको ₹1 का घाटा लगा| यानी कि आपने 1 दिन में ₹5000  गंवा दिए| 

Delivery/Interday Trading का उदाहरण: आपने ₹10 के मूल्य पर 5000 शेयर खरीदे| आपने जिस दिन यह शेयर खरीदे उसके बाद, तब तक इंतजार किया जब तक कि इस शेयर का मूल्य आपके मन के मुताबिक ना आ जाए|

नोट: ऐसा जरूरी नहीं है कि शेयर का मूल्य एक सा रहे| यह घटता है या बढ़ता रहता है|

शेयर ट्रेडिंग की सामान्य जानकारी 

Intraday Timings: “इंट्राडे की टाइमिंग 9:15 A.M. से 3:10 P.M. तक होती है| शनिवार और रविवार की छुट्टियों के अलावा राजपत्रित अवकाश भी मान्य रहेगा| यदि आपने  बीच में स्टॉक नहीं बेचा तो वह अपने आप ही बिक जाएगा|”

यदि आप इंट्राडे ट्रेडिंग के बारे में बहुत अधिक जानना चाहते हैं तो आपको इन विषयों के बारे में अच्छी तरह समझना पड़ेगा| 

Circuit breakers क्या होता हैं? 

दो तरह के सर्किट ब्रेकर शेयर बाजार में होते हैं| पहला होता है Upper freeze (Upper circuit) तथा दूसरा होता है Lower freeze (Lower circuit)

Upper Freeze: “सेबी द्वारा शेयर मार्केट मेंअपर फ्रीज़ लिए तीन सीमा तय की गई हैं: 10%, 15% तथा 20%| जब कोई भी शेयर सेबी द्वारा तय गई सीमा से, 1 दिन में ऊपर चढ़ता है तो उस पर रोक लग जाती है| इसे ही Upper Freeze कहते हैं|” 

Lower freeze: “Lower freeze में भी सेबी ने वही तीन सीमाएं तय की है: 10%, 15% तथा 20%| जब भी कोई शेयर, 1 दिन में इस तरह सीमा से नीचे गिरता है तो उस पर भी रोक लग जाती| इसे ही Lower freeze (Lower circuit) कहते हैं|” 

Intraday Trading के बारे में अच्छी तरह समझने के लिए आपको स्टॉक मार्केट के बारे में समझना पड़ेगा| 

स्टॉक मार्केट को समझने के लिए आपको शेयर के बारे में समझना पड़ेगा|  शेयर को समझने के लिए आपको कंपनी के स्ट्रक्चर को समझना पड़ेगा|

स्टॉक मार्केट में लोग  इंट्राडे ट्रेडिंग  मुनाफा कमाने के लिए करते हैं|

मुनाफे का अर्थ होता है:  “कम कीमत पर खरीद कर अधिक कीमत पर बेच देना|” 

Intraday Trading में भी लोग इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं| वह कम कीमत पर शेयर खरीदते हैं तथा अधिक कीमत होते के साथ ही बेच देते हैं| 

इंट्राडे ट्रेडिंग में Brokerage Charges कितना लगता हैं?

ब्रोकरेज चार्जेस को आप कमीशन भी कह सकते हैं| जब भी आप शेयर खरीदते तथा बेचते हैं तब आपके ब्रोकर को कुछ कमीशन मिलता है| 

ब्रोकर, डीमैट अकाउंट प्रोवाइडर या ट्रेडिंग अकाउंट प्रोवाइडर हो सकता है| 

आजकल बहुत आसानी से डिमैट अकाउंट या ट्रेडिंग अकाउंट खुल जाता है|

कुछ अकाउंट प्रोवाइडर सालाना फीस भी नहीं लेती हैं| इसके बदले में वह आपसे ट्रेडिंग करने के लिए कह सकती हैं| 

अलग-अलग ब्रोकर अकाउंट में, ब्रोकरेज चार्ज कम या ज्यादा हो सकता है| 

सामान्यतः यह ब्रोकरेज चार्ज लगते हैं| 

Delivery Brokerage Charges: Zero

Intraday Brokerage Charges: ₹20 पर आर्डर| यानी कि आप एक बार में चाहे 1 शेयर खरीदे या फिर एक लाख| इसे एक ही ऑर्डर माना जाएगा| 

फुल सर्विस ब्रोकर में, इंट्राडे ट्रेडिंग हो या डिलीवरी ट्रेडिंग, परसेंटेज के हिसाब से ब्रोकरेज चार्ज लिया जाता है जो कि डिस्काउंट ब्रोकरेज की तुलना में बहुत ज्यादा होता है| 

Note: आप चाहे इंट्राडे ट्रेडिंग कर रहे हो या डिलीवरी ट्रेडिंग, सरकार भी आपसे कुछ हिस्सा टैक्सेस तथा चार्जेस के नाम पर ले लेगी| हालांकि यह बहुत छोटी धनराशि होती है| 

डीपी शुल्क क्या हैं? (What is DP Charge in Stock Trading)

ब्रोकरेज चार्ज के अलावा भी एक चार्ज लगता है| इसका नाम है DP Charges 

इंट्राडे में खरीदने तथा बेचने पर कोई भी DP Charge लगता है|

डिलीवरी ट्रेडिंग में शेयर खरीदने के समय DP Charge नहीं लगता परंतु डिलीवरी के समय खरीदा गया शेयर बेचने के समय DP Charge लगता है| 

आपके डीमैट खाते के सभी बिक्री लेनदेन पर Depository Participant (DP) चार्ज लगाया जाता है। ये शुल्क ब्रोकरेज के लिए विशेष शुल्क होता हैं|

अनुबंध नोटों में परिलक्षित (Reflected) नहीं होते हैं। डीपी शुल्क के द्वारा डिपॉजिटरी और उसके प्रतिभागियों के लिए राजस्व प्राप्त करने का मुख्य स्रोत है| 

डीपी शुल्क एक ट्रांजैक्शन पर एक  समान ही लगता है| चाहे  जितने भी शेयर खरीदे या बेचे जाएं इसलिए, चार्ज किया गया शुल्क प्रति ऑर्डर होता है, न कि बेची गई मात्रा|

यह शुल्क वही रहता है चाहे आप 1 शेयर  बेचो या 1000 शेयर बेचो|

DP Charge कौन लगाता है?

डीपी चार्ज डिपॉजिटरी के साथ-साथ Depository Participant द्वारा लगाया जाता है। यदि वह स्टॉक निफ्टी का हिस्सा होता है तो, यह टैक्स नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) द्वारा लगाया जाता है।

यदि यह स्टॉक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का हिस्सा है, तो Central Depository Services (India) Limited (CSDL) द्वारा शुल्क लगाया जाता है। डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट डिपॉजिटरी और निवेशक के बीच बिचौलिया होता है। 

उदाहरण: स्टॉक ब्रोकर डिपॉजिटरी, बैंक, वित्तीय संस्थान पार्टिसिपेंट्स के उदाहरण हैं।

आमतौर पर, डिपॉजिटरी प्रतिभागी डीमैट खाते के लेनदेन के लिए चार तरह के शुल्क (या कर) लगाते हैं|

यह इस प्रकार हैं: खाता खोलने का शुल्क (Account opening charges), वार्षिक रखरखाव शुल्क (Annual maintenance fees), लेनदेन शुल्क (transaction fees) और संरक्षक शुल्क (custodial fees)|

कितना DP Charge लगता है?

जैसा की आपने ऊपर पढ़ा की “डिपॉजिटरी द्वारा लगाए गए शुल्क सभी बिक्री लेनदेन शुल्क के लिए समान होते हैं। यह शुल्क इस प्रकार हैं:

CSDL के लिए डीमैट लेनदेन शुल्क:13 रुपए प्लस 5.50 रुपए|

NSDL के लिए डीमैट लेनदेन शुल्क: 13 rupey प्लस 4.50 रुपए|

डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट द्वारा लगाए गए शुल्क प्रतिभागियों के अनुसार अलग-अलग भी हो सकते हैं! 

Intraday Trading Tips

सबसे पहले तो मैं आपको यह कहूंगा कि यदि आप शेयर मार्केट क्यों ट्रेडिंग में नए हैं तो, इंट्राडे ट्रेडिंग से बचें! शुरुआत में लोंग टर्म इन्वेस्टमेंट के बारे में ही सोचें| 

इसमें नए बंदों के लिए बहुत ज्यादा जोखिम होता है|

परंतु यदि फिर भी आप Intraday Trading  करना चाहते हैं तो इन बिंदुओं पर जरूर गौर करें| 

  1. आपके पास जितनी भी धनराशि है उसे एक बार में ही ना लगाएं| 
  2. एक ही स्टॉक में निवेश ना करें|
  3. अलग-अलग सेक्टर में निवेश करें|  जैसे कि:  ऑटोमोबाइल,  फार्मास्यूटिकल,  इत्यादि|
  4.  जिस भी कंपनी की शेयर खरीदना चाहते हैं उसकी हिस्ट्री जरूर देखें|
  5. जिस शेयर में निवेश करना है उस कंपनी का मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन जरूर पढ़ें| 
  6. कंपनी की पिछले सालों की एनुअल रिपोर्ट जरूर पढ़ें| 
  7. जब शेयर अपने निचले प्राइस पर हो तभी खरीदें|
  8.  अपना एक गोल हमेशा सोच कर रखे हैं कि शेयर इस भाव पर आ गया तो मैं उसे बेच दूंगा| इसमें सबसे ज्यादा नुकसान लालच के द्वारा ही लगता है| 
  9.  सरकार द्वारा जब भी बिजनेस के संबंध में कोई नई पॉलिसी आती है तो, इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि उस पॉलिसी से किन कंपनियों को फायदा होगा? तथा किन कंपनियों को नुकसान होगा? किसी समझ बूझ के साथ आप फायदे वाली कंपनियों के स्टॉक में ही पैसा लगाएं| 

मैं कुछ पोस्ट के लिंक नीचे दे रहा हूं, इन पोस्ट के माध्यम से आप आसानी से इस पूरी कार्यप्रणाली को अच्छी तरह समझ सकते हैं|

शेयर जारी (Issue) करने की प्रक्रिया जानें

आईपीओ क्या होता है?

IPO में निवेश की रणनीति

Stock market Basics: शेयर मार्केट क्या है?

निफ्टी और सेंसेक्स क्या है?

आपने क्या सीखा?

इस पोस्ट के माध्यम से आपने “इंट्राडे ट्रेडिंग तथा डिलीवरी (difference between intraday and delivery)” के बीच अंतर को समझा|

आपको यह पोस्ट कैसा लगा?  यदि आपको किसी अन्य विषय के बारे में जानना हो तो आप मुझे मेल कर सकते हैं| 

नमस्कार 

धन्यवाद

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प्यारे दोस्तों, मैं नवीन कुमार एक बिज़नेस ट्रैनर हूँ| अपने इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपको - आयात-निर्यात व्यवसाय (Export-Import Business), व्यापार कानून (Business Laws), बिज़नेस कैसे शुरु करना है?(How to start a business), Business digital marketing, व्यापारिक सहायक उपकरण (Business accessories), Offline Marketing, Business strategy, के बारें में बताऊँगा|| साथ ही साथ मैं आपको Business Motivation भी दूंगा| मेरा सबसे पसंदीदा टॉपिक है- “ग्राहक को कैसे संतुष्ट करें?-How to convince a buyer?" मेरी तमन्ना है की कोई भी बेरोज़गार न रहे!! मेरे पास जो कुछ भी ज्ञान है वह सब मैं आपको बता दूंगा परंतु उसको ग्रहण करना केवल आपके हाथों में है| मेरी ईश्वर से प्रार्थना है की आप सब मित्र खूब तरक्की करें! धन्यवाद !!