कंपनी कैसे खोले?, कंपनी क्या होती है?, कंपनी तथा साझेदारी में क्या अंतर होता है?

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दोस्तों, आप अक्सर सोचते होंगे कि कंपनी कैसे खोले? इस सवाल  का जवाब जानने से पहले आपको कंपनी के बारे में पता होना चाहिए कि आखिर कंपनी क्या होती है? तथा कंपनी कितने प्रकार की होती है? इसके बारे में जाने बिना आपको किसी भी कंपनी को खोलने का निर्णय लेने में परेशानी होगी|  

Company को समझने के लिए आपको कंपनी तथा साझेदारी में अंतर को भी समझना पड़ेगा| इसके बिना कंपनी का अर्थ एवं परिभाषा समझने में आपको दिक्कत होगी|

तो चलिए दोस्तों, यदि आपका कोई बिजनेस है या आप कोई नया बिजनेस करना चाहते हैं और उसके बारे में आप सोच रहे हैं कि “कंपनी कैसे खोले”, तो मैं अपने ब्लॉग के माध्यम से आपकी यह परेशानी दूर करने की कोशिश करुंगा|

Company meaning in Hindi

आइए! सबसे पहले कंपनी का हिन्दी अर्थ जानते हैं|

Company meaning in Hindi: “कंपनी, कम्पनी, संगठन, संगत, संग, संगति, समवाय, टोली, साहचर्य, सेना का गुल्म, समिति, साझा, मण्डली, सोहबत, साथी, साथ, सहयोगी, समवाय, अतिथि, इकाई, उद्योग, जत्था, जनसमूह, दल, संग”

कंपनी का अर्थ एवं परिभाषा (Company definition)

कंपनी का अर्थ: “Company से तात्पर्य है ऐसी कंपनी से है जिसका पंजीयन कंपनी अधिनियम 2013 या उससे पहले किसी अधिनियम के अंतर्गत एक कृत्रिम व्यक्ति के रूप में किया गया हो| कंपनी लाभ कमाने के उद्देश्य से बनाई गई ऐच्छिक संस्थान होती है| जिसकी पूँजी हस्तांतरण (transferable) होने वाले अंशों (शेयरों) में विभाजित होती है|

कंपनी समान उद्देश्यों की पूर्ति हेतु बनाया गया व्यक्तियों का एक ऐच्छिक संगठन है| कंपनी का जन्म विधान द्वारा एक अदृश्य (दिखाई ना देने वाला), अमूर्त (जिसकी कोई शक्ल ना हो) तथा कृत्रिम (Artificial) व्यक्ति के रूप में होता है|”

कंपनी की परिभाषा: कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 2(20) के अनुसार कंपनी उसे कहते हैं जिसका समामेलन (incorporation) कंपनी अधिनियम 2013 के अधीन अथवा इससे पहले के किसी अधिनियम के अधीन हुआ हो|” 

कंपनी विडिओ

कंपनी तथा पार्टनरशिप में क्या अंतर होता है?: Company कैसे खोले?: Company law: Types of Company

कंपनी के मुख्य बिंदु 

  1. Company से तात्पर्य ऐसी कंपनी से है जिसका पंजीयन कंपनी अधिनियम 2013 या उससे पहले किसी अधिनियम के अंतर्गत किया गया हो|
  2. कंपनी एक्ट 2013 के अनुसार कंपनी एक कृत्रिम व्यक्ति होती है|
  3. Company को आप अदृश्य व्यक्ति भी कह सकते हैं क्योंकि कंपनी दिखाई नहीं देती| आप कंपनी को कल्पित नहीं कह सकते क्योंकि कंपनी का अस्तित्व होता है (डाक्यूमेंट्स में)| 
  4. कंपनी तथा उसके मेंबरों में अंतर होता है| कंपनी तथा उसके मेंबर एक दूसरे से अलग (पृथक) होते हैं| 
  5. Company की एक सार्व मुद्रा होती है यानी कंपनी का एक logo होता है| 
  6. कंपनी का एक सतत उत्तराधिकारी होता है| यानी कि यदि मैं सरल शब्दों में समझाऊं तो इसका अर्थ है कि यदि कंपनी के शेयर होल्डर पागल हो जाए या उनकी मृत्यु हो जाए उस स्थिति में भी कंपनी बंद नहीं होती बल्कि नए संचालक आते जाते रहते हैं| 
  7. क्योंकि कंपनी एक कृत्रिम व्यक्ति होती है इसलिए इसके हाथ पैर भी नहीं होते परंतु इसका संचालन करना भी तो आवश्यक होता है|अब कंपनी खुद ही यह काम तो कर नहीं सकती| इसलिए इसके लिए संचालक मंडल का गठन किया जाता है| 

कंपनी तथा पार्टनर-शिप फर्म में क्या अंतर होता है?

आपके सवाल कंपनी कैसे खोले? (How to start a company in India?): का जवाब देने से पहले मैं पार्टनर-शिप फर्म तथा कंपनी में अंतर को समझाना

चाहता हूँ|

इससे आपको “कंपनी कैसे खोले?” के विषय में अच्छी तरह समझ में आ जायेगा|

इस बिंदु को समझना अत्यधिक आवश्यक है| इसी के द्वारा आपको कंपनी क्या होती है? इसके बारे में भी अच्छी तरह समझ में आएगा

Sr. No.CompanyPartnership ( भागिता/साझेदारी)
1.कंपनी का जन्म कानून के हिसाब से होता है|भागिता में पार्टनर अपने हिसाब से कानून बनाते हैं जिनको वह कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से लागू करने की कोशिश करते हैं| 
2. कंपनी स्वायत्त संस्था होती है|  कंपनी के मेंबर कंपनी नहीं होते| परंतु इसका एक अपवाद भी होता है जिसे अनावरण हटाना (Veil Lifting)  कहते हैं| पार्टनर-शिप में मेंबर ही फर्म होते हैं इन्हें अलग नहीं माना जाता| 
3.कंपनी की जो प्रॉपर्टी होती है वह कंपनी की खुद की होती है| साझेदारी में जो प्रॉपर्टी होती है वह पार्टनर्स की होती है|
4. कंपनी के जो कर्ज दाता होते हैं, वह केवल कंपनी द्वारा ही अपना कर्जे की प्राप्ति कर सकते हैं|  वह कंपनी के सदस्यों से अपना कर्जा वसूल नहीं कर सकते|पार्टनरशिप फर्म में कर्जा मेंबर्स को ही चुकाना होता है|
5. मेंबर्स ऑफ़ कंपनी किसी भी कॉन्ट्रैक्ट में अलग से शामिल हो सकता है| पार्टनरशिप फर्म में अलग से कोई कॉन्ट्रैक्ट फर्म के नाम पर नहीं बन सकता| 
6. कंपनी के शेयर, डिबेंचर आसानी से बेचे या ट्रांसफर किए जा सकते हैं| इसके शेयर ट्रांसफर या बेच नहीं सकते
7. कंपनी की देनदारी के लिए कंपनी जिम्मेदार होती है ना कि उसके मेंबर जिम्मेदार होते हैं| जबकि पार्टनरशिप फर्म में हिस्सेदार ही जिम्मेदार होते हैं| 
8. कंपनी का कोई भी मेंबर मर जाता है या कंपनी छोड़ देता है तब भी कंपनी चलती रहती है|  इसका कारण है की कंपनी Perpetual succession पर आधारित होती है|पार्टनर शिप फर्म में मेंबर के मर जाने,  पागल हो जाने या फर्म के छोड़ देने की स्थिति में है बंद भी हो सकती है| 
9. कंपनी पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करके बनती है इसलिए यह आसानी से बंद नहीं हो सकती| यही कारण है कि लोगों का इस पर भरोसा भी ज्यादा होता है|पार्टनर-शिप फर्म को कभी भी बंद किया जा सकता है| 
कंपनी तथा पार्टनर-शिप फर्म में अंतर

Types of company 

अब दोस्तों, कंपनी क्या होती है? यह तो आप जान गए परंतु अभी भी बहुत से सवालों के जवाब बाकी हैं और वह यह कि कंपनी कितने प्रकार की होती है?

मान लीजिए आपका गद्दे का व्यवसाय है| तो आप उसे व्यवसाय को किस प्रकार की कंपनी में परिवर्तित करना चाहेंगे?

इस पोस्ट में हम केवल कंपनियों के प्रकार के बारे में ही बात करेंगे कि कंपनियों के प्रकार क्या होते है? किस कंपनी कि कैसी रूपरेखा होती है? उसके बारे में हम अलग से अन्य लेखों में बात करेंगे|

वह कंपनियां जो मेंबर की संख्या पर आधारित है| 

  1. One person company
  2. Private limited Company – इसमें भी एक कैटेगरी बना दी गई है जिसका नाम है: “Small Company
  3. Public Limited Company नोट:- केवल लिस्टेड पब्लिक लिमिटेड कंपनी ही IPO ला सकती है|

जवाबदेही पर आधारित कंपनियां 

  1. Company Limited by Guarantee
  2. Company Limited by Shares
  3. Unlimited Company

अन्य प्रकार की कंपनियां 

  1. Joint venture
  2. Foreign Company
  3. Subsidiary Company
  4. Holding Company
  5. Producer Company
  6. Section 8 company

कंपनी की विशेषताएँ: company characteristics

दोस्तों, इस लेख कंपनी कैसे खोले? में अब तक आपने पढ़ा की कंपनी क्या होती है? तथा कंपनियों के प्रकार|

तो क्या इसका मतलब किसी भी ऐसी फर्म से है जिसमें हम डायरेक्टर बना दें वह कंपनी कहलाएगी? तो इसके लिए कंपनी की विशेषताएं हैं वह भी आपको जाननी चाहिए की एक कंपनी कब कंपनी कहलाती है?

  1. निगमित संघ (Incorporated Association) – कंपनी R.O.C. में रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद एक निर्मित संघ बन जाती है|
  2. Artificial Person – यह एक कृत्रिम व्यक्ति होती है| यानी यह एक लीगल पर्सन होती है| 
  3. Separate Legal Entity – यह अपने मेंबरों से अलग होती है| कंपनी तथा उसके मेंबरों के Rights, powers, duties, obligations, Assets, Liability अलग होते हैं|
  4. Separate Property– कंपनी तथा उसके मेंबरों के संपत्ति अलग-अलग होती है|
  5. Can sue or be sued- कंपनी पर केस दायर भी किया जा सकता है तथा कंपनी स्वयं भी केस दायर कर सकती है|
  6. Separate Owner/Separate management – कंपनी का स्वामित्व तथा कंपनी का संचालन अलग अलग होता है| स्वामित्व का कंपनी को संचालित करना संभव होता है|
  7. Common Seal– कंपनी की एक कॉमन मोहर होती है| जिस पर कंपनी के डायरेक्टरों के हस्ताक्षर द्वारा कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी दी जाती है|  इसको यह माना जाता है कि यह मंजूरी कंपनी द्वारा दी गई है|
  8. Transferability of shares – कंपनी में शेयर्स का हस्तांतरण संभव  होता है| प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के शेयर को भी कुछ प्रतिबंधों के साथ बेचा जा सकता है| पब्लिक लिमिटेड कंपनी के शेयर लिस्ट होने के बाद फ्रिली ट्रांसफरेबल होते हैं| 
  9. कंपनी को बंद करने का तरीका– जो कंपनी का जन्मदाता है वही कंपनी का मृत्युदाता भी होता है| अर्थात कंपनी का जन्म कंपनी एक्ट 2013 के माध्यम से होता है इसलिए कंपनी को बंद भी 2013 के एक्ट के माध्यम से ही किया जा सकता है| यानी कि कंपनियों के बंद होने के तरीके कंपनी एक्ट 2013 में वर्णित हैं| कंपनी के मेंबरों की मृत्यु होने के पश्चात भी कंपनी बंद नहीं होती| 
  10. Limited Liability – कंपनी की देनदारी (आर्थिक दायित्व, आर्थिक ज़िम्मेदारी, देयधन, दायित्व) तय होती है| यानि की कंपनी बंद होने की स्तिथि में की संपत्ति को बेचकर ही उसकी देनदारी पूरी की जाएगी| इसके शेयर होल्डर्स की निजी संपत्ति को छुआ तक नहीं जाएगा|
  11. कंपनी नियम : कंपनी Perpetual succession के नियम पर आधारित होती है|

Company Registration Process (कंपनी कैसे खोले Act 2013)

हमे किसी भी Company का Registration करने के लिए कुछ स्टेप्स फॉलो करने पड़ेंगे| आइए जानते हैं Company Registration Process में वह स्टेप्स क्या हैं?

कंपनी के लिए नाम कैसे चुनें | Reservation of company name

किसी भी Company Registration Process में सबसे पहले कंपनी का नाम सुझाया जाता है| इसके लिए एक ई-फॉर्म भरा जाता है| 

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी तथा पब्लिक लिमिटेड कंपनी के लिए लिए INC-1 फॉर्म भरा जाता है| One person company के लिए INC-2  फॉर्म भरा जाता है|

इसके लिए 6 नामों की एक लिस्ट दी जाती है| 

यह नामों की श्रंखला प्राथमिकता के आधार पर होती है| इसके लिए आपको कुछ विषयों का ध्यान रखना आवश्यक है जैसे कि:-

  • दिया गया नाम किसी अन्य मौजूदा कंपनी के नाम पर ना हो|
  • किसी भी प्रकार का ऐसा नाम नहीं होना चाहिए जिसमें सरकारी चिन्हों यह नाम का इस्तेमाल किया गया| यानी कि सुनने पर यह कंपनी सरकारी कंपनी नहीं लगनी चाहिए| उदाहरण के लिए आप नाम में इस प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकते जैसे कि:- भारत सरकार, लोक सभा, राज्य सभा, भारत के राष्ट्रपति, तथा महात्मा गांधी का नाम भी इसी सूची में शामिल है|
  • किसी धर्म को प्रभावित करने वाला नाम भी नहीं होना चाहिए|
  • जो आपका सरनेम नहीं है आप उस नाम से भी कंपनी को इनकॉर्पोरेट नहीं करवा सकते|
  • बैंकिंग कंपनी के लिए कंपनी के नाम में बैंक शब्द का इस्तेमाल करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से परमिशन लेनी पड़ती है| 
  • कंपनी के नाम में क्रेडिट रेटिंग तथा मर्चेंट बैंकिंग बैंकर जैसे नामों के लिए SEBI की परमिशन लेनी पड़ेगी| 
  • कंपनी के नाम में इंश्योरेंस जैसे शब्द का इस्तेमाल करने के लिए IRDA की परमिशन लेनी पड़ेगी|
Company Name Selection

R.O.C. (Registrars of Companies) Approval

आर.ओ.सी. का अप्रूवल आने के बाद कंपनी के पास 60 दिनों का समय होता है|

इन 60 दिनों में कंपनी को कुछ फॉर्म इस्तेमाल करने होते हैं जो कि इस प्रकार हैं|

INC – 7

इसमें इन-कॉरपोरेशन की रिक्वेस्ट सबमिट की जाती है|

नोट:- कंपनी के तीन मुख्य दस्तावेज़ होते हैं| 1- मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन 2- आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन 3- प्रस्पेक्टस

नोट:- Prospectus केवल पब्लिक लिमिटेड कंपनी के लिए इस्तेमाल किया जाता है|

इसके साथ ही कंपनी का M.O.A. (Memorandum of Association) तथा AoA (Articles of association) भी जमा किया जाता है| 

INC – 8

इसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट, एडवोकेट तथा कंपनी सेक्रेट्री के लिए इस्तेमाल किया जाता है|

जो लीगल व्यक्ति कंपनी इन-कॉरपोरेशन के प्रोसेस में शामिल होते हैं उनका डिक्लेरेशन फॉर्म लिया जाता है| 

इसमें कंपनी के प्रोफेशनल्स यह डिक्लेअर करते हैं कि कंपनी को बनाते समय सभी कानूनों का पालन किया गया है तथा यह कंपनी 2013 कंपनी अधिनियम के तहत ही बनी है|

साथ ही साथ इसमें इनके डिजिटल सिग्नेचर भी होते हैं| 

INC -9

यह फॉर्म कंपनी के प्रमोटर्स की तरफ से होता है| इसमें उनकी तरफ से घोषणा की जाती है कि वह किसी भी कंपनी के धोखाधड़ी के मामले में लंबित नहीं है ना ही वह किसी प्रकार की पहले बनाई कंपनी में फ्रॉड के केस में शामिल है|

इसके लिए कंपनी के प्रमोटर उसको एफिडेविट पर लिख कर देना होता है कि वह किसी भी प्रकार की कंपनी में धोखाधड़ी के केस में शामिल नहीं हैं तथा ना ही भूतकाल में उन पर कोई कंपनी फ्रॉड का मुकदमा दर्ज है|

नोट:- INC – 9 एक फॉर्म तो होता है परंतु इसे अलग से टाइप किया जाता है तथा इसके बाद उसका प्रिंट आउट निकाला जाता है|

उस पर प्रमोटर्स के साइन होते हैं तथा इसकी फिजिकल कॉपी को स्कैन करके INC-7  फॉर्म के साथ संलग्न कर दिया जाता है| 

DIR – 3

इसमें कंपनी के प्रस्तावित डायरेक्टर के बारे में ब्यौरा दिया जाता है|  बाद में भी जरूरत के हिसाब से डायरेक्टर्स की भर्ती की जा सकती है|

INC -11

यह कंपनी इन कॉरपोरेशन सर्टिफ़िकेट होता है रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी के द्वारा जारी किया जाता है|

इस सर्टिफिकेट के ऊपर 21 अंकों का CIN number होता है|

इस सिन नंबर को कॉरपोरेट आइडेंटिफिकेशन नंबर भी कहा जाता है| इसमें कंपनी का पूरा ब्यौरा लिखा होता है| 

FAQs: कंपनी कैसे खोले

कंपनी किसे कहते हैं?

कंपनी का अर्थ उन स्वतंत्र व्यक्तियों या व्यक्तियों के समूहों से है जो इसे कानूनी रूप से प्रदत्त उद्देश्य तथा लक्ष्य को प्राप्त करने के मकसद से इकट्ठा हुए हैं|

किसी कंपनी का स्वरूप कैसा होता है?

कंपनी एक कृत्रिम व्यक्ति या अदृश्य व्यक्ति होती है|

यदि कंपनी के सभी मेंबर्स की मृत्यु हो जाती है तो क्या कंपनी बंद हो जाएगी?

जी नहीं,  कंपनी जिस एक्ट के द्वारा बनी है उसी एक्ट में उसके बंद करने के प्रावधान भी दिए गए हैं|

एक व्यक्ति की कंपनी को क्या कहते हैं?

एक व्यक्ति द्वारा बनाई गई कंपनी को वन पर्सन कंपनी कहते हैं|

क्या कोई भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी स्माल कैटेगरी की कंपनी में आ सकती है?

जी नहीं,  केवल वही कंपनी स्मॉल कंपनी की कैटेगरी में आ सकती है जिसकी प्रदत्त पूंजी (Paid up capital) 50 लाख या इससे कम हो अथवा उसका कारोबार (Turn Over) दो करोड़ या उससे कम हो| या फिर उस समय पर जितना अधिनियम में वर्णित हो|

कंपनी का प्रमोटर किसे कहते हैं?

जिस व्यक्ति के दिमाग में सबसे पहले कंपनी बनाने का आइडिया आया होता है तथा वह इस आइडिया को पूरा करने के मकसद से क्रियान्वयन  करता है|

कंपनी तथा उसके मेंबरों में क्या अंतर होता है?

कंपनी तथा उसके मेंबर दोनों एक दूसरे से अलग होते हैं| 

साथ ही यह अवश्य देखें:

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तो दोस्तों,

मुझे उम्मीद है कि मेरा यह लेख कंपनी कैसे खोले? आपको अवश्य ही पसंद आया होगा|

इस पोस्ट में मैंने कंपनी कैसे खोले? के साथ आपको कंपनी तथा साझेदारी में अंतर भी बताया है|

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 धन्यवाद

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