बिजनेस करते हैं तो बाल श्रम कानून के बारे में अवश्य जानें | Child labour act 1986

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प्यारे दोस्तों, जैसा कि आपको पता है कि मैं Business Lok के द्वारा आपको बिजनेस की सारी समस्याओं का हल उपलब्ध करवाता रहता हूं| इसी कड़ी में बहुत महत्वपूर्ण कानूनी विषय है: “Child labour act 1986

यदि आप business करते हैं तो आपको labour law के बारे में अवश्य ही पता होना चाहिए| कभी-कभी ऐसा हो जाता है कि कानून के अज्ञानता के अभाव में भी हम कुछ गलती कर जाते हैं| 

यदि आप  यह पोस्ट पूरा पढ़ लेंगे तो हो सकता है आप किसी प्रकार के कानूनी उलझन में ना फंसे| साथ ही साथ आपको “बाल मज़दूरी” की गंभीरता का भी पता चल जाएगा| 

बाल श्रम कानून क्या है?

Child labour in Hindi meaning: ” बाल श्रमिक, बाल-श्रम बाल मजदूर, बालश्रम, बाल मज़दूरी “

बाल श्रम कानून क्या है? इसको समझने से पहले आपको Child labour act 1986 के बारे में जानना जरूरी है|

आइए! सबसे पहले समझते हैं चाइल्ड लेबर क्या है?: 

इसे समझने के लिए मैं आपको एक छोटा सा उदाहरण देना चाहता हूं जिसके माध्यम से आपको Child labour act 1986 के बारे में अच्छी तरह समझ में आ जाएगा|

एक गरीब फैमिली है| जिसमें माता-पिता के अलावा एक 11 साल का लड़का तथा एक 12 साल की लड़की है|

परिवार इतना गरीब है की उन्हें भोजन जैसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए भी इन दोनों बच्चों से काम करवाना पड़ेगा|

अब! लड़का किसी पंचर वाले की दुकान पर काम करता है तथा लड़की घरों में साफ-सफाई का काम करती है| यह दोनों ही बच्चे चाइल्ड लेबर (बाल श्रमिक) माने जाएंगे| 

बाल श्रम की परिभाषा: “14 वर्ष से कम आयु के बच्चे (कुछ विशेष परिस्थितियों में 15 वर्ष) आजीविका कमाने के लिए किसी कारखाने, कंपनी या किसी रेडीमेड गारमेंट की दुकान पर मानसिक या शारीरिक श्रम करते हैं तो यह बाल श्रम कहलायेगा| नोट: इसमें अपने परिवार के अलावा किसी और के यहां काम करना ही शामिल होगा|”

संयुक्त राष्ट्र संघ के मुताबिक बाल श्रम की परिभाषा: “यूनाइटेड नेशंस के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के काम करने वाले बच्चों को बाल श्रमिक कहा जाएगा|”

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के मुताबिक बाल श्रम की परिभाषा: “International labor organization के अनुसार बाल श्रम की उम्र 15 साल  निर्धारित की गई है|” 

अमेरिका में बाल श्रमिक की उम्र कितनी है?: “अमेरिका में तो 12 साल या उससे कम उम्र के बच्चों को बाल श्रमिक माना जाएगा|” 

बाल-श्रम (Child labour) इस समय चर्चा में क्यों हैं?

  • बीते दिनों दुनिया भर में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया गया| बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस: (World Day Against Child Labour) प्रतिवर्ष 12 जून को मनाया जाता है| इस बार विश्व बाल श्रम निषेध दिवस का मुख्य विषय बाल श्रम के ऊपर था| इसमें उनका स्लोगन था “ बच्चों को व्यावसायिक संस्थानों पर काम करने के बजाए सपने देखना चाहिए| “ 
  • यूनिसेफ़ और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन किस ताजा रिपोर्ट में कोरोना वायरस के कारण बाल मजदूरी बढ़ने की आशंका व्यक्त की गई है| अत्यधिक मंदी के कारण ऐसा अनुमान है कि बहुत सारे छोटे बच्चों को मजदूरी में धकेल दिया जाएगा|
  • इस रिपोर्ट में ब्राजील, भारत, पाकिस्तान तथा मेक्सिको जैसे देशों के बारे में चर्चा की गई है| हालांकि यह पूरे विश्व की समस्या है| अमेरिका जैसे विकसित देश भी इससे अछूते नहीं हैं| 

बाल श्रम की अंतरराष्ट्रीय स्थिति क्या है?

  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की गणना के मुताबिक सन् 2000 में करीब 24.6 करोड़ बच्चे मजदूरी कर रहे थे|   हालांकि  सरकारें काफी  क़ानूनों के माध्यम से इस को कंट्रोल में लाने का प्रयास करती हैं| सरकारों के पास इसका अभी तक कोई भी स्थाई हल नहीं हो पाया है| 
  • 17 सालों की अवधि में करीब 9.4 करोड़ बच्चे बाल मजदूरी से मुक्त हो पाए हैं| 
  • बाल मज़दूरों में 11 से 5 वर्ष के बीच की आयु के लगभग 48% बच्चे हैं| यानी कि आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कितनी बड़ी संख्या में बाल श्रम होता है| 
  • भारत में  सन 2011  में हुई जनगणना के मुताबिक एक करोड़ 1 लाख बच्चे मजदूरी कर रहे थे|

बाल श्रम के क्या-क्या रूप हो सकते हैं? 

बाल श्रमिक: बच्चों द्वारा कारख़ानों, खदानों, कार्यशालाओं जैसे क्षेत्रों में वेतन तथा बिना वेतन के काम करना| 

बंधुआ बच्चे: ऐसे बच्चे जिन्हें किसी मजबूरी के कारण गिरवी रख लिया जाता है या यह कह सकते हैं एक प्रकार से असामाजिक तरीके से कैद कर लिया जाता है| फिर इनसे पूरी जिंदगी काम करवाया जाता है और बदले में केवल खाना दिया जाता है| 

पारिवारिक श्रम: इस क्रम का अर्थ है जैसे गांव में कृषि क्षेत्र में अपने माता-पिता का हाथ बटाना|  अपने किसी घरेलू उद्योग में शारीरिक तथा मानसिक श्रम करना इत्यादि| पारिवारिक श्रम को कानून में निषेध नहीं किया गया है| 

यौन शोषण: यह शोषण का सबसे घिनौना रूप है|  बहुत सारे बच्चे और बच्चियां इस अंधेरे कुएं मैं धकेल दिए जाते हैं|

घरेलू कामगार:  इसका अर्थ है घरों में बर्तन मांजना, साफ सफाई करना तथा इसी प्रकार के अन्य काम करना| 

बाल श्रम के कारण क्या है? (Child labor causes)

Child labour act 1986 को बनाने से पहले सरकार द्वारा इस बात की खोजबीन की गई की आखिर “बाल श्रम के क्या कारण है?“

किसी भी कानून को बनाने से पहले सरकार द्वारा कुछ तथ्यों पर ध्यान दिया जाता है|

जैसे: यह समस्या क्यों हो रही है? इस समस्या से क्या प्रभाव पड़ेगा? इस समस्या का निवारण कैसे होगा? इत्यादि 

आइए! चर्चा करते हैं! बाल मजदूरी से पड़ने वाले प्रभावों के बारे में 

बेरोज़गारी 

अब आपके मन में यह प्रश्न आ रहा होगा कि बाल श्रम का बेरोज़गारी से क्या मतलब है? तो भाइयों! इसका बहुत बड़ा संबंध होता है|

आइए! मैं आपको क्लियर करके समझाता हूं!

व्यस्क के मुकाबले बच्चे सस्ते में काम करते हैं| इसके साथ ही इनके काम के घंटे भी व्यस्क के मुकाबले बहुत ज्यादा होते हैं| वयस्कों के काम की जगह को बच्चे ले लेते हैं तथा व्यस्क बेरोजगार रह जाते हैं| यही बेरोज़गारी मनुष्य को बुरे कार्यों में धकेलने का भी काम करती है| 

सस्ते मजदूर 

कई जगह तो यहां तक पाया गया है कि एक बच्चे से 1 दिन में औसतन 20 घंटे तक काम कराया जा रहा था|

इनका इतना शोषण किया जाता है कि यह अपनी आवाज भी नहीं उठा पाते| अब! यह आवाज उठाने वाली बात मैंने क्यों लिख दी!! आवाज़ उठाएंगे भी तो हो क्या जाएगा? मालिक इन्हें काम से निकाल देगा|  नए बच्चों की भर्ती कर लेगा और यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा|

यह बाल श्रम की एक मुख्य वजह है |

जब किसी भी व्यापारी को यह संस्थान को सस्ती दर पर मजदूर उपलब्ध है तो वह उसे महंगे में क्यों लेगा?

इसी सोच के कारण बाल मजदूरी को बढ़ावा मिलता है तथा बेरोज़गारी भी बढ़ती चली जाती है|

गरीबी

बाल श्रम का सबसे मुख्य कारण गरीबी है| निर्धन मां-बाप अक्सर अपने घर का लाल पालन नहीं कर पाते इस कारण मजबूरी बस उन्हें अपने बच्चों से श्रम करवाना पड़ता है| 

जनसंख्या

हमारे देश में बहुत सारी समस्याओं का कारण जनसंख्या ही है| ज्यादा जनसंख्या होने के कारण सरकार रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं करा पाती|  सबको अच्छी शिक्षा की व्यवस्था नहीं करवा पाती| फिर यही अज्ञानता का कारण बनती है| 

बेरोज़गारी होने पर भुखमरी का कारण बनती है| अंततः बाल श्रम का कारण बनती है| 

खाद्य असुरक्षा

जब किसी गरीब परिवार में दरिद्रता इस कदर हावी हो जाए कि खाने के लिए दो वक्त की रोटी भी नसीब ना हो| तब! ऐसी स्थिति बाल मजदूरी या बाल श्रम को बढ़ावा देती है|

खाद्य असुरक्षा की वजह से ही बच्चे बाल श्रम करने को मजबूर हो जाते हैं| यदि इनके लिए  दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर दिया जाए तो कोई क्यों अपने बच्चों से काम कराएगा? 

कोई भी माता-पिता अपने बच्चे को अपनी खुद की इच्छा से बाल मजदूरी नहीं करवाना चाहते| अक्सर ऐसा देखा गया है कि बहुत गरीबी के समय ही मां-बाप अपने बच्चों को बाल श्रम में धकेलते हैं|

परिवार को अक्सर अपनी गुजर-बसर करने के लिए अपने बच्चों से बाल श्रम करवाना पड़ता है| अब! आप खुद सोचिए! एक तरफ जहां खाने के लिए रोटी तक नसीब नहीं हो रही है वहां पर कोई शिक्षा जैसे कार्य पर कैसे खर्च करेगा? 

यही मुख्य वजह बन जाती है साक्षरता दर में कमी की| 

अनाथ 

जब किसी छोटे बच्चे पर से बचपन में ही किसी कारण वश मां बाप का साया सर पर से उठ जाता है तो उस बच्चे का भविष्य समझो अंधकार में चला जाता है|

भगवान ने हर बच्चे का ध्यान स्वयं रखने की मंशा से मां-बाप की उत्पत्ति की होगी| मां-बाप छोटे बच्चों के लिए भगवान का स्वरूप होते हैं|

यदि यही मां बाप नहीं रहेंगे तो आप रिश्तेदारों से तो कोई कल्पना उम्मीद रखना अपने आप को धोखा देने जैसा है| ऊपर से हमारे समाज की स्थिति तो सभी जानते हैं| यहां पर अच्छे खासे जवान लोगों को न्याय नहीं मिल पाता तो फिर बच्चे क्या चीज है!!

खैर! यह भी एक बहुत बड़ा कारण है बाल श्रम का| 

मौजूदा क़ानूनों का कड़ाई से लागू ना होना| 

सरकार द्वारा बच्चों की भलाई के लिए कानून तो बहुत सारे बना दिए गए हैं परंतु इन को ठीक से लागू करना प्रशासन का काम होता है| जब इंसान के मन से कानून का डर ही नहीं निकल जाएगा तो वह उसका उल्लंघन करने से क्यों डरेगा?

मौजूदा क़ानूनों को इतने लचर रूप से लागू किया गया है कि कानून का उल्लंघन करने वालों को कानून जैसी कोई चीज दिखाई ही नहीं पड़ती| 

भ्रष्टाचार

कानून का उल्लंघन करने वालों को भ्रष्टाचार की वजह से ही कानून का उल्लंघन करने का बल मिलता है| यदि भ्रष्टाचार खत्म हो जाए, रिश्वतखोरी खत्म हो जाए तो मजाल है कोई जरा सा कानून तोड़ के तो दिखाए! 

भ्रष्टाचार भी एक मुख्य वजह है बाल श्रम को बढ़ावा देने की 

बाल श्रम के दुष्प्रभाव क्या है? (side effects of child labor)

साथ ही साथ हमे बाल-श्रम के कारण क्या प्रभाव पड़ता है? इसके बारे में भी जान लेना चाहिए|

साक्षरता दर में कमी

किसी भी देश में बाल मजदूरी का सबसे बड़ा मुख्य प्रभाव पड़ता है कि वहां पर साक्षरता दर में कमी आ जाती है| 

शारीरिक शोषण

जब यह बच्चे कहीं पर काम कर रहे होते हैं तो धीरे-धीरे वह मानसिक रूप से भी कमजोर होते चले जाते हैं| 

अक्सर बहुत जगह ऐसा पाया गया है कि विरोध ना करने की क्षमता के कारण इनका शारीरिक शोषण भी शुरू हो जाता है| अब आप इसको थोड़ा ऐसे सोचिए कि यदि वह आपका बच्चा होता तो आपके क्या विचार होते? 

देखा! ऐसी स्थिति की कल्पना करते के साथ ही आपके मन में गुस्से का भाव किस कदर बढ़ गया है! मैं केवल आपको यह समझाना चाहता था कि यह स्थिति कितनी गंभीर है! 

बाल मजदूरी के कारण  शारीरिक शोषण को बढ़ावा मिलता है यह इसका एक बहुत बड़ा दुष्प्रभाव है| 

मानव अंग तस्करी 

यह जानकर निश्चित ही आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे!  कुछ असामाजिक तत्व मिलकर ऐसा घृणित कार्य करते हैं जिनको सुनकर भी घृणा आने लगती है|

यह असामाजिक तत्व इन छोटे बच्चों को किडनैप कर लेते हैं या खरीद लेते हैं| इसके उपरांत वह उनके अंगों की तस्करी करते हैं| 

अरे! थू है!! ऐसी मानसिकता पर जिसमें किसी बच्चे के कोमल अंग उसके कोमल जिस्म से केवल अपने मुनाफ़े के लिए निकाल लिए जाएँ|

भाषा की मर्यादा बनाए रखने के लिए मैंने इन्हें असामाजिक तत्व लिखा है अन्यथा ऐसे घृणित लोगों के लिए दुनिया में अभी तक शायद कोई गाली भी नहीं बनी है! 

गैर कानूनी खरीद-फरोख्त 

बाल श्रम में लगे हुए बच्चों कि गैर कानूनी रूप से खरीद-फरोख्त भी हो जाती है| अक्सर यह भी देखा गया है कि इन छोटे बच्चों को भीख मांगने जैसे कार्यों में धकेल दिया जाता है|

बच्चे फसल की छोटी पौध के समान होते हैं| किसी भी समाज में यदि बहुत ही खराब हो जाएगी तो फसल तो खराब होनी निश्चित है|

गैर कानूनी खरीद-फरोख्त child labor से उत्पन्न हुई एक गंभीर समस्या है| 

स्वास्थ्य 

विषम परिस्थितियों में काम करने के कारण वयस्क क्या बच्चों को भी नुकसान पहुँचता है! बहुत सी ऐसी जगह होती हैं जो मनुष्य के काम करने के अनुकूल नहीं होती|

इस प्रकार की जगहों पर बाल श्रम करवाने से उनके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है| 

चाइल्ड क्राइम

बाल श्रम के कारण सबसे पहले बचपन मरता है| उसके बाद उसके अच्छे विचार मरते हैं| उसके बाद उस बच्चे के दिल में समाज के लिए घृणा उत्पन्न होती है| यही घृणा बाद में बाल अपराध का कारण बनती है| 

बाल श्रम के कारण बाल अपराध उत्पन्न होता है| 

चाइल्ड पॉर्नोग्राफी

एक सुसज्जित समाज का एक घृणित चेहरा भी होता है| यह ऊपर से दिखाई नहीं देता| इसी का एक रूप सामने आता है चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के रूप में|

कुछ लोगों की मानसिकता इस प्रकार की होती है कि वह बच्चों के साथ यौन शोषण का आनंद लेते हैं| इसी के चलते इस व्यवसाय को बल मिलता है|

अब! इस प्रकार के कुकृत्य के लिए निश्चित ही किसी की अपनी मंजूरी नहीं हो सकती|

और नाबालिक की क्या तो मंजूरी और क्या ना मंजूरी?

इस व्यवसाय से जुड़े लोग छोटे बच्चों को अगवा कर लेते हैं तथा उनसे ज़बरदस्ती अश्लील फिल्में बनवाते हैं| बाल श्रम से जुड़कर कितनी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती है? यह इस पोस्ट को अब तक पढ़ने के बाद आप जान चुके हैं| 

भीख माँगना

अक्सर आपने रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड  तथा चौराहों पर छोटे बच्चों को भीख मांगते हुए अवश्य देखा होगा| क्या आपने कभी सोचा है| कहाँ से आते हैं यह बच्चे?  

कई बार पुलिस की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि के गैंग का भंडाफोड़ हुआ है जो छोटे बच्चों से भीख मंगवाने का कार्य करते हैं| 

अब आप स्वयं ही समझ सकते हैं कि भिक्षावृत्ति का मूल कारण चाइल्ड लेबर है| 

हमारे देश का खेलों में पिछड़ना

खेल कूद जैसी चीजें देश का नाम रोशन करती हैं|  बहुत सारे खेलों में बच्चों को छोटी उम्र से ही अभ्यास करवाया जाता है|

अरे भाई!  वह जो बच्चा कल को एक बहुत अच्छा धावक बन सकता था! एक बहुत अच्छा तैराक बन सकता था! पर वह तो बेचारा तो वहां रेड लाइट पर भीख मांग रहा है!

 अब हमारा देश खेलों में नहीं पिछड़ेगा तो क्या होगा! 

बच्चों के लिए भारतीय संविधान में क्या-क्या प्रावधान किए गए हैं?

1-अनुच्छेद 23: इस अनुच्छेद के अनुसार भारत में बच्चों का व्यापार या बच्चों से ज़बरदस्ती काम करवाना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा| 

2- अनुच्छेद 24:  इसमें भारत में बाल मजदूरी पर रोक लगाने के प्रावधानों को लिखा गया है|

3- अनुच्छेद 15(3): बच्चों के साथ भेदभाव को रोकने के लिए सरकार को अलग से कानून बनाने का अधिकार दिया गया है| 

4- अनुच्छेद 39:  बच्चों के शारीरिक विकास और स्वास्थ्य के लिए जरूरी सुविधाएँ उपलब्ध कराने का आदेश देता है| 

बाल मजदूरी पर भारत में क्या-क्या कानून बनाए गए हैं? 

  • वर्ष 1948 में कारखाना अधिनियम बनाया गया इसके अंतर्गत 14 साल तक की आयु वाले बच्चों को कारखाने में काम करने को प्रतिबंधित किया गया है| 
  • इसके उपरांत बाल श्रम अधिनियम, 1986 (Child labour act 1986)  का निर्माण किया गया| इसके अंतर्गत 14 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी जोखिम में डालने वाले व्यवसाय में काम करने से रोकने का प्रावधान किया गया है|
  • किशोर न्याय अधिनियम 2015 लाया गया जिसको 2018 में संशोधित भी किया गया है|  इस अधिनियम के अंतर्गत कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण की व्यवस्था की गई है| इसमें अनाथ बच्चों तथा छोड़ दिए गए बच्चों के विषय में कानून बनाए गए हैं तथा गोद लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने के प्रावधान किए गए हैं| 
  • निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम सन 2009 में अस्तित्व में आया| इसके अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया कि गरीब मां बाप अपने बच्चों को पढ़ा सकें जिससे कि उन्हें बाल मजदूरी ना करनी पड़े| 
  • बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 के अंतर्गत सन 2007 में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की स्थापना की गई| इसके अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया कि समस्त विधियां,  कार्यक्रम तथा समस्त तंत्र बाल अधिकारों के अनुरूप हों| 

बाल मजदूरी को खत्म करने में क्या-क्या चुनौतियाँ हैं?

जैसा कि अब तक आप जान चुके हैं कि बाल मजदूरी से क्या क्या नुकसान है?  तो अब आप निश्चित ही यह सोच रहे होगे कि सरकार द्वारा इसे पूर्णता निषेध क्यों नहीं कर दिया जाता?

यह सवाल आना स्वाभाविक है  कि “ यदि बाल मजदूरी इतना खतरनाक विषय है तो सरकार द्वारा इसे पूर्णत: प्रतिबंधित क्यों नहीं कर दिया जाता? “

तो दोस्तों,  सरकार जिस भी चीज को पूर्णतया समाप्त नहीं कर पाती वह उस को कंट्रोल करने की कोशिश करती है|

आप ऐसा भी कह सकते हैं कि रेगुलेट करने की कोशिश करती है| 

चलिए!  इसे थोड़ा सा आसान भाषा में समझाने की कोशिश करता हूं|

अब इसे थोड़ा सा इस प्रकार समझते हैं जैसे कि शराब को सरकार प्रतिबंधित करना चाहती है परंतु वह ऐसा नहीं  करती| 

क्योंकि ऐसा करने से नकली शराब बनाने वालों की भरमार हो जाएगी| शराब की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो जाएगी| 

शराबियों द्वारा अपनी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा शराब को खरीदने में वह हो जाएगा जिससे कि उनके परिवार में भुखमरी का संकट पैदा हो जाएगा|

ऐसा होने की स्थिति में अराजकता बहुत तेजी से बढ़ जाएगी इसीलिए सरकार शराब को कंट्रोल करती है ना कि प्रतिबंधित|

गरीबी

कुछ ऐसा ही चाइल्ड लेबर के संबंध में है| जब तक हमारे देश में गरीबी है तब तक सरकार चाइल्ड लेबर को प्रतिबंधित नहीं कर सकती|

इसका सीधा सा कारण है परिवार में गरीबी है भुखमरी का संकट है तो गरीब आदमी क्या करेगा?

यदि आप उससे यह विकल्प भी छीन लेंगे तो फिर उसके पास क्राइम करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा|

बाल मजदूरी को खत्म करने के संबंध में गरीबी सबसे बड़ी वजह है| 

अशिक्षा

गरीबी के अलावा  दूसरी चुनौती है अशिक्षा| हालांकि हर मां-बाप अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं|

कुछ अशिक्षित मां-बाप शिक्षा के महत्व को थोड़ा सा कम-तर आँकते हैं| इस कारण से भी कुछ बच्चे अशिक्षित रह जाते हैं तथा वह बाल श्रम में लिप्त हो जाते हैं|

जागरूकता

माता-पिता में बच्चों की शिक्षा के लिए भी जागरूकता का अभाव चाइल्ड लेबर को बढ़ावा देता है| इस कारण से माता-पिता बच्चों की शिक्षा को लेकर कुछ खास ध्यान नहीं देते|

वह उन्हें बहुत ज्यादा पढ़ाने के मुकाबले कुछ शुरुआती सालों तक शिक्षा देते हैं फिर उनका स्कूल छुड़वा देते हैं| 

प्रशासन की लापरवाही

अक्सर! यह देखा गया है कि पुलिस द्वारा सभी मामलों को दर्ज नहीं किया जाता|  इस प्रकार दोषी में कानून का डर खत्म हो जाता है| 

जिसके कारण समाज में यह संदेश जाता है कि चाइल्ड लेबर के साथ आप आसानी से किसी भी घटना को अंजाम दे सकते हैं और आपको कुछ नहीं होगा|

कई बार दोषी को बहुत थोड़ी सी सजा होती है जिस कारण से यह कानून पूर्णतया अपना काम नहीं कर पाता| 

यह भी देखा गया है कि पुलिस में शिकायत करने पर अन्य व्यापारी उस बच्चे को अपने काम पर रखने से मना कर देते हैं| इन कारणों से और बच्चे अपने शोषण के बारे में पुलिस में शिकायत ही दर्ज नहीं करवाते| 

लंबी कानूनी प्रणाली 

इस प्रकार के मामलों में यदि मुकदमा न्यायालय तक पहुंच जाता है तो आपको पता ही है कि हमारे न्यायालयों पर पहले ही कितना काम का अतिरिक्त दबाव है| 

इस कारण से न्यायिक प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो जाती है|  साथ ही साथ खर्चीली भी हो जाती है|

अब!  भैया सीधी सी बात है!  चाइल्ड लेबर वाला परिवार तो निर्धन ही होता है| वह इस प्रक्रिया में धन को खर्च नहीं कर पाता जिससे दोषी आसानी से छूट जाता है| 

बच्चों से काम करवाने में क्या सजा होगी? (Child labour act 1986 Penalty)

जब बच्चे किसी खतरनाक जगह पर काम करते हैं तो इससे बच्चों का मानसिक तथा शारीरिक विकास रुक जाता है|

साथ ही साथ उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी शुरू हो जाती हैं| इस कारण से सरकार ने खतरनाक जगहों पर बच्चों से काम करवाने को प्रतिबंधित कर दिया|

इस संबंध में राज्यसभा ने 19 जुलाई को विधेयक पारित किया था। एक विधेयक लोकसभा द्वारा 26 जुलाई को पारित किया गया था। 

संशोधित अधिनियम उल्लंघन करने वालों के लिए बढ़ी हुई सजा का प्रावधान करता है।

एक बच्चे को नौकरी देने पर  जुर्माना अब छ: महीने से दो साल (तीन महीने से एक साल तक) या फाइन  20 हज़ार रुपए से 50 हजार रुपए या दोनों का जुर्माना होगा।

दूसरी बार अपराध करने पर एक साल से तीन साल तक की कैद होगी।

कानून के अनुसार, किसी भी बच्चे को किसी भी प्रक्रिया या व्यवसाय में नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए, इस बात को छोड़कर कि वह स्कूल समय के बाद या छुट्टियों के दौरान अपने परिवार की मदद करता है।

यह अधिनियम उन बच्चों के लिए लागू नहीं है जो  फिल्मों, विज्ञापन, टेलीविजन धारावाहिकों या सर्कस को छोड़कर किसी अन्य मनोरंजन या खेल गतिविधियों सहित ऑडियो-विजुअल मनोरंजन उद्योग में एक कलाकार के रूप में काम करते हों, बशर्ते कि कोई भी ऐसा काम नहीं होना चाहिए जो उनकी स्कूली शिक्षा को प्रभावित करें| 

लेखक की राय 

इस पोस्ट के माध्यम से आपने Child labour act 1986 के बारे में जाना है|

उम्मीद करता हूं आपको यह पोस्ट “Child labour act 1986” अच्छी तरह समझ में आ गई होगी| इस पोस्ट को आप बाल श्रम निबंध (child labor essay) की तरह अपने बच्चों को पढ़ाएँ| साथ ही उन्हे इस बारे में जागरुक अवश्य करें|

साथ ही साथ आप बाल श्रम कानून के विषय में इतना तो जान ही गए हैं कि यह बच्चों की भलाई के लिए बनाया गया है तथा इससे पूरा समाज किस प्रकार प्रभावित होता है?

यदि आप इन बच्चों की भलाई के लिए कुछ योगदान करना चाहते हैं तो मैं आपको कुछ गैर सरकारी संगठनों के नाम मुहैया करवा रहा हूं| आप इनमें अपनी इच्छा अनुसार दान देकर इन बच्चों के कल्याण में विशेष योगदान दे सकते हैं| यह पूरी तरह सरकार से पंजीकृत है तथा आपको इसमें इनकम टैक्स की छूट भी मिलेगी|

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

फैक्ट्री act 1948 क्या है?

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न्यूनतम मजदूरी अधिनियम: 1948 क्या है?

गद्दे बनाने की फैक्ट्री कैसे लगायें?

उम्मीद करता हूं आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी|

मैं नवीन कुमार अब आपसे इजाज़त चाहता हूं| अगली पोस्ट में फिर मिलूंगा तब तक के लिए नमस्कार

धन्यवाद 

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प्यारे दोस्तों, मैं नवीन कुमार एक बिज़नेस ट्रैनर हूँ| अपने इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपको - आयात-निर्यात व्यवसाय (Export-Import Business), व्यापार कानून (Business Laws), बिज़नेस कैसे शुरु करना है?(How to start a business), Business digital marketing, व्यापारिक सहायक उपकरण (Business accessories), Offline Marketing, Business strategy, के बारें में बताऊँगा|| साथ ही साथ मैं आपको Business Motivation भी दूंगा| मेरा सबसे पसंदीदा टॉपिक है- “ग्राहक को कैसे संतुष्ट करें?-How to convince a buyer?" मेरी तमन्ना है की कोई भी बेरोज़गार न रहे!! मेरे पास जो कुछ भी ज्ञान है वह सब मैं आपको बता दूंगा परंतु उसको ग्रहण करना केवल आपके हाथों में है| मेरी ईश्वर से प्रार्थना है की आप सब मित्र खूब तरक्की करें! धन्यवाद !!