कार्ड टोकनाइजेशन क्या है? इसका ऑनलाइन शॉपिंग पर क्या असर होगा? | What is card tokenization in Hindi

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card tokenization: जब से ऑनलाइन शॉपिंग में जबरदस्त उछाल आया है तब से डेटा की सुरक्षा के उल्लंघन के मामले और भी बढ़ रहे हैं! रिजर्व बैंक ने साइबर सुरक्षा के मद्देनजर, इस खतरे को कम करने के लिए कई प्रकार के उपाय लागू किए हैं! जिनमें से कार्ड टोकनाइजेशन एक नया कदम होने जा रहा है! पीटी नाउ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2022 से ग्राहकों को ऑनलाइन शॉपिंग करते समय सुरक्षा की दृष्टि से, अपने कार्ड को टोकनाइज करने के लिए कहा जा सकता है! 

What is card tokenization in Hindi

कार्ड टोकनाइजेशन क्या होता है?

टोकनाइजेशन एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड की डिटेल को एक एनक्रिप्टेड कोड से बदल दिया जाता है! इसी इंक्रिप्टेड कोर्ट कोर्ट टोकन कहा जाता है! 

प्रत्येक टोकन में कार्ड, टोकन रिक्वेस्टर तथा जिस डिवाइस से रिक्वेस्ट किया गया है, इन सभी जानकारियों का कॉन्बिनेशन होता है! 

अब! मर्चेंट ऑनलाइन पेमेंट को प्रोसेस करने के लिए इन्हीं टोकन का इस्तेमाल करेंगे! 

कार्ड टोकनाइजेशन की जरूरत क्यों पड़ी?

जब भी आप  इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन किसी ऐप पर या किसी ई-कॉमर्स वेबसाइट के माध्यम से खरीदारी करते हैं तो उस समय आपको डेबिट कार्ड/ क्रेडिट कार्ड की डिटेल सेव करने के लिए कहा जाता है! इसके पीछे वेबसाइट यह तर्क देती है कि “इससे आपका आगे का ट्रांजैक्शन फास्ट हो जाएगा”

हालांकि, इस सहूलियत के साथ-साथ सुरक्षा का रिस्क भी जुड़ा होता है! यदि आपका यह डाटा लीक हो जाए या उस हैक कर लिया जाए तो आपको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है! 

इसी समस्या का समाधान कार्ड टोकनाइजेशन के तौर पर लाया गया है! 

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पहली बार इसका प्रस्ताव मार्च सन 2020 में किया था!  पहले इसे 2021 के सितंबर महीने तक लागू करने का प्लान था, लेकिन अब इसे 2022, 30 सितंबर तक के लिए टाल दिया गया है! 

क्या यह जरूरी होगा?

जी नहीं,  कार्ड को टोकनाइज करना जरूरी नहीं होगा! इसके लिए ग्राहक को हां या ना का विकल्प दिया जाएगा!  इसके अलावा भी आप कई तरह से अपने कार्ड को रजिस्टर कर पाएंगे!

इसका असर क्या होगा?

टोकनाइजेशन प्रणाली लागू होने के बाद फिलहाल ऑटो डेबिट या स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन वाले भुगतान प्रभावित होंगे! सभी ई-कॉमर्स मर्चेंट से सभी ग्राहकों के पेमेंट डिटेल को डिलीट करने के लिए कहा गया है!

इसका सीधा सा अर्थ यह है कि अब आपको अपनी पेमेंट की डिटेल दोबारा से भरनी होगी!  टोकनाइजेशन करने पर आप आगे से इस झंझट से मुक्त हो सकते हैं| 

यदि टोकेनाइजेशन में कोई शिकायत आती है तो इन शिकायतों का समाधान कार्ड जारीकर्ता ही करेंगे! 

टोकनाइजेशन कितने प्रकार के होते हैं? (Types of Tokenization)

टोकनाइजेशन मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं|

1- Front-end Tokenization

2- Back-end Tokenization

फ्रंट एंड टोकनाइजेशन क्या होता है? 

Front-end Tokenization: “Front-end” Tokenization का निर्माण  स्वयं उपभोक्ता के द्वारा किया जाता है, जिसमें अपनी मूल पहचान को छुपाकर डिजिटल रूप में उपयोग करता है|

इस टोकनाइजेशन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि “उपयोगकर्ता को डिजिटल रुप से साक्षर तथा तकनीकी रूप से शिक्षित होना चाहिए”

उपयोगकर्ता को यह पता होना चाहिए कि उन्हें टो कंस की आवश्यकता क्यों होगी तथा इसे ऑनलाइन कैसे बनाया जा सकता है? उपयोगकर्ता इसके माध्यम से डिजिटल रूप में अपनी प्राइवेसी को सुरक्षित कर सकते हैं!

Back-end Tokenization: “Back-end” Tokenization का तब प्रयोग किया जाता है जब पहचान करता अन्य विधि के द्वारा अपने टोकनों को दूसरों के साथ साझा करते हैं!  इसमें उनका मुख्य मकसद अपनी मूल पहचान को दूसरे तक जाने से रोकना होता है!  इस प्रकार उपयोग करता अपने डेटा को सुरक्षित रखते हैं!

इस प्रणाली में उपयोगकर्ता ऑटोमेटिकली अपनी पहचान को छुपाकर टोकन को जनरेट करता है तथा अपनी पहचान को गुप्त रखते हुए इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है!

टोकनाइजेशन के फायदे (Advantages of Tokenization)

  • इस प्रक्रिया में डाटा कि सही संरचना तथा स्वरूप को इंक्रिप्टेड तरीके से ट्रांसमिट किया जाता है जिससे साइबर हमला होने की संभावना काफी कम हो जाती है!
  • इसमें किया गया भुगतान केवल प्रोसेसर ही पढ़ पाता है अन्य किसी भी व्यक्ति के लिए यह पढ़ना संभव नहीं है!
  • इस प्रक्रिया में क्रेडिट कार्ड/ डेबिट के अलावा आपकी सभी तरह की व्यक्तिगत जानकारियां भी गुप्त रहती हैं जैसे की:  फाइल, बैंक डिटेल, पासवर्ड, पता इत्यादि|
  • इसमें यूजर के ऑथेंटिकेशन के बिना ट्रांजैक्शन संभव नहीं है!
  • धोखाधड़ी या चोरी जैसे मामलों में यह अधिक सुविधाजनक है क्‍योंकि विभिन्न प्लेटफार्मों पर एक ही कार्ड से भुगतान के लिए विभिन्न टोकन जारी किए जाते हैं!
  • किसी भी प्लेटफॉर्म पर डाटा उल्लंघन के मामले में हैकर/आपराधिक गतिविधियों से सुरक्षा!
  • इसमें सुरक्षित तथा सुविधाजनक भुगतान हो जाता है! 
  • इस प्रक्रिया में यूजर का अपने कार्ड के डाटा पर अधिक नियंत्रण होता है! 

टोकनाइजेशन के नुकसान (Disadvantages of Tokenization)

  • इस प्रक्रिया में इंफ्रास्ट्रक्चर अधिक जटिलता को दर्शाती है जैसे कि:  जब किसी व्यवसाय के ई-कॉमर्स प्लेटफार्म के द्वारा लेन देन को सुविधाजनक कदम उठाया जाता है तो वह इस प्रक्रिया के कारण थोड़ा जटिल हो जाता है!
  • इसके द्वारा प्रत्येक ट्रांजैक्शन की लिमिट तय करना होता है यानी कि आप तय किए गए लिमिट से अधिक ट्रांजैक्शन नहीं कर सकते इस कारण से यह आपको बार-बार निर्धारित करना होता है!
  • इसमें दिल्ली ट्रांसफर लिमिट को भी तय करना होता है जिसमें आप 1 दिन में उससे ज्यादा पैसा ट्रांसफर नहीं कर सकते!
  • यह प्रक्रिया थर्ड पार्टी टोकन को सिक्योरिटी जिससे नहीं बचाती यानी  की आपने जिस विक्रेता के पास अपना डाटा भेजा है वह उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करें!
  • डिजिटल निरक्षरता के कारण क्रेडिट कार्ड/ डेबिट कार्ड से पेमेंट करने वाले 16% भारतीय नागरिक भी जागरूक नहीं है| टोकन सिस्टम में  ग्राहकों को जागरूक करना एक बहुत बड़ी समस्या हो सकती है! 

FAQs: Card tokenization 

क्रेडिट कार्ड को टोकननाइज करने का क्या अर्थ है?

कार्ड टोकनाइजेशन प्लास्टिक कार्ड पर कार्ड के ऊपर लिखा है 16 अंकों की संख्या 1 अद्वितीय तथा वैकल्पिक कार्ड नंबर में बदल जाती है| इसी अद्वितीय अंको की संख्या को कार्ड टोकननाइज कहते हैं| इस बदले हुए टोकन के साथ ऑनलाइन लेनदेन, मोबाइल पॉइंट ऑफ सेल्स लेनदेन या ऐप में लेनदेन के लिए सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है|

क्या कार्ड टोकनाइजेशन पद्धति में अनलिमिटेड ट्रांजैक्शन की जा सकती है?

जी नहीं, इसके लिए जितने ट्रांजैक्शन लिमिट सेट की गई होती है केवल उतने ही अमाउंट कि 1 दिन में ट्रांजैक्शन होती है|

टोकनाइजेशन का क्या फायदा है?

एक टोकनयुक्त कार्ड लेन-देन के लिए सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें लेन-देन करने के लिए व्यापारियों के साथ वास्तविक कार्ड की डिटेल को साझा/संग्रहीत नहीं किया जाता है|

यदि आप अपने कार्ड का टोकन नहीं करेंगे तो क्या होगा?

यदि आप अपने कार्ड का टोकन नहीं चुनते हैं तो आपको अपने हर बार प्रत्येक भुगतान के लिए अपने क्रेडिट/डेबिट कार्ड नंबर, समाप्ति और सीवीवी सहित सभी कार्ड विवरण दर्ज करने होंगे।

यदि किसी के पास एक से अधिक कार्ड टोकन है तो क्या वह चुन सकता है कि किस कार्ड का उपयोग किया जाए?

कोई भी लेन-देन करने के लिए, आप टोकन अनुरोधकर्ता/व्यापारी के पास पंजीकृत किसी भी कार्ड का उपयोग स्वतंत्र रूप से कर सकते हैं|

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

1- कम या ज़ीरो निवेश वाले बिजनेस आइडियास

2- नियों बैंक क्या होता है?

3- वित्तीय प्रबंधन के उद्देश्य

4- फ्रेंचाइजी बिजनेस क्या है?

उम्मीद करता हूं मेरे द्वारा दी गई यह जानकारी आपको पसंद आई होगी! बिजनेस स्टडी से संबंधित ऐसे ही अगली पोस्ट में, मैं फिर मिलूंगा तब तक के लिए नमस्कार 

धन्यवाद 

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प्यारे दोस्तों, मैं नवीन कुमार एक बिज़नेस ट्रैनर हूँ| अपने इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपको - आयात-निर्यात व्यवसाय (Export-Import Business), व्यापार कानून (Business Laws), बिज़नेस कैसे शुरु करना है?(How to start a business), Business digital marketing, व्यापारिक सहायक उपकरण (Business accessories), Offline Marketing, Business strategy, के बारें में बताऊँगा|| साथ ही साथ मैं आपको Business Motivation भी दूंगा| मेरा सबसे पसंदीदा टॉपिक है- “ग्राहक को कैसे संतुष्ट करें?-How to convince a buyer?" मेरी तमन्ना है की कोई भी बेरोज़गार न रहे!! मेरे पास जो कुछ भी ज्ञान है वह सब मैं आपको बता दूंगा परंतु उसको ग्रहण करना केवल आपके हाथों में है| मेरी ईश्वर से प्रार्थना है की आप सब मित्र खूब तरक्की करें! धन्यवाद !!