Capital market: पूंजी बाजार क्या है? | What is capital market in India

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Capital market in India: इस पोस्ट में हम जानेंगे कि कैपिटल मार्केट क्या होती है?, पूंजी बाजार की विशेषताएं, पूंजी बाजार को प्रभावित करने वाले सरकारी नियम के बारे में| 

तो चलिए! दोस्तों शुरू करते हैं| “Capital market in India”

पूंजी बाजार क्या है?

उदाहरण:

Capital market in India: कैपिटल मार्केट क्या होती है?  इसको अच्छी तरह समझाने के लिए मैं आपको सबसे पहले एक उदाहरण दे रहा हूं| 

कैपिटल मार्केट को पूंजी बाजार भी कहते हैं| 

महेश नाम का एक व्यक्ति है| महेश अपना बिजनेस खोलना चाहता है| अपना बिजनेस खोलने के लिए महेश के पास पैसे नहीं है| साथ ही साथ महेश जिस बिजनेस को करने के बारे में सोच रहा है, उससे एकदम से मुनाफा मिलना शुरू नहीं हो जाएगा| 

ज्यादातर सभी बिजनेस के साथ यही होता है|  एकदम से मुनाफा शायद ही किसी बिजनेस में मिलता होगा| लगातार मेहनत करते रहना पड़ता है| 

जो लोग शुरुआती दौर में ही टूट जाते हैं वह हमेशा सफल रहते हैं| बिजनेस में सफलता की कुंजी का दूसरा नाम लगातार मेहनत करते रहना तथा अपनी सोच को पॉजिटिव बनाए रखना है| 

हा हा हा हा, एक छोटी सी बात सोचकर हंसी आ गई, सोचता हूं कि आपको भी बता दूँ|

कभी ना कभी आपके मन में भी जिम जाने के बारे में जरूर आया होगा| कुछ लड़कों को मैंने जिम में पहले दिन ही इतनी मेहनत करते देखा है कि उसके बाद वह 1 हफ्ते तक खाट पर से नहीं उठे|

कुछ तो पहली बार में ही 1 साल की फीस जमा करा कर चले गए और तीसरे दिन के बाद नहीं दिखे|

ऐसा भी हो सकता है कि आप में से जो कोई पोस्ट पढ़ रहा हो वह बॉडी बिल्डर बन गया हो! वही जान सकता है उसने कैसे यह मुकाम हासिल किया होगा? 

ऐसा ही बिजनेस के साथ होता है| 

यदि आप कोई भी बिजनेस करने के बारे में सोच रहे हैं तो, उस बिजनेस को सफल बनाने के लिए अपनी तरफ से हंड्रेड परसेंट दीजिए| 

मैंने अपनी जिंदगी में ऐसे हजारों एग्जांपल देखे हैं,  जिन्होंने एक छोटा सा व्यवसाय शुरू किया था, तथा आज है उस फील्ड में शिखर पर हैं|

चलिए! आगे बढ़ते हैं| 

महेश ने जिस बिजनेस को चुना था उससे लगभग 5 साल बाद रिटर्न मिलना शुरू होता| अब!  यहां पर यह सवाल उठता है कि महेश को किस जगह से धन लेना चाहिए?

मनी मार्केट के बारे में तो आप पिछली पोस्ट में पढ़ ही चुके हैं| वहां से तो महेश की बात नहीं बन पाएगी| 

इसलिए महेश को कैपिटल मार्केट का रुख करना पड़ेगा| 

अब यहां से आपको अच्छी तरह कैपिटल मार्केट क्या होती है? इसके बारे में समझ आ जाएगा| 

कैपिटल मार्केट क्या होती है?

Capital market (पूंजी बाजार) वह मार्केट होती है जिसमें मिनिमम मैच्योरिटी 1 साल से ज्यादा होती है| यानी कि Capital market का मिनिमम मैच्योरिटी टाइम पीरियड 1 साल का होता है| 

कैपिटल मार्केट वह स्थान है जहां पर medium (1 साल से 6 साल तक) तथा long term (6 साल से अधिक) के लिए धन मिलता है|

प्रत्येक वह ऑर्गेनाइजेशन,  प्रत्येक वह इंस्टीट्यूशन,  प्रत्येक वह इंस्ट्रूमेंट, जो भी मीडियम टर्म तथा लॉन्ग टर्म के लिए फंड्स देता है, वह Capital market (पूंजी बाजार) के दायरे में आता है| 

जो भी इंस्टीट्यूशन 1 साल से कम की अवधि के लिए फंड मुहैया कराएगा वह Capital market में नहीं आएगा| 

कैपिटल मार्केट में मुख्यतः शेयर, म्यूचूअल फंड्ज, बॉन्ड, पब्लिक डिपाज़ट, डिबेन्चर, जैसे इंस्ट्रूमेंट्स आते हैं| 

कैपिटल मार्केट/पूंजी बाजार की परिभाषा: “पूंजी बाजार को उस तंत्र के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जो निवेश या उत्पादक उपयोग में बचत करता है, पूंजी बाजार वैकल्पिक उपयोगों के बीच पूंजी संसाधनों को आवंटित करता है। यह उन लोगों की बचत के प्रवाह में हस्तक्षेप करता है जो अपनी आय का एक हिस्सा उन लोगों से बचाते हैं जो इसे उत्पादक संपत्तियों में निवेश करना चाहते हैं|” 

सरल भाषा में अर्थ: एक व्यक्ति पैसे की बचत करता है|  उस बचत को वह कैपिटल मार्केट में लगाता है| Capital market के द्वारा वह धन जरूरतमंद बिजनेसमैन को मिल जाता है| 

विशेषताएं

पूंजी बाजार की विशेषताएं | Features of capital market

1- यह बचतकर्ताओं और निवेश के अवसरों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होती है| पूंजी बाजार बचत और निवेश प्रक्रिया के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होती है। पूंजी बाजार बचतकर्ताओं से धन लेकर उद्यमी उधारकर्ताओं को धन हस्तांतरित करता है।

यदि कैपिटल मार्केट ना होता तो पैसा देने वाले तथा पैसा लेने वाले दोनों के बीच कभी भी विश्वास कायम ना हो पाता| 

2- Capital market (पूंजी बाजार) लंबे समय अवधि के लिए निवेश में लेन-देन करता है| यह मध्यम अवधि तथा लंबी अवधि के लिए ही धन मुहैया करवाता है|  इसमें 1 साल से कम समय के लिए निवेश का लेन देन नहीं होता| इसलिए मनी मार्केट पूंजी बाजार का भागीदार नहीं है|

3- कैपिटल मार्केट अपने इस काम के लिए मध्यस्थों का अच्छी तरह उपयोग करता है| इन मध्यस्थों में ब्रोकर,  अंडरराइटर, डिपॉजिटरीज, इत्यादि आती हैं| 

जैसे कि: कोई कंपनी जब अपना IPO लाना चाहती है तो,  उस कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट कराने के लिए मर्चेंट बैंक सहायता करते हैं| 

यह मध्यस्थ या बिचौलिए कैपिटल मार्केट के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण तत्व होते हैं| 

4- Capital market (पूंजी बाजार) में जो एक्टिविटी चलती है उसी के द्वारा किसी देश की इकोनॉमी के बारे में पता चलता है| 

जैसे कि: जब स्टॉक मार्केट ऊपर जाता है तो किसी भी देश की इकोनॉमी बढ़ जाती है परंतु जब स्टॉक मार्केट नीचे जाता है तो उस देश की इकोनॉमी गिर जाती है| ऐसा बिल्कुल नहीं है कि केवल स्टॉक मार्केट के परफॉर्मेंस से ही किसी देश की इकोनॉमी के बारे में पता चलता है|  यह तो केवल एक छोटा सा पैरामीटर है| 

जिन लोगों के पास में सरप्लस फंड है वह कैपिटल मार्केट में निवेश करते हैं,  जिन लोगों को प्रोडक्टिविटी के लिए धन की आवश्यकता है, वह कैपिटल मार्केट से धन ले लेते हैं| 

5- सरकार द्वारा कैपिटल मार्केट के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं किया जाता, परंतु कैपिटल मार्केट को भी सरकार के नियमों का पालन करना पड़ता है| 

सरकार द्वारा कैपिटल मार्केट को नियंत्रित (Regulate) किया जाता है| इसे नियंत्रित करने के लिए SEBI सरकार द्वारा बनाई गई एक रेगुलेटरी बॉडी है| 

किसी भी कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर्ड कराने के लिए सेबी की गाइडलाइन्स को फॉलो करना ही पड़ेगा| 

पूंजी बाजार को सेबी नियमित करता है| 

पूंजी बाजार को प्रभावित करने वाले सरकारी नियम

सरकार के अनुसार एक आदर्श कैपिटल मार्केट वह होती है, जिसमें निम्न गुण हैं| 

1- जहां पर वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धन एक उचित कीमत पर मिले| 

2- जो आर्थिक विकास को सुगम बनाने में सहायता करे|

3- कैपिटल मार्केट में बाजार संचालन मुफ्त, निष्पक्ष (Fair), प्रतिस्पर्धात्मक (competitive) तथा पारदर्शी (transparent) होना चाहिए| किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं होनी चाहिए| 

4- निवेशक को जरूरी तथा उपयुक्त सूचनाएं मुहैया कराने के साधन होने चाहिए|

5- पूंजी को उत्पादक रूप से ही आवंटित करना चाहिए। यानी कि प्रोडक्टिविटी करने वाले जरूरतमंद बिजनेसमैन को ही धन उपलब्ध करवाना चाहिए| 

भारतीय पूंजी बाजार में संस्कृति का प्रभाव (Impact of culture in Indian capital market)

भारतीय पूंजी बाजार में संस्कृति का बहुत अत्यधिक प्रभाव पड़ता है|  हमारे देश की सोच धन के मामले में सबसे अलग है|  हम लोगों को बचपन से ही  बचत करना सिखाया जाता है|  हमारे माता-पिता सदैव यह कहते हैं कि “बुरे समय के लिए पैसा जोड़कर रखो|”

 आज के समय में यही संस्कार हमारे भारतीय  पूंजी बाजार में विशेष भूमिका अदा करते हैं| भारतीय लोगों की यही सोच के चलते, भारत में लगातार वृद्धि हो रही है| 

Capital Markets important in Hindi: “भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से तरक्की कर रही है|  इसके पीछे मुख्य योगदान कैपिटल मार्केट का ही है|  इससे भारत में रोजगार बढ़ता है|  भारत के लोगों को व्यवसाय करने के लिए धन की उपलब्धता होती है| जो लोग बचत करते हैं उनको अच्छा रिटर्न मिल जाता है|” 

भारत में कैपिटल मार्केट में छोटे निवेशकों की भूमिका (Roll of small investors in capital market in India)

भारतीय पूंजी बाजार में छोटे निवेशकों की महत्वपूर्ण भूमिका है| मध्यम वर्गीय आय वाले लोग सबसे ज्यादा भारतीय पूंजी बाजार में निवेश करते हैं| इसी कड़ी में छोटे संस्थान को भी जोड़ा जा सकता है| यह भी भारतीय पूंजी बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं| 

महामारी के बाद के परिदृश्य में पूंजी बाजार का रुझान (Capital market trends in post-pandemic scenario)

कोरोना महामारी के बाद कैपिटल मार्केट में बहुत सारी कंपनियां लिस्टेड हुई| बहुत सारी कंपनियां अपने आईपीओ लेकर आई|  ज्यादातर कंपनियों के आईपीओ ओवरसब्सक्रिप्शन हुए|  इससे पता चलता है कि पूंजी बाजार ने महामारी के बाद सकारात्मक रुख अपनाया है| 

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

Dividend क्या होता है?

फाइनेंशियल मार्केट क्या होता है?

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का इतिहास

पूंजी बाजार और मुद्रा बाजार के बीच अंतर

उम्मीद करता हूं आपको यह पोस्ट “Capital market in India” अवश्य ही पसंद आई होगी|

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धन्यवाद 

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