Loan News: लोन पर सुप्रीम कोर्ट का ऐसा फैसला आया कि बैंकिंग शेयरों में आ गया उछाल!!

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नई दिल्ली:

लोन मोरटोरियम की अवधि को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बढ़ाने से इनकार करने पर मंगलवार को बैंकिंग शेयरों में शानदार तेजी देखी गई| सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने फैसले में कहा गया कि “ किसी भी वित्तीय सहायता के लिए सरकार या आरबीआई को कोई आदेश नहीं दिया जा सकता” सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 2.9% का उछाल देखा गया|

वहीं निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ़्टी बैंक दोनों इंडेक्स 1.7%  चढ़कर बंद हुए| उदय कोटक महिंद्रा बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं| इनके द्वारा सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया गया है| उदय कोटक में एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि “ यह एक कमर्शियल फैसला था जिसे बैंकों के ऊपर ही छोड़ देना चाहिए|”  ध्यान देने वाली बात यह है कि रियल स्टेट और पावर सेक्टर के विभिन्न संगठनों ने कोरोना वायरस को देखते हुए किस्त अदायगी में छूट की अवधि और अन्य राहत उपायों को बढ़ाने की मांग भी की थी|

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि “कर्ज दाताओं से 6 महीने की मोरटोरियम अवधि के लिए ब्याज नहीं वसूला जाना चाहिए| यदि पहले ही कोई राशि ली जा चुकी है तो उसे कर्ज धारकों को वापस किया जाएगा या अगली किस्त में उसे जोड़ दिया जाए|

विश्लेषकों  का मानना है कि इस फैसले के द्वारा बैंकों की कमाई पर शॉर्ट-टर्म असर पड़ सकता है| हालांकि लंबे समय के लिए बैंकों के ग्रोथ का आउटलुक अभी भी बरकरार है|

बैंकों पर अतिरिक्त कितना भार पड़ेगा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह साफ कर दिया कि वह NPA (A non performing asset) के मामलों में दखल नहीं देगा लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को सभी कर्ज धारकों को ब्याज पर ब्याज में छूट का लाभ देने का आदेश दिया| इस आदेश से बैंकों के बैड लोन में 1.3 लाख करोड़ की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है| 

इकरा के वाइस प्रेसिडेंट अनिल गुप्ता ने कहा कि “ इस अवधि के लिए बैंकों पर चक्रवृद्धि ब्याज  13500 से 14000 करोड़ रुपए के अनुमानित है| 

इससे पहले सरकार द्वारा जिन लोगों के लोन 2 करोड़ रुपए से कम थे उन्हें ब्याज पर ब्याज की रकम लौटा दी गई थी|  इस रकम की लागत 6500  करोड़ रुपए रहने का अनुमान था| अब सभी को छूट का लाभ देने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त लगभग 7000 करोड़ रुपए का असर पड़ सकता है| 

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा 

supreme court loan moratorium judgment
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के पक्ष को समझते हुए कहा कि कोरोना महामारी से सिर्फ कंपनियों को ही नहीं, सरकार को भी भारी नुकसान हुआ है|

जस्टिस शाह ने कहा की “हमने राहत पर स्वतंत्र तौर से विचार किया है, लेकिन पूरी तरह से ब्याज को माफ करना संभव नहीं हो सकता क्योंकि बैंकों को भी तो आखिर पेंशनर्स तथा धारकों को ब्याज देना होता है!” 

केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दिया गया है| इस हलफनामे में साफ तौर पर कहा गया है कि सरकार द्वारा विभिन्न सेक्टर्स को पर्याप्त राहत पैकेज दिया गया है| 

केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि “जनहित याचिका के माध्यम से विशेष  क्षेत्र के लिए राहत की मांग नहीं की जा सकती|”

केंद्र सरकार के हलफनामे के मुताबिक 2 करोड़ तक के लोन के लिए ब्याज पर ब्याज (चक्रवृद्धि ब्याज) माफ करने के अलावा कोई और राहत, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र के लिए हानिकारक हो सकती है|

मामला क्या है? 

यह वही मामला है जिसमें सरकार ने बैंक कर्जदारों को कोरोना काल में EMI भुगतान पर बड़ी राहत दी थी|  दरअसल, पिछले साल भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्ज देने वाली कंपनियों को ऋण स्थगन की बात कही थी, इसे 31 अगस्त तक बढ़ाया भी गया था|

साल 2020 में मार्च से अगस्त के दौरान मोरेटोरियम योजना का लाभ बड़ी संख्या में लोगों ने लिया था लेकिन उनकी शिकायत थी कि अब बैंक बकाया राशि पर ब्याज के ऊपर ब्याज लगा रहे हैं| यहीं से यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा| कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले पर सवाल पूछा था कि स्थगित EMI पर अतिरिक्त ब्याज क्यों लिया जा रहा है?  तो सरकार ने अपने जवाब में कहा कि 2 करोड़ रुपए तक के कर्ज के लिए बकाया इंस्टॉलमेंटस के लिए ब्याज पर ब्याज नहीं लगाया जाएगा| 

सरकार के इस प्रस्ताव में 2 करोड़ रुपए तक के एजुकेशन लोन, MSME लोन, होम लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया, कार-टू व्हीलर लोन तथा पर्सनल लोन शामिल है| इस ब्याज माफी का पूरा खर्च सरकार ने उठाया था और करीब 7 हजार करोड़ रुपए खर्च भी किए थे| 

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 मैं नवीन कुमार इजाजत चाहता हूं अगली पोस्ट में फिर मिलूंगा तब तक के लिए नमस्कार! 

धन्यवाद

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