आउटसोर्सिंग क्या होती है?, बीपीओ क्या होता है | BPO Full Form and Meaning

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दोस्तों, इस पोस्ट में हम जानेंगे कि BPO Full Form क्या होता है?, आउटसोर्सिंग क्या होती है? Outsourcing hindi meaning क्या होता है? इत्यादि विषयों को  जानेंगे|

BPO full form

BPO full form: “Business Process Outsourcing”

BPO full form in Hindi: “बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग”

अब! आप BPO full form तो जान ही गए हैं| BPO Full Form जानने के बाद आगे बात करते हैं! कि बीपीओ होता क्या है?

Business Process Outsourcing (BPO) क्या होता है?

 मुख्यतः आउटसोर्सिंग में दो प्रकार होते हैं:  

1- BPO (Business Process Outsourcing) 

2- KPO (Knowledge Process Outsourcing)

इसमें आप अपने किसी बिजनेस का कोई कार्य किसी बाहरी संस्थान से पूरा करवाते हो| 

ऐसा क्यों किया जाता है? 

जब हम अपना बिजनेस सामान्य रूप से चला रहे होते हैं| उसमें किसी खास एरिया पर यदि हम अपना पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं|

ऐसा भी हो सकता है कि हम उस एरिया के विषय में ज्यादा ना जानते हो! 

ऐसी स्थिति में सबसे अच्छा यह रहता है कि उस काम को किसी बाहरी संस्थान से करवा लिया जाए| 

1-जो व्यक्ति जिस कार्य में ज्यादा निपुण होता है वह उस कार्य को बहुत अच्छी प्रकार कर सकता है| 

2- कंपनी अपना समय किन्हीं अन्य विषयों पर देना चाहती है| 

3- जब कंपनी अपने ग्राहकों को  24 घंटे x 7 दिन सुविधा देना चाहती हो| 

यही बाहर वाले व्यक्ति यह संस्थान को कार्य देना Business Process Outsourcing (BPO) होता है| 

Business Process Outsourcing (BPO) का उदाहरण

इस उदाहरण के माध्यम से आप बीपीओ के बारे में अच्छी तरह समझ जाएंगे!

आप लोगों ने कॉल सेंटर के बारे में तो सुना होगा| कॉल सेंटर किसी न किसी संस्थान से जुड़े हुए होते हैं|

इन कॉल सेंटर के माध्यम से कंपनियां अक्सर अपने उपभोक्ताओं की शिकायतों को सुनती हैं और उनका निवारण करती हैं| 

जैसे:  

1- कोई गद्दे बनाने वाली कंपनी अपने कस्टमर्स की शिकायत को सुनने के लिए अक्सर कॉल सेंटर की ही मदद लेती है|

2- आपकी मोबाइल कंपनियां भी कॉल सेंटर्स के द्वारा ही आपकी शिकायतों को सुनती हैं| 

बीपीओ इंडस्ट्री का लगभग 72 परसेंट रेवेन्यू कॉल सेंटर के माध्यम से ही होता है| 

इस डाटा के माध्यम से आप समझ गए होंगे कि बीपीओ इंडस्ट्री कितनी बड़ी है और इसका क्या महत्व है?

इसका मतलब यह नहीं है कि बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग तथा कॉल सेंटर एक ही चीज है| 

कहने का मतलब यह है कि “बीपीओ के माध्यम से ही कॉल सेंटर्स का उदय होता है|” 

आउटसोर्सिंग का हिंदी में क्या अर्थ होता है?

आइए! सबसे पहले आउटसोर्सिंग का हिंदी मीनिंग जानते हैं!

Outsourcing meaning in Hindi: “बाहरी स्त्रोत, बहि:स्रोतन, बाहरी ठेका देना, किसी बाहरी स्त्रोत को काम देना”

आउटसोर्सिंग क्या होती है?

आउटसोर्सिंग को अच्छी तरह समझने के लिए हमें सबसे पहले इसका बेसिक कंसेप्ट समझ लेना चाहिए|

इसके माध्यम से यह टॉपिक हमें अच्छी तरह क्लियर हो जाएगा|

तो चलिए दोस्तों, शुरू करते हैं!

एक गद्दे बनाने वाली कंपनी है| 

इस कंपनी की गद्दे बनाने के बारे में तो बहुत अच्छी नॉलेज है परंतु इनकी पैकिंग का मेटेरियल बनाने में यह कंपनी निपुण नहीं है|

अब! होता यह है कि गद्दों की  क्वालिटी बहुत अच्छी होते हुए भी उनकी भारी पैकिंग की वजह से वह आकर्षक नहीं लगते|

अब भैया!  आपने यह बात तो सुनी होगी कि

“ जो दिखता है वही बिकता है”

यानी कि गद्दा देखने में पैकिंग की वजह से अच्छा नहीं लगता| 

इस कंपनी की तरक्की तो हो रही है परंतु यह तरक्की बहुत धीरे-धीरे हो रही है| 

देखिए!  क्योंकि यह कंपनी क्वालिटी बहुत अच्छी बनाती है इसलिए इसका कस्टमर तो टूटेगा नहीं परंतु इसकी सेल बहुत तेजी के साथ नहीं बढ़ेगी|

आपने अक्सर मार्केट में ऐसी किताबें भी देखी होंगी जिनकी सेल बहुत ज्यादा है परंतु  इसका मतलब यह नहीं कि वह लेखक अन्य लेखकों की तुलना में सर्वश्रेष्ठ है| 

एक बहुत ही चर्चित किताब है रिच डैड पुअर डैड |

यह किताब वास्तव में बहुत अच्छी है एक बार यह किताब पढ़ लेने के बाद आपके जीवन जीने का नजरिया ही बदल जाएगा| परंतु अच्छी होने के साथ-साथ इसकी मार्केटिंग भी जबरदस्त है|

खैर! आगे बढ़ते हैं|

अब एक दिन! 

इस गद्दे बनाने वाली कंपनी के मालिक को एक ऐसा बंदा मिलता है जिसका मुख्य काम पैकिंग करना है|  बातों ही बातों में बात निकल पड़ती है| 

गद्दे  बनाने वाली कंपनी का मालिक कहता है कि “क्या आप मेरे गद्दों पर पैकिंग कर के दे सकते हैं? इससे आपको भी प्रॉफिट होगा और मुझको भी|”

पैकिंग करने वाला बंदा बोलता है  “क्यों नहीं भाई निश्चित तौर पर करूंगा,  आखिर इसमें मेरा भी तो फायदा है|” 

अब इन दोनों की अलग-अलग कार्यों में निपुणता है| जिस को अच्छी तरह इस्तेमाल करने पर  निश्चित तौर पर बहुत अच्छा रिजल्ट मिलेगा| 

यानी कि गद्दे बनाने वाली कंपनी  ने अपना non-core area पैकिंग करने वाले को दे दिया| 

Non-core area का अर्थ: वह कार्य जो आपका मुख्य कार्य नहीं है|

यानी कि गद्दे बनाने वाली कंपनी का मुख्य कारण गद्दे बनाना था ना कि पैकिंग करना| 

Outsourcing definition in Hindi: जब हमारे द्वारा अपने बिजनेस के किसी non-core area को किसी और को करने के लिए ट्रांसफर कर देते हैं तो इसे ही आउटसोर्सिंग कहा जाता है| 

आउटसोर्सिंग के फायदे (Outsourcing benefits)

यदि किसी विषय में  आपको निपुणता नहीं है तो निश्चित तौर पर ही उसके अभाव में आपको नुकसान लगना तय है| 

किसी अन्य व्यक्ति संस्थान में यदि है निपुणता है तो आप इसका फायदा आउटसोर्सिंग के द्वारा उठा सकते हैं| 

  • दक्षता तथा अपव्यय (Efficiency and Wastage)

इससे आपका समय वेस्ट होने से बचेगा तथा आप अपने मुख्य काम में और ज्यादा निपुण होते चले जाओगे| जैसे कि ऊपर गद्दे की पैकिंग बनाने वाले एग्जांपल में मैंने बताया था| गद्दे की पैकिंग करते समय नुकसान बहुत होता था| 

इसमें समय भी अधिक लगता था तथा दक्षता ना होने के कारण पैकिंग करने वाले सामान की wastage भी बहुत ज्यादा हो जाती थी| 

  • मुख्य एरिया पर ध्यान केंद्रित (Focus core)

कंपनी का सारा फोकस कोर एरिया पर चला जाएगा|

पैकिंग का कार्य दूसरी कंपनी को देने पर कंपनी का सारा ध्यान अन्य विषयों या अन्य सुधारों पर चला जाएगा| विशेषज्ञता ज्ञान (Expertise knowledge)

आप किसी की नॉलेज का या आपकी किसी नॉलेज का कोई फायदा उठा सकता है|

जब दोनों कंपनियां अपनी अपनी दक्षता का भरपूर इस्तेमाल  करेंगी तो दोनों कंपनियां फायदे की स्थिति में चली जाएंगी|

आउटसोर्सिंग में हमने क्या सीखा?

हमने सीखा की जब हम किसी कार्य में करने में निपुण नहीं है और वह कार्य हम किसी और को करने के लिए दे देते हैं तो मैं अपनी दक्षता (Efficiency) अपने निपुणता वाले कार्य में दिखाता है तथा हम अपनी दक्षता अपने निपुणता वाले कार्य में दिखाते हैं| 

आउटसोर्सिंग की जरूरत क्यों पड़ी? (Need of outsourcing) 

ध्यान केंद्रित (focus of attention)

ऊपर दिए उदाहरण में आपने पढ़ा कि एक गद्दे बनाने वाली कंपनी ने एक पैकिंग करने वाली कंपनी को गद्दे पैकिंग करने का काम दिया| 

इससे कंपनी का सारा ध्यान उसके मेन एरिया पर चला गया| इससे कंपनी अपने मुख्य एरिया पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर पाएगी|

एक ही एरिया पर फोकस करने पर वह कंपनी है उस कार्य में पहले गुड होगी फिर बैटर होगी और फिर बेस्ट हो जाएगी! 

अब यदि यह कंपनी पैकिंग में लगी रहती तो जिस काम में उसे निपुणता है वह उस पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाती|

यानी जो व्यक्ति जिस कार्य में निपुण हैं आपको उससे वही कार्य करवाना चाहिए|

जैसे कि “सचिन तेंदुलकर से आप गाना गवाने लगें!” 

लागत में कमी (cost reduction)

ऊपर वाले उदाहरण में पढ़ा है कि कंपनी को पैकिंग में निपुणता हासिल नहीं है|

अब क्योंकि कंपनी को पैकिंग ठीक प्रकार से नहीं करनी आती इसलिए  उसे इसमें समय बहुत लगता है तथा इसके लिए उसमें ज्यादा वर्कर की भी जरूरत पड़ती है|  इसके साथ ही उसका नुकसान भी काफी लगता है|

इन सब विषयों को जोड़े हैं तो कुल मिलाकर उस प्रोडक्ट की लागत में वृद्धि होती है|

आउटसोर्सिंग के द्वारा जब कंपनी यह काम किसी और को दे देती है तो निश्चित ही उसकी लागत में कमी आनी तय है| 

यानी कि इससे  वेस्टेज तो होती नहीं साथ में आर्थिक वृद्धि भी होती है|

उत्कृष्टता के लिए खोज (Quest for excellence)

गद्दे बनाने वाली कंपनी किस चीज में अच्छी थी?  जवाब है गद्दे बनाने में|

 पैकिंग करने वाली कंपनी किस चीज में अच्छी थी?  जवाब है पैकिंग करने में| 

यानी कि आपने अपना मनपसंद काम करना निश्चित किया तथा पैकिंग करने वाले ने अपना मनपसंद काम करना निश्चित किया| 

इसके द्वारा दोनों ही कंपनियां अपने-अपने क्षेत्र में नई खोज को भी अंजाम दे सकती हैं| साथ ही अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ शिखर पर भी पहुंच  सकती हैं| 

गठबंधन के माध्यम से विकास (Growth through alliance)

इसके अनुसार गद्दे बनाने वाली कंपनी जब तक पैकिंग भी स्वयं कर रही थी वह अपना ही फायदा कर रही थी|

अब क्योंकि उसने पैकिंग के लिए किसी के साथ गठबंधन कर लिया है तो अब! दोनों ही कंपनियों का विकास होगा| 

आर्थिक विकास के लिए प्रोत्साहन (Fillip to economic development)

इसके द्वारा जब एक कंपनी ने पैकिंग का काम किसी दूसरी कंपनी को दे दिया तो दूसरी कंपनी के पास भी रोजगार बढ़ गया| 

अब! वह कंपनी अपने काम को और भी अच्छी तरह करने के लिए नई-नई अत्याधुनिक मशीनें भी  खरीदेगी|

आपको इन मशीनों में निवेश नहीं करना पड़ेगा|  इससे आपको वित्तीय लाभ पहुंचेगा|

जब वह मशीनें खरीदेगी तो मशीन बनाने वाली कंपनी को रोजगार मिलेगा|

अब!  हम कस्टमर केयर वाले उदाहरण के माध्यम से भी कुछ समझने की कोशिश करते हैं|  

ऐमेज़ॉन जैसी विशाल कंपनियां जब भारत में अपना बिजनेस चलाती है तो उन्हें यहां के ग्राहकों से संबंध स्थापित करने होते हैं| 

इसके लिए कंपनियां भारत की विभिन्न भाषाओं में कॉल सेंटर्स को हायर करती हैं| इससे यहां पर रोजगार में बढ़ोतरी होती है| 

Note: अब कोर एरिया में भी आउटसोर्सिंग के विकल्पों को तलाशा जा रहा है|

भविष्य में आउटसोर्सिंग का महत्व बहुत बढ़ने वाला है| क्योंकि हर कंपनी निपुण व्यक्तियों या कंपनियों से कार्य करवाने की मंशा रखेगी| 

आउटसोर्सिंग के नुकसान (Outsourcing Disadvantages)

ऐसा होना तो मुमकिन नहीं है कि किसी चीज के फायदे और नुकसान ना हो!  हां यह हो सकता है कि फायदे के मुकाबले नुकसान बहुत कम हो|

चलिए! जानते हैं इनके बारे में|

गोपनीयता (confidentiality)

जब हम किसी अन्य आउटसोर्सिंग एजेंसी से गठबंधन करते हैं तो हमें उसे बहुत सी जानकारियां देनी होती हैं| अब!  यह जानकारियां बहुत गोपनीय भी हो सकती हैं!  जिनको कि हम नहीं चाहते कि वह हमारे प्रतियोगी (competitor) को पता चलें|

आज हमारे संबंध उस आउटसोर्सिंग एजेंसी से अच्छे हैं ऐसा हो सकता है कि कल को यह संबंध इतने अच्छे ना रहे|

उस समय पर यह आउटसोर्स एजेंसी हमारी यह गोपनीय जानकारी हमारे प्रतियोगी को दे सकती है| 

नैतिक चिंताएं (ethical concerns)

सबसे पहले तो हमें जान लेना चाहिए कि जब भी कोई कंपनी आउटसोर्सिंग करती है तो वह विकासशील देशों को ढूंढती है| 

इसमें बालश्रम जैसे गंभीर मुद्दों को प्रेरणा मिलती है|

साथ ही साथ इसके द्वारा समान पारिश्रमिक भी नहीं मिल पाता| यही हमारे नैतिक चिंताओं को बढ़ाती है| 

शोषण करने वाली श्रमिकशाला (Sweat Shopping)

सामान्यतः हम अपनी आउटसोर्सिंग का कार्य विकासशील देशों की एजेंसियों से करवाते हैं|

ऐसी जगहों से काम करवाने का मुख्य मकसद कम से कम दाम पर वर्कर्स का मिलना है| 

कंपनियां उसी व्यक्ति से वह कार्य करवाती हैं जिसमें वह निपुण हो|

अब जिस कारण में व्यक्ति एजेंसी पहले से ही निपुण है उस कार्य में उसे नया कुछ सीखने को नहीं मिलेगा|

जब वह नए कार्यों को नहीं करेगा तो उसकी स्किल डेवलपमेंट भी नहीं इंप्रूव होगी|

आउटसोर्सिंग में कोई ट्रेनिंग तो दी नहीं जाती| वहां तो केवल आपके किसी कार्य की निपुणता का फायदा उठाया जाता है| 

स्किल इंप्रूवमेंट हमेशा कुछ नया कार्य सीखने पर ही होती है| 

इसमें कंपनी का एक ही मकसद रहता है कि कम से कम दाम पर ज्यादा से ज्यादा कार्य करवाया जा सके|

इसकी वजह से इन वर्कर्स की ना तो कोई स्किल डेवलपमेंट होती है,  ना ही अन्य कुछ बढ़ोतरी होती है| 

नाराज़गी (resentment)

जब लोग आउटसोर्सिंग के लिए विकासशील देशों का रुख करते हैं तब उनके खुद के देश के लोग इस बात से बहुत नाराज हो जाते हैं|

स्वाभाविक सी बात है कि यदि आपके अपने देश में लोग मौजूद हैं तो सबसे पहले आप उनको रोजगार दीजिए परंतु ऐसा केवल किताबों में लिखा होता है| 

असल जिंदगी में सबको मुनाफा चाहिए| 

इस नाराजगी की वजह  से ही मैंने इसको आउटसोर्सिंग के नुकसान के कॉलम में लिखा है| 

साथ ही यह भी अवश्य देखें:

KPO क्या होता है?

KPO तथा BPO में क्या अंतर होता है?

एग्रीगेटर बिजनेस मॉडल क्या होता है?

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का इतिहास

Business Process Outsourcing (BPO) पोस्ट के माध्यम से आपने क्या सीखा? 

इस पोस्ट के माध्यम से आपने Business Process Outsourcing (BPO) क्या होता है?, आउटसोर्सिंग क्या होती है?, outsourcing meaning in Hindi, आउटसोर्सिंग की जरूरत क्यों पड़ती है?, आउटसोर्सिंग के क्या फायदे तथा नुकसान है- इत्यादि के विषय में जाना|

उम्मीद करता हूं आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी| 

मैं अगली पोस्ट में फिर मिलूंगा तब तक के लिए नमस्कार!

धन्यवाद

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