Bill of exchange क्या होता है? | BOE की परिभाषा, प्रकार तथा आवश्यक तत्व

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इस पोस्ट के माध्यम से आपको Bill of exchange के बारें में सारी जानकारी मिल जाएगी|

जैसे की :- बिल ऑफ एक्सचेंज किस प्रकार कार्य करता है?, बिल ऑफ एक्सचेंज कितने प्रकार के होते हैं?, किस स्थिति में बिल ऑफ एक्सचेंज का इस्तेमाल किया जाता है?, बिल ऑफ एक्सचेंज के आवश्यक तत्व कौन से हैं?, बिल ऑफ एक्सचेंज की परिभाषा क्या है? तथा हमें बिल ऑफ एक्सचेंज ग्रहण करते समय यह जारी करते समय किस किस चीज का ध्यान रखना चाहिए? 

तो चलिए, दोस्तों!  शुरू करते हैं|

Bill of exchange एक financially instrument होता है जो सामान्यतः इंटरनेशनल व्यापार के साथ-साथ घरेलू व्यापार में भी इस्तेमाल होता है| 

जिस प्रकार लेटर ऑफ क्रेडिट और बैंक गारंटी बिज़नेस में इस्तेमाल होता है| इन सारे डाक्यूमेंट्स का उद्देश्य एकदम अलग होता है तथा इनके काम करने का तरीका भी भिन्न होता है|

बिल ऑफ एक्सचेंज क्या है? (What is bill of exchange?)

Bill of exchange आयात निर्यात व्यापार के साथ-साथ घरेलू व्यापार में भी इस्तेमाल किया जाता है| 

बिल ऑफ एक्सचेंज में Buyer को Debtor/Drawee  कहते हैं जबकि Seller को Creditor/Maker/Drawer कहा जाता है| 

मान लो, Buyer कुछ सामान खरीदना चाहता है परंतु उसके पास तुरंत देने के लिए पैसे नहीं हैं| उसकी पेमेंट थोड़े ही टाइम में आने वाली है| 

अब वह Seller से माल उधार देने की रिक्वेस्ट करता है|

Seller उसे कहता है कि वह “उसे माल बिल ऑफ एक्सचेंज पर उधार देगा|” 

अब Seller एक Bill of exchange  जारी करता है तथा Buyer इसे एक्सेप्ट करता है|

इस बिल ऑफ एक्सचेंज में पैसे देने का समय/ तारीख, कुल राशि, नाम तथा पते इत्यादि लिखे होंगे|

अब इसे Buyer से हस्ताक्षर करा लिया जाएगा| इस पोस्ट में आगे डिटेल में मैं यह सारी चीजें मेंशन कर दूंगा| 

बिल ऑफ एक्सचेंज की परिभाषा 

इसका वर्णन 1881 के सेक्शन 5 में दिया हुआ है| 

Bill of exchange एक लिखित दस्तावेज होता है| इसमें Seller द्वारा Buyer को एक निश्चित लिखी हुई राशि देने के लिए आदेश दिया जाता है| इसमें एक निश्चित राशि के साथ एक निश्चित तारीख लिखी होनी चाहिए| इसमें Buyer तथा Seller के हस्ताक्षर भी अनिवार्य है|

इसमें  बेनेफिशरी का नाम लिखा हुआ होना चाहिए वह कोई थर्ड पर्सन भी हो सकता है| यदि इसमें यह बात लिखी होगी कि जिसके पास भी यह बिल ऑफ एक्सचेंज होगा उसे पेमेंट कर दी जाए तो जिसके पास भी है बिल ऑफ एक्सचेंज होगा उसे पैसा मिल जाएगा|

बिल ऑफ एक्सचेंज में कौन सी पार्टियाँ सम्मिलित होती हैं?

Bill of exchange में निम्न पार्टी में सम्मिलित होती हैं| 

  • उधार देने वाला– Maker/Drawer/Creditor/Payee
  • Endorsee– पेमेंट पाने वाला Seller/Drawer|  यह Seller भी हो सकता है तथा को तीसरा नॉमिनेटेड व्यक्ति भी हो सकता है
  • उधार लेने वाला– Payer/Debtor/Acceptor/Drawee

Bill of exchange Types

  1. Demand Bill 

इसमें Seller जब भी पेमेंट की डिमांड करेगा वह Buyer को करनी होगी 

  1. Term Bill/Usance Bill

इसमें एक तय तारीख पर बिल का भुगतान करना होता है| 

नोट:- यदि बिल ऑफ एक्सचेंज में किसी थर्ड पार्टी को नॉमिनेटेड किया गया है और Buyer पेमेंट देने में विफल रहता है| 

इस स्थिति में नॉमिनेटेड व्यक्ति Buyer तथा Seller दोनों पर केस फाइल कर सकता है| 

Bill of exchange sample format

बिल ऑफ एक्सचेंज के आवश्यक तत्व 

  • लिखित

 बिल ऑफ एक्सचेंज लिखित में होना चाहिए| मौखिक समझौता नहीं माना जाता है| 

  • बिना शर्त आदेश

इसमें पेमेंट के लिए कोई भी शर्त नहीं लिखी होनी चाहिए|

जैसे कि:- मेरी पेमेंट वहां से आ जाएगी तब मैं यह पेमेंट करूंगा इत्यादि| 

  • उधार देने वाले की जानकारी 

बिल ऑफ एक्सचेंज में उधार देने वाले व्यक्ति की जानकारी होनी चाहिए|

  • देय राशि

बिल ऑफ एक्सचेंज में हमेशा देय राशि जरूर लिखी होनी चाहिए| 

  • उधार लेने वाले की जानकारी 

उधार लेने वाले का सही नाम और सही जानकारी होनी चाहिए|

  • जारी करने की तारीख और स्थान 

बिल ऑफ एक्सचेंज को जारी करने की तारीख तथा जारी करने का स्थान भी जरूर लिखा होना चाहिए|

  • परिपक्वता तिथि (Maturity Date)

टर्म बिल के अंदर मैच्योरिटी डेट लिखनी आवश्यक है जबकि Demand Bill के लिए ऐसा नहीं है|

  • स्टाम्प – जितनी कानून द्वारा आवश्यक है|

इसके लिए आप  या तो रिवेन्यू स्टैंप लगा सकते हैं या फिर इतने रुपए के स्टांप पेपर पर इसे बनवा सकते हैं| 

  • उधार देने वाले के हस्ताक्षर

बिल ऑफ एक्सचेंज पर उधार देने वाले के हस्ताक्षर अवश्य होने चाहिए| 

  • उधार लेने वाले के हस्ताक्षर

बिल ऑफ एक्सचेंज पर उधार लेने वाले के हस्ताक्षर अवश्य होने चाहिए| 

  • इसमें ब्याज नहीं लिया जाता| यह ठीक उसी प्रकार कार्य करता है जैसे कोई पोस्ट डेटेड चेक हो| परंतु यदि निश्चित तारीख पर पेमेंट का भुगतान नहीं किया जाता है तो उस तारीख के बाद जितने भी दिन लेट होते हैं उतने दिन पर ब्याज लिया जा सकता है| 
  • बिल ऑफ एक्सचेंज कितने भी पार्टियों को आगे स्थानांतरित किया जा सकता है परंतु यह उसकी मैच्योरिटी की डेट से पहले ही हो जाना चाहिए| 

बिल ऑफ एक्सचेंज के कानूनी पहलू 

  1. Bill of exchange में non-payment या डिस ओनर के केस में यदि मैच्योरिटी की तारीख मेंशन है तो उस तारीख से लेकर 3 साल के अंदर तक आप केस फाइल कर सकते हैं| 
  2. यदि बिल ऑफ एक्सचेंज ऑन डिमांड है तो जिस दिन पेमेंट की डिमांड की जाती है उस दिन से लेकर 3 साल के अंदर तक आपके केस फाइल कर सकते हैं|

FAQs: Bill Of Exchange

बिल ऑफ एक्सचेंज क्या होता है?

बिल ऑफ एक्सचेंज एक प्रकार का फ़ाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट होता है जो कि इंटरनेशनल व्यापार के साथ-साथ घरेलू व्यापार में भी इस्तेमाल किया जाता है|

बिल ऑफ एक्सचेंज में उधार लेने वाले को क्या कहते हैं?

बिल ऑफ एक्सचेंज में उधार लेने वाले को Buyer/Debtor/Drawee कह सकते हैं|

बिल ऑफ एक्सचेंज में उधार देने वाले को क्या कहते हैं?

बिल ऑफ एक्सचेंज में उधार देने वाले को Seller/Creditor/Maker/Drawer कह सकते हैं|

बिल ऑफ एक्सचेंज में पेमेंट किस किसको हो सकती है?

बिल ऑफ एक्सचेंज में जिसका नाम होगा उसको पेमेंट होती है|  यदि ऐसा लिखा हुआ है कि जिसके पास ए बिल ऑफ एक्सचेंज पाया जाएगा उसको पेमेंट हो जाएगी तो उस स्थिति में जिसके पास भी बिल ऑफ एक्सचेंज होगा उसको पेमेंट मिल जाएगी|

बिल ऑफ एक्सचेंज में कितनी पार्टियां सम्मिलित होती हैं?

उधार देने वाला, Endorsee तथा उधार लेने वाला

बिल ऑफ एक्सचेंज कितने प्रकार का होता है?

ऑन डिमांड बिल,  usance बिल ऑफ एक्सचेंज, टर्म बिल

बिल ऑफ एक्सचेंज की जरूरत क्यों होती है?

इसके द्वारा बिजनेस में पेमेंट रिस्क को कम किया जाता है| इसका इस्तेमाल करेंसी फ्लकचुएशन केस में भी किया जाता है| इसके द्वारा एक पेमेंट फिक्स कर ली जाती है जिससे कि करेंसी के उतार-चढ़ाव होने पर भी एक निश्चित राशि मिल जाती है|

बिल ऑफ एक्सचेंज तथा चेक में क्या अंतर है?

चेक की वैलिडिटी 3 मंथ होती है जबकि बिल ऑफ एक्सचेंज की कोई वैलिडिटी नहीं होती| चेक को भुगतान के लिए प्रस्तुत करने से पहले पार्टियों से किसी भी अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है जबकि विनिमय के बिल को भुगतान के लिए Drawee से अप्रूवल की आवश्यकता होती है।

साथ ही यह अवश्य देखें:

लैटर ऑफ क्रेडिट क्या होता है? तथा इसके फायदे क्या होते हैं?

बिल डिस्काउंटिंग क्या होती है? इसके नियम, शर्तें क्या होती हैं?

बैंक गारंटी क्या होती है? बहुत ही आसान तरीके से समझें

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प्यारे दोस्तों, मैं नवीन कुमार एक बिज़नेस ट्रैनर हूँ| अपने इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपको - आयात-निर्यात व्यवसाय (Export-Import Business), व्यापार कानून (Business Laws), बिज़नेस कैसे शुरु करना है?(How to start a business), Business digital marketing, व्यापारिक सहायक उपकरण (Business accessories), Offline Marketing, Business strategy, के बारें में बताऊँगा|| साथ ही साथ मैं आपको Business Motivation भी दूंगा| मेरा सबसे पसंदीदा टॉपिक है- “ग्राहक को कैसे संतुष्ट करें?-How to convince a buyer?" मेरी तमन्ना है की कोई भी बेरोज़गार न रहे!! मेरे पास जो कुछ भी ज्ञान है वह सब मैं आपको बता दूंगा परंतु उसको ग्रहण करना केवल आपके हाथों में है| मेरी ईश्वर से प्रार्थना है की आप सब मित्र खूब तरक्की करें! धन्यवाद !!