Bank Guarantee क्या होती है? बहुत ही आसान तरीके से समझें!!

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What is bank guarantee?

Bank Guarantee एक तरह का non fund based credit facility है| इसे अच्छी तरह समझने के लिए मैं आपको एक उदाहरण देता हूं| 

 मान लीजिए आप एक Buyer हैं तथा आप कुछ सामान खरीदना चाहते हैं|

चाहे वह इंडिया से खरीदें या आप इंपोर्ट करना चाहते हैं|

इसके लिए आपके पास तुरंत पैसे ना हो और ऐसा हो सकता है आपकी पेमेंट कहीं से आने वाली हो| इस स्थिति में seller को आप पर तुरंत भरोसा नहीं होता|

ऐसे केस में बैंक गारंटी का सहारा लिया जाता है| इस स्थिति में बैंक involve हो जाता है| बैंक Seller को उसकी पेमेंट की गारंटी देता है| इसे ही Bank Guarantee कहते हैं|

Bank Guarantee केवल किसी सामान को खरीदने बेचने में ही इस्तेमाल नहीं होती बल्कि इसे सरकारी टेंडरों में, प्राइवेट टेंडरों में भी Bank Guarantee का इस्तेमाल किया जाता है| 

बैंक गारंटी समझें बिल्कुल आसान तरीके से |

उदाहरण:-

 मान लीजिए आप 20 लाख रुपए का गुड्स खरीदना चाहते हैं| इसके लिए आपके पास तुरंत पैसे नहीं है| ऐसी स्थिति में आपका seller आप पर विश्वास नहीं करेगा|

इस केस में दो issue खड़े हो जाते हैं, पहला विश्वास तथा दूसरा उधार| इन दोनों समस्याओं का समाधान Bank Guarantee द्वारा होता है|

बैंक गारंटी की परिभाषा

अब यह समझने की कोशिश करते हैं की बैंक किस प्रकार गारंटी देता है? 

Bank Guarantee में Bank Seller को यह वादा करता है कि यदि Buyer द्वारा तय की हुई डील में पेमेंट नहीं की जाती तो बैंक द्वारा उसका भुगतान किया जाएगा| 

Bank Guarantee में वास्तविक रूप में कोई ट्रांजेक्शन नहीं होती बल्कि यदि Buyer अपनी पेमेंट देने में विफल रहता है तब बैंक द्वारा पेमेंट दी जाती है| 

LC तथा बैंक गारंटी में क्या अंतर होता है?

Letter of credit तथा Bank guarantee में यह डिफरेंस होता है कि LC में  पेमेंट ट्रांजैक्शन पहले हो जाती है परंतु Bank gurantee में वास्तविक ट्रांजैक्शन जब होती है जब Buyer पेमेंट देने में विफल हो जाता है| 

उदाहरण द्वारा आप letter of credit and bank guarantee का Difference आसानी से समझ सकते हैं|

मान लो आपका कोई मित्र है महेश (Applicant/Buyer)

वह अपनी पास की दूध की डेयरी से दूध खरीदना चाहता है इसका नाम है दीपक डेयरी (Beneficiary/Seller)

और एक हो गए आप (Bank)

मान लो 1 महीने के दूध का बिल 1500 रुपए होता है 

क्योंकि महेश को दीपक डेरी वाले महेश को नहीं जानते इसलिए वह उसे उधार नहीं देना चाहते परंतु दीपक डेरी वाले आप पर बहुत विश्वास करते हैं|

आपकी नजर में महेश की बहुत अच्छी वैल्यू  है परंतु आप भी उस पर इतना विश्वास नहीं करते कि आप दीपक डेरी वाले से यह कह सकें कि “यदि महेश महीने के अंत में आपके पैसे नहीं देता तो आप दे देंगे|”

फिर हुआ यूं कि महेश ने अपनी मोटरसाइकिल आपके यहां रख दी और आपसे कहा कि

“आप दीपक डेयरी वालों को आश्वासन दे दो कि मैं महीने के अंत में उनकी पेमेंट दे दूंगा,  यदि मैं उनकी पेमेंट नहीं देता तो आप मेरी मोटरसाइकिल को बेचकर अपना भुगतान कर सकते हैं| साथ ही इस काम के बदले में आपको भी 100 रुपए दूंगा| क्योंकि मेरे इस स्थिति में आने के बाद कि यदि मैं पैसे ना दे पाऊं तो उनका भुगतान आपको ही करना होगा|” 

अब आप यानी कि बैंक को एक सिक्योरिटी डिपॉजिट मिल गया और आपने दीपक डेयरी वालों से कहा कि

“महेश को 1500 रुपए का दूध उधार दे| यदि महीने के अंत में (30 तारीख को ) यह आपकी पेमेंट नहीं करता तो इन 1500 रुपए की पेमेंट मैं कर दूंगा|”

इस कंडीशन में केवल आश्वासन पर ही काम चल रहा है कहीं भी कोई पैसों का लेन देन नहीं हुआ|

यही मुख्य अंतर होता है lc तथा bank guarantee में|

आशा करता हूं ऊपर दिए उदाहरण द्वारा आप भली-भांति लैटर ऑफ क्रेडिट तथा बैंक गारंटी का अंतर समझ गए होंगे|

Bank guarantee में Buyer को Applicant/Borrower कहते हैं  तथा Seller को Beneficiary/Creditor कहते हैं| 

Bank Guarantee के आवश्यक तत्व

  • Validity मेंशन होना बहुत जरूरी है|

यह कितने भी दिनों की हो सकती है| ऊपर वाले उदाहरण में आपने पढ़ा होगा कि मैंने उसमें एक महीने को पॉइंट आउट किया  है| 

  • इसमें अमाउंट भी खुला हुआ होना चाहिए| जैसा कि मैंने उदाहरण में बताया 1500 रुपए|

यदि मैं 1500 रुपए नहीं कहता तो कि महेश उससे बहुत अधिक राशि का दूध ले सकता है|

  • यह भी क्लियर होना चाहिए कि किस काम के लिए आप गारंटी दे रहे हैं| 

ऊपर वाले उदाहरण में यदि आप पढ़ेंगे तो आप समझ जाएंगे इसमें दूध की पेमेंट देने के लिए कहा गया है|

यदि महेश कुछ और वस्तु दीपक डेयरी वालों से लेता है तो उसकी ज़िम्मेदारी मेरी नहीं होगी| 

  • एक Collateral Security  होनी चाहिए क्योंकि कोई भी बैंक फ्री में बैंक गारंटी नहीं देता| 
  • बैंक गारंटी देने के लिए FD, BANK DEPOSITS, इत्यादि के ऊपर ही गारंटी देगा|

ऊपर वाले में आप आएंगे उसमें मैंने महेश की मोटरसाइकिल अपने पास Collateral  के तौर पर रख ली थी|

  • बैंक गारंटी देने के लिए कुछ फीस भी लेगा| 

जैसा की आपने ऊपर उदाहरण में पढ़ा की मुझे यह गारंटी देने के एवज में 100 रुपए की राशि भी मिली थी|

बैंक गारंटी कितने प्रकार की होती है? (Bank guarantee types)

आइए अब समझते हैं कि बैंक गारंटी कितने प्रकार की होती है? 

Trading

  • Financial guarantee

यह एक प्रकार की नार्मल बैंक गारंटी होती है| 

इसमें बैंक कहता है कि यदि Buyer पेमेंट नहीं करेगा तो बैंक पेमेंट करेगा| 

  • Foreign bank guarantee

इसे foreign bank guarantee इसलिए कहते हैं

क्योंकि यह आयात में इस्तेमाल होती है तथा इसमें विदेशी मुद्रा में भी बैंक गारंटी दी जाती है| 

  • Deferred payment guarantee

इस केस में यदि Buyer के पास तुरंत पैसे नहीं है और वह कहता है कि “मैं 3 महीने में पेमेंट कर दूंगा” तो Seller उसे 3 महीने की बैंक गारंटी पर गुड्स दे देता है|

इसे Deferred payment guarantee

Contracts

इस प्रकार की गारंटी सरकारी टेंडरों में या प्राइवेट टेंडरों में चलती है| 

  • Bid bond or EMD (Earnest Money Deposit)

मान लीजिए सरकार का कोई 1 करोड़ रुपए की अनुमानित राशि का प्रोजेक्ट है| 

इसमें उसे बच्चों की पढ़ाई के लिए 1 करोड रुपए की स्टेशनरी चाहिए|

अब सरकार द्वारा इस टेन्डर को पाने के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है|

इस बोली लगाने में अलग-अलग कंपनियां भाग लेती हैं|

सरकार द्वारा एक राशि तय की जाती है जिसे बिड बॉन्ड या अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट कहते हैं| 

मान लीजिए वह राशि 10 लाख रुपए सरकार द्वारा रखी गई|

अब जितनी भी कंपनियां इस बोली में भाग लेंगे उन्हें यह राशि जमा करानी पड़ेगी| 

इसे Bid bond or EMD (Earnest Money Deposit)  कहते हैं| 

ऐसा इसलिए कहा जाता है कि यदि बोली में कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने वाली कंपनी यदि मुकर जाती है तो इससे प्रोजेक्ट में देरी होती है तथा उसमें जो अरेंजमेंट सरकार द्वारा किया गया था उसका नुकसान सरकार को लग जाता है| 

अपने इस नुकसान की भरपाई  सरकार Bid bond or EMD (Earnest Money Deposit) द्वारा कर सकती है| 

  • Advance payment guarantee

मान लीजिए, जीतने वाली कंपनी पर प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए एकदम से पैसे नहीं है परंतु यह पैसे कुछ समय में उसके पास आ जाएंगे| 

तब वह सरकार से कह सकते हैं कि आप मुझे प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए एडवांस पेमेंट कर दीजिए| 

वह पेमेंट 10 परसेंट है 20 परसेंट कुछ भी हो सकती है परंतु इसके लिए सरकार उससे पूरी रकम  की बैंक गारंटी मांगेगी| 

अब यदि यह कंपनी प्रोजेक्ट को बीच में छोड़ देती है या पैसे लेकर भाग जाती है तो सरकार को बैंक गारंटी द्वारा अपने नुकसान की भरपाई हो  सकती है|

इसलिए इसे Advance payment guarantee  कहते हैं| 

  • Performance bank guarantee

मान लीजिए किसी प्रोजेक्ट के लिए सरकार प्रोजेक्ट में अलग-अलग चरण निर्धारित करती है और कहती है कि जब कंपनी किसी एक चरण को पूरा कर लेगी तो उसे सरकार द्वारा तय की गई राशि मिल जाएगी| 

परंतु यदि कंपनी ने काम में कोई काम ही छोड़ दी या बीच में ही भाग जाए तो इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार द्वारा जिस गारंटी की डिमांड की जाती है उसे Performance bank guarantee कहते हैं|

FAQs: Bank guarantee

बैंक गारंटी का क्या अर्थ होता है?

बैंक गारंटी का अर्थ होता है कि बैंक गारंटी देता है की यदि जिसकी उसने गारंटी ली है वह तय समय पर पेमेंट नहीं करेगा तो बैंक द्वारा उसकी पेमेंट की जाएगी|

लैटर ऑफ क्रेडिट बैंक गारंटी से क्यों अलग होती है?

बैंक गारंटी में किसी निश्चित राशि तथा किसी निश्चित समय सीमा पर भुगतान का वादा होता है|  यदि Seller  भुगतान करने में असफल रहता है उस वक्त बैंक की जवाबदेही शुरू होती है जबकि लैटर ऑफ क्रेडिट में पेमेंट की ट्रांजैक्शन पहले भी हो सकती है|

बैंक गारंटी का ज्यादातर इस्तेमाल कहां किया जाता है?

सरकारी और प्राइवेट टेंडर्स में

क्या बैंक फ्री में गारंटी देता है?

नहीं, बैंक गारंटी के बदले कुछ चार्ज लेता है|

बैंक गारंटी में बैंक अपने नुकसान की भरपाई किस प्रकार कर सकता है?

बैंक गारंटी देने से पहले ही Collateral के रूप में कुछ ना कुछ रखता है| इसी के द्वारा वह अपने नुकसान की भरपाई कर लेता है|

क्या बैंक गारंटी सेफ तरीका है पेमेंट लेने का?

जी हां,  बैंक गारंटी एक सेफ तरीका है|

हम एक्सपोर्ट-इंपोर्ट में  बैंक गारंटी के बजाए Letter of credit को क्यों इस्तेमाल करते हैं?

क्योंकि एक्सपोर्ट में हमें पेमेंट पहले चाहिए होती है तथा बैंक गारंटी में Buyer के मुकरने या Default होने पर ही बैंक की जवाबदेही शुरू होती है| यानी हमें पैसे पहले चाहिए होते हैं|

बैंक गारंटी देने के लिए कितना चार्ज करता है? क्या उसे मार्जिन (Profit) राशि कहा जाता है? बैंक गारंटी की बदले में कौन-कौन सी वस्तु को गिरवी (सिक्योरिटी, Collateral) रखना पड़ता है?

मैं अपने अनुभव के आधार पर जवाब लिख रहा हूँ, इसलिये बैंक गारंटी जारी करने की शर्तों में बदलाव होना सम्भव है तथा किसी अन्य उपभोग कर्ता के अनुभव भिन्न हो सकते है।
एक बैंक गारंटी जारी करवाने के लिये सबसे पहले एक ग्राहक के तौर पर आपका किसी बैंक में खाता होना चाहिए साथ ही, उस बैंक के साथ आपका Non fund based credit facility होनी चाहिए।
आप किसी Bank से आप दो प्रकार के Loan ले सकते है। Fund based और Non fund based.
Fund based credit facility में Term loan और Cash credit की सुविधा होती है।
Non fund based credit facility के अंतर्गत Letter of credit (LC), बैंक गारंटी आदि जारी करवाये जा सकते है।
बैंक गारंटी जारी करने के लिये 2% प्रतिशत से लेकर 10% तक का शुल्क ले सकता है| मेरे मामले में यह 4% सालाना थी। इसके अलावा, बैंक आपसे गारंटी रकम का 25% से लेकर 100% की Fixed deposit (FD) के रूप में रखने के लिये कहता है। इसे ही मार्जिन मनी कहते है। यह आपके बैंक के साथ आपके लेन-देन के रिश्तों पर आधारित होता है। कंपनियों के मामले में, यह कम्पनी के Credit rating पर निर्भर करता है।
अब! आप समझ गए होंगे की बैंक, मार्जिन मनी के तौर पर आपसे Fixed deposit मांगता है। दूसरी तरह की सम्पत्तियों को margin money के तौर पर रखने की बात term loan के मामले में आती है। Working capital loan यानि cash credit या मूल भाषा मे फण्ड बेस्ड क्रेडिट फैसिलिटी पाने के लिये आपको चल-अचल सम्पत्तियों को बैंक के नाम गिरवी रखना होता है, इसे कॉलेटरल देना या चार्ज देना भी कहते है।
जो लोग बैंक गारंटी जारी करवाना चाहते है, उनके cash credit खाते भी अगर उसी बैंक में हैं तो, बैंक उनके कैश क्रेडिट खाते से मार्जिन मनी Debit कर Fixed Deposit में डाल देता है साथ ही जरूरी शुल्क भी उसी खाते से ले लेता है।

बैंकों में डूबने वाले पैसों की सुरक्षा के लिए सरकार ने बजट (2020-21) में क्या बदलाब किया है?

वित्त मंत्री श्री मति निर्मला सीतारमण ने 2020-21 का बजट पेश करते हुए बैंक गारंटी को लेकर बड़ा ऐलान किया गया। उन्होंने बैंक गारंटी की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा कर दी है|।
यानी अब! अगर कोई बैंक किसी कारण से बंद हो जाता है तो, ग्राहकों को उनके जमा किए हुए धन पर 5 लाख रुपए तक की सुरक्षा मिलेगी| पहले यह गारंटी सिर्फ एक लाख रुपये तक ही थी।

साथ ही यह अवश्य देखें:

Promissory note क्या होता है? इसे कैसे इस्तेमाल करें? 

लैटर ऑफ क्रेडिट की पूरी प्रक्रिया

Letter of credit में नियम एवं शर्तों का महत्व

लैटर ऑफ क्रेडिट के प्रकार

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